क्या पवन ऊर्जा आपके खेत के लिए सही है?
पवन सबसे ज़्यादा जगह पर निर्भर ऊर्जा है। टरबाइन तभी उपयोगी बिजली देता है जब हवा तेज़ और लगातार चले - आमतौर पर तटीय तमिलनाडु और गुजरात, और महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश व मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से। कम हवा वाली जगह पर छोटा टरबाइन लगभग बेकार रहता है, इसलिए पहला कदम हमेशा अपनी हवा जांचना है, हार्डवेयर खरीदना नहीं। जहां हवा कमज़ोर है वहां सोलर बेहतर है; जहां हवा तेज़ है या रात व मानसून में बिजली चाहिए, वहां पवन या पवन-सौर हाइब्रिड काम का है।
खेत पर पवन के तीन उपयोग
- छोटा पवन टरबाइन: रोशनी, बाड़, छोटी पंपिंग या ऑफ-ग्रिड उपयोग के लिए बिजली बनाता है।
- पवन-सौर हाइब्रिड पंप: सौर पैनल और छोटे टरबाइन को मिलाकर दिन-रात ज़्यादा घंटे पानी पंप करें।
- यांत्रिक पवनचक्की पंप: बिना बिजली, ईंधन या बैटरी के सीधे पानी उठाती है - उथले जलस्तर के लिए सरल और टिकाऊ।
लागत और सब्सिडी की सच्चाई
पवन हार्डवेयर का दाम आकार, टावर ऊंचाई और जगह पर बहुत निर्भर करता है, और प्रति यूनिट ऊर्जा यह आमतौर पर सौर से महंगा है। साथ ही ईमानदारी से: किसानों के लिए कोई राष्ट्रव्यापी पवन-पंप सब्सिडी नहीं है - PM-KUSUM सिर्फ़ सौर पंप पर है, पवन पर नहीं। छोटे पवन व हाइब्रिड के लिए MNRE, NIWE और कुछ राज्य एजेंसियों से सीमित मदद है। विवरण: पवन टरबाइन लागत और पवन सब्सिडी।
कैसे तय करें
पहले जांचें कि आपके खेत में पर्याप्त हवा है या नहीं (मुफ्त पवन जांच), सौर से ईमानदार तुलना करें (पवन बनाम सौर), और अगर हवा ठीक-ठाक है पर लगातार नहीं, तो हाइब्रिड पर विचार करें। ऊपर अपना स्थान और ज़रूरत बताएं, हम सीधी सलाह देंगे।