लौंग भारत में व्यावसायिक रूप से सिर्फ दक्षिणी पश्चिमी घाट की नम जगहों (तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक) और अंडमान-निकोबार द्वीपों में उगती है, जहां छायादार, अच्छे जल-निकास वाली, ह्यूमस से भरपूर जमीन और भारी बारिश हो। यह पेड़ वाली फसल है जो फल देने में छह से सात साल लेती है, इसलिए उन किसानों के लिए ठीक है जिनके पास उस पट्टी में जमीन है, जो इंतजार कर सकते हैं और जिनके पास सुपारी, नारियल या फलदार पेड़ पहले से हैं जो आंशिक छाया देते हैं।
भारत में लौंग की कमी है: ICAR-IISR के अनुसार लौंग देश के मसाला आयात बिल में मूल्य के हिसाब से सबसे बड़ी अकेली मद है (लगभग 16%), इसलिए मांग समस्या नहीं है। जोखिम लंबा इंतजार, सीमित जलवायु क्षेत्र और पेड़ की उपज में सालों के बीच बड़े उतार-चढ़ाव हैं।
भारत में कहां उगती है
- तमिलनाडु: कन्याकुमारी जिला (Keeriparai और Maramalai इलाकों में स्थानीय लौंग प्रकारों का सर्वे हुआ है) और नीलगिरि।
- केरल और कर्नाटक: दक्षिणी और मध्य केरल, और कर्नाटक के पश्चिमी घाट के पहाड़ी इलाके। Kerala Agricultural University के 2017-18 के सर्वे में दक्षिणी केरल और कन्याकुमारी शामिल थे, जिसे वह भारत का मुख्य लौंग उगाने वाला क्षेत्र कहता है।
- जलवायु (TNAU): आर्द्र उष्णकटिबंधीय, सालाना बारिश 150 से 250 सेमी, औसत तापमान 20 से 30 डिग्री सेल्सियस, ऊंचाई लगभग 1,000 मीटर तक।
- मिट्टी (TNAU): गहरी, उपजाऊ, ज्यादा ह्यूमस वाली दोमट और लेटेराइट मिट्टी। जलभराव वाली या सूखी, कम गहरी मिट्टी ठीक नहीं।
- छाया: छोटे पौधों को छाया चाहिए। शुरू में केला या अस्थायी पंडाल लगाते हैं, और उत्तर व उत्तर-पूर्वी ढलान पसंद की जाती हैं। पुराने बागों में लौंग आमतौर पर मिश्रित बाग या अंतरफसल का पेड़ होती है।
- इस पट्टी के बाहर, यानी मैदानों, सूखे इलाकों और हिमालयी राज्यों में, लौंग व्यावहारिक फसल नहीं है।
रोपण सामग्री
- लौंग पूरी तरह पके फलों के बीज से तैयार होती है, जिन्हें तुरंत बोया जाता है क्योंकि बीज जल्दी अंकुरण क्षमता खो देता है; अंकुरण में लगभग 5 से 6 हफ्ते लगते हैं (TNAU)। पौध Spices Board, ICAR, राज्य कृषि विश्वविद्यालय या राज्य बागवानी विभाग की नर्सरी से लें।
- भारत में सामान्य रोपण के लिए कोई नामित सुधरी लौंग किस्म नहीं मिली। KAU के सर्वे ने 25 साल से पुराने 30 अच्छी उपज वाले स्थानीय पेड़ चुने और उनमें बड़ा अंतर पाया, इसलिए जानी-मानी ज्यादा उपज वाली मातृ पेड़ों की पौध लें।
दूरी और रोपाई
- दूरी: दोनों तरफ 6 मीटर (TNAU), यानी लगभग 278 पेड़ प्रति हेक्टेयर (लगभग 112 प्रति एकड़)।
- गड्ढे: लगभग 75 x 75 x 75 सेमी।
- मौसम: बारिश की शुरुआत में (जून से जुलाई) रोपाई करें; नीचे के गीले इलाकों में मानसून के अंत की ओर (सितंबर से अक्टूबर)।
पोषण और सिंचाई
| पेड़ की उम्र | FYM | N | P2O5 | K2O |
|---|---|---|---|---|
| 1 साल | 15 kg | 20 g | 20 g | 60 g |
| 7 साल और ऊपर (फल देने वाले) | 50 kg | 300 g | 300 g | 960 g |
- मात्रा प्रति पेड़ प्रति वर्ष है (TNAU)। 112 पेड़ प्रति एकड़ वाले 7 साल के बाग के लिए यह प्रति एकड़ प्रति वर्ष लगभग 34 kg N, 34 kg P2O5 और 108 kg K2O है। TNAU खाद देने के एक महीने बाद 50 g Azospirillum और 50 g Phosphobacterium देने की भी सलाह देता है।
- सिंचाई: सूखे महीनों, यानी जनवरी से मई में, ड्रिप या थाले से प्रति पेड़ लगभग 8 लीटर। ड्रिप सिंचाई देखें।
- कीट और रोग (TNAU): तना छेदक, काला शल्क कीट और पत्ती खाने वाली इल्लियां; पत्ती सड़न, पत्ती धब्बा और क्विक विल्ट। जल-निकास अच्छा रखें, प्रभावित पौधे नष्ट करें, और किसी भी छिड़काव के लिए लेबल और अपने KVK या Spices Board की सलाह मानें। कीट देखें।
कटाई और उपज
- पहली फलन: छठे साल से (TNAU); दूसरे विस्तार स्रोत लगभग सात साल बताते हैं। फिर पेड़ दशकों तक फल देते हैं।
- कटाई: कलियां पूरी तरह विकसित होने पर लेकिन खिलने से पहले तोड़ें, और उन्हें 5 से 7 दिन धूप में सुखाएं (TNAU)।
- उपज: TNAU प्रति पेड़ 2 से 3 kg सूखी कलियां बताता है, यानी 112 पेड़ प्रति एकड़ पर लगभग 225 से 335 kg प्रति एकड़ (550 से 830 kg प्रति हेक्टेयर)।
- KAU के सर्वे ने 25 साल से पुराने 30 चुने हुए स्थानीय पेड़ों की 5 साल की सूखी कली उपज दर्ज की: औसत 1.5 से 6.6 kg प्रति पेड़ रहे, और अलग-अलग पेड़ों में सालों के बीच बड़ा उतार-चढ़ाव दिखा (एक पेड़ लगातार सालों में 8.98 kg से 3.1 kg पर आ गया)। ये पेड़ ज्यादा उपज के लिए चुने गए थे, इसलिए TNAU की कम संख्या पर योजना बनाएं।
लागत और आय
- लौंग की कोई सत्यापित भारतीय खेती-लागत नहीं मिली। मौजूदा अनुमान Spices Board के क्षेत्रीय कार्यालय, KVK या राज्य बागवानी विभाग से पूछें।
- गणित: प्रति पेड़ 2 से 3 kg और 112 पेड़ प्रति एकड़ पर, सूखी कली के हर ₹100 प्रति kg दाम की कीमत पूरी तरह फल देने वाले बाग में प्रति एकड़ प्रति वर्ष लगभग ₹22,500 से ₹33,500 है। अनुमान लगाने से पहले आज की दर देखें; मंडी भाव देखें।
- सुखाने और छांटने की मजदूरी, ऊंचे पेड़ों से तोड़ने के लिए सीढ़ी और पहली फसल से पहले छह से सात साल की देखभाल मुख्य खर्च हैं।
बाजार और जोखिम
- घरेलू उत्पादन मांग के मुकाबले छोटा है; ICAR-IISR बताता है कि लौंग का आयात घरेलू उपज के मुकाबले बड़ा है और निर्यात से ज्यादा आयात होता है। स्थानीय खरीदार मसाला व्यापारी, पिसाई वाले और लौंग-तेल निकालने वाले हैं।
- आयात मुख्य रूप से मेडागास्कर, कोमोरोस, श्रीलंका, तंजानिया और इंडोनेशिया से आता है, इसलिए दाम वैश्विक आपूर्ति के साथ चलते हैं। किसी एक साल के दाम पर बजट न बनाएं।
- जो विक्रेता तय बाय-बैक या प्रति पेड़ आय का वादा करें, उनसे पौधे न खरीदें। प्रमाणित पौध सरकारी या विश्वविद्यालय नर्सरी से लें।
- एकसमान रंग और कम नमी वाली सूखी कलियां किसी व्यापारी या FPO के जरिए बेचें। MIDH की रोपण सहायता के लिए सब्सिडी खोजक देखें; लौंग की कोई अलग दर सत्यापित नहीं हुई।
