मेलिया डुबिया (मालाबार नीम, मलाई वेम्बु) एक तेजी से बढ़ने वाला देशी पेड़ है, जो प्रायद्वीपीय भारत की ज्यादातर खेती की मिट्टियों में कम से कम 800 से 1,000 मिमी बारिश या नियमित सिंचाई के साथ चलता है, और इसकी लकड़ी मुख्य रूप से प्लाईवुड, माचिस, पैकिंग केस और कागज की मिलों को बिकती है। असली अड़चनें ये हैं कि शुरुआती सालों में पानी चाहिए, बिक्री का भाव स्थानीय मिलें तय करती हैं, और कटाई की उम्र और उपज के छपे आंकड़े अलग-अलग स्रोतों में काफी अलग हैं।
दो तरह के आंकड़े चल रहे हैं। विस्तार की सामग्री में 5 साल में प्रति पेड़ 12 से 15 घन फुट (0.4 से 0.5 m3) लकड़ी बताई जाती है, जबकि कर्नाटक के एक खेत अध्ययन में 3 से 5 साल के बीच प्रति पेड़ करीब 0.08 m3 नापी गई। जब तक किसी मिल के खरीदार या पड़ोसी के खेत से कुछ और न दिखे, कम और नापे हुए आंकड़ों पर ही बजट बनाएं।
भारत में यह कहां उगता है
- मूल क्षेत्र: पश्चिमी घाट और केरल के नम पर्णपाती जंगल; खासी पहाड़ियों, ओडिशा की पहाड़ियों, उत्तर बंगाल, सिक्किम, ऊपरी असम और दक्कन पठार में भी मिलने की रिपोर्ट है।
- लगाए जाने वाले इलाके: नापे गए बागान बीदर (कर्नाटक), तमिलनाडु (IFGTB कोयंबटूर, Forest College मेट्टुपालयम) और झांसी (उत्तर प्रदेश, RLBCAU के ट्रायल) से बताए गए हैं।
- जलवायु: उष्णकटिबंधीय से उपोष्णकटिबंधीय, बारिश करीब 800 से 1,000 मिमी और ऊपर, मूल इलाके में ऊंचाई 600 से 1,800 मीटर। छोटे पौधे हल्की ठंड सह लेते हैं लेकिन कड़ा पाला नहीं, और पेड़ को आग से और छोटी अवस्था में जानवरों के चरने से नुकसान होता है।
- मिट्टी: उपजाऊ रेतीली दोमट, लाल और लैटेराइट मिट्टी में सबसे अच्छा चलता है; उथली कंकरीली मिट्टी में बढ़वार रुकती है। TNAU के अनुसार बिना सिंचाई के बढ़वार करीब 50% धीमी रहती है।
- रोशनी: पौधे छांव में मुश्किल से बढ़ते हैं, इसलिए खुली धूप में लगाएं।
रोपण सामग्री
- बीज: पके फल जनवरी से फरवरी में इकट्ठा करें। एक स्रोत में जमाव 25% से कम बताया गया है, जबकि IFGTB कोयंबटूर के अनुसार बिना उपचार के भी 60% तक होता है। एक नर्सरी क्यारी में 6 से 7 किलो सूखे फल (करीब 1,500 बीज) लगते हैं, बुवाई मार्च से अप्रैल में होती है, जमाव में 90 दिन तक लगते हैं, और पौध को नर्सरी में करीब 6 महीने चाहिए।
- कलम और क्लोन: 1,000 से 2,000 ppm IBA से उपचारित कच्ची तने की कलमें करीब 75% जड़ पकड़ती हैं। Forest College मेट्टुपालयम की mini-clonal विधि में कोकोपीट भरी 90 cc की root trainer ट्रे इस्तेमाल होती हैं और जड़ें 15 दिन में निकलने लगती हैं।
- बिना छांटे बीज से बने पौधों की बढ़वार में बहुत फर्क रहता है। नर्सरी से पूछें कि कौन सा क्लोन या बीज स्रोत दे रहे हैं और वह कहां परखा गया है। भारतीय ट्रायल के पुष्ट आंकड़ों वाली कोई आधिकारिक रूप से जारी नामित किस्म नहीं मिली।
दूरी और रोपाई
| दूरी | प्रति एकड़ पेड़ | प्रति हेक्टेयर पेड़ | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| 2 x 2 मीटर | करीब 1,000 | 2,500 | Indian Forester के आर्थिक अध्ययन में 5 साल का सबसे ज्यादा शुद्ध लाभ |
| 3 x 3 मीटर | करीब 444 | 1,111 | TNAU की रोपाई दूरी; किसानों की आम पसंद |
| 5 x 5 मीटर | करीब 162 | 400 | TNAU और Indian Farming में इसे optimal कहा गया; अंतरफसल के लिए जगह रहती है |
| 8 x 8 मीटर | करीब 63 | 156 | अकेले पेड़ की बढ़वार के लिए ideal कहा गया; छत्र बंद होने में लंबा इंतजार |
- गड्ढे 45 x 45 x 45 सेमी के रखें। 6 महीने के पौधे बारिश की शुरुआत में लगाएं, या सिंचाई के साथ।
- घनी दूरी से कुल लकड़ी ज्यादा मिलती है पर पेड़ पतले रहते हैं। प्लाईवुड मिलें 120 सेमी से ऊपर गोलाई पर प्रति टन या घन फुट ज्यादा देती हैं (भाव देखें), इसलिए पहले तय करें कि उत्पाद क्या बेचना है।
- तना सीधा रखने के लिए साल में एक बार, शुरुआती सालों में साल में दो बार, छंटाई करें।
खाद और सिंचाई
- शुरुआत की बढ़वार में पहले दौर में रोज पानी और पहले 3 साल हर 3 महीने पर खाद से मदद मिलती है (TNAU)। सूखे मौसम में हर 10 से 15 दिन पर पानी दें।
- Indian Farming (अप्रैल 2025) साल में दो बार प्रति पेड़ 25 से 50 ग्राम N, P और K देने का सुझाव देती है। 444 पेड़ प्रति एकड़ पर यह साल में प्रति एकड़ हर पोषक तत्व का करीब 22 से 44 किलो बैठता है; इसे शुरुआती अंदाज मानें और मिट्टी जांच व अपने KVK की सलाह से चलें।
- निराई: TNAU के अनुसार 3 x 3 मीटर दूरी पर 3 साल की उम्र तक महीने में दो बार निराई करें; अंतरफसल की जुताई यह काम ज्यादातर कर देती है।
- यह फसल ड्रिप के लिए ठीक है; drip irrigation देखें।
अंतरफसलें
TNAU और Indian Farming शुरुआती सालों में, जब तक छत्र बंद न हो, मूंगफली, मिर्च, हल्दी, अदरक, उड़द, मूंग, मसूर, खरबूजा, कंगनी, गन्ना, केला और पपीता बताते हैं। किसी एलीलोपैथी की रिपोर्ट नहीं है।
कीट और रोग
- मेलिया डुबिया के लिए बहुत कम भारतीय विस्तार स्रोत पूरी कीट सूची देते हैं। IFGTB ने 2012 से 2014 में मुख्य कीटों के लिए जर्मप्लाज्म की छंटाई का प्रोजेक्ट चलाया, और लाल मकड़ी के नियंत्रण के लिए प्रभावित पत्तियां हटाना या पत्तियों के नीचे नीम तेल का छिड़काव बताया गया है।
- कलम की क्यारियों में जलभराव होने पर छोटे पौधों में जड़ सड़न हो सकती है। Forest College मेट्टुपालयम ने 2017 से 2020 में जीवित पेड़ों पर लगने वाली दीमक पर प्रोजेक्ट चलाया, इसलिए नए बागान में दीमक के नुकसान पर नजर रखें।
- किसी भी रसायन के लिए लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK या वन अनुसंधान केंद्र से पूछें। pests देखें।
कटाई और उपज
| स्रोत | दावा |
|---|---|
| TNAU Agritech | कटाई 6 से 7 साल में; गहन देखभाल में 5 साल पर प्रति पेड़ 12 से 15 घन फुट (0.4 से 0.5 m3); संभाले जाने पर बढ़वार साल में 20 से 25 सेमी, न संभालने पर 6 से 8 सेमी (स्रोत नहीं बताता कि यह गोलाई है या ऊंचाई) |
| Indian Farming, अप्रैल 2025 | कृषि वानिकी के लिए 8 से 12 साल की रोटेशन |
| कर्नाटक का दूरी अध्ययन | 3 से 5 साल में सबसे अच्छा अकेला पेड़: 4 x 2 मीटर पर 0.081 m3 आयतन और 84.6 किलो बायोमास; 3 x 3 मीटर उसके करीब |
| बीदर बायोमास अध्ययन | 3 x 3 मीटर पर 5 से 7 साल के बागानों में सबसे ज्यादा जमीन के ऊपर का बायोमास 23.64 टन/हेक्टेयर (करीब 9.6 टन प्रति एकड़) |
प्रति पेड़ 0.4 से 0.5 m3 और 0.08 m3 के बीच का फर्क बड़ा है और इन स्रोतों में इसकी वजह नहीं बताई गई। प्लाईवुड के लिए कटने वाले पेड़ में काफी गोलाई चाहिए, इसलिए 5 साल में कटाई सिर्फ अच्छी, सिंचित जमीन पर गहन देखभाल के साथ ही यथार्थवादी है। TNAU के नोट में उसके आंकड़ों के पीछे का क्षेत्र, मिट्टी या प्रबंधन नहीं लिखा है।
लागत और कमाई
- TNAU और Indian Farming में बताए गए भाव (बिना तारीख, मौजूदा नहीं): 50 से 120 सेमी गोलाई के टुकड़ों के लिए ₹7,300 प्रति टन, और 120 सेमी से ऊपर गोलाई के पेड़ों के लिए ₹370 प्रति घन फुट। TNAU के अपने वित्तीय उदाहरण में पल्पवुड के लिए ₹4,500 प्रति टन और प्लाईवुड के लिए ₹7,500 प्रति टन लिया गया है। मिल के भाव इलाके और साल के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए दो या तीन मिलों से आज का भाव और ग्रेड के नियम लिखित में लें।
- नापे हुए बायोमास से हिसाब: करीब 9.6 टन प्रति एकड़ x ₹4,500 से ₹7,500 प्रति टन = 5 से 7 साल में करीब ₹43,000 से ₹72,000 कुल आय प्रति एकड़। यह साफ नहीं है कि अध्ययन का बायोमास हरा वजन है या सूखा और उसमें डालियां गिनी गई हैं या नहीं, इसलिए यह सिर्फ मोटा अंदाज है।
- छपा हुआ अर्थशास्त्र: 5 साल के पेड़ों पर Indian Forester के एक अध्ययन में 2 x 2 मीटर दूरी पर ₹752,791 का शुद्ध लाभ और चार दूरियों पर लाभ-लागत अनुपात 2.45 से 3.35 के बीच बताया गया। उपलब्ध सार में क्षेत्र का आधार और इस्तेमाल हुए भाव नहीं दिखे, इसलिए इस आंकड़े को योजना में न उतारें।
- लागत: पौधे, गड्ढे, सिंचाई, खाद और निराई, और जानवरों से बचाव के लिए बाड़। प्रति एकड़ लागत का कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं मिला; नर्सरी से भाव लें और सिंचाई जोड़ें, जो सबसे बड़ा चालू खर्च है।
बाजार और जोखिम
- खरीदार प्लाईवुड और वीनियर मिलें, माचिस और पैकिंग केस की इकाइयां, पल्प और कागज की मिलें और व्यापारी हैं। लकड़ी बहुत हल्की है (विशिष्ट गुरुत्व 0.33), बाहर टिकाऊ नहीं है, और फर्नीचर की कठोर लकड़ी नहीं है।
- उन नर्सरी वालों से सावधान रहें जो "सागौन जैसी" कमाई, तय buy-back या प्रति एकड़ करोड़ों का वादा करते हैं। ऐसे दावे सबसे ऊंचे आयतन के आंकड़े और ऊंचे भाव को साथ मिलाकर बनते हैं।
- खेत में उगे पेड़ों की कटाई और ढुलाई के नियम राज्य के हिसाब से अलग हैं। यहां हर राज्य में मेलिया डुबिया का नियम पुष्ट नहीं किया जा सका, इसलिए बड़ा ब्लॉक लगाने से पहले जिला वन कार्यालय से पूछ लें।
- बिना सिंचाई के खेत में बढ़वार धीमी रहती है, इसलिए पहले दो सालों में सूखे का साल नुकसान का मुख्य जोखिम है।
- मेलिया डुबिया के लिए MIDH या राज्य की सब्सिडी दर की कोई पुष्ट जानकारी नहीं मिली। subsidy finder देखें, और मिल को साझा बिक्री के लिए FPO का सहारा लें।
स्रोत
- TNAU Agritech Portal, Industrial Forestry: Melia dubia
- TNAU Agritech Portal, Forestry Technologies: Melia dubia
- Indian Farming, April 2025, Malabar neem (Melia dubia): a promising agroforestry tree in India (RLBCAU Jhansi)
- Indian Forester, Economic Feasibility of Five Year Old Melia dubia in Different Planting Densities
- Indian Forester, Growth and Productivity of Melia dubia under Varying Spatial Configurations and Age Gradations
- Assessment of Biomass Productivity of Melia dubia in Bidar District, Karnataka (KrishiKosh)
