गुग्गुल (Commiphora wightii) राजस्थान और गुजरात की सूखी, पथरीली या रेतीली जमीन पर उगाया जा सकता है, जहां यह प्राकृतिक रूप से पाया जाता है, लेकिन यह धीमी और लंबे इंतजार वाली फसल है: पौधे गोंद निकालने (टैपिंग) लायक कम से कम 5 से 6 साल में होते हैं, और राजस्थान की आबादी पर एक रिपोर्ट सूखे हालात में इसे करीब 10 साल बताती है। यह धैर्य रखने वाले जमीन मालिकों, वन विभागों और पक्के खरीदार वाले संस्थानों के लिए है, छोटे किसान की जल्दी कमाई वाली फसल नहीं।
जंगली पौधों की भारी टैपिंग से इसके भंडार घट गए हैं, इसलिए इस प्रजाति को संकटग्रस्त माना जाता है। पौधे लगाने, टैपिंग करने या गोंद ढोने से पहले राज्य के वन विभाग और राज्य औषधीय पादप बोर्ड के नियम जरूर पूछ लें।
यह कहां उगता है
- प्राकृतिक इलाका: राजस्थान और गुजरात के सूखे इलाके, जिनमें अरावली की पहाड़ियां और थार का किनारा शामिल है। Arid Forest Research Institute (AFRI), जोधपुर के अनुसार यह कभी वहां बहुतायत में था और अब भारत में अपने ज्यादातर क्षेत्र से लगभग खत्म होने की कगार पर है।
- सर्वे के आंकड़े: राजस्थान के 20 जिलों में 604 जगहों के सर्वे में यह पौधा सिर्फ 68 जगह मिला, और जिन जिलों में मिला वहां प्रति दसवें हिस्से हेक्टेयर में 1 से 20 पौधे थे। यह Acacia senegal, Euphorbia caducifolia, Grewia tenax, Acacia leucophloea और Boswellia serrata के साथ उगता मिला, और विदेशी झाड़ Prosopis juliflora इसके बचे रहने के लिए खतरा पाई गई।
- मिट्टी: रेतीली या रेतीली दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है, सूखे, पथरीले और रेतीले इलाकों में। भारी और नीची जमीन से बचें, जो इसके प्राकृतिक ठिकाने से अलग होती है।
रोपण सामग्री
- बीज कम बनते हैं और जमते भी कम हैं; Vikaspedia की खेती गाइड काले बीज से करीब 40% जमाव बताती है।
- तने की कलमें: मई में तैयार की गई बिना पत्ती वाली तने की कलमें सामान्य तरीका हैं। AFRI के अनुसार राजस्थान और गुजरात के वन विभाग बीज और कलमों से अपनी रोपण की मांग भर के पौधे भी नहीं बना पाए हैं।
- एयर लेयरिंग: 5 से 8 साल पुराने मातृ पौधों से जुलाई से अगस्त में (Vikaspedia)।
- Tissue culture: AFRI जोधपुर ने पौधे तेजी से बढ़ाने के लिए tissue culture की विधियों पर काम किया है, जिसमें प्रति पौधा लागत थोड़ी ज्यादा आती है। मान्यता प्राप्त रोपण सामग्री कहां मिलेगी, यह AFRI या अपने राज्य औषधीय पादप बोर्ड से पूछें।
दूरी और रोपाई
- Vikaspedia की गाइड 45 x 45 x 45 सेमी के गड्ढे और 2 मीटर x 2 मीटर की दूरी बताती है, यानी प्रति हेक्टेयर 2,500 पौधे (प्रति एकड़ करीब 1,010)।
- जंगल में बहाली के लिए राजस्थान सर्वे के लेखक बहुत कम घनत्व, यानी प्रति हेक्टेयर करीब 200 पौधे (प्रति एकड़ करीब 80), छायादार पेड़ों के साथ मिश्रित रोपण में सुझाते हैं।
- वन विभाग या KVK से अपने जिले में रोपाई का सही समय पूछें और पौधे छोटे हों तब बकरी और पशुओं को दूर रखें। स्थानीय बारिश के समय के लिए crop calendar और weather देखें।
देखभाल और सिंचाई
- गुग्गुल रेगिस्तानी पौधा है जिसे जम जाने के बाद बहुत कम पानी चाहिए; पहले सूखे मौसम में छोटे पौधों को कितना पानी चाहिए, यह अपने KVK से पूछें, और सिंचाई करनी हो तो drip इस्तेमाल करें।
- गुग्गुल के लिए खाद की मात्रा का कोई राज्य पैकेज नहीं मिला। गड्ढे में गोबर की खाद डालें और रासायनिक खाद डालने से पहले अपने KVK या AFRI से पूछें।
- खेत को Prosopis juliflora और दूसरे प्रतिस्पर्धी पौधों से साफ रखें।
टैपिंग और उपज
- टैपिंग की उम्र: स्रोत अलग-अलग बताते हैं। Vikaspedia 5 से 6 साल देता है; राजस्थान पर 2008 की IUCN समर्थित रिपोर्ट सूखे हालात में करीब 10 साल कहती है। जब तक तना मोटा और सेहतमंद न हो, टैपिंग न करें।
- प्रति पौधा उपज: Vikaspedia एक सीजन में हर सेहतमंद पौधे से 250 से 500 ग्राम गोंद राल बताती है, जो छठे साल से करीब 200 से 400 ग्राम से बढ़ती है। ये बताए गए आंकड़े हैं; प्रति एकड़ खेत की उपज का कोई नियंत्रित भारतीय ट्रायल नहीं मिला।
- मौसम: राल की टैपिंग नवंबर से जनवरी तक होती है, और छाल पर हल्का कट लगाकर संग्रह मई या जून तक चलता है।
- ज्यादा टैपिंग न करें: AFRI के अनुसार गहरा काट लगाने पर पौधा आमतौर पर दो से छह महीने में मर जाता है। जंगल से इकट्ठा करने वालों ने तीन से चार गुना ज्यादा राल के लिए तांबे के सल्फेट की लेई या ethephon के साथ गहरे चीरे लगाए हैं, और पौधे मर जाते हैं। हल्की टैपिंग करें, सीजनों के बीच पौधों को आराम दें और वन विभाग या NMPB की विधि मानें।
लागत, कमाई और बाजार
- भाव: खेती वाले गुग्गुल गोंद का कोई मौजूदा खेत भाव पक्का नहीं हो सका, इसलिए यहां नहीं दिया गया। पौधे लगाने से पहले निर्माताओं और राज्य औषधीय पादप बोर्ड से लिखित भाव पूछ लें।
- कमाई का हिसाब कैसे लगाएं: प्रति एकड़ पौधे x प्रति पौधा राल के ग्राम x प्रति किलो भाव। उदाहरण के लिए 1,000 पौधे x 0.3 किलो यानी करीब छठे से दसवें साल तक साल में 300 किलो; इसे तय भाव से गुणा करें और बिना आमदनी वाले पांच या ज्यादा सालों के रोपण, पानी और बाड़ के खर्च घटाएं।
- मांग: 2008 की रिपोर्ट ने गुग्गुल गोंद की घरेलू मांग करीब 300 टन सालाना और आपूर्ति करीब 75 टन आंकी, इसीलिए कमी और जरूरत से ज्यादा संग्रह की समस्या बनी रहती है। खरीदार आयुर्वेदिक और हर्बल निर्माता हैं।
- औषधीय पौधों के लिए मदद National Medicinal Plants Board और राज्य बोर्डों से मिल सकती है; subsidy finder से जांचें। समूह में बिक्री के लिए FPO देखें।
स्रोत
- Arid Forest Research Institute, Jodhpur, Biotechnological interventions to save Commiphora wightii (Guggal)
- Final project report, In-situ conservation of Commiphora wightii in Rajasthan (IUCN Sir Peter Scott Fund, 2008)
- Kumar and Kulloli, Effect of associated species on distribution of Commiphora wightii in Indian Arid Zone, Taiwania 2017
- Vikaspedia, Commiphora wightii package of practices
