खजूर भारत में व्यावसायिक रूप से सिर्फ गर्म, सूखे और कम बारिश वाले इलाकों में चलता है: गुजरात का कच्छ देश के करीब 85% रकबे के साथ सबसे आगे है, और पश्चिमी राजस्थान (बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर, जोधपुर) तथा पंजाब और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में नए बाग हैं। इसके लिए करीब ₹3,100 से ₹4,700 प्रति पौधा वाले tissue culture पौधे, ड्रिप सिंचाई, परागण की व्यवस्था, पकने के समय मानसून की बारिश से बचाव और पहले फल के लिए तीन से चार साल का इंतजार चाहिए।
भारत जितने खजूर उगाता है उससे कहीं ज्यादा आयात करता है (2019 में 282,580 टन), इसलिए मांग की समस्या नहीं है। जोखिम कटाई के समय की बारिश, खजूर के कीटों और प्रति हेक्टेयर शुरुआती खर्च में है।
भारत में यह कहां उगता है
- कच्छ, गुजरात: गुजरात में करीब 18,286 हेक्टेयर और 171,522 टन ताजा फल बताया गया है, जिसमें कच्छ सबसे बड़ा जिला है। गुजरात के लिए Barhee (Barhi) की सिफारिश 2002 में हुई थी और अब यही मुख्य किस्म है।
- राजस्थान: खजूर की खेती 2007 में शुरू हुई; बाड़मेर में 2010-11 में 22 हेक्टेयर और 11 किसानों से शुरुआत हुई और 2020-21 तक 156 हेक्टेयर हो गया, पहली फसल 2014 में आई। बाड़मेर में साल में 150 से 180 टन उत्पादन बताया गया है। ICAR की रिपोर्ट के अनुसार Barhi, Khuneizi, Khalas और Medjool किस्में दी गईं, और बाड़मेर को भारत की इकलौती जगह बताया गया है जहां Medjool अच्छा होता है।
- जलवायु की सीमा: पेड़ बहुत गर्मी सह लेता है, लेकिन फल को पकने के लिए लंबा सूखा मौसम चाहिए। जहां बारिश जल्दी आ जाती है वहां फल पेड़ पर पूरा नहीं पक पाता, इसलिए किसान khalal (पीले, कुरकुरे) चरण में तोड़ते हैं और बाद में कृत्रिम तरीके से पकाते हैं। पकने के समय की बारिश ही वह मुख्य कारण है जिससे यह फसल सूखे पश्चिमी इलाकों की है।
- आंध्र प्रदेश: चित्तूर, अनंतपुर और नंद्याल के कुछ किसान बेमौसम बारिश से आम को नुकसान होने के बाद आम छोड़कर खजूर की ओर गए हैं। वहां की रिपोर्टों के अनुसार अधिकारियों के पास स्थानीय तकनीकी सलाह कम है और फल का रंग रेगिस्तानी इलाकों से कमजोर हो सकता है।
किस्में
| किस्म | कहां उपयोग | टिप्पणी |
|---|---|---|
| Barhee (Barhi) | कच्छ, राजस्थान, आंध्र | गुजरात में 2002 में सिफारिश हुई; khalal चरण में ताजा बिकती है; कच्छ के करीब 1,800 हेक्टेयर में tissue culture Barhee बताई गई है |
| Medjool | बाड़मेर, राजस्थान | बड़ा प्रीमियम फल; बहुत सूखी और गर्म जगह चाहिए |
| Khalas, Khuneizi, Khadrawy | राजस्थान के ट्रायल और पुराने बाग | ICAR-CIAH बीकानेर के पोषण ट्रायल में Khadrawy किस्म इस्तेमाल हुई |
- किसी नामित मादा किस्म के tissue culture पौधे लगाएं। बीज वाले पौधों में आधे नर निकलते हैं, फल एक जैसा नहीं आता और इंतजार लंबा होता है। पौधे सिर्फ ऐसी लैब या सप्लायर से लें जो किस्म और बैच लिखित में दे।
- नर पौधों या पराग के स्रोत का इंतजाम रखें: खजूर में नर और मादा पेड़ अलग होते हैं, इसलिए हर मौसम में मादा फूलों का नर किस्म के पराग से हाथ से परागण करना पड़ता है। पराग कहां मिलेगा, यह अपने जिले के बागवानी विभाग से पूछें।
रोपाई और दूरी
- दूरी: राजस्थान के बाड़मेर के बागों में 8 x 8 मीटर रखा गया है, यानी प्रति हेक्टेयर 156 पौधे (प्रति एकड़ करीब 63)। तेलंगाना के एक किसान ने 27 फुट रखा है, यानी प्रति एकड़ करीब 60। ICAR-CIAH ने एक ट्रायल में 5 x 5 मीटर रखा, लेकिन वह शोध की घनत्व है।
- गड्ढा: CIAH के एक ट्रायल में 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर के गड्ढे में खेत की मिट्टी, चिकनी मिट्टी और FYM को 0.5:0.5:2.0 के अनुपात में भरने पर Barhee के tissue culture पौधे सबसे अच्छे रहे।
- सिंचाई: बाड़मेर के किसानों के लिए पौधे बचाने को ड्रिप जरूरी रखा गया था। छोटे पौधों को पहले साल नियमित पानी चाहिए। देखें drip irrigation।
- अंतरफसल: बाड़मेर के किसानों ने छोटे पौधों के बीच मूंग, मोठ और तिल उगाए।
पोषण
- छोटी Barhee के लिए उम्र के हिसाब से भारतीय सारणी नहीं मिली। CIAH बीकानेर के एक ट्रायल में 35 साल पुराने Khadrawy पेड़ों पर प्रति पेड़ 100 किलो FYM, 1 किलो N, 0.5 किलो P2O5 और 1 किलो K2O के साथ 1% FeSO4 और 0.5% ZnSO4 के छिड़काव से सबसे अच्छा नतीजा मिला; मिट्टी में खुराक अक्टूबर के आखिर में और छिड़काव नवंबर और मार्च में। यह पुराने पेड़ों की खुराक है, छोटे पौधों की नहीं।
- मिस्र के एक ट्रायल में रेतीली मिट्टी की Barhee को प्रति पेड़ 450 ग्राम N, 225 ग्राम P और 225 ग्राम K तीन बार में दी गई। इसे सिर्फ संदर्भ मानें, मिट्टी की जांच कराएं और छोटे पौधों के लिए अपने KVK की सलाह मानें।
कीट और समस्याएं
- Red palm weevil और rhinoceros beetle गंभीर कीट हैं। Red palm weevil के बारे में बताया गया है कि वह छोटे बागों पर बड़े पैमाने पर हमला करता है, और नुकसान अक्सर तब दिखता है जब ताज में सुरंग बन चुकी होती है; आंध्र की रिपोर्ट दोनों कीटों को जानलेवा बताती है। ताज की बार-बार जांच करें।
- पकने के समय की बारिश से फल सड़ता और फटता है; गुच्छों पर कवर लगाना और khalal चरण में तोड़ना आम उपाय हैं।
- किसी भी छिड़काव के लिए लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK की सलाह लें।
कटाई और उपज
- Tissue culture पौधे करीब 3 साल में पहली छोटी फसल दे सकते हैं; कच्छ और राजस्थान में Barhee के लिए 3 से 4 साल बताए गए हैं।
- निकाला गया खेत का आंकड़ा: गुजरात के 18,286 हेक्टेयर पर 171,522 टन का मतलब करीब 9.4 टन प्रति हेक्टेयर (3.8 टन प्रति एकड़) है, जो फल देने वाले और छोटे दोनों बागों का औसत है। 156 पौधों में बांटें तो करीब 60 किलो प्रति पौधा बैठता है।
- तेलंगाना के एक किसान का कहना है कि प्रति पेड़ 6 से 7 किलो के 10 से 15 गुच्छे (60 से 105 किलो) मिलते हैं, जो एक किसान का दावा है, ट्रायल का नतीजा नहीं। बाड़मेर के 156 हेक्टेयर से 150 से 180 टन यानी सिर्फ करीब 1 टन प्रति हेक्टेयर है, क्योंकि वहां ज्यादातर पेड़ अभी छोटे थे।
- एक पुराने भारतीय आर्थिक अध्ययन (CAZRI जोधपुर, 1985) में बीज वाले दौर के बागों पर IRR 13% निकला, जो बैंक दर 14% से थोड़ा कम है। यह पुराना है, लेकिन दिखाता है कि नतीजा फल के भाव और एक से ज्यादा उत्पाद बेचने पर बहुत टिका है।
लागत और कमाई
- पौधे: प्रति tissue culture पौधा ₹3,100 से ₹4,700 (तेलंगाना और आंध्र की रिपोर्टें)। प्रति हेक्टेयर 156 पौधों पर यह करीब ₹4.8 से ₹7.3 लाख प्रति हेक्टेयर बैठता है (प्रति एकड़ 63 पौधों पर ₹1.9 से ₹2.9 लाख), ड्रिप, गड्ढों, बाड़ और मजदूरी से पहले।
- भाव: तेलंगाना के एक किसान के अनुसार ₹80 प्रति किलो, और आंध्र की एक रिपोर्ट में ₹110 से ₹150 प्रति किलो। ताजे भारतीय खजूर की कोई सरकारी थोक भाव श्रृंखला नहीं मिली; इन्हें किसानों के आंकड़े मानें।
- हिसाब (उदाहरण): पूरी तरह फल देने वाला पेड़ 50 किलो दे और भाव ₹80 प्रति किलो हो तो ₹4,000 होते हैं; 100 किलो और ₹110 पर ₹11,000। 156 पौधों पर यह ₹6.2 लाख से ₹17 लाख प्रति हेक्टेयर कुल आय है, वह भी तभी जब पेड़ पूरी फसल देने लगें (6 से 8 साल में)। प्रति एकड़ ₹10 लाख के दावे सबसे ऊंची उपज और भाव पर टिके हैं।
- Southfirst ने आंध्र से प्रति पेड़ साल में ₹10,000 से ₹40,000 बताए हैं, यह भी किसानों का दावा है।
बाजार और सब्सिडी
- ताजे khalal खजूर कच्छ, राजस्थान और बड़े शहरों की मंडियों के व्यापारियों को और टेबल फल के रूप में बिकते हैं; प्रोसेस किए खजूर आयात से मुकाबला करते हैं। mandi bhav देखें और पहली फसल से पहले व्यापारी तय कर लें।
- रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड खजूर के लिए प्रोजेक्ट लागत का 25% back-ended पूंजी सब्सिडी देता है, और राजस्थान ने tissue culture पौधों पर ऊंची सब्सिडी दी है। दरें बदलती रहती हैं; subsidy finder के जरिए NHB, MIDH और अपने राज्य के बागवानी विभाग से पुष्टि करें। मौजूदा दर की पुष्टि यहां नहीं हो सकी।
- रेतीली मिट्टी और भरोसेमंद पानी का स्रोत चाहिए, और KCC या बैंक का फसल कर्ज लंबे अंतराल को पार करने में मदद कर सकता है।
स्रोत
- ICAR, Plantation of date palms has changed fortune of farmers in Barmer
- Date palm cultivation in India: an overview of activities (EJFA, 2014)
- Integrated nutrients management in Khadrawy date palm, hot arid region (Indian Journal of Horticulture)
- Economic appraisal of date palm plantations in western Rajasthan (CAZRI, Annals of Arid Zone, 1985)
- Indian Journal of Arid Horticulture, tissue-culture Barhee date palm trials (ICAR-CIAH)
- Date palm farming in India (Wikipedia, secondary source)
- The South First, farmers in Andhra switching from mango to date palm (secondary source)
- Agrifarming, date palm farmer account from Telangana (secondary source)
