खाद की कमी क्यों होती है, और आगे कैसे रहें
खाद की मांग बुवाई के समय बढ़ती है, खरीफ जून-जुलाई और रबी अक्टूबर-नवंबर, जब लाखों किसान एक साथ खरीदते हैं। DAP व इसके कच्चे माल की वैश्विक आपूर्ति भी तंग रही है, इसलिए नया स्टॉक आने के कुछ दिनों में ही केंद्र खाली हो जाते हैं। जो किसान कमी में नहीं फंसते वे आमतौर पर अपने PACS से पहले बुकिंग करते हैं, स्थानीय डीलर से आवक की जानकारी लेते रहते हैं, और खिड़की खुलते ही खरीद लेते हैं।
अगर आपकी सामान्य खाद उपलब्ध न हो तो अच्छे विकल्प मौजूद हैं: NPK कॉम्प्लेक्स जैसे 12:32:16, SSP (जो सल्फर भी देता है), या DAP की जगह यूरिया + SSP का मेल, और आपूर्ति बढ़ाने के लिए नैनो-यूरिया या नैनो-DAP। हर मात्रा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार तय करें ताकि उतना ही डालें जितना मिट्टी को चाहिए, जिससे पैसे बचते हैं और कम मात्रा ढूंढनी पड़ती है।