सफेद चंदन (Santalum album) कर्नाटक, तमिलनाडु और कुछ और राज्यों में निजी जमीन पर उगाया जा सकता है, और यह सूखे, हल्की मिट्टी वाले खेतों के लिए ठीक है, लेकिन एक भी लट्ठा बेचने से पहले इसे होस्ट पौधा, सालों तक चोरी से बचाव और कानूनी कागजात चाहिए। हार्टवुड काटने लायक होने तक कम से कम 15 साल का इंतजार मानें, और पुराने वानिकी संदर्भों के हिसाब से करीब 30 साल।
भारत में लागत और कमाई का एकमात्र विस्तृत मॉडल जो मिला, वह ICFRE-Institute of Wood Science and Technology (IWST), बेंगलुरु का पैकेज है। यह पुराने भावों वाला एक शोध मॉडल है, कोई वादा नहीं।
भारत में यह कहां उगता है
- IWST के अनुसार यह पेड़ दक्कन पठार के सूखे पर्णपाती जंगलों में करीब 9,000 वर्ग किमी में प्राकृतिक रूप से मिलता है, जिसमें से कर्नाटक और तमिलनाडु में करीब 8,200 वर्ग किमी है। यह केरल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, बिहार और मणिपुर में भी मिलता है।
- यह मजबूत है, इसे उपजाऊ मिट्टी या ज्यादा नमी नहीं चाहिए, और IWST इसे अर्ध-शुष्क बारानी इलाकों और बिगड़ी जमीन के लिए ठीक मानता है। IUCN इसे Vulnerable श्रेणी में रखता है।
- यह आंशिक रूप से जड़ों पर पलने वाला परजीवी है, इसलिए पास में होस्ट पौधे के बिना यह ठीक से नहीं बढ़ेगा।
होस्ट पौधे, रोपण सामग्री और दूरी
- पौध अवस्था (प्राथमिक होस्ट): IWST पौध 270 cc के root trainer में रेत, मिट्टी और कम्पोस्ट (35:15:50) के मिश्रण और छुईमुई (Mimosa pudica) या अरहर जैसे छोटे होस्ट के साथ तैयार करता है। रोपने लायक पौध 30 से 50 सेमी ऊंची होती है, करीब 6 महीने में तैयार होती है, और IWST के 2011 के आसपास के आंकड़ों में नर्सरी की दोहराई जाने वाली लागत के रूप में करीब ₹6 से ₹7 प्रति पौधा है। Root trainer की पौध में पॉलीबैग की पौध के मुकाबले जड़ें और होस्ट से जुड़ाव बेहतर बने।
- खेत की अवस्था (द्वितीयक होस्ट): IWST की कृषि वानिकी रूपरेखा में चंदन 6 मीटर x 3 मीटर पर है और बीच में आंवला (Indian gooseberry) जिगजैग (quincunx) तरीके से लगाया जाता है। उनके ट्रायल प्लॉट में आम, इमली और कॉफी भी होस्ट के रूप में इस्तेमाल हुए। Indian Journal of Agroforestry की 2025 की एक समीक्षा में Acacia, Casuarina और Eucalyptus को अहम होस्ट बताया गया है।
- 6 मीटर x 3 मीटर पर प्रति एकड़ पौधे: हर चंदन के पेड़ के लिए 18 वर्ग मीटर के हिसाब से प्रति एकड़ करीब 225 चंदन के पेड़ (प्रति हेक्टेयर करीब 555) बैठते हैं, यह यहां का अपना हिसाब है।
- शुरू के सालों में कतारों के बीच कुल्थी या सेम जैसी कम ऊंचाई की दलहनी फसल उगाई जा सकती है।
- पौध किसी जाने-माने स्रोत से लें। IWST चेतावनी देता है कि अनजान स्रोत की खराब पौध बिना होस्ट के लगाने से हार्टवुड बिगड़ता है और किसान को नुकसान होता है।
पानी, खाद और देखभाल
किसी भारतीय विश्वविद्यालय से चंदन के लिए खाद या सिंचाई की कोई जांची हुई सारणी नहीं मिली, इसलिए कोई नहीं दी जा रही। IWST पेड़ को पोषक तत्वों और नमी में कम मांग वाला बताता है, और होस्ट फसल (आंवला, आम) को उसकी अपनी सामान्य देखभाल मिलती है। निराई जैसी अंतर-सस्य क्रियाएं जमने में मदद करती हैं। होस्ट फसल की खाद की योजना के लिए fertilizers और drip irrigation देखें। कीट और रोग IWST की सामग्री में सिर्फ नर्सरी के छिड़काव कार्यक्रम के रूप में हैं (महीने के अंतर पर मैन्कोजेब और क्विनालफॉस का एक-एक छिड़काव); बागान के लिए अपने KVK या वन विभाग की सलाह और लेबल के हिसाब से चलें।
कटाई तक के साल
- IWST 15 साल और 20 साल के चक्र का मॉडल बनाता है, हार्टवुड की कोई तय उम्र नहीं। दूसरे वानिकी संदर्भ (World Agroforestry की प्रजाति प्रोफाइल, खोज के सारांश में देखी गई) कहते हैं कि पेड़ करीब 30 साल में छाती की ऊंचाई पर 15 सेमी व्यास तक पहुंचता है और करीब 50 किलो हार्टवुड देता है, और अच्छी तरह बढ़ा 40 साल का पेड़ 250 किलो से ज्यादा दे सकता है। हार्टवुड की मात्रा उम्र के साथ बढ़ती है, इसलिए 15 साल की कटाई में 30 साल वाली से बहुत कम मिलता है।
- कम से कम 15 साल, और संभवतः उससे ज्यादा, के लिए तैयार रहें, जिसमें चंदन से खुद कोई आमदनी नहीं होगी।
लागत और कमाई (IWST मॉडल, प्रति हेक्टेयर)
| मॉडल (15 साल का चक्र) | 10 प्रतिशत पर लाभ-लागत अनुपात | आंतरिक प्रतिफल दर | 10 प्रतिशत पर शुद्ध वर्तमान मूल्य |
|---|---|---|---|
| चंदन का ब्लॉक बागान | 4.4 | 33 प्रतिशत | ₹26.8 लाख |
| चंदन + आंवला | 3.8 | 29 प्रतिशत | ₹25.6 लाख |
| चंदन + आंवला + कुल्थी | 3.8 | 30 प्रतिशत | ₹25.7 लाख |
- चंदन + आंवला + कुल्थी वाली रूपरेखा के लिए 15 साल में IWST प्रति हेक्टेयर कुल लागत करीब ₹19.87 लाख और प्रति हेक्टेयर कुल लाभ ₹143.08 लाख बताता है। करीब आधी लागत सुरक्षा (चौकीदार, बाड़) की है।
- माना गया राजस्व: 15वें साल में करीब ₹25,000 प्रति पेड़ और 20वें साल में ₹31,400 प्रति पेड़ (सैपवुड, हार्टवुड और मिली-जुली लकड़ी मिलाकर)। जांच: करीब 555 पेड़ x ₹25,000 करीब ₹1.39 करोड़ प्रति हेक्टेयर होता है, जो बताए गए लाभ के करीब है।
- ये आंकड़े मानते हैं कि ज्यादातर पेड़ बचे रहेंगे और चोरी नहीं होंगे, और हार्टवुड उन भावों के आसपास बिकेगा जो IWST ने लिए (₹3,500 से ₹5,000 प्रति किलो, करीब 2011)। सितंबर 2025 में केरल के प्रेस ने मौजूदा भाव ₹4,000 से ₹7,000 प्रति किलो बताए। 15 साल पर IWST की प्रति पेड़ उपज ऊपर दिए 30 साल वाले वानिकी आंकड़े से कहीं ज्यादा आशावादी है, इसलिए अपनी तरफ से कटौती लगाएं।
- "एक लाख प्रति पेड़" के दावों पर भरोसा न करें। उसी उम्र के असली बागान की जीवित रहने और हार्टवुड की जानकारी देखे बिना किसी को चंदन की योजना के लिए पैसे नहीं देने चाहिए।
कानूनी सीमाएं और बाजार
- कर्नाटक: Karnataka Forest (Amendment) Act, 2001 जमीन के कब्जेदार को अपनी जमीन के चंदन के पेड़ों पर कानूनी हक देता है, लेकिन वह इस Act के तहत बने नियमों के बाहर लकड़ी को काट, बेच, बदल, जमा, ढो या बेच नहीं सकता। सही इजाजत और ट्रांजिट के चरणों के लिए कर्नाटक के मौजूदा नियम देखें।
- केरल: सितंबर 2025 में कैबिनेट ने निजी जमीन पर वन विभाग की इजाजत से चंदन की कटाई और बिक्री की अनुमति देने वाला बिल मंजूर किया। यह पक्का नहीं हो सका कि वह अब तक पास हुआ है या नहीं।
- नियम राज्य के हिसाब से अलग हैं और बदलते रहते हैं; व्यावसायिक रोपण से पहले और कुछ भी काटने से पहले अपने Divisional Forest Officer से लिखित इजाजत लें।
- खरीदार: राज्य वन विभाग की नीलामी, Karnataka Soaps and Detergents और Karnataka State Handicrafts Development Corporation जैसी सरकारी यूनिटें, और FFDC कन्नौज जैसी सुगंध यूनिटें, जिन्हें IWST अपनी तकनीक के उपयोगकर्ताओं में गिनता है। IWST अंतरराष्ट्रीय चंदन तेल का भाव ₹1,00,000 प्रति किलो से ऊपर बताता है, लेकिन यह खेत पर मिलने वाले भाव में नहीं बदलता।
- जोखिम: चोरी सबसे बड़ा है, फिर लंबा इंतजार, कानून में बदलाव, और फर्जी "निवेश बागान" कंपनियां। किसी भी ऑफर की तुलना ऊपर के IWST मॉडल से करें।
IWST बताता है कि National Medicinal Plants Board ने राज्य औषधीय पौधा बोर्डों के जरिए चंदन की खेती बढ़ाने की योजनाएं चलाई हैं। किसी जांची हुई मौजूदा दर का पता नहीं चला; अपने राज्य के बोर्ड से और subsidy finder पर देखें।
स्रोत
- IWST (ICFRE), Technology package for raising sandal plantations from quality planting material
- IWST, Technology package for raising sandal plantations (Viswanath, Joshi, Rathore)
- Sharma, Sandalwood cultivation and management, Indian Journal of Agroforestry 27(1), 2025
- Karnataka Forest (Amendment) Act, 2001
- Onmanorama, Kerala cabinet approves sandalwood felling bill, 13 September 2025
- World Agroforestry, Santalum album species profile
