जोजोबा भारत में सिर्फ गर्म, सूखे और रेतीले इलाकों में चलती है, और व्यवहार में इसका मतलब राजस्थान है, जहां भारत की करीब 90% जोजोबा उगाई जाती है; गुजरात और कुछ दूसरे राज्यों में ट्रायल बागान हैं। यह धैर्य वाली, देर से फल देने वाली फसल है: नर और मादा फूल अलग-अलग पौधों पर आते हैं, पैदावार कई साल में बनती है, और कोई संगठित मंडी भाव नहीं है, इसलिए पहला पौधा लगाने से पहले खरीदार तय होना चाहिए।
बीज में 50 से 55% तरल मोम होता है (जिसे "जोजोबा तेल" कहकर बेचा जाता है), जो सौंदर्य प्रसाधन और खास उद्योगों में काम आता है। बीज के मौजूदा खेत-भाव और बागान की कमाई पर भारत का छपा डेटा बहुत कम है, इसलिए यह गाइड वही बताती है जो दर्ज है और बाकी के लिए किससे पूछना है यह बताती है।
भारत में यह कहां उगती है
- राजस्थान: ICAR-CAZRI, जोधपुर ने इस पौधे को भारतीय हालात के हिसाब से ढाला, और थार इलाका (बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर) मुख्य क्षेत्र है। बीकानेर में 2008 में 90 एकड़ का एक निजी बागान लगा और 2016 में 14 एकड़ का दूसरा।
- गुजरात: अलग-अलग मिट्टियों पर ट्रायल बागान हैं, जिनमें भावनगर के पास जांजमेर की तटीय रेत के टीलों पर एक अध्ययन स्थल भी है।
- जलवायु: एक सामान्य गाइड सालाना बारिश 200 से 400 मिमी तक कम बताती है, और पौधा पाले से लेकर 45 C से ऊपर की गर्मी तक सह लेता है। फूल वसंत में तापमान 15 C पार करने पर आते हैं। फूल और फल बनने के समय गंभीर सूखा फिर भी बीज की फसल घटा देता है।
- मिट्टी: मोटी, रेतीली या कंकरीली मिट्टी जिसमें जल निकास अच्छा हो। जलभराव वाली या भारी चिकनी मिट्टी ठीक नहीं है।
किस्में और रोपण सामग्री
| सामग्री | स्रोत | खासियत |
|---|---|---|
| EC 33198 | 1960 के दशक के आखिर में लाई गई, CAZRI में परखी गई | भारत के शुष्क क्षेत्र के लिए ठीक पाई गई |
| EC33198-Sel.1 x EC99692 (F1 संकर) | भारत के शुष्क क्षेत्र का शोध | नियमित फलन; बताए गए ट्रायल में EC33198 की Sel.5 ने औसतन 7.5 किलो बीज प्रति पौधा दिया |
- बीज से उगे पौधों में नर और मादा का मिश्रण आता है, जिसे फूल आने तक पहचाना नहीं जा सकता। राजस्थान में करीब 110 हेक्टेयर के मदर बागान इजराइली तकनीक पैकेज से कलम से तैयार पौधे (जिनका लिंग पता हो) देने के लिए बनाए गए। नर्सरी से पूछें कि पौधे कलम से बने हैं और उनका लिंग पता है या नहीं।
- नर पौधे सिर्फ परागण के लिए चाहिए। नर:मादा अनुपात से उपज बदलती है; एरिज़ोना के लिए 4:1 बताया जाता है, और भारत का कोई पुष्ट अनुपात नहीं मिला, इसलिए नर्सरी या CAZRI की सलाह मानें।
दूरी और रोपाई
- एक सामान्य गाइड कतारों के बीच 3 से 4 मीटर और कतार में कमजोर पौधे निकालने के बाद पौधों के बीच करीब 1.5 मीटर की दूरी सुझाती है।
- हिसाब: 4 मीटर x 1.5 मीटर = 6 वर्ग मीटर प्रति पौधा, यानी करीब 1,667 पौधे प्रति हेक्टेयर या करीब 675 प्रति एकड़; 3 मीटर x 1.5 मीटर पर करीब 2,200 प्रति हेक्टेयर (करीब 900 प्रति एकड़)। ये आंकड़े दूरी से निकाले गए हैं, भारत की किसी सर्वे वाली सिफारिश से नहीं।
- जमने तक छोटे पौधों को ड्रिप से सींचें। देखें drip irrigation।
खाद, पानी और कीट
- जोजोबा को खाद कम चाहिए, लेकिन प्रति पौधा भारत की कोई पुष्ट मात्रा नहीं मिली। मिट्टी की जांच कराएं और नजदीकी CAZRI या KVK से पूछें।
- पानी सबसे ज्यादा फूल और फल बनने के समय चाहिए। पौधे को कीट और रोगों के प्रति काफी सहनशील बताया गया है। किसी भी समस्या में लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK से पूछें।
कटाई और उपज
- फल वसंत और शुरुआती गर्मी में पकते हैं और बीज देर गर्मी तक गिर जाते हैं। बीज हाथ से चुने जाते हैं या पौधे को हिलाकर गिराए जाते हैं, इसलिए मजदूरी असली खर्च है।
- उपज में लगने वाला समय: एक सामान्य स्रोत पूरी उपज तक 4 से 5 साल बताता है, जबकि दूसरा कहता है कि करीब 10 साल के बागान से साल में 1,000 से 3,000 किलो साफ बीज प्रति हेक्टेयर मिल सकता है। हाथ की कटाई में 340 से 900 किलो प्रति हेक्टेयर भी बताया जाता है। ये ज्यादातर भारत के खेत सर्वे नहीं हैं, इसलिए इन्हें चौड़ा दायरा मानें, करीब 135 से 1,200 किलो प्रति एकड़।
- पौधे दशकों तक जीते हैं।
लागत और कमाई
- Association of Rajasthan Jojoba Plantation and Research Project (AJORP) ने भारत में बीज की उत्पादन लागत करीब US$0.70 प्रति किलो बताई है, जबकि इजराइल में US$1.50 और अमेरिका में US$3। यह उद्योग का आंकड़ा है।
- भारतीय व्यापार में जोजोबा बीज का कोई पुष्ट मौजूदा रुपये का भाव नहीं मिला। भाव के बिना प्रति एकड़ मुनाफा ईमानदारी से नहीं निकाला जा सकता। लिखित भाव मिलने पर यह सूत्र लगाएं: प्रति एकड़ बीज के किलो x प्रति किलो भाव, घटाइए पौधे, ड्रिप, मजदूरी और चुनाई का खर्च, जिसे कई सालों में बांटें।
- कई साल खर्च रहेगा और आमदनी कम, तब जाकर बागान कमाई देगा।
बाजार और जोखिम
- खरीदार मोम और तेल निकालने वाली इकाइयां हैं जो सौंदर्य प्रसाधन और खास उद्योगों को देती हैं; बाजार छोटा और पतला है। जोजोबा Agmarknet की भाव सूची में नहीं है, इसलिए mandi bhav पर यह नहीं दिखेगी।
- buy-back के वादे के साथ पौधे बेचने वाली नर्सरी या कंपनियों से सावधान रहें। शर्तें लिखित में लें और खरीदार की अलग से जांच करें।
- पिछले दशकों की कई जोजोबा योजनाओं में किसानों को जमीन और पौधे दिए गए; किसी मौजूदा मदद के बारे में राज्य के बागवानी या वन विभाग से पूछें, और subsidy finder देखें। जोजोबा के लिए मौजूदा सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हो सकी।
स्रोत
- Performance and potential of jojoba in the Indian arid regions (Indian Journal of Plant Genetic Resources)
- Dwarf mutant in jojoba, Indian Journal of Genetics and Plant Breeding
- India Environment Portal, jojoba plantations in Rajasthan wasteland
- Krishi Jagran, cultivation of jojoba (secondary source)
- GKToday, jojoba plant and desertification (secondary source)
- Richters, jojoba growing questions (spacing and yield, general)
