बड़ी इलायची (Amomum subulatum, बड़ी इलायची) छांव में उगने वाली पहाड़ी फसल है जो असल में सिर्फ पूर्वी हिमालय में चलती है: सिक्किम, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग और कलिम्पोंग की पहाड़ियां, और अरुणाचल प्रदेश व नागालैंड के कुछ हिस्से, करीब 600 से 2,400 मीटर की ऊंचाई पर पेड़ों की छांव में। यह लंबे समय की बहुवर्षीय फसल है जिसमें बड़ा जोखिम भाव का नहीं बल्कि वायरस रोग और पुराने बागानों का है: 8 अगस्त 2026 को गंगटोक में बड़े दाने का थोक भाव ₹1,450 प्रति किलो था।

यह मैदानों के लिए नहीं है, और यह छोटी (हरी) इलायची से अलग फसल है, जो केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में उगती है। औसत उपज कम है, इसलिए कमाई स्वस्थ रोपण सामग्री और रोग पर सावधानी भरे नियंत्रण पर टिकी है।

भारत में यह कहां उगती है

  • राज्य: सिक्किम सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसका हिस्सा देश के उत्पादन का करीब 80% बताया गया है। पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग और दार्जिलिंग दूसरे नंबर पर हैं। फसल अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मिजोरम, मेघालय, मणिपुर और उत्तराखंड में छोटे रकबे में फैली है।
  • सिक्किम के आंकड़े: Down To Earth की एक रिपोर्ट के अनुसार सिक्किम का उत्पादन 2004 में 22,714 हेक्टेयर पर 5,152 टन था, जो 2017-18 में 17,735 हेक्टेयर पर घटकर करीब 4,385 टन रह गया। यह सिर्फ करीब 250 किलो प्रति हेक्टेयर है। 2015-16 में दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में 3,305 हेक्टेयर था और औसत उत्पादकता 300.5 किलो प्रति हेक्टेयर थी।
  • मौसम: 600 से 2,400 मीटर के बीच ठंडी, नम पहाड़ियां, जहां हिमालयी आलडर (Alnus nepalensis) पसंदीदा छांव का पेड़ है। सिक्किम के ट्रायल स्थलों पर सालाना करीब 3,045 मिमी बारिश, 57 से 91% नमी और 11 से 18°C औसत तापमान दर्ज हुआ।
  • उत्पादन क्यों गिरा: जलवायु परिवर्तन (गर्म, सूखी सर्दियां), वायरस रोग, पुराने बागान, खराब प्रबंधन और कम सिंचाई; सिक्किम में घर की आय में इस फसल का हिस्सा 1997 से पहले आधा था, जो 2016 में घटकर 29% रह गया।

किस्में

किस्मस्रोतठीक ऊंचाई
Seremnaस्थानीय किस्म975 मीटर से नीचे
Dzongu Golseyस्थानीय किस्मनिचली ऊंचाई, करीब 1,300 मीटर तक
Sawney, Varlangeyस्थानीय किस्मेंमध्यम (975 से 1,515 मीटर) और ऊंची (1,515 मीटर से ऊपर); Varlangey दार्जिलिंग और कलिम्पोंग में करीब 90% रकबे में है और सर्वे में 60 किसानों ने उपज और मुनाफे में इसे सबसे अच्छा माना
Ramseyस्थानीय किस्म1,515 मीटर से ऊपर
ICRI Sikkim 1, ICRI Sikkim 2Indian Cardamom Research Institute, गंगटोक (2004 में जारी)ICRI Sikkim 1 के लिए 1,515 मीटर से ऊपर; ICRI Sikkim 2 के लिए 975 से 1,515 मीटर

किस्म को अपनी ऊंचाई के हिसाब से चुनें; सिक्किम की किस्म वाली स्टडी में उत्पादकता ऊंचाई पर निर्भर मिली। गंगटोक का Spices Board शोध केंद्र 254 accessions रखता है और सलाह, bio-agents और रोपण सामग्री देता है।

रोपाई और दूरी

  • पहली मानसूनी बौछारों के बाद पहाड़ी के कंटूर पर 30 x 30 x 30 सेमी के गड्ढे। 1.5 x 1.5 मीटर की दूरी (प्रति एकड़ करीब 1,800 पौधे, प्रति हेक्टेयर 4,400) आम है; Sawney, Varlangey और Ramsey जैसी जोरदार किस्मों के लिए 1.8 x 1.8 मीटर (प्रति एकड़ करीब 1,250, प्रति हेक्टेयर 3,100) की सलाह दी जाती है।
  • सिर्फ रोगमुक्त झुंडों से ही सकर या पौधे लें। वायरस वाले सकर लगाना बागान खोने का सबसे तेज रास्ता है।
  • छांटे हुए प्राकृतिक जंगल या आलडर की छांव में लगाएं; मिट्टी और पानी रोकने के लिए ढलान को ढका रखें।

खाद और रोग

  • खाद और उर्वरक: एक बताई गई सिफारिश है प्रति पौधा 5 किलो गोबर की खाद या कम्पोस्ट और 75:75:150 किलो प्रति हेक्टेयर N:P2O5:K2O (प्रति एकड़ करीब 30:30:60 किलो), दक्षिण-पश्चिम मानसून से पहले और बाद में बांटकर। मिट्टी की जांच कराएं और ICRI गंगटोक या अपने KVK से पक्का करें।
  • चिरके (mosaic streak): नई पत्तियों पर हल्की हरी से पीली धारियां। फुरके (bushy dwarf): बौने अंकुर और फूल या फल नहीं। दोनों वायरस रोग हैं। प्रभावित पौधे दिखते ही उखाड़कर जला दें; फैलने से पहले उन्हें हटाएं।
  • फफूंद पत्ती धब्बा और झुलसा: मानसून से पहले और फूल आने के बाद एक-एक बार झुंडों के आसपास 1% बोर्डो मिश्रण या 0.2% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव या ड्रेंचिंग करें।
💡 सुझाव: स्वस्थ सकरों से ब्लॉक में दोबारा रोपाई करें और हो सके तो जगह बदलें; सिक्किम की Down To Earth रिपोर्ट के अनुसार Seremna से कुंवारी मिट्टी पर फसल चक्र के साथ करीब 700 किलो प्रति साल मिला, जबकि एक उत्पादक की उपज 1990 के दशक के आखिर के 2,000 किलो प्रति साल से घटकर 300 किलो रह गई क्योंकि बागान पुराने हुए और रोग फैला।

कटाई और सुखाई

  • ताजी फलियों में करीब 80 से 85% नमी होती है और उन्हें तुरंत सुखाना पड़ता है, परंपरागत रूप से लकड़ी से जलने वाली भट्टी (bhatti) में। धुएं की खुशबू ही इस फसल की बाजार पहचान है।
  • पहली कटाई का समय और उम्र के हिसाब से प्रति पौधा उपज इस पेज के लिए प्रमाणित नहीं हो सकी; अपनी किस्म और ऊंचाई के आंकड़े ICRI गंगटोक या अपने KVK से पूछें।
  • उपज: सिक्किम और दार्जिलिंग में सूखी फलियों की औसत उपज करीब 250 से 300 किलो प्रति हेक्टेयर (प्रति एकड़ करीब 100 से 120 किलो) बताई गई है, और ICRI गंगटोक बता सकता है कि आपकी किस्म के स्वस्थ बागान कितना देते हैं।

लागत और कमाई

  • भाव (Spices Board की साप्ताहिक रिपोर्ट, 8 अगस्त 2026): गंगटोक में बड़ा दाना ₹1,450 प्रति किलो और छोटा दाना ₹1,300; सिलीगुड़ी में पूंछ के साथ बड़ा दाना ₹1,775 और बिना पूंछ ₹1,825; दिल्ली में कंचीकट ₹1,640 से ₹1,650। एक साल पहले (20 सितंबर 2025) गंगटोक में बड़ा दाना ₹1,400 था। ये संकेतक थोक भाव हैं, खेत पर मिलने वाले भाव नहीं।
  • हिसाब (उदाहरण): 300 किलो प्रति हेक्टेयर x ₹1,450 = प्रति हेक्टेयर ₹4.35 लाख कुल आय (प्रति एकड़ करीब 120 किलो = ₹1.75 लाख)। लागत मजदूरी, भट्टी के ईंधन और दोबारा रोपाई पर निर्भर करती है; कोई प्रमाणित लागत तालिका नहीं मिली, इसलिए बजट अपने स्थानीय KVK के साथ बनाएं।
  • भाव ग्रेड और मंडी के हिसाब से अलग होते हैं (बड़ा दाना, छोटा दाना, पूंछ के साथ या बिना); दर तय करने से पहले Spices Board की साप्ताहिक रिपोर्ट देख लें।

बाजार और जोखिम

  • गंगटोक और सिलीगुड़ी के व्यापारियों के जरिए दिल्ली और उत्तर भारत की मंडियों में बिकती है। Down To Earth के अनुसार नेपाल सिक्किम को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बन गया है, जिसके पास वैश्विक बाजार का करीब 68% है।
  • जोखिम: संक्रमित सकरों से वायरस का फैलना, गर्म और सूखी सर्दियां, और भट्टी का ईंधन। भाव साल दर साल बदलते हैं।
  • समूह में बिक्री के लिए FPO, कर्ज के लिए KCC और export buyers देखें। रोपाई और दोबारा रोपाई की मौजूदा मदद के लिए Spices Board से पूछें; यहां कोई दर प्रमाणित नहीं हुई। छोटी इलायची अलग फसल है; छोटी इलायची देखें।

स्रोत