खेजड़ी (Prosopis cineraria) थार और भारत के बाकी शुष्क इलाके (राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, दक्षिण के कुछ हिस्से) का देशी पेड़ है, और यह वहां चलता है जहां बारिश करीब 150 से 500 मिमी हो। कमाई वाली उपज कोमल फली है, जो सूखकर सांगरी के नाम से बिकती है। ICAR-CIAH, बीकानेर की Thar Shobha जैसी कलम चढ़ी, बिना कांटों वाली किस्म तीसरे साल से फल दे सकती है, जबकि बीज से उगे पेड़ 8 से 10 साल लेते हैं।

राजस्थान में खेजड़ी काटना कानून से रोका गया है, इसलिए ज्यादातर किसानों के सामने सवाल काटने का नहीं, बल्कि खेत में मौजूद पेड़ों को संभालने और नए जोड़ने का है। सूखी सांगरी हरी फली से कहीं महंगी बिकती है, लेकिन तुड़ाई का समय साल में सिर्फ करीब दो हफ्ते का है।

यह कहां उगती है और क्या चाहिए

  • मौसम: ICAR-CIAH के अनुसार 150 से 500 मिमी औसत बारिश वाली पहाड़ों और खारे गड्ढों को छोड़कर सारी शुष्क जमीन में खेजड़ी का अच्छा घनत्व मिलता है। मार्च से जून के सूखे महीनों में इसमें फूल और फली आती है और यह पाला और भीषण गर्मी दोनों सह लेती है (शुष्क इलाके में तापमान करीब -2.5°C से 49.9°C तक)।
  • मिट्टी: रेतीली रेगिस्तानी मिट्टी। इसकी जड़ें गहरी जाती हैं, यह नाइट्रोजन जमाती है और छाया हल्की देती है, इसलिए कपास और मेहंदी जैसी साथी फसलें इसके नीचे नमी के लिए ज्यादा होड़ के बिना उगाई जाती हैं।
  • राज्य: पश्चिमी राजस्थान में पारंपरिक; Thar Shobha की खेती राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में फैलती बताई गई है।

किस्में और रोपण सामग्री

किस्मकिसने निकालीखासियत
Thar ShobhaICAR-CIAH, बीकानेरबौनी, बिना कांटे, हर साल फल देने वाली, एक जैसी फलियां, अच्छा पत्ती चारा; कलम चढ़ाने पर तीसरे साल से फल
Thar AmrutaICAR-CIAH, बीकानेरबौनी, हर साल फल देने वाली; मौजूदा रोपण सामग्री के लिए CIAH या अपने KVK से पूछें
  • बीज से उगे पेड़ एक जैसे नहीं होते और 8 से 10 साल में फल देते हैं। micro-propagation और air layering आजमाए गए पर व्यावसायिक रूप से टिकाऊ नहीं निकले। चलने वाला तरीका patch budding या bud-grafting है।
  • नर्सरी: पकी फलियों से बीज (मई से जून में निकाला गया) फफूंदनाशी से उपचारित करें, 4 से 6 घंटे पानी में भिगोएं और करीब जुलाई में रेत, चिकनी मिट्टी और बकरी की खाद (3:1:1) भरी पॉलीबैग में बोएं। एक साल बाद 0.4 से 0.8 सेमी मोटे मूल-वृंत को 25 से 30 सेमी पर काटकर जुलाई से सितंबर में कलम चढ़ाएं (करीब 60% सफलता)। कलम चढ़े पौधे 40 से 50 दिन बाद तैयार होते हैं; सितंबर से अक्टूबर में खेत में लगाएं।
  • खेत में ही कलम चढ़ाना CIAH का दूसरा रास्ता है, यानी खेत में पहले से लगे पौधों पर। 9 से 10 महीने के पौधों को मानसून की शुरुआत (जुलाई से सितंबर) में लगाने पर 80 से 90% पौधे जमते बताए गए हैं।
  • Top-working: खेत के जंगली खेजड़ी पेड़ों को patch budding से सुधरे पेड़ों में बदला जा सकता है।

दूरी और देखभाल

  • CIAH पर आधारित हिसाब में प्रति हेक्टेयर 278 पौधे (प्रति एकड़ करीब 112) लिए गए, यानी मोटे तौर पर 6 x 6 मीटर। अपनी बारिश और टीलों के हिसाब से दूरी CIAH या KVK से पक्की कर लें।
  • CIAH पर आधारित तालिका में प्रति पौधा करीब 5 किलो खाद रखी गई है; आर्थिक तालिका में छंटाई, रखवाली, बाड़ और पौध सुरक्षा के लिए प्रति पौधा प्रति साल ₹25 रखे गए हैं।
  • प्रशिक्षण और छंटाई से छतरी का आकार बनता है। पश्चिमी राजस्थान में चारे के लिए छंगाई मध्य नवंबर से जनवरी तक होती है। हर साल छंगाई आम है, पर सांगरी के लिए इसकी सलाह नहीं दी जाती; फली तोड़ने के बाद छंगाई करें ताकि अगले मौसम की फसल के लिए टहनियां पक सकें। हर 3 साल पर छंगाई से बार-बार छंगाई की तुलना में 172 से 242% ज्यादा पत्ती चारा मिलने की बात कही गई है।

कटाई और उपज

  • फूल और फली: फूल फरवरी से मार्च में, फली अप्रैल से मई में लगती है। हरी कोमल फली सिर्फ 10 से 15 दिन मिलती है, ज्यादातर अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में।
  • तुड़ाई की अवस्था: अच्छी सूखी सांगरी के लिए Thar Shobha की फली लगने के 10 से 16 दिन बाद, हाथ से 2 से 3 तुड़ाई में तोड़ें, जब वह गहरी हरी और पतली हो। 10 से 16 दिन पर तोड़ी फली सूखकर काली होती है और सबसे अच्छी भीगती है (rehydration 287 से 296%); 19 दिन या बाद की फली सूखकर भूरी हो जाती है, जो खरीदार पसंद नहीं करते। सूखा माल ताजा वजन का करीब 26 से 28% बनता है।
  • प्रोसेसिंग: 5 मिनट उबलते पानी में blanch करें, फिर 5 मिनट ठंडे पानी में डुबोएं, और एक परत में फैलाएं। CIAH का सोलर टनल ड्रायर सांगरी को करीब 8 घंटे में सुखा देता है, जबकि खुली धूप में करीब 24 घंटे लगते हैं, और रंग भी साफ रहता है।
  • उपज: ICAR के स्रोत खेत की हालत में 12 साल से पुराने औसत पेड़ से साल में 7 से 8 किलो कोमल फली बताते हैं, और सुधरे उत्पादन तरीकों में करीब 20 साल के अच्छी तरह संभाले पेड़ से 10 से 15 किलो; पूरे पेड़ से 25 से 30 किलो सूखी पत्ती (लूंग) भी मिलती है। कलम चढ़े जवान पेड़ों की तीसरे से पांचवें साल की उपज छपे आंकड़ों में नहीं मिली, और वह कम होती है।
💡 सुझाव: कुछ मौजूदा पेड़ों पर कलम चढ़ाने या top-working से शुरू करें और सही अवस्था पर तुड़ाई करें। साफ सूखी काली सांगरी को 250 ग्राम के पैकेट में सीधे उपभोक्ता को बेचना बिचौलिये हटाने का CIAH का सुझाया तरीका है।

लागत और कमाई

  • भाव: ICAR-CIAH (2024) के अनुसार सूखी सांगरी खुदरा में ₹800 से ₹1,000 प्रति किलो बिकती है, जबकि बिचौलिये किसान को ₹400 से ₹500 प्रति किलो देते हैं। CIAH का 2025 का पेपर हरी के लिए ₹100 से ₹150 और सूखी के लिए ₹500 से ₹800 प्रति किलो बताता है। ICAR की एक पुरानी पत्रिका की तालिका में बहुत कम दर (सूखी ₹60 प्रति किलो, हरी ₹20 प्रति किलो) ली गई थी, इसलिए छपी कमाई साल के हिसाब से बहुत बदलती है।
  • लागत (CIAH तालिका): प्रति हेक्टेयर ₹20,180 (प्रति एकड़ करीब ₹8,170), जिसमें जमीन की तैयारी ₹3,500, ₹30 के हिसाब से 278 कलम चढ़े पौधे (₹8,340), खाद ₹1,390 और देखभाल व बाड़ के ₹6,950 शामिल हैं। ये उस लेख की तारीख के भाव हैं; आज का पौधे, बाड़ और मजदूरी का खर्च ज्यादा होगा।
  • हिसाब (उदाहरण): प्रति पेड़ 7.5 किलो हरी फली, 27% सूखा माल = करीब 2 किलो सूखी; x 278 पेड़ = प्रति हेक्टेयर करीब 560 किलो सूखी (प्रति एकड़ करीब 225 किलो)। ₹400 प्रति किलो पर यह प्रति हेक्टेयर करीब ₹2.2 लाख (प्रति एकड़ ₹90,000) है; ₹500 प्रति किलो पर करीब ₹2.8 लाख। प्रति पेड़ 15 किलो और 27% माल (करीब 4 किलो सूखी) लें तो यह लगभग दोगुना होगा। छपी तालिका में कोमल फली की आय और सूखी फली की आय जोड़ दी गई है, जिससे वही फलियां दो बार गिनी जाती हैं; सिर्फ एक ही लें।
  • लूंग अलग से कमाई है: उस तालिका में प्रति पौधा 25 किलो सूखी पत्ती ₹5 प्रति किलो पर प्रति हेक्टेयर ₹34,750 बैठी।

बाजार और नियम

  • खरीदार स्थानीय सांगरी व्यापारी और खुदरा दुकानदार हैं, और खुद पैक करें तो सीधे उपभोक्ता। बिचौलिये बड़ा हिस्सा ले जाते हैं, इसलिए खुद पैकिंग और लेबलिंग फायदेमंद है।
  • कानूनी सीमा: खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है। इसे काटना Rajasthan Tenancy Act, 1965 और Rajasthan Forest Act, 1953 के तहत रोका गया है, और 2026 की शुरुआत में राज्य ने कटाई पर रोक का आदेश दिया और 29 प्रजातियों को कवर करने वाले Rajasthan Trees (Protection) Bill, 2026 के मसौदे को मंजूरी दी। कोई भी खेजड़ी काटने या प्लॉट के लिए हटाने से पहले अपने तहसील, वन या राजस्व कार्यालय से मौजूदा नियम पूछ लें।
  • वैल्यू एडिशन के लिए FPO या महिला समूह की बिक्री अपनाएं, और ड्रायर व बागवानी की मदद के लिए subsidy finder देखें। खेजड़ी की कोई प्रमाणित सब्सिडी दर नहीं मिली।

स्रोत