सीताफल (शरीफा, Annona squamosa) उन गिने-चुने फलदार पेड़ों में है जो महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात के सूखे इलाकों की खराब, पथरीली और बारानी जमीन पर चल जाते हैं, और फल अगस्त से अक्टूबर में आता है। इसमें काम की फसल तक 4 से 5 साल लगते हैं, पके फल के दबने और फटने के कारण सावधानी से संभालना पड़ता है, और बाजार तोड़ाई के एक-दो दिन के भीतर चाहिए।
छपे ट्रायल में उपज प्रति पौधा 9 से 15 किलो फल है, जबकि खेती की वेबसाइटें प्रति पेड़ 50 से 100 किलो बताती हैं। हिसाब ट्रायल के आंकड़ों पर लगाएं।
कहां उगता है और क्या चाहिए
- रकबा: भारत में सीताफल के तहत करीब 55,000 हेक्टेयर बताया गया है, मुख्यतः महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक में। नीचे बताए ट्रायल मध्य प्रदेश और कर्नाटक के बेलगाम जिले में हुए।
- जलवायु: गर्म, अर्ध-शुष्क हालात, करीब 500 से 1,000 मिमी बारिश; पेड़ गर्मी सह लेता है लेकिन करीब 10°C से नीचे के तापमान से नुकसान होता है। फल आने के समय भारी मानसूनी बारिश से फल सड़न और फल मक्खी बढ़ती है।
- मिट्टी: हल्की, उथली, पथरीली और मुरम वाली मिट्टी चलती है; उर्वरता से ज्यादा pH 6 से 7.5 और अच्छा जल निकास मायने रखता है। जलभराव में पेड़ मर जाते हैं।
किस्में
| किस्म | स्रोत | खासियत | कहां के लिए ठीक |
|---|---|---|---|
| Balanagar | आंध्र प्रदेश (बालानगर, तेलंगाना इलाका) का चयन | 400 से 600 ग्राम का बड़ा फल, चिकना छिलका, गूदे का ज्यादा हिस्सा, कम बीज | सूखे इलाकों में आम व्यावसायिक किस्म |
| Arka Sahan | ICAR-IIHR, बेंगलुरु; Annona atemoya x A. squamosa का संकर | औसत फल करीब 410 ग्राम, मलाईदार गूदा, बहुत कम बीज (प्रति 100 ग्राम करीब 9), TSS करीब 30 °Brix | सातवें साल तक प्रति एकड़ करीब 3.2 टन की बताई गई उपज वाला संकर और चौथे साल से फल; उपलब्धता और स्थानीय प्रदर्शन IIHR या अपने KVK से पूछ लें |
| स्थानीय चयन | हर इलाके के बीज से उगे पेड़ | अक्सर छोटा फल और ज्यादा बीज; बेलगाम के ट्रायल में 25 स्थानीय चयनों में सबसे अच्छे ने प्रति पौधा 4.36 किलो तक दिया | कम लागत वाले बागों के लिए ठीक; सबसे अच्छा इस्तेमाल यह है कि बेहतर पेड़ों से कलम बांधी जाए |
- कलमी या चश्मा चढ़े पौधे सरकारी या विश्वविद्यालय की नर्सरी से खरीदें। बीज से उगे पेड़ों के फल अलग-अलग आकार के होते हैं, जो अच्छे नहीं बिकते।
रोपाई और दूरी
- एक गाइड में 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढे, ऊपरी मिट्टी, करीब 15 किलो गोबर की खाद और 300 ग्राम बोन मील से भरने की बात है; मानसून की शुरुआत में रोपें।
- दूरी: 5 x 5 मीटर पर प्रति एकड़ करीब 160 पौधे (प्रति हेक्टेयर 400); 6 x 5 मीटर पर प्रति एकड़ करीब 135 (प्रति हेक्टेयर 333); 6 x 6 मीटर पर प्रति एकड़ करीब 112 (प्रति हेक्टेयर 277)। खराब मिट्टी और बारानी बागों में ज्यादा दूरी ठीक रहती है।
- सुप्त अवस्था में मानसून से पहले (अप्रैल से मई) छंटाई करें: आपस में कटती शाखाएं, पानी वाली टहनियां और जमीन से करीब 60 सेमी से नीचे की शाखाएं हटाएं, ताकि छतरी खुली रहे और पेड़ के भीतर रोशनी जाए।
खाद और सिंचाई
- फल देने वाले पेड़ के लिए छपी मात्रा: गोबर की खाद 10 से 15 किलो और प्रति पौधा प्रति साल N:P:K 250:125:250 ग्राम, दो बार में: मानसून की शुरुआत (अप्रैल से मई) में आधा रासायनिक खाद और पूरी गोबर की खाद, और बाकी मानसून के आखिर (अक्टूबर) में। 160 पौधों पर यह प्रति एकड़ मोटे तौर पर 40 किलो N, 20 किलो P और 40 किलो K होता है। छोटे पेड़ों को कम चाहिए; उम्र के हिसाब से मात्रा घटाएं और मिट्टी जांच से पक्का कर लें।
- मध्य प्रदेश में Arka Sahan के एक ट्रायल में सिफारिश की गई खाद का 75%, साथ में प्रति पौधा 2 किलो वर्मीकम्पोस्ट और Azotobacter व फॉस्फेट घुलाने वाले जीवाणु देने पर प्रति पौधा 31.5 फल और 9.08 किलो उपज मिली, जो सभी उपचारों में सबसे अच्छी थी।
- पानी: जमे हुए पेड़ बारानी चलते हैं। पहली दो गर्मियों में छोटे पेड़ों को जिंदा रखने के लिए घड़े से या drip से कुछ लीटर दें; एक गाइड सूखे दौर में प्रति पेड़ करीब 10 लीटर हफ्ते में दो से तीन बार सुझाती है।
- परागण: फूल पहले मादा रूप में खुलते हैं, इसलिए प्राकृतिक फल लगना अक्सर कमजोर रहता है। फूल आने के समय सुबह (करीब 6 से 9 बजे) हाथ से परागण की सलाह आम है, ताकि फल ज्यादा लगें और आकार ठीक बने; एक गाइड 3 से 5 गुना बढ़त बताती है, जिसे भारतीय ट्रायल के आंकड़ों से जांचा नहीं गया है।
कीट और रोग
- मिलीबग महाराष्ट्र में मुख्य कीट है (Ferrisia virgata वहां अध्ययन की गई एक प्रजाति है); शल्क कीट, फल छेदक इल्लियां, पत्ती के धब्बे और anthracnose भी होते हैं। खरपतवार और चींटियों की कतारें हटाएं, संक्रमित टहनियां काटें और शुरू में ही नीम तेल और साबुन का छिड़काव करें; एक गाइड हर 10 दिन पर बताती है।
- फल छेदक के लिए फेरोमोन ट्रैप इस्तेमाल होते हैं। किसी भी रसायन का नाम और मात्रा राज्य विश्वविद्यालय की ताजा सिफारिश या अपने KVK से लें और तुड़ाई से पहले की प्रतीक्षा अवधि मानें, क्योंकि फल ताजा खाया जाता है।
- भारी मानसूनी बारिश से anthracnose और फल मक्खी का नुकसान बढ़ता है, इसलिए खुली छतरी और बाग की सफाई जरूरी है।
तुड़ाई और उपज
- सीताफल के बाग से काम की फसल रोपाई के 4 से 5 साल बाद मानी जाती है, और Arka Sahan चौथे साल से फल देने वाली बताई गई है। तुड़ाई इलाके और किस्म के हिसाब से अगस्त से अक्टूबर तक चलती है।
- अपनी किस्म के लिए तुड़ाई की परिपक्वता कैसे परखें, यह अपने KVK से पूछें। पका फल आसानी से दबता और फटता है, इसलिए सावधानी से तोड़ें और उथले, गद्देदार डिब्बों में पैक करें।
- ट्रायल की उपज: प्रति पौधा 9.08 किलो (Arka Sahan, मध्य प्रदेश का INM ट्रायल); अरभावी में सबसे अच्छे स्थानीय चयन से प्रति पौधा 4.36 किलो; IIHR में सबसे अच्छी Balanagar संतति से प्रति पौधा 15.06 किलो। परिपक्व बाग में प्रति पेड़ करीब 80 से 100 फल का औसत आम तौर पर बताया जाता है, जो 300 से 400 ग्राम पर 25 से 40 किलो बैठेगा और ऊपरी सिरा है।
- ब्रोशर की उपज: Arka Sahan के लिए 25 टन प्रति हेक्टेयर और प्रति पेड़ 50 से 100 किलो खेती की साइटों पर मिलते हैं; इन्हें अच्छी मिट्टी, सिंचाई और हाथ के परागण वाली सबसे अच्छी हालत मानें।
लागत और कमाई
- भाव: कर्नाटक की एक खेती गाइड ₹55 से ₹120 प्रति किलो बताती है, सीधी बिक्री में ऊपरी सिरे पर। आपकी स्थानीय मंडी में उस दिन का भाव ही मायने रखता है; mandi prices और अपना थोक बाजार देखें।
- हिसाब (उदाहरण): प्रति एकड़ 135 पेड़ और प्रति पेड़ 10 किलो पर 1.35 टन प्रति एकड़ मिलता है, जो ₹50 प्रति किलो पर ₹67,500 है। प्रति पेड़ 25 किलो और ₹80 प्रति किलो पर कुल आय 3.4 टन और करीब ₹2.7 लाख है। 35 किलो और ₹100 पर यह 4.7 टन और करीब ₹4.7 लाख है। फल के शुरुआती सालों में असली आमदनी निचले और बीच वाले हिसाब के करीब रहती है।
- लागत: एक गाइड कम लागत वाले जैविक बाग के लिए प्रति एकड़ सालाना ₹20,000 से कम बताती है; पौधे, गड्ढे, बाड़, खाद, छंटाई, मजदूरी और पैकिंग आय शुरू होने से पहले के चार सालों में जुड़ते हैं। ताजा स्थानीय कोटेशन अपने KVK या बागवानी विभाग से पूछें।
बाजार और जोखिम
- फल शहर की फल मंडियों, सड़क किनारे और साप्ताहिक बाजारों, आइसक्रीम और पल्प प्रोसेसरों को जाता है। अनुबंध मान लेने से पहले पल्प या आइसक्रीम प्रोसेसर से लिखित भाव और मात्रा मांगें।
- मुख्य जोखिम हैं बारिश में फल का फटना, पकने के बाद कम टिकाऊपन, और मिलीबग। कोल्ड रूम या शहर तक तेज ढुलाई से मदद मिलती है; देखें cold storage subsidy।
- MIDH की क्षेत्र विस्तार सहायता की मौजूदा दर राज्य के बागवानी विभाग से पूछें; इस गाइड के लिए किसी सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हुई। समूह में बिक्री के लिए subsidy finder और FPO देखें।
स्रोत
- Organic Mandya, custard apple farming (secondary source: spacing, price, cost)
- ICAR epubs, integrated nutrient management in custard apple cv. Arka Sahan
- Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry, performance of local custard apple selections (Arabhavi, Karnataka)
- Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry, nutrient levels in custard apple cv. Balanagar
- Vikaspedia, Arka Sahan variety of custard apple (ICAR-IIHR)
