स्टीविया भारत में हिमालय की तलहटी (पालमपुर, हिमाचल प्रदेश) से लेकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक के मैदानों तक उगाई जा सकती है, लेकिन इसे तभी लगाना ठीक है जब किसी प्रोसेसर ने आपकी सूखी पत्ती खरीदने के लिए लिखित में हामी भरी हो। यह छोटी पत्ती वाली और ज्यादा मजदूरी वाली फसल है, और प्रचार में बताए जाने वाले "गारंटीड" ₹200 से ₹400 प्रति किलो के भाव और खरीदारों के बताए जाने वाले ₹55 से ₹100 प्रति किलो के भाव में बहुत बड़ा फर्क है।
भारत में छपे ट्रायल की उपज कम है, जबकि बिक्री के ब्रोशर में इससे दो से तीन गुना बताई जाती है। जब तक आपका अपना खेत कुछ और न दिखाए, ट्रायल के आंकड़ों पर ही हिसाब लगाएं।
भारत में यह कहां उगती है
- राज्य: CSIR-IHBT के अनुसार पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में स्टीविया उगाई जाती है।
- ट्रायल की जगहें: तीन जगह का एक ट्रायल CSIR-IHBT पालमपुर (1,393 मीटर, चिकनी गाद वाली मिट्टी, pH 6.4), RHRS जाछ (431 मीटर, दोमट रेतीली मिट्टी, pH 7.5) और PAU लुधियाना (247 मीटर, रेतीली दोमट, pH 7.82) में हुआ। ठंडे पालमपुर में सबसे ज्यादा उपज मिली और लुधियाना में सबसे कम, यानी मैदानों में गर्मी एक रुकावट है।
- मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली रेतीली दोमट या लाल दोमट, pH 6.5 से 7.5, और ठीक-ठाक जैविक पदार्थ के साथ। थोड़े समय का जलभराव भी पौधों को मार देता है।
- रोशनी: IHBT ने पाया कि 25% छांव में सूखी पत्ती की उपज घनी छांव से काफी ज्यादा रही, और 75% छांव में फूल देर से आए और ग्लाइकोसाइड की मात्रा घट गई। पूरी धूप दें, और मैदानों की गर्मी में जरूरत हो तो हल्की छांव करें।
- पाला: पालमपुर में पौधों पर पाले, ज्यादा बारिश और कीटों का असर कम बताया गया, लेकिन कड़ाके की सर्दी में बढ़वार रुक जाती है।
किस्में और रोपण सामग्री
| किस्म | स्रोत | खासियत | कहां के लिए ठीक |
|---|---|---|---|
| Him Stevia | CSIR-IHBT, पालमपुर | सूखे वजन में Rebaudioside-A 7.34%, stevioside 5.78%, कुल ग्लाइकोसाइड 14.49%; Reb-A से स्वाद ज्यादा साफ आता है | उत्तर भारत के पहाड़ और मैदान |
| RSIT 94-751, RSIT 95-10-11 | एक खेती गाइड में नाम है; उत्पत्ति की पुष्टि नहीं हुई | 10 से 14% stevioside बताया गया | अपने खरीदार से पूछ लें |
- बीज का जमाव कमजोर होता है और पौधे एक जैसे नहीं आते। रोपण सामग्री आमतौर पर tissue culture के पौधे या तने की कलमें होती हैं। अपने खरीदार से पूछें कि उन्हें कौन सी किस्म और कितना ग्लाइकोसाइड चाहिए, क्योंकि भुगतान इसी पर टिका हो सकता है।
- IHBT के ट्रायल में पौध 75 दिन में तैयार की गई और 13वें से 15वें मौसम विज्ञान सप्ताह (मार्च के आखिर से अप्रैल के बीच) में रोपी गई।
दूरी और रोपाई
- IHBT के कई जगह वाले ट्रायल में 45 x 45 सेमी की दूरी रखी गई। IHBT के एक अलग ट्रायल में 45 x 10 सेमी पर प्रति पौधा सूखी पत्ती 30 x 15 सेमी से ज्यादा मिली।
- एक खेती गाइड ऊंची क्यारियों पर 30 x 30 सेमी की सलाह देती है, यानी प्रति एकड़ 40,000 से 50,000 पौधे (करीब 1 से 1.2 लाख प्रति हेक्टेयर)। यह गाइड दूसरे दर्जे का स्रोत है।
- ऊंची क्यारियां बनाकर ड्रिप लगाएं, ताकि जड़ों के पास पानी कभी न रुके।
खाद और सिंचाई
- IHBT के ट्रायल में पालमपुर और जाछ में प्रति हेक्टेयर 90 किलो N, 40 किलो P2O5 और 40 किलो K2O से सूखी पत्ती की सबसे अच्छी उपज मिली (प्रति एकड़ करीब 36 किलो N, 16 किलो P2O5 और 16 किलो K2O)। आधार में जैविक खाद डालें और नाइट्रोजन को कटाइयों में बांटकर दें।
- Stevioside की मात्रा जगह के हिसाब से काफी बदली, जबकि Reb-A काफी हद तक स्थिर रहा, इसलिए Reb-A के लिए खाद से ज्यादा किस्म मायने रखती है।
- स्टीविया की जड़ें उथली होती हैं और इसे बार-बार हल्की सिंचाई चाहिए; एक खेती गाइड पहले हफ्ते ड्रिप से दिन में दो बार पानी देने को कहती है।
- कीट और रोग: सबसे ज्यादा सफेद मक्खी की शिकायत है; septoria पत्ती धब्बा और जड़ सड़न भी होते हैं। पीले चिपचिपे ट्रैप और नीम का छिड़काव सुझाया जाता है, और जल निकास से जड़ सड़न रुकती है। किसी भी रसायन के लिए लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK से पूछें, क्योंकि स्टीविया मीठे के रूप में खाई जाती है और अवशेष मायने रखते हैं।
कटाई और उपज
- पहली कटाई रोपाई के करीब 60 से 75 दिन बाद होती है; बाद की कटाई हर 70 से 90 दिन पर, यानी गर्म इलाकों में साल में 3 से 4 कटाई। IHBT के हिमालयी ट्रायल में ठंडे पहाड़ों में दो साल की फसल अवधि में तीन कटाई बताई गई।
- फूल आने से ठीक पहले कटाई करें, जब ग्लाइकोसाइड सबसे ज्यादा होता है। पत्तियों को छांव में या ड्रायर में कम नमी तक सुखाएं; फफूंद लगी या धूप से सफेद पड़ी पत्ती खरीदार वापस कर देते हैं।
- ट्रायल की उपज: IHBT के तीन जगह के ट्रायल में सूखी पत्ती की उपज पालमपुर में 1.69 से 1.91 टन/हेक्टेयर, जाछ में 1.03 से 1.19 टन/हेक्टेयर और लुधियाना में 0.53 से 0.83 टन/हेक्टेयर रही, यानी मोटे तौर पर प्रति एकड़ 0.2 से 0.8 टन।
- ब्रोशर की उपज: खेती गाइड प्रति एकड़ साल में 1,500 से 2,400 किलो (3.7 से 5.9 टन/हेक्टेयर) बताती हैं। यह भारत के सबसे अच्छे ट्रायल आंकड़े से तीन गुना तक ज्यादा है, इसलिए स्थानीय सबूत के बिना इस पर बजट नहीं बनाना चाहिए।
लागत और कमाई
- भाव: एक खेती गाइड सूखी पत्ती के लिए ₹60 से ₹70 प्रति किलो के कॉन्ट्रैक्ट भाव बताती है, और दूसरा स्रोत कहता है कि प्रचार के ₹200 से ₹400 के दावों के मुकाबले असली buy-back ₹55 से ₹100 प्रति किलो है। जून 2026 की एक भाव वाली साइट पर 29 सितंबर 2026 को नीमच APMC में औसत भाव करीब ₹189 प्रति किलो और ₹19,824 प्रति क्विंटल दिखा, लेकिन सिर्फ एक मंडी ने 0.12 टन की आवक बताई और उत्पाद का रूप भी नहीं लिखा, इसलिए इसे पैमाना न बनाएं।
- हिसाब (उदाहरण): ब्रोशर की उपज मानें तो 1,500 किलो x ₹60 = ₹90,000 प्रति एकड़; 2,400 किलो x ₹70 = ₹1.68 लाख प्रति एकड़ कुल आय। प्रति एकड़ 0.2 से 0.8 टन की ट्रायल उपज और ₹60 से ₹70 प्रति किलो पर कुल आय सिर्फ ₹12,000 से ₹56,000 प्रति एकड़ बैठती है।
- लागत: एक गाइड के अनुसार पहले साल में प्रति एकड़ ₹40,000 से ₹65,000 लगते हैं, ज्यादातर पौधों, ड्रिप, क्यारियों और मजदूरी पर (दूसरे दर्जे का स्रोत)। कटाई और सुखाई में मजदूरी बहुत लगती है। प्रति एकड़ ₹1 से ₹1.5 लाख के शुद्ध मुनाफे के दावे ब्रोशर की उपज पर टिके हैं।
- स्टीविया खेत में 3 से 5 साल रहती है और बीच-बीच में कुछ पौधे बदलने पड़ते हैं, इसलिए पहले साल की लागत कई सालों में बंट जाती है।
बाजार और जोखिम
- खरीदार स्टीविया एक्सट्रैक्ट के प्रोसेसर और कुछ हर्बल और मीठा बनाने वाली कंपनियां हैं। दूसरे दर्जे के स्रोत बड़े प्रोसेसरों के नाम बताते हैं; किसी मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों या इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि वे नए किसानों से खरीदते हैं, इसलिए उनसे सीधे पूछ लें।
- ऐसे पौधे बेचने वालों से सावधान रहें जो ऊंचे buy-back भाव, तय कमाई या "एक्सपोर्ट" बाजार का वादा करते हैं: उनकी कमाई पौधे बेचने से होती है, और buy-back के वादे अक्सर निभाए नहीं गए हैं।
- पत्ती को खाने की चीजों में बेचना steviol glycosides पर FSSAI के नियमों पर निर्भर है; आपके खरीदार को बताना चाहिए कि उन्हें कौन सा ग्रेड और कौन सी जांच चाहिए।
- पानी बचाने के लिए drip irrigation, समूह में बिक्री के लिए FPO और औषधीय पौधों की मदद के लिए subsidy finder देखें। स्टीविया के लिए NMPB की मौजूदा सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हो सकी।
स्रोत
- Crop-ecology and nutritional variability influence growth and secondary metabolites of Stevia rebaudiana (CSIR-IHBT trials)
- CSIR-IHBT, shade and spacing effects on stevia
- CSIR-IHBT, Himalayan stevia cultivation study
- Organic Mandya, stevia farming in India (secondary source)
- Agrijob, stevia buyback prices 2026 (secondary source)
- ACROP, stevia mandi price (Agmarknet data)
