क्लोनल यूकेलिप्टस (सफेदा) तभी फायदे का है जब कागज मिल या लकड़ी का खरीदार ढुलाई की व्यावहारिक दूरी में हो और जमीन में पर्याप्त पानी हो और कोई कानूनी रोक न हो। इसे पल्पवुड, बल्लियों और जलावन की लकड़ी के लिए 4 से 8 साल की रोटेशन पर उगाया जाता है, और पेड़ पानी बहुत पीता है, इसलिए भूजल की कमी वाली जमीन पर यह ठीक चुनाव नहीं है और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में इस पर रोक है।

कंपनी और राज्य निगम के बागानों में क्लोनल पौधों ने बीज वाले पौधों से साफ तौर पर ज्यादा उपज दी है, लेकिन किसान के स्तर पर उपज के दावे बहुत अलग-अलग हैं, और मिलने वाला भाव उस दिन मिल की खरीद शर्तों पर टिका है।

कहां उगता है और क्या चाहिए

  • इलाके: क्लोनल पल्पवुड बागान कागज मिलों के आसपास आंध्र प्रदेश और तेलंगाना (ITC Bhadrachalam क्लोन), तमिलनाडु (कॉन्ट्रैक्ट ट्री फार्मिंग) और छत्तीसगढ़ में हैं, जहां Orient Paper और ITC ने राज्य वन विभाग के साथ नीलगिरी क्लोन की आपूर्ति और buy-back के समझौते किए। उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में यूकेलिप्टस खेत की मेड़ों, किनारों और कृषि वानिकी के ब्लॉकों में उगाया जाता है।
  • जलवायु और मिट्टी (TNAU): 330 से 1,500 मिमी बारिश और मिट्टी का pH 6 से 8; बहुत क्षारीय या खारी जमीन, कटी-फटी जमीन और जहां पानी रुकता हो वहां से बचें।
  • पानी: कर्नाटक के होसकोटे में एक जल-विज्ञान अध्ययन में तीन साल में यूकेलिप्टस का पानी का उपयोग 3,400 मिमी मापा गया, जबकि बारिश 2,100 मिमी थी। कोलार जिले में 1972 से 2011 के बीच जिले का करीब 17.7% हिस्सा यूकेलिप्टस में बदल गया, और भूजल रिचार्ज और बहाव में करीब 30% गिरावट बताई गई। जिस बोरवेल या तालाब पर आप निर्भर हैं, उसके पास इसे न लगाएं।

क्लोन और रोपण सामग्री

क्लोन समूहस्रोतखासियतकहां के लिए ठीक
Bhadrachalam क्लोन (E. tereticornis क्लोन 3, 4, 6, 7, 10 और अन्य)ITC Bhadrachalam Paperboards, आंध्र प्रदेशसाढ़े चार साल पर परखे गए; कंपनी का दावा है बारानी में करीब 25 घन मीटर प्रति हेक्टेयर प्रति साल और सिंचाई में करीब 50आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और आसपास के मिल क्षेत्र; मिल के अपने कार्यक्रमों से मिलते हैं
IFGTB क्लोन (C-7 से C-196 श्रृंखला; 24 में से 16 चुने गए)ICFRE-IFGTB, कोयंबटूरपरखे गए 24 में से 16 क्लोन चुने गएदक्षिणी राज्य; मौजूदा रिलीज और उपलब्धता IFGTB या अपने राज्य वन विभाग से पूछें
APFDC क्लोनल बागानA.P. Forest Development Corporation7 साल में कम से कम 50 टन प्रति हेक्टेयर और 96% पौधे जीवित बताए गएआंध्र प्रदेश
  • किसी नामित क्लोन की जड़दार कलमें मिल, वन विभाग या ICFRE की नर्सरी से खरीदें। बीज वाले पौधों से बागान असमान बनता है: आंध्र प्रदेश में बीज वाले बागानों ने 8 से 9 साल पर औसतन करीब 10 टन प्रति हेक्टेयर दिया, जबकि अनुमान 40 टन का था, और बाद की रोटेशन में पहली का एक तिहाई से एक चौथाई मिला।
  • मिल से पूछें कि वह कौन सा क्लोन खरीदेगी। जो क्लोन मिल के गेट पर नहीं लिया जाता, उसकी बिक्री नहीं होती।

दूरी और रोपाई

  • TNAU क्लोनल बागानों के लिए 2 x 2 मीटर बताता है, यानी प्रति एकड़ करीब 1,000 पौधे (प्रति हेक्टेयर 2,500)। पल्पवुड के लिए अक्सर 3 x 2 मीटर रखा जाता है, जो प्रति हेक्टेयर 1,667 पौधे, यानी प्रति एकड़ करीब 675 है; 2.5 x 2.5 मीटर पर प्रति एकड़ करीब 650।
  • उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की कृषि वानिकी के लिए Indian Forester के एक अध्ययन में 2.5 x 2.5 मीटर, 3 x 1.5 मीटर, 4 x 2 मीटर और 6 x 1 मीटर आजमाए गए और निष्कर्ष निकला कि 8 साल की रोटेशन पर फसलों के साथ ज्यादा दूरी से अच्छा मुनाफा मिला। मेड़ों और किनारों पर कतारें लगाने से फसल का कम नुकसान होता है।
  • बारिश की शुरुआत में रोपें, पहले साल खेत को खरपतवार से साफ रखें और चराई से बचाने के लिए बाड़ लगाएं। पेड़ दो साल में करीब 3.2 मीटर ऊंचे हो जाते हैं (TNAU)।

देखभाल

  • बागान ज्यादातर बारिश के पानी पर चलते हैं; जहां पानी हो वहां सिंचाई और खाद से उपज बढ़ती है। TNAU की ऊंची उपज सिर्फ पानी वाली जगहों के लिए बताई गई है।
  • निराई, छंटाई और विरलन मुख्य काम हैं। रोपाई पर आधार में खाद और शुरुआती उर्वरक, जैसा आपकी मिट्टी के लिए राज्य वन विभाग या KVK बताए, आम है; प्रति पेड़ की कोई पुष्ट मात्रा नहीं मिली।
  • अपने जिले के कीट और रोगों के लिए क्लोन देने वाले और अपने वन विभाग या KVK से पूछें, और किसी भी रसायन के लिए लेबल मानें।
  • कॉपिस: ठूंठ दोबारा फूटकर दूसरी कटाई दे सकता है, लेकिन आंध्र प्रदेश में बीज वाली दूसरी रोटेशन ने पहली का सिर्फ एक तिहाई से एक चौथाई दिया। क्लोन के लिए कॉपिस की फसल तभी रखें जब मिल उसे ले और बागान स्वस्थ हो; क्लोन देने वाले से पूछें कि क्या वह क्लोन कॉपिस के लिए बना है।

कटाई और उपज

  • रोटेशन: TNAU क्लोनल किस्मों के लिए 4 साल बताता है; APFDC ने 7 साल बताए; उत्तर की कृषि वानिकी के ट्रायल में 8 साल रखे गए।
  • बताई गई उपज: 7 साल में कम से कम 50 टन प्रति हेक्टेयर (APFDC, प्रति एकड़ करीब 20 टन); Bhadrachalam क्लोनल पल्पवुड के लिए 6 साल में करीब 70 टन प्रति हेक्टेयर बताया गया (प्रति एकड़ करीब 28 टन); TNAU का पानी वाली जगह पर 4 साल में औसत 40 टन प्रति एकड़, जो करीब 100 टन प्रति हेक्टेयर है और बाकी आंकड़ों से काफी ऊपर है। जब तक पास के किसी उत्पादक का रिकॉर्ड कुछ और न कहे, कम आंकड़ों पर चलें।
  • मिल के साथ कटाई और ढुलाई की योजना रखें, क्योंकि लकड़ी का भुगतान गेट पर वजन से होता है और ढेर में रखने पर उसकी नमी घटती है।
💡 सुझाव: पौधे खरीदने से पहले मिल से आज का भाव प्रति टन, मान्य क्लोन और उठाव व भुगतान की शर्तें लिखित में लें, और अपने राज्य के कटाई और परिवहन के नियम पक्के कर लें।

लागत और कमाई

  • आय का आंकड़ा: TNAU के अनुसार हर 4 से 5 साल में प्रति एकड़ करीब ₹75,000 की आय।
  • संवेदनशीलता: प्रति एकड़ 20 से 28 टन पर (6 से 7 साल की क्लोनल रिपोर्टें), भाव में हर ₹1,000 प्रति टन का फर्क प्रति एकड़ ₹20,000 से ₹28,000 होता है। अपने खरीदार का आज का भाव लें, पुराना आंकड़ा नहीं।
  • लागत में पौधे, जमीन की तैयारी, बाड़, निराई, सुरक्षा, कटाई और ढुलाई आते हैं। प्रति एकड़ की कोई पुष्ट लागत नहीं मिली; मिल या वन विभाग से कोटेशन लें।
  • आमदनी 4 से 8 साल में एक बार आती है और बीच में कोई नकद नहीं आता, जब तक आप अंतरफसल न लें; पैसा फंसा रहता है, और मिल के भाव या खरीद शर्तों में बदलाव का असर आप पर पड़ता है।

बाजार और जोखिम

  • खरीदार कागज और पल्प मिलें, प्लाईवुड और बल्ली के खरीदार और बायोमास इस्तेमाल करने वाले हैं। मिलें कई राज्यों में buy-back और आपूर्ति कार्यक्रम चलाती हैं; दस्तखत से पहले लिखित शर्तें पढ़ें।
  • भाव मुख्य जोखिम है: आंध्र प्रदेश में किसानों को बेचने में दिक्कत होने के बाद सरकार ने सामाजिक वानिकी के किसानों को बचाने के लिए नए खरीद भाव घोषित किए। मिल से जुड़ाव के बिना व्यापारी को बेची गई लकड़ी का भाव कमजोर मिल सकता है।
  • कानूनी सीमाएं: कर्नाटक ने फरवरी 2017 में नए यूकेलिप्टस और बबूल के बागानों पर रोक लगाई, और मलनाड व अर्ध-मलनाड जिलों (शिमोगा, चिकमगलूर, हासन, उत्तर कन्नड़, कोडागु) में यूकेलिप्टस की खेती पर पाबंदी है। Karnataka Preservation of Trees Act, 1976 में अधिसूचित क्षेत्रों में काटने के लिए अनुमति चाहिए। दूसरे राज्यों के अपने कटाई और परिवहन के नियम हैं; लगाने से पहले अपने राज्य वन विभाग से पूछें।
  • समूह में बिक्री के लिए FPO और बागान की मदद के लिए subsidy finder देखें; यहां किसी राज्य सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हुई। दूसरे खेत के पेड़ों के लिए poplar देखें।

स्रोत