छोटी (हरी) इलायची की व्यावसायिक खेती केवल पश्चिमी घाट की छायादार, नम पहाड़ियों में होती है, मुख्यतः केरल के इडुक्की और वायनाड, कर्नाटक के कोडागु, हासन और चिकमगलूर, और तमिलनाडु की थेनी व नीलगिरि पहाड़ियों में। इसे 600 से 1,500 मीटर ऊंचाई, अम्लीय वन दोमट मिट्टी, 40 से 60% छाया और सूखे महीनों में सिंचाई की सुविधा वाला बाग चाहिए, इसलिए यह मैदानी इलाकों की फसल नहीं है।

बाग दूसरे से तीसरे साल में फल देने लगता है और लगभग 8 से 12 साल तक उत्पादक रहता है। उपज में बहुत अंतर है: सामान्य वर्षा आधारित पैकेज में करीब 200 से 250 किलो सूखी फली प्रति हेक्टेयर से लेकर सुधरी किस्मों के शोध परीक्षणों में 1,400 किलो प्रति हेक्टेयर से अधिक तक। Spices Board की ई-नीलामी में भाव का उतार चढ़ाव तय करता है कि सीजन फायदे का रहा या नहीं।

कहां उगती है और जलवायु की सीमाएं

  • ऊंचाई: TNAU के अनुसार 600 से 1,500 मीटर। तेज हवा वाले खुले इलाके अनुपयुक्त हैं।
  • मिट्टी: अम्लीय वन दोमट, pH 5.0 से 6.5, जल निकास अच्छा। जलभराव वाले हिस्सों में प्रकंद सड़न (rhizome rot) लगती है।
  • छाया: वर्षा आधारित बाग में 40 से 50% और सिंचित बाग में 55 से 60% (TNAU)। यह जंगल के निचले स्तर का पौधा है और खुली धूप में झुलस जाता है।
  • राज्य: केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु। Indian Cardamom Research Institute (ICRI), मायलाडुम्परा के पास हर राज्य के लिए अलग चयनित किस्में हैं।

किस्में

किस्मस्रोतप्रकार और विशेषताक्षेत्र
ICRI-1, 2, 5, 6, 7ICRI (Spices Board), मायलाडुम्पराकेरल के लिए जारी अधिक उपज वाली चयनित किस्मेंकेरल
ICRI-3, ICRI-8ICRI (Spices Board)कर्नाटक के लिए जारीकर्नाटक
ICRI-4ICRI (Spices Board)तमिलनाडु के लिए जारीतमिलनाडु
Mudigere 1, Mudigere 2, PV-1, PV-3, IISR Suvarna, TKD-4राज्य और ICAR अनुसंधान केंद्र, TNAU की सूची के अनुसारमालाबार प्रकार, सबसे प्रचलित समूहICRI या KVK से पूछें
MCC-12, MCC-16, PV-2, PV-5TNAU की सूची के अनुसारवझुक्का प्रकारICRI या KVK से पूछें
एक्सेशन 594ICRI, 2021-22 में पंजीकृतमध्यम प्रबंधन में 3,000 किलो/हेक्टेयर उपज क्षमता (क्षमता है, खेत का औसत नहीं)केरल की पहाड़ियां

एक प्रजनन शोध पत्रिका में बताए गए परीक्षण में संकर MHC-26 से 1,896 किलो/हेक्टेयर और चयनित MCC-73 से 1,886 किलो/हेक्टेयर उपज मिली, यानी सुधरी सामग्री पुराने बागों से कहीं आगे जा सकती है। पौधे केवल ICRI, Spices Board या KVK से मान्य नर्सरी से लें; बिना पहचान के सकर से कट्टे (katte) वायरस फैलने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

पौध सामग्री, दूरी और रोपाई

  • प्रवर्धन: बीज, सकर या टिशू कल्चर पौध। TNAU नर्सरी क्यारी के लिए करीब 600 ग्राम ताजा बीज प्रति हेक्टेयर लेता है; पौध 3 से 4 पत्ती की अवस्था में छाया में 20 x 20 सेमी पर द्वितीयक नर्सरी में लगाई जाती है।
  • मुख्य खेत के लिए उम्र: 18 से 22 महीने की पौध।
  • दूरी: बड़े प्रकार के लिए 2.5 x 2.0 मीटर और छोटे प्रकार के लिए 2.0 x 1.5 मीटर, यानी करीब 2,000 से 3,333 पौधे प्रति हेक्टेयर, या लगभग 810 से 1,350 प्रति एकड़।
  • गड्ढे: 60 x 60 x 60 सेमी, कम्पोस्ट और ऊपरी मिट्टी से भरे हुए। रोपाई का सबसे अच्छा समय जून से दिसंबर, जब मिट्टी नम हो।

पोषण और सिंचाई

  • आधार खुराक: कम्पोस्ट 25 टन/हेक्टेयर (लगभग 10 टन प्रति एकड़)।
  • उर्वरक (TNAU): 75 किलो N, 75 किलो P और 150 किलो K प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष (लगभग 30:30:60 किलो प्रति एकड़), दो बराबर किस्तों में।
  • पानी: ज्यादातर बाग वर्षा पर निर्भर हैं, पर TNAU सूखे मौसम में स्प्रिंकलर की सलाह देता है ताकि उपज बढ़े। उपकरण और सब्सिडी के लिए स्प्रिंकलर सिंचाई और ड्रिप सिंचाई देखें।

कीट और रोग

समस्याक्या नुकसान करता हैप्रबंधन
थ्रिप्सफली पर निशान, विकृत फली, घटिया गुणवत्ताTNAU में diafenthiuron 8 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी दिया है; लेबल और स्थानीय KVK की सलाह मानें
प्ररोह और फली छेदकछेदे हुए प्ररोह और फलियांफेरोमोन ट्रैप, 12 प्रति हेक्टेयर, पतंगे पकड़ने के लिए (TNAU)
फली सड़न (azhukal)मानसून में फलियां और पत्तियां सड़ती हैं1% बोर्डो मिश्रण, या 0.25% कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, या 0.2% mancozeb, मानसून से पहले और दौरान तीन छिड़काव (TNAU)। Spices Board के परीक्षणों में dimethomorph, fosetyl-Al और कॉपर ऑक्सीक्लोराइड से फली और प्रकंद सड़न में सबसे ज्यादा कमी मिली
प्रकंद सड़न और डैम्पिंग ऑफगीली मिट्टी में पौध और झुंड का गिरनाअच्छे जल निकास वाली क्यारी, बोर्डो मिश्रण या mancozeb से ड्रेंचिंग (TNAU)
कट्टे (मोज़ेक) वायरसपत्तियों पर हल्की धारियां, बौने झुंड, कोई इलाज नहींकेवल रोगमुक्त पौध लगाएं, रोगी झुंड उखाड़ें, फैलाने वाले केले के माहू को नियंत्रित करें

Spices Board के अनुसार उसके समेकित पैकेज से कीटनाशक छिड़काव 12 से 14 से घटकर साल में 5 से 7 रह गए। छिड़काव का कार्यक्रम और अनुमत रसायन बदलते रहते हैं, इसलिए छिड़काव से पहले Spices Board या अपने KVK से पूछ लें।

कटाई, सुखाई और उपज

  • पहली फसल: रोपाई के करीब दो साल बाद फल आना शुरू; पूरी उपज तीसरे या चौथे साल से।
  • तुड़ाई: फलियां असमान रूप से पकती हैं, इसलिए हर 15 से 25 दिन में तुड़ाई, चरम अक्टूबर से नवंबर (TNAU)।
  • सुखाई: बिजली के ड्रायर में 45 से 50 डिग्री सेल्सियस पर 14 से 18 घंटे, या भट्टी में 50 से 60 डिग्री सेल्सियस पर रात भर। सुखाने से पहले 2% धोने के सोडे में 10 मिनट डुबोने से हरा रंग टिकता है (TNAU)।
  • उपज की सीमा: TNAU पैकेज में 200 से 250 किलो सूखी इलायची प्रति हेक्टेयर (80 से 100 किलो प्रति एकड़); शोध परीक्षणों में सर्वोत्तम किस्मों से 1,400 से 1,900 किलो प्रति हेक्टेयर (570 से 770 किलो प्रति एकड़)। अच्छी तरह चलाया गया व्यावसायिक बाग इन दोनों के बीच रहता है।

लागत और आमदनी

Puttady (इडुक्की) की ई-नीलामी में Spices Board की बाजार रिपोर्ट के अनुसार औसत भाव मार्च 2026 में करीब ₹2,250 से ₹2,320 प्रति किलो, मई 2026 में ₹2,420 से ₹2,480 और अगस्त 2026 में ₹2,980 से ₹3,250 रहा। पिछले सीजन की इसी अवधि में यह लगभग ₹3,100 से ₹3,170 था। एक सीजन में भाव 30% या उससे ज्यादा घट बढ़ जाता है।

स्थिति (प्रति एकड़, प्रति वर्ष)सूखी उपज₹2,500 प्रति किलो पर कुल आय₹3,200 प्रति किलो पर कुल आय
सामान्य वर्षा आधारित पैकेज90 किलो₹2.25 लाख₹2.9 लाख
अच्छा सिंचित बाग300 किलो₹7.5 लाख₹9.6 लाख
शोध स्तर (सामान्य नहीं)600 किलो₹15 लाख₹19.2 लाख

ये कुल आय के आंकड़े हैं: उपज गुणा भाव। हर 15 से 25 दिन की तुड़ाई की मजदूरी, सिंचाई, पौध संरक्षण, सुखाई का ईंधन और पहली फसल से पहले के 2 से 3 साल बड़े खर्च हैं, और घटाने के लिए प्रति एकड़ लागत का कोई सत्यापित भारतीय आंकड़ा नहीं मिला। मुनाफे का अनुमान लगाने से पहले Spices Board के क्षेत्रीय कार्यालय या KVK से स्थानीय लागत पूछें। फसल ऋण और बीमा के लिए देखें किसान क्रेडिट कार्ड और PMFBY।

बाजार और बिक्री

  • छोटी इलायची मुख्यतः केरल के इडुक्की (केरल) के Puttady और अन्य मान्य केंद्रों पर Spices Board के लाइसेंसशुदा ई-नीलामी से बिकती है; किसान लाइसेंसशुदा नीलामीकर्ता या व्यापारी के जरिए बेचते हैं, इसलिए Spices Board में पंजीकरण कराएं।
  • ग्रेड मायने रखता है: मोटी, हरी, एक समान सूखी फलियों का भाव सबसे ऊंचा मिलता है, इसलिए सावधानी से सुखाना सीधे पैसे में बदलता है।
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO) के जरिए मिलकर बेचने से छोटे बागों की सुखाई और विपणन लागत घटती है। सिक्किम और दार्जिलिंग की बड़ी (काली) इलायची के लिए बड़ी इलायची देखें।
💡 सुझाव: जलवायु तनाव और वायरस से ग्रस्त पुराने बाग ही उपज घटने के मुख्य कारण हैं; प्रमाणित सामग्री से एक एक खंड दोबारा लगाना और छाया प्रबंधन के साथ सिंचाई जोड़ना आमतौर पर क्षेत्र बढ़ाने से ज्यादा फायदा देता है।

स्रोत