काली मिर्च पश्चिमी घाट की नम पट्टी की फसल है: ज्यादातर केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में उगती है, और महाराष्ट्र, पूर्वोत्तर तथा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में थोड़े रकबे में। इसे 1,250 से 2,000 मिमी अच्छी तरह बंटी बारिश, जीवित सहारा पेड़, छांव का प्रबंधन, फुट रॉट से बचाव और कई साल का धैर्य चाहिए; पेड़ों की छांव और सिंचाई वाले प्लॉट के बिना सूखे मैदानों में यह नहीं चलती।
2023 में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा उत्पादक था (65,740 टन) और वियतनाम ने करीब चार गुना (257,427 टन) उगाया, इसलिए मात्रा से ज्यादा गुणवत्ता और ग्रेड मायने रखते हैं। बेल को स्थिर उपज बनाने में कई साल लगते हैं, और बरसात का एक मौसम फुट रॉट पूरे बाग को खत्म कर सकता है।
कहां उगती है और क्या चाहिए
- जलवायु: ICAR-IISR के अनुसार अनुकूल तापमान 23 से 32 डिग्री सेल्सियस (आदर्श करीब 28), सापेक्ष आर्द्रता 75 से 80%, सालाना बारिश 1,250 से 2,000 मिमी और ऊंचाई 1,500 मीटर तक।
- मिट्टी: pH 5.5 से 6.5 वाली कई तरह की मिट्टी; लाल लैटेराइट इसका प्राकृतिक घर है। जलभराव मुख्य दुश्मन है, इसलिए जल निकास जरूरी है।
- ढलान: ढलानों पर उत्तर और उत्तर-पूर्व की तरफ का निचला आधा हिस्सा बेलों को गर्मी की धूप से बचाने के लिए पसंद किया जाता है।
- किस्में: भारत में 75 से ज्यादा किस्में उगाई जाती हैं। केरल में Karimunda सबसे लोकप्रिय है; दूसरी हैं Kottanadan (सबसे ज्यादा oleoresin, 17.8%), Narayakodi, Aimpiriyan, Neelamundi, Kuthiravally, और कर्नाटक में Malligesara और Uddagare।
उन्नत किस्में
| किस्म | किसने जारी की | औसत सूखी उपज (किलो/हेक्टेयर) | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| Panniyur-1 | KAU, Panniyur (संकर) | 1,242 | ज्यादा उपज; घनी छांव वाली जगह के लिए नहीं |
| Panniyur-2 | KAU, Panniyur (चयन) | 2,570 | छांव सहने वाली |
| Panniyur-8 | KAU, Panniyur (संकर) | 1,365 | फुट रॉट और सूखे के प्रति सहनशील |
| Subhakara | ICAR-IISR (Karimunda से) | 2,352 | सभी काली मिर्च क्षेत्रों के लिए |
| Sreekara | ICAR-IISR (Karimunda से) | 2,677 | सभी काली मिर्च क्षेत्रों के लिए |
| Pournami | ICAR-IISR | 2,333 | रूट-नॉट निमेटोड के प्रति सहनशील |
| IISR Shakthi | ICAR-IISR | 2,253 | Phytophthora फुट रॉट के प्रति सहनशील |
| IISR Thevam | ICAR-IISR | 2,481 | फुट रॉट सहनशील; ऊंचाई वाले इलाके और मैदान |
| IISR Girimunda | ICAR-IISR (संकर) | 2,880 | ऊंचाई वाले इलाकों के लिए |
| IISR Malabar Excel | ICAR-IISR (संकर) | 1,440 | ऊंचाई वाले इलाके; oleoresin 14.6% |
- उपज संस्थानों के ट्रायल के औसत आंकड़े हैं, हर खेत की उपज नहीं। 1,242 से 2,880 किलो प्रति हेक्टेयर यानी प्रति एकड़ करीब 500 से 1,165 किलो।
- अपनी समस्या के हिसाब से चुनें: छांव वाला बाग (Panniyur-2), फुट रॉट वाला प्लॉट (IISR Shakthi, IISR Thevam, Panniyur-8), निमेटोड वाली मिट्टी (Pournami), या ऊंचाई वाला इलाका (IISR Girimunda, Malabar Excel)।
रोपण सामग्री और रोपाई
- सहारा पेड़: पहले सहारा देने वाले पेड़ (Erythrina, Garuga pinnata, silver oak, Ailanthus) लगाएं। 3 मीटर x 3 मीटर पर प्रति हेक्टेयर करीब 1,110 सहारा पेड़ (प्रति एकड़ करीब 450) आते हैं। करीब तीन साल बाद, जब पेड़ काफी ऊंचे हो जाएं, तब काली मिर्च को उन पर चढ़ाया जाता है।
- कलमें: स्वस्थ बेलों की रनर शाखाओं से 2 से 3 गांठ वाली कलमें, थैलियों में (मिट्टी, रेत और FYM 2:1:1) जड़ें जमाकर, जो मई से जून तक तैयार हो जाती हैं। बीज जमते हैं लेकिन पौधे एक जैसे नहीं आते, इसलिए बागान में इस्तेमाल नहीं होते।
- स्रोत: कलमें रोगमुक्त बागों से लें और नर्सरी धूप से उपचारित (solarised) या धूमित मिट्टी में बनी हो; फुट रॉट या निमेटोड वाला पौधा बाग की शुरुआत ही रोग के साथ करा देगा।
- गड्ढा: 50 सेमी x 50 सेमी x 50 सेमी, सहारा पेड़ के आधार से करीब 30 सेमी दूर उसकी उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में, ऊपरी मिट्टी, 5 किलो FYM और 150 ग्राम रॉक फॉस्फेट से भरा हुआ; 1 किलो नीम खली के साथ 50 ग्राम Trichoderma भी मिलाई जा सकती है। मानसून की शुरुआत में प्रति गड्ढा 2 से 3 जड़ वाली कलमें लगाएं।
- छांव: छोटी बेलों को गर्मी में छांव दें, और सहारा पेड़ की शाखाएं साल में दो बार (जून और सितंबर) छांटें; फूल और फल के समय घनी छांव से कीट बढ़ते हैं।
खाद और सिंचाई
- सामान्य खुराक: 3 साल और उससे ऊपर की बेलों के लिए प्रति बेल प्रति साल NPK 50:50:150 ग्राम (IISR)। पहले साल एक-तिहाई, दूसरे साल दो-तिहाई और तीसरे साल से पूरी खुराक दें। प्रति हेक्टेयर 1,110 बेलों पर यह साल में करीब 56 किलो N, 56 किलो P और 167 किलो K प्रति हेक्टेयर है (प्रति एकड़ करीब 22, 22 और 67 किलो)। दो बार में दें, मई से जून और अगस्त से सितंबर में, बेल के चारों ओर 30 सेमी दूर।
- जैविक: मई में प्रति बेल 10 किलो गोबर खाद या कम्पोस्ट, और हो सके तो 1 किलो नीम खली। ज्यादा अम्लीय मिट्टी में एक साल छोड़कर अप्रैल से मई में प्रति बेल 500 ग्राम चूना या dolomite। IISR की गाइड मिट्टी की जांच के आधार पर खुराक की सलाह देती है।
- सिंचाई: IISR के अनुसार गर्मी (15 मार्च से 15 मई) में हर पखवाड़े सिंचाई से बिना सिंचाई वाली बेलों से 90 से 100% ज्यादा उपज मिलती है। IISR की सिफारिश है: 5 से 10 साल की बेलों के लिए प्रति बेल 30 लीटर, 11 से 15 साल के लिए 40 लीटर और 15 साल से ऊपर के लिए 50 लीटर। देखें drip irrigation।
- सूक्ष्म तत्व: जहां जस्ते की कमी हो वहां साल में दो बार 0.25% जिंक सल्फेट का पत्तों पर छिड़काव, और जहां मैग्नीशियम की कमी हो वहां प्रति बेल 200 ग्राम मैग्नीशियम सल्फेट।
कीट और रोग
- फुट रॉट (Phytophthora capsici) सबसे विनाशकारी रोग है, जो दक्षिण-पश्चिम मानसून में आता है। एक बेल महीने भर में गिर सकती है। IISR की सलाह: मरी बेलों को जड़ समेत निकालें, जल निकास अच्छा रखें, रनर को जमीन से उठाकर बांधें या काट दें, मानसून की शुरुआत में सहारा पेड़ छांटें, और पहली बारिश के बाद copper oxychloride 0.2% (प्रति बेल 5 से 10 लीटर) से बेलों की जड़ें भिगोएं और Bordeaux mixture 1% का छिड़काव करें, अगस्त से सितंबर में दोहराएं। प्रति बेल 50 ग्राम Trichoderma और potassium phosphonate 0.3% सूची में दिए गए विकल्प हैं।
- Slow decline: निमेटोड और Phytophthora मिलकर फीडर जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं; पीलापन अक्टूबर से दिखता है। निमेटोड-मुक्त कलमें लें, बहुत प्रभावित बेलें निकाल दें, और निमेटोड वाली जमीन में Pournami पर विचार करें।
- Pollu beetle सबसे विनाशकारी कीट है, खासकर 300 मीटर से नीचे, जिसकी संख्या सितंबर से अक्टूबर में सबसे ज्यादा होती है; छांव को नियंत्रित रखने से यह घटता है। Top shoot borer जुलाई से अक्टूबर में छोटी बेलों पर हमला करता है। Anthracnose मानसून के आखिर में फटे, काले पड़ते दानों के रूप में दिखता है। Stunt (विषाणु रोग) और phyllody में प्रभावित बेलें निकालनी पड़ती हैं।
- IISR की गाइड में रसायनों के विकल्प खुराक के साथ दिए गए हैं; सिर्फ वही उत्पाद इस्तेमाल करें जो अभी अनुमत हों, लेबल के हिसाब से चलें, और छिड़काव से पहले अपने KVK या Spices Board से पूछ लें, क्योंकि निर्यात के खरीदार अवशेषों की जांच करते हैं।
कटाई और उपज
- काली मिर्च को फूल आने से पकने तक 7 से 8 महीने लगते हैं; कटाई मैदानों में दिसंबर से जनवरी और ऊंचे इलाकों में जनवरी से अप्रैल में होती है।
- कटाई तब शुरू करें जब बाली के एक या दो दाने पीले से लाल होने लगें। बालियां हाथ से साफ थैलों में तोड़ें; जमीन पर गिरी बालियां अलग रखें।
- कटाई के समय दानों में 65 से 70% नमी होती है, जिसे करीब 10% तक सुखाना होता है। एक मिनट उबलते पानी में डुबाने से रंग एक सा आता है, जीवाणु घटते हैं और सुखाई 5 से 6 दिन की जगह 3 से 4 दिन में हो जाती है।
- उत्पाद के हिसाब से पकाव: काली मिर्च के लिए जब 1 से 2 दाने पीले से लाल होने लगें; सफेद मिर्च के लिए पूरी तरह पकी हुई; हरी मिर्च के लिए पकने से 10 से 15 दिन पहले।
- उपज: किस्मों की तालिका देखें (1,242 से 2,880 किलो सूखी प्रति हेक्टेयर, ट्रायल के औसत)। बुश पेपर रोपाई के करीब 3 साल बाद प्रति बुश 1 किलो तक ताजी मिर्च दे सकती है।
लागत और कमाई
- काली मिर्च की खेती की लागत का कोई जांचा हुआ भारतीय आंकड़ा नहीं मिला, और कोच्चि का मौजूदा भाव नहीं मिल सका, इसलिए मुनाफे का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया। बजट बनाने से पहले Spices Board का भाव पन्ना और अपने स्थानीय व्यापारी का भाव देखें।
- तरीका: सूखी मिर्च के भाव में हर ₹100 प्रति किलो पर, ट्रायल की औसत उपज 503 से 1,165 किलो प्रति एकड़ मानें तो, कुल आय करीब ₹50,000 से ₹1.17 लाख प्रति एकड़ बढ़ती है। अपनी अनुमानित उपज को व्यापारी के मौजूदा भाव से गुणा करें और सहारा पेड़, मजदूरी, छिड़काव और सुखाई की लागत घटाएं।
- IISR का सिंचाई नतीजा (90 से 100% उपज बढ़त) बताता है कि खर्च सबसे ज्यादा कहां फायदा देता है: गर्मी की सिंचाई और रोग की रोकथाम।
बाजार और मूल्यवर्धन
- Malabar pepper को Geographical Indication मिला है (2007 से 2008 में घोषित), जो केरल का मालाबार क्षेत्र और पश्चिमी तमिलनाडु तथा दक्षिणी कर्नाटक के हिस्से कवर करता है।
- वियतनाम से मुकाबला, जो दुनिया का अगुआ है और वैश्विक उत्पादन का करीब 30% उगाता है, भाव की एक सीमा बांधे रखता है; साफ, अच्छी तरह सूखे, मोटे दाने और पता लगने लायक स्रोत ही बेहतर भाव दिलाते हैं।
- मूल्यवर्धित रूप: सफेद मिर्च, डिहाइड्रेटेड या कैन में बंद हरी मिर्च, पाउडर, oleoresin और आवश्यक तेल। IISR ने हर एक के लिए अलग पकाव चरण दिए हैं; पहले खरीदारों से मांग पूछ लें। समूह में बिक्री के लिए export buyers और FPO देखें, और Spices Board की मदद के लिए subsidy finder; मौजूदा सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हुई।
स्रोत
- ICAR-IISR (Spices Board), Black Pepper: Good Agricultural Practices, 2019
- ICAR-IISR Kozhikode, black pepper crop page
- TNAU Agritech Portal, pepper (older package, used only to cross-check the harvest season)
- Black pepper (Wikipedia, FAO production figures, secondary source)
- Malabar pepper (Wikipedia, GI status, secondary source)
