एप्पल बेर (थाई एप्पल बेर के नाम से भी बिकता है) बड़े फल वाला कलमी बेर है जो भारत के गर्म, सूखे और अर्ध-शुष्क इलाकों में चलता है, जिनमें पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र शामिल हैं, और जमने के बाद इसे कम पानी चाहिए। ब्रोशर पहले ही साल में फल आने की बात करते हैं, पर खेत पर बिक्री भाव कम है और मंडी में माल की भरमार आम है, इसलिए कमाई समय पर छंटाई, फल मक्खी के नियंत्रण और भरोसेमंद खरीदार पर निर्भर है।
कई ब्रोशर प्रति एकड़ 30 टन और ₹4 से ₹5 लाख शुद्ध आमदनी बताते हैं। असम का जो एकमात्र सरकारी फसल पैकेज मिला, उसमें उपज 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (लगभग 12 से 16 टन प्रति एकड़) दी गई है। हिसाब सरकारी सीमा पर लगाएं।
भारत में कहां उगता है
- क्षेत्र: एप्पल बेर पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र से बताया गया है, और आम बेर हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार और तमिलनाडु की शुष्क पट्टी में उगता है।
- जलवायु: TNAU के अनुसार बेर शुष्क और अर्ध-शुष्क हालात में अच्छा चलता है और खारापन व क्षारीयता सह लेता है।
- मिट्टी: कोई भी अच्छे जल निकास वाली मिट्टी, जैविक पदार्थ हो तो बेहतर (असम फसल पैकेज)। जलभराव वाली जगह से बचें।
- खेत में मौसम: असम का पैकेज पीले फल के लिए जनवरी से फरवरी बताता है, जिसमें 4 से 5 तुड़ाई होती हैं। समय क्षेत्र और छंटाई की तारीख के साथ बदलता है, इसलिए स्थानीय KVK से पूछें।
किस्में और रोपण सामग्री
| किस्म | स्रोत | टिप्पणी | कहां उपयुक्त |
|---|---|---|---|
| Apple Colour | BCKV, पश्चिम बंगाल द्वारा परखी गई | छह किस्मों में प्रति गुच्छा सबसे ज़्यादा फूल (31.25), सबसे ऊंचा TSS (10.5 डिग्री ब्रिक्स) और शर्करा (9.30%); लाल लैटेराइट मिट्टी में उपज और गुणवत्ता बेहतर | पश्चिम बंगाल का लाल लैटेराइट क्षेत्र |
| Madhav Kool | BCKV, पश्चिम बंगाल द्वारा परखी गई | उस परीक्षण में प्रति पौधा सबसे ज़्यादा उपज, 7.10 किलो | वही क्षेत्र |
| Apple, BAU, Thailand प्रकार | असम फसल पैकेज में सूचीबद्ध | असम के लिए अनुशंसित किस्में | असम और समान आर्द्र इलाके |
| Umran, Gola, Banarasi, Kaithali, Goma Keerthi | TNAU द्वारा सूचीबद्ध | पारंपरिक भारतीय बेर किस्में | तमिलनाडु और शुष्क क्षेत्र |
- पौधे बेर के मूलवृंत पर बडिंग से बनते हैं। ऐसी नर्सरी चुनें जो किस्म का नाम दे, और अपने ज़िले में परखी गई किस्म के पौधे मांगें। "कश्मीरी एप्पल बेर" और "थाई एप्पल बेर" बिक्री के नाम हैं, जारी की गई किस्में नहीं, इसलिए असली किस्म का नाम पूछें।
- बडिंग जोड़ के नीचे से निकलने वाले कल्ले नियमित रूप से हटाते रहें।
दूरी और रोपण
- असम का फसल पैकेज 5 m x 3 m (लगभग 270 पौधे प्रति एकड़, 667 प्रति हेक्टेयर) और सघन रोपण के लिए 3 m x 2.5 m (लगभग 540 प्रति एकड़, 1,333 प्रति हेक्टेयर) बताता है।
- TNAU पारंपरिक किस्मों के लिए ज़्यादा दूरी देता है, सामान्य प्रकार के लिए 7 x 7 m।
- हर तरफ 45 सेमी के गड्ढे, 7 से 10 दिन बाद 5 किलो FYM या 2 किलो वर्मीकम्पोस्ट के साथ भरें; रोपण असम में अप्रैल से सितंबर, तमिलनाडु में जुलाई से अगस्त। छोटे पौधों को डंडे का सहारा दें और तने पर 40 से 50 सेमी तक शाखाएं न रहने दें।
पोषण, सिंचाई और छंटाई
- दूसरे साल से खाद (असम पैकेज): प्रति पेड़ 10 से 12 किलो FYM के साथ 200 ग्राम N, 250 ग्राम P2O5 और 100 ग्राम K2O, मार्च में छंटाई के बाद और अक्टूबर में, साथ में प्रति पेड़ 25 ग्राम बोरेक्स। 5 x 3 m पर यह लगभग 133 किलो N, 167 किलो P2O5 और 67 किलो K2O प्रति हेक्टेयर है (54, 68 और 27 किलो प्रति एकड़)।
- पारंपरिक बेर के लिए TNAU: पहले साल प्रति पेड़ 20 किलो FYM, 200 ग्राम N, 100 ग्राम P, 200 ग्राम K; दूसरे साल से 50 किलो FYM, 500 ग्राम N, 200 ग्राम P और 500 ग्राम K, और जनवरी से मार्च में मासिक अंतर पर 2% KNO3 के तीन छिड़काव।
- पानी: नए पौधों को जमने तक पानी दें। असम पैकेज हर 2 हफ्ते पर सिंचाई कहता है, और बताता है कि फूल व फल के समय पानी की कमी से उपज घटती है। देखें ड्रिप सिंचाई।
- छंटाई: बेर नई शाखाओं पर फलता है, इसलिए छंटाई से ही फसल तय होती है। तुड़ाई के बाद शाखाओं को ग्राफ्ट जोड़ से लगभग 30 सेमी ऊपर काट दें (असम); TNAU फरवरी से मार्च में छंटाई और भीड़ वाली शाखाओं की छंटनी करता है। ढांचे के लिए 4 से 6 अच्छी दूरी वाली साइड शाखाएं चुनें। अपने ज़िले की सही तारीख स्थानीय KVK से लें, क्योंकि वह बारिश खत्म होने के समय पर निर्भर है।
कीट और रोग
- बेर की फल मक्खी: फल मटर के आकार के होने पर प्रति हेक्टेयर 20 मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप (असम)। गिरे फल उठाकर दबा दें।
- पत्ती खाने वाला चेफर बीटल: वयस्कों के लिए लाइट ट्रैप; असम पैकेज में thiamethoxam के छिड़काव भी बताए गए हैं।
- चूर्णिल आसिता: प्रति पेड़ 150 से 200 ग्राम सल्फर की डस्टिंग, 15 से 20 दिन के अंतर पर 2 से 3 बार दोहराएं।
- Alternaria और Cercospora पत्ती धब्बे: chlorothalonil 2 ग्राम प्रति लीटर, 15 से 20 दिन के अंतर पर दो से तीन छिड़काव। TNAU स्केल कीट और काला पत्ती धब्बा भी बताता है।
- मात्रा और तुड़ाई से पहले के इंतज़ार के लिए लेबल और अपने KVK की सलाह मानें।
तुड़ाई और उपज
- फल पीला होने पर तोड़ें, सीज़न में 4 से 5 तुड़ाई में।
- सरकारी उपज सीमा: असम पैकेज में 300 से 400 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (लगभग 12 से 16 टन प्रति एकड़), जो दूरी, किस्म और देखभाल पर निर्भर है। TNAU पारंपरिक किस्मों के लिए साल में 70 से 80 किलो प्रति पेड़ बताता है।
- BCKV किस्म परीक्षण में प्रति पौधा अधिकतम 7.10 किलो दर्ज हुआ, जो दिखाता है कि छोटे पौधे शुरू में कम फसल देते हैं। महीनों में फल और 150 किलो प्रति पेड़ के ब्रोशर दावे द्वितीयक स्रोतों से हैं और पूरी तरह विकसित, अच्छी देखभाल वाले पेड़ों के लिए हैं।
लागत और आमदनी
- दाम: एक ब्रोशर किसान को ₹15 से ₹20 प्रति किलो और खुदरा ₹40 से ₹80 बताता है। कोई भी आंकड़ा इस्तेमाल करने से पहले मंडी भाव पर ताज़ा रेट देखें।
- हिसाब (उदाहरण): पूरी फलत पर प्रति एकड़ 12 से 16 टन, ₹15 से ₹20 प्रति किलो पर, कुल ₹1.8 लाख (12,000 किलो x ₹15) से ₹3.2 लाख (16,000 किलो x ₹20) देता है। ब्रोशर की ₹5.25 लाख आमदनी 30 टन मानकर है।
- लागत: उसी ब्रोशर में प्रति एकड़ ₹65,000 ऊपरी अनुमान है, जो सरकारी स्रोत नहीं है। पौधे, गड्ढे, ड्रिप, बाड़, छंटाई व तुड़ाई की मज़दूरी और क्रेट मुख्य मदें हैं; स्थानीय कोटेशन लें।
- उपज पहले दो से तीन साल में बढ़ती है; शुरुआती साल पूरी फलत के हिसाब से कम देते हैं।
बाज़ार और जोखिम
- फल ताज़ा ही स्थानीय बाज़ार, थोक मंडी और शहर के फल विक्रेताओं के ज़रिए बिकता है। यह नरम होता है और दब जाता है, इसलिए क्रेट इस्तेमाल करें और कुछ दिनों में बेच दें।
- एक ही हफ्तों में ज़्यादा फसल आने से दाम गिरते हैं; जो किसान जल्दी बेच नहीं पाता उसके पास कम विकल्प हैं क्योंकि बेर आसानी से स्टोर नहीं होता।
- तय बायबैक या बहुत ऊंची कमाई का वादा करने वाली नर्सरियों से सावधान रहें। किस्म का नाम और लिखित गारंटी मांगें।
- ऋण के लिए KCC देखें; सहायता के लिए सब्सिडी खोजक और अपना राज्य बागवानी विभाग देखें। बेर के लिए कोई मौजूदा सब्सिडी दर सत्यापित नहीं हुई।
