महोगनी (Swietenia macrophylla, बड़ी पत्ती वाली महोगनी) भारत के नम, गर्म हिस्सों में उगाई जा सकती है, लेकिन यह 30 साल का लकड़ी का निवेश है, 12 साल का नहीं, और इस गाइड के लिए भारत का कोई प्रमाणित भाव, उपज या बाय-बैक आंकड़ा नहीं मिला। इसे तभी लगाएं जब आप दशकों इंतजार कर सकते हों, गहरी अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी हो और लगभग 1,600 मिमी या ज्यादा बारिश होती हो, और आपने अपने राज्य के वन विभाग से कटाई और ढुलाई के नियम पक्के कर लिए हों।
World Agroforestry का वृक्ष डेटाबेस लकड़ी के लिए 30 से 35 साल का रोटेशन बताता है। 12 से 15 साल के ऑनलाइन दावे उस संदर्भ से समर्थित नहीं हैं, और विनियर या फर्नीचर ग्रेड के लट्ठों के लिए मोटा, सीधा, कीड़े से मुक्त तना चाहिए।
भारत में कहां उगती है
- इतिहास: भारत ने Swietenia macrophylla और S. mahagoni दोनों 1865 में कैरेबियन बीज से मंगाईं, और तब से यह प्रजाति खूब लगाई गई है। भारतीय अध्ययन पश्चिम बंगाल के तराई (Uttar Banga Krishi Viswavidyalaya का वृक्षारोपण पत्ती गिरावट का काम) और कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु (तीन राज्यों के 25 बीज स्रोतों का बीज स्रोत ट्रायल) से हैं।
- जलवायु सीमाएं: डेटाबेस 1,600 से 2,500 मिमी सालाना वर्षा, 20 से 28 डिग्री C औसत तापमान और 0 से 1,500 मीटर ऊंचाई बताता है। इससे बहुत कम बारिश वाले क्षेत्र दायरे से बाहर हैं, और उनके लिए सिंचित वृक्षारोपण का कोई आंकड़ा नहीं मिला।
- मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली मध्यम से भारी मिट्टी में सबसे अच्छी; प्राकृतिक जंगल नदियों के किनारे गहरी उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी पर हैं। जलभराव वाली या उथली मिट्टी खराब जगह है।
योजना के लिए मुख्य तथ्य
| मद | संदर्भ मान | प्रति एकड़ बराबर |
|---|---|---|
| मानक रोपण दूरी | 10 x 3 मीटर, लगभग 333 पेड़ प्रति हेक्टेयर | लगभग 135 पेड़ |
| लकड़ी की कटाई पर अंतिम पेड़ संख्या | 150 से 250 पेड़ प्रति हेक्टेयर | लगभग 61 से 101 पेड़ |
| लकड़ी के लिए रोटेशन | 30 से 35 साल | वही |
| वर्षा | 1,600 से 2,500 मिमी सालाना (4,000 मिमी तक सहन) | वही |
| औसत वार्षिक तापमान | 20 से 28 डिग्री C (सीमा 11 से 35) | वही |
| ऊंचाई | 0 से 1,500 मीटर | वही |
| बीज | लगभग 2,400 पंखरहित बीज प्रति किलो | वही |
महोगनी को ऊपर से पूरी रोशनी और बगल से सुरक्षा चाहिए, इसलिए इसे घना नहीं लगाया जाता। 10 x 3 मीटर पर डेटाबेस के अनुसार बीमार तने हटाने के अलावा वृक्षारोपण को शायद ही छंटाई चाहिए, और पेड़ खुद टहनियां गिरा देता है। उसी स्रोत में लिखा है कि पेड़ वृक्षारोपण से बाहर फैल सकता है और उसे उच्च संरक्षण महत्व वाले क्षेत्रों के पास नहीं लगाना चाहिए।
रोपण सामग्री
- बीज आम रोपण सामग्री है: लगभग 2,400 पंखरहित बीज प्रति किलो। बीज बंद ठंडे भंडारण में लगभग एक साल जीवित रहता है, इसलिए ताजा बीज इस्तेमाल करें।
- बीज स्रोत मायने रखता है। Indian Forester के बीज स्रोत ट्रायल (Durai, 2020) में अंकुरण, शाखाएं और असामान्य पौधे स्रोतों के बीच काफी अलग निकले, कर्नाटक के स्रोतों में सबसे ज्यादा अंकुरण और शाखाओं वाले पौधे मिले, और केरल में सबसे कम असामान्य पौधे। नर्सरी से बीज का मूल पूछें।
- रोपने से पहले पौधों को ऊंचाई के हिसाब से ग्रेड करें। एक ग्रेडिंग अध्ययन (Patel, 2019) में 51 दिन पर ग्रेड किया गया सबसे ऊंचा ग्रेड छह महीने बाद भी आगे रहा (तना 50.5 सेमी, जड़ 40.2 सेमी)।
- भारतीय खेतों के लिए गड्ढे, दूरी और खाद की मात्रा राज्य कृषि विश्वविद्यालय के पैकेज में नहीं मिली, इसलिए यहां नहीं दी गई। वन विभाग की नर्सरी या अपने KVK से पूछें।
कीट और रोग
- शूट बोरर (Hypsipyla): सबसे गंभीर कीट। डेटाबेस इसे कुछ वृक्षारोपणों में महामारी जैसा बताता है, जिससे तने का आकार बिगड़ता है और लकड़ी की गुणवत्ता बहुत गिरती है। सीडर टिप मॉथ Hypsipyla robusta भारत सहित पूरे एशिया में है और Swietenia के साथ टून और Chukrasia पर हमला करता है। बार बार शीर्ष पर हमले से मुड़ा या टेढ़ा तना बाद में ठीक नहीं होता, और इसीलिए महोगनी के लट्ठे अक्सर खराब ग्रेड के निकलते हैं।
- डेटाबेस में एक सिस्टमिक कीटनाशक (acephate, पहले Orthene नाम से बिकता था) को इस कीट पर प्रभावी बताया गया है। जांचें कि यह इस उपयोग के लिए पंजीकृत है और लेबल तथा अपने KVK या वन विभाग की सलाह मानें; भारत का कोई छिड़काव कार्यक्रम नहीं मिला।
- पुराने पेड़ों में हृदय और तल की सड़न आ सकती है जो तने के निचले घाव और टहनियों के ठूंठ से घुसती है, इसलिए तने को घायल न करें। नर्सरी रोगों में नम स्थितियों में डैम्पिंग ऑफ और पत्ती धब्बे शामिल हैं।
बढ़वार, कटाई और लकड़ी की गुणवत्ता
- अच्छी स्थितियों में पेड़ 30 से 40 मीटर ऊंचे और 3 से 4 मीटर मोटाई (गिर्थ) तक पहुंचते हैं, और लगभग 15 साल में नियमित फल देने लगते हैं।
- वृक्षारोपण की लकड़ी का वजन 12% नमी पर 485 से 840 किलो प्रति घन मीटर होता है और यह प्राकृतिक जंगल की लकड़ी से कुछ हल्की है। इसका उपयोग पैनलिंग, जॉइनरी, फर्नीचर और प्लाईवुड में होता है। डेटाबेस लिखता है कि विनियर गुणवत्ता रंग के अंतर, लहरदार रेशे, छोटी गांठों और छेदक कीड़े के नुकसान से सीमित है।
- भारत की कोई बढ़वार और उपज तालिका (उम्र के हिसाब से मोटाई या प्रति एकड़ लकड़ी का आयतन) नहीं मिली, इसलिए घन मीटर या प्रति पेड़ उपज नहीं दी गई।
लागत और आय
- वृक्षारोपण महोगनी के लट्ठों का कोई प्रमाणित भारतीय भाव और स्थापना की लागत नहीं मिली। प्रचार में दिखने वाले प्रति पेड़ लाखों के आंकड़ों पर लिखित खरीदार अनुबंध के बिना भरोसा न करें।
- गणित जो आप खुद कर सकते हैं: प्रति एकड़ 135 पेड़ पर कटाई के समय हर पेड़ के ₹1,000 शुद्ध मूल्य का मतलब प्रति एकड़ ₹1.35 लाख है, जो 30 साल में फैला है (इंतजार की लागत से पहले लगभग ₹4,500 सालाना प्रति एकड़)। स्थानीय आरा मिल या लकड़ी व्यापारी से पूछें कि आप जिस मोटाई की उम्मीद करते हैं उसके लट्ठों के वे क्या देते हैं, फिर गुणा करें।
- कटाई से पहले आय केवल अंतरफसलों से आती है जब तक छत्र खुला है। डेटाबेस के अनुसार दूसरी जगह किसान महोगनी के बीच मक्का, बीन, केला और कसावा लगाते हैं, और मिश्रित खड़ी फसल में महोगनी सागौन को पीछे छोड़ देती है। अंतरफसल की योजना केवल शुरुआती कुछ सालों के लिए बनाएं।
बाजार, कानून और जोखिम
- कटाई और ढुलाई: निजी जमीन पर उगे पेड़ों की कटाई और ढुलाई के नियम राज्य के अनुसार अलग हैं, और किसी भी राज्य में महोगनी को अनुमति से छूट है या नहीं, यह पक्का नहीं हो सका। लगाने से पहले अपने Divisional Forest Officer से लिखित में पूछें।
- CITES: S. macrophylla 2003 से CITES Appendix II में है, लेकिन एक सामान्य संदर्भ के अनुसार व्यापार प्रतिबंध केवल नियोट्रॉपिकल (दक्षिण और मध्य अमेरिका) आबादी पर लागू हैं। लकड़ी निर्यात करनी हो तो नियम वन विभाग या DGFT से जांचें।
- बाय-बैक योजनाएं: जो कंपनियां वादा किए बाय-बैक के साथ महोगनी के पौधे बेचती हैं उनसे सावधान रहें। ऐसे वादे लकड़ी के पेड़ों के लिए आम प्रचार पैटर्न हैं, और वादा खरीदार की वित्तीय हालत जितना ही अच्छा होता है। भुगतान से पहले पंजीकरण जांचें और अनुबंध पढ़ें।
- जोखिम: तीस साल का क्षितिज, शूट बोरर का नुकसान और अनिश्चित स्थानीय मांग। जमीन दशकों के लिए बंध जाती है, और PMFBY अधिसूचित खेत की फसलों को कवर करती है, लकड़ी के पेड़ों को नहीं।
- कम अवधि के विकल्पों के लिए फसल कैलेंडर और कृषि वानिकी सहायता के लिए सब्सिडी खोजक देखें। महोगनी के लिए कोई प्रमाणित MIDH या राज्य सब्सिडी दर नहीं मिली।
स्रोत
- World Agroforestry, Agroforestree Database: Swietenia macrophylla (Orwa et al. 2009)
- Durai, M.V. (2020), seed source influence on germination in big-leaf mahogany, Indian Forester
- Patel, N.V. (2019), impact of grading on quality seedling production in Swietenia macrophylla, Indian Forester
- Dinesha et al. (2020), litterfall of Swietenia macrophylla plantation in Terai, West Bengal, Indian Forester
- Wikipedia, Mahogany (India introduction 1865, CITES status)
- Wikipedia, Hypsipyla robusta (cedar tip moth, host plants and range)
