आंवला भारत के उन गिने-चुने फलदार पेड़ों में है जो सूखी, कमजोर या नमक वाली जमीन पर भी भरोसे की फसल देता है, और इसकी व्यावसायिक खेती मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में होती है। इसके लिए नामी किस्म का कलमी पौधा, शुष्क उपोष्णकटिबंधीय जलवायु और प्रोसेसर को बेचने की योजना चाहिए, क्योंकि फल ज्यादातर कैंडी, मुरब्बा, जूस और पाउडर के लिए खरीदा जाता है, ताजा खाने के लिए कम।
पेड़ मजबूत है और रखरखाव सस्ता है, लेकिन यह लंबे समय का बाग है: पूरी फसल से पहले कई साल की स्थापना लागत झेलने की योजना बनाएं, और लगाने से पहले ताजा भाव जांच लें।
भारत में यह कहां उगता है
- मुख्य राज्य: राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) की मॉडल परियोजना रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश (करीब 15,750 हेक्टेयर), गुजरात (करीब 10,050 हेक्टेयर) और राजस्थान (करीब 5,000 हेक्टेयर) को अग्रणी राज्य बताया गया है; वाराणसी और आगरा (उत्तर प्रदेश), देवास और होशंगाबाद (मध्य प्रदेश) और तिरुनेलवेली (तमिलनाडु) के आसपास खास पट्टियां हैं।
- जलवायु: शुष्क उपोष्णकटिबंधीय जलवायु सबसे ठीक रहती है। TNAU आंवले को सूखा मौसम पसंद करने वाला उपोष्णकटिबंधीय पौधा बताता है। ICAR-CIAH बीकानेर ने गर्म शुष्क जगह पर कई किस्मों को परखा और वहां NA-7, Chakaiya, NA-6 और Krishna को उम्मीद वाली पाया।
- मिट्टी: NHB के अनुसार मिट्टी का pH 6.5 से 9.5 तक चलता है, यानी हल्की अम्लीय से लेकर खारी और क्षारीय मिट्टी तक। TNAU भी खारेपन और क्षारीयता को सहने की बात कहता है। जहां पानी भरा रहता हो, वह जमीन न लें।
किस्में
| किस्म | स्रोतों की जानकारी | कहां ठीक बैठती है |
|---|---|---|
| NA-7 (Neelum) | TNAU ने बाजार की पसंदीदा बताई; CIAH बीकानेर के गर्म शुष्क ट्रायल में उम्मीद वाली; उस ट्रायल में सबसे ऊंचा पेड़ (3.46 मीटर) | सूखे और अर्ध-शुष्क इलाके; प्रोसेसिंग और ताजा बिक्री |
| Krishna (NA-5) | बीकानेर ट्रायल में सबसे बड़ा फल (48.3 ग्राम); गर्म शुष्क ट्रायल में उम्मीद वाली | सूखे इलाके |
| Kanchan (NA-4) | बीकानेर ट्रायल में सबसे छोटा फल (30.16 ग्राम) | लगाने से पहले स्थानीय प्रदर्शन देख लें |
| Chakaiya, NA-6 | दोनों गर्म शुष्क ट्रायल में उम्मीद वाली मानी गईं | सूखे इलाके |
| NA-10, Banarasi, BSR-1 | NHB और TNAU की सूचियों में नाम है; ट्रायल के आंकड़े नहीं मिले | अपने राज्य के बागवानी विभाग या KVK से पूछें |
- कलमी या बडिंग वाले पौधे सरकारी या ICAR से मान्यता प्राप्त नर्सरी से लें। बीज से उगे पेड़ों में फल का आकार और गुण अलग-अलग निकलते हैं।
- दो या तीन किस्में मिलाकर लगाना समझदारी है, क्योंकि जिस किस्म की मांग इस साल है, अगले साल दूसरी की हो सकती है।
रोपाई और दूरी
- मौसम: TNAU के अनुसार जुलाई से अगस्त (बरसात)। NHB कुछ इलाकों के लिए फरवरी को दूसरा मौका बताता है।
- गड्ढे: TNAU 1 x 1 मीटर या 1.25 x 1.25 मीटर के गड्ढे बताता है। NHB हर गड्ढे को सड़ी गोबर की खाद और ऊपर की मिट्टी मिलाकर भरने की सलाह देता है।
- दूरी: NHB चौकोर ढंग से 4 से 5 मीटर की दूरी सुझाता है; TNAU 6 x 6 मीटर बताता है। 5 x 5 मीटर पर प्रति हेक्टेयर 400 पेड़ (करीब 162 प्रति एकड़) आते हैं; 6 x 6 मीटर पर करीब 278 प्रति हेक्टेयर (करीब 112 प्रति एकड़)। NHB का कैश-फ्लो मॉडल खुद करीब 250 से 260 पेड़ प्रति हेक्टेयर (101 से 104 प्रति एकड़) मानता है।
- ढांचा देना: TNAU मुख्य शाखाओं को जमीन से 0.75 से 1 मीटर ऊपर रखने (modified central leader) और मार्च से अप्रैल में छंटाई की सलाह देता है।
खाद और सिंचाई
- NHB की सारणी पहले साल में प्रति पेड़ 10 किलो गोबर की खाद, 100 ग्राम नाइट्रोजन, 50 ग्राम फॉस्फोरस और 100 ग्राम पोटाश से शुरू होती है, जो हर साल दसवें साल तक बढ़ाई जाती है और उसके बाद वही रखी जाती है। अपनी मिट्टी के लिए हर साल की सही मात्रा अपने KVK से पूछें।
- TNAU की सलाह के अनुसार छंटाई के बाद खाद डालें। नमक वाली जमीन में मिट्टी की जांच सबसे अच्छा रास्ता है।
- सिंचाई: छोटे पेड़ों को जमने तक अच्छी तरह पानी दें। NHB सूखे मौसम में हर 15 से 20 दिन पर सिंचाई मानता है; TNAU के अनुसार बरसात और सर्दी में सिंचाई की जरूरत नहीं और ड्रिप से 40 से 45% पानी बच सकता है।
- NHB के मॉडल में ड्रिप वाले पेड़ तीसरे साल तक करीब 30 किलो प्रति पेड़ देते हैं, जबकि बारानी हालत में 4 से 5 साल में करीब 20 किलो प्रति पेड़। ड्रिप और उसकी सब्सिडी की जानकारी drip irrigation पेज पर है।
कीट और रोग
- कीट: TNAU गॉल इल्ली और छाल खाने वाली इल्ली गिनाता है; NHB पत्ती लपेटने वाली इल्ली, शूट गॉल मेकर और मीलीबग भी जोड़ता है। TNAU गॉल इल्ली के लिए dimethoate 0.03% का छिड़काव और छाल की इल्ली के छेदों में मिट्टी का तेल डालने की सलाह देता है।
- रस्ट (गेरुआ): रस्ट दिखे तो TNAU जुलाई से सितंबर में mancozeb 0.2% सुझाता है।
- रसायनों की मंजूरी बदलती रहती है; छिड़काव से पहले लेबल देखें और अपने KVK से पूछें। पहचान के लिए pests देखें।
कटाई और उपज
- पूरी तरह विकसित और भूरे रंग का हुआ फल तोड़ें, सुबह जल्दी या शाम के समय (NHB)।
- NHB के मॉडल में शुरू के सालों में 4 टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर परियोजना के पांचवें साल तक 8 टन प्रति हेक्टेयर और पूरे बड़े पेड़ों में 15 से 20 टन प्रति हेक्टेयर उपज मानी गई है। यानी पूरे बाग में करीब 6 से 8 टन प्रति एकड़। इन्हें मॉडल की मान्यताएं समझें, गारंटी नहीं; असली उपज किस्म, सिंचाई और फूल आने पर निर्भर है।
लागत और कमाई
- पुरानी लागत: NHB की रिपोर्ट एक एकड़ की परियोजना का कुल खर्च करीब ₹1.25 लाख मानती है, जिसमें सिंचाई (करीब ₹50,000), ड्रिप (करीब ₹20,000) और खेती का खर्च शामिल है। यह पुरानी गणना है, इसलिए अब पौधे, मजदूरी और पाइप का खर्च ज्यादा होगा।
- पुराने भाव: इसी मॉडल में पहले साल ₹700 प्रति क्विंटल और चौथे साल तक ₹1,000 प्रति क्विंटल माना गया है। आज के भाव मंडी और फल के आकार के हिसाब से अलग हैं; लगाने से पहले mandi bhav और अपने आसपास के प्रोसेसरों से पूछ लें।
- हिसाब: प्रति एकड़ 6 टन की पूरी उपज 60 क्विंटल होती है। ₹1,000 प्रति क्विंटल पर यह प्रति एकड़ ₹60,000 कुल आय है; ₹2,000 प्रति क्विंटल पर ₹1.2 लाख। भाव की जगह अपने खरीदार का लिखित भाव रखें। इसमें से हर साल का खाद, सिंचाई, छंटाई, मजदूरी और तुड़ाई का खर्च घटाएं।
- आमदनी छोटे पेड़ों के सालों के बाद शुरू होती है, इसलिए शुरू के सालों में खर्च रहता है और पूरी फसल नहीं; योजना अपनी आर्थिक हालत के हिसाब से बनाएं, KCC credit लें तो उसे भी गिनें।
बाजार और सब्सिडी
- खरीदार कैंडी, मुरब्बा, जूस और पाउडर के प्रोसेसर, आयुर्वेदिक और हर्बल निर्माता और ताजा फल के व्यापारी हैं। छोटी खेप खुले में बेचने की बजाय प्रोसेसर से कॉन्ट्रैक्ट में भाव का जोखिम बेहतर बंटता है।
- एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत बाग के लिए मदद राज्य और साल के हिसाब से बदलती है। यहां कोई मौजूदा सब्सिडी दर प्रमाणित नहीं हो सकी; subsidy finder इस्तेमाल करें और जिले के बागवानी कार्यालय से पूछें।
- आंवले का फसल बीमा इस पर निर्भर है कि आपका राज्य उसे अधिसूचित करता है या नहीं; अपने बैंक या कृषि कार्यालय से PMFBY के बारे में पूछें।
