"छोटा" पवन टरबाइन क्या होता है?
खेतों के लिए "छोटा पवन" आमतौर पर 1 किलोवाट से कम के माइक्रो टरबाइन से लेकर लगभग 10 किलोवाट तक की इकाई है। ये क्षैतिज-अक्ष (तीन ब्लेड वाले) या ऊर्ध्वाधर-अक्ष प्रकार के होते हैं, और एक टावर पर लगते हैं। हवा की गति के बाद सबसे बड़ा कारक टावर की ऊंचाई है - रोटर को पेड़ों और इमारतों से ऊपर ले जाने से उत्पादन कई गुना बढ़ सकता है।
यह कहां काम करता है
आपको खुली, खुली हवा वाली जगह चाहिए जहां लगातार हवा चले और रुकावटें कम हों। भारत के पवन क्षेत्रों के तटीय, पठारी और खुले मैदानी खेत अच्छे उम्मीदवार हैं; घिरे हुए खेत नहीं। चूंकि उत्पादन हवा की गति के साथ तेज़ी से बढ़ता है, "थोड़ी हवादार" जगह अक्सर पर्याप्त नहीं होती। खरीदने से पहले पवन जांच ज़रूर करें।
आप क्या चला सकते हैं
- रोशनी, मोबाइल व बैटरी चार्जिंग, और बिजली की बाड़।
- छोटी पानी पंपिंग (अक्सर पवन-सौर हाइब्रिड के रूप में बेहतर)।
- ऑफ-ग्रिड शेड, मुर्गी या डेयरी इकाई जहां ग्रिड बिजली अनियमित है।
प्रमाणन, लागत और रख-रखाव
जहां संभव हो NIWE (राष्ट्रीय पवन ऊर्जा संस्थान) के छोटे-पवन कार्यक्रम के तहत परखे गए टरबाइन खरीदें, और सस्ते अप्रमाणित आयात से बचें। दाम आकार, टावर और साइट कार्य के साथ बहुत बदलता है, और पेबैक सिर्फ़ वाकई हवादार जगहों पर अच्छा होता है - देखें पवन टरबाइन लागत। सौर के विपरीत टरबाइन में चलने वाले पुर्ज़े होते हैं, इसलिए समय-समय पर जांच व सर्विस की योजना रखें।