ऑलस्पाइस (Pimenta dioica, जिसे Jamaica pepper भी कहते हैं) एक पेड़ वाला मसाला है जो भारत के गर्म और नमी वाले इलाकों में उगता है, लेकिन यहां यह व्यावसायिक बागान की फसल नहीं है। केरल में इसके छिटपुट पेड़ हैं, और कुछ कर्नाटक और तमिलनाडु में। यह उस किसान के लिए ठीक है जिसके पास दूसरी फसलों के बीच कुछ पेड़ों की जगह हो और जो पहली बेरी के लिए 3 से 6 साल इंतजार कर सके।

ऑलस्पाइस के लिए भारत का कोई पुष्ट बाजार भाव, खरीदारों की सूची या खेती की लागत का अध्ययन नहीं मिला, इसलिए इस पेज पर कमाई का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। मुट्ठी भर पेड़ों से ज्यादा लगाने से पहले अपने इलाके के Spices Board और खरीदारों से आज का भाव पूछना जरूरी है।

भारत में यह कहां उगता है

  • ICAR-IISR (Indian Institute of Spices Research) ऑलस्पाइस को अपनी अधिदेश फसलों में गिनता है और बताता है कि यह केरल में उगाया जाता है। वायनाड की प्रेस रिपोर्टें इसे कम लगाया जाने वाला बताती हैं, आमतौर पर नियमित फसलों के पास दो या तीन पेड़।
  • जलवायु और मिट्टी: TNAU गहरी, ह्यूमस वाली दोमट और लेटराइट मिट्टी, 100 से 200 सेमी सालाना बारिश और करीब 27 डिग्री C का आदर्श तापमान बताता है। IISR के अनुसार इसे गर्म नम जलवायु और अच्छे जल निकास वाली मिट्टी चाहिए।
  • यह सूखे मैदानों, पाले वाले इलाकों या जलभराव वाली जमीन के लिए ठीक नहीं है।

रोपण सामग्री

  • पेड़ द्विलिंगी है, यानी नर और मादा पेड़ अलग होते हैं, और बेरी सिर्फ मादा पेड़ पर लगती है। TNAU बागान में नर और मादा का अनुपात 1:10 रखने की सलाह देता है। पौधे में फूल आने से पहले लिंग पता नहीं चलता, यही रोपाई का मुख्य जोखिम है।
  • बीज: तैयार नर्सरी क्यारियों में बोने पर बीज बुवाई के करीब 15 दिन बाद उगता है। बीज से उगे पेड़ों में फूल करीब 6 साल में आते हैं।
  • एयर लेयरिंग: जनवरी में की जाती है, इससे क्लोन वाले पौधे बनते हैं जिनमें फूल करीब 3 साल में आते हैं, और आप ऐसे पेड़ को चुन सकते हैं जो मादा और अच्छी उपज वाला जाना हुआ हो।
  • भारत की कोई जारी की गई किस्म की पुष्टि नहीं हुई। रोपण सामग्री राज्य बागवानी विभाग, ICAR संस्थान या KVK से लें जो मातृ पेड़ का नाम बता सकें।

दूरी और रोपाई

  • TNAU 6 मीटर x 6 मीटर की सलाह देता है, यानी प्रति एकड़ करीब 112 पेड़ (277 प्रति हेक्टेयर), जिनमें करीब हर ग्यारहवां पेड़ नर होना चाहिए।
  • मानसून की शुरुआत में ऊपरी मिट्टी और गोबर की खाद भरे गड्ढों में रोपें, और छोटे पेड़ों को पहली सूखी ऋतुओं में पानी देते रहें।

खाद

  • पहला साल: TNAU प्रति पेड़ 10 किलो गोबर की खाद के साथ 20 ग्राम N, 180 ग्राम P2O5 और 50 ग्राम K2O बताता है।
  • 15 साल से ऊपर के पेड़: प्रति पेड़ 50 किलो गोबर की खाद के साथ 300 ग्राम N, 250 ग्राम P2O5 और 750 ग्राम K2O, दो हिस्सों में, तने से 1 से 1.5 मीटर दूर उथली खाइयों में।
  • बीच के सालों के लिए अपने KVK से मात्रा उम्र के हिसाब से तय करवाएं। मिट्टी जांच से बर्बादी बचती है।
  • TNAU फूल और फल बैठने को बढ़ाने के लिए प्रति पेड़ 1.25 ग्राम paclobutrazol बताता है। इसे सिर्फ KVK की सलाह पर और लेबल के हिसाब से इस्तेमाल करें।
  • प्रेस रिपोर्टें कहती हैं कि पेड़ को गंभीर कीट या रोग कम लगते हैं। भारत का कोई कीट कार्यक्रम नहीं मिला।

कटाई और उपज

  • बेरी तब तोड़ी जाती है जब वह पूरी बड़ी हो चुकी हो पर अभी हरी (कच्ची) हो, फिर सुखाई जाती है। सूखी बेरी ताजे वजन का करीब चौथाई रह जाती है।
  • TNAU पूरे बड़े पेड़ के लिए साल में प्रति पेड़ 20 से 25 किलो सूखी बेरी बताता है। केरल की एक प्रेस रिपोर्ट में एक किसान ने सही देखभाल पर प्रति पेड़ 15 किलो से ज्यादा बेरी कही, जो ताजे वजन जैसा आंकड़ा है; 25% रिकवरी पर यह 4 किलो सूखी से कम बैठती है। दोनों आंकड़ों में करीब पांच गुना का फर्क है, इसलिए जब तक आपके अपने पेड़ कुछ और न दिखाएं, कम वाले आंकड़े पर चलें।
  • प्रति एकड़ कम वाले आंकड़े पर करीब 100 मादा पेड़ों से लगभग 375 किलो सूखी बेरी बैठती है; TNAU का आंकड़ा 2,000 से 2,500 किलो देगा। इनमें से किसी की भारत के खेत के अध्ययन से पुष्टि नहीं हुई, और छोटे पेड़ बहुत कम देते हैं।
  • उसी प्रेस रिपोर्ट के अनुसार सूखी पत्तियां भी बिकती हैं, और पत्तियों और बेरी से तेल निकाला जा सकता है।
💡 सुझाव: पहले किसी जाने हुए मादा पेड़ की एयर लेयरिंग से बने 5 से 10 पेड़ लगाएं, और ज्यादा पेड़ जोड़ने से पहले सूखी बेरी का खरीदार ढूंढ लें।

लागत और कमाई

  • सूखी ऑलस्पाइस का भारत का कोई पुष्ट भाव और कोई लागत अध्ययन नहीं मिला, इसलिए मुनाफे का आंकड़ा ईमानदारी से नहीं दिया जा सकता। कमाई का अंदाजा लगाने के लिए प्रति पेड़ अपेक्षित सूखी उपज को उस भाव से गुणा करें जो खरीदार लिखित में पक्का करे, फिर रोपाई, मजदूरी और सुखाई का खर्च घटाएं।
  • पहली फसल 3 से 6 साल में आती है और शुरू की उपज कम होती है, इसलिए ऑलस्पाइस को लंबे समय का अतिरिक्त पेड़ मानें, आमदनी की फसल नहीं। जब यह दूसरी फसलों के साथ उगता है, जैसे वायनाड में, तो इसमें अलग से खर्च बहुत कम जुड़ता है।

बाजार और उपयोग

  • सूखी बेरी साबुत या पिसी हुई अचार, सॉसेज और मांस उत्पादों में, और jerk seasoning में इस्तेमाल होती है। तेल और oleoresin फ्लेवरिंग, इत्र और कॉस्मेटिक में जाते हैं। जमैका दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक है।
  • खरीदारों और मौजूदा भाव के लिए कोच्चि के मसाला व्यापारियों या Spices Board से पूछें, और मंडी भाव और export buyers देखें, हालांकि ऑलस्पाइस शायद ही कभी सूचीबद्ध होता है।
  • भारत में स्थापित बाजार वाले दूसरे पेड़ मसालों के लिए जमीन लगाने से पहले काली मिर्च से तुलना कर लें।

स्रोत