लेमनग्रास (Cymbopogon flexuosus) एक मजबूत बहुवर्षीय घास है जो भारत में अपने सिट्रल से भरपूर सुगंधित तेल के लिए उगाई जाती है, और इसे खराब, सूखी या बंजर जमीन पर भी लगाया जा सकता है, क्योंकि जम जाने के बाद इसे कम पानी और कम लागत चाहिए। फसल तभी कमाई देती है जब घास का आसवन हो और तेल ऐसे खरीदार को बिके जिसने भाव बताया हो, इसलिए आसवन इकाई या समूह में उस तक पहुंच ही अर्थशास्त्र तय करती है।

उपज और कमाई पर भारत के ट्रायल के सबूत बिखरे हुए हैं: छपे अध्ययनों में जगह-जगह घास और तेल के आंकड़े बहुत अलग हैं। नीचे के दायरे यही फैलाव दिखाते हैं, और तेल का कोई पुष्ट मौजूदा भाव नहीं मिला, इसलिए रोपाई से पहले खरीदार से भाव पूछ लें।

भारत में यह कहां उगती है

  • मूल और रकबा: यह प्रजाति भारत, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया की मूल है (Wikipedia)। Food Chemistry: X की 2024 की एक समीक्षा के अनुसार भारत में करीब 4,000 हेक्टेयर में लेमनग्रास है जिससे साल में करीब 250 टन तेल बनता है, और दुनिया के कारोबार का करीब 90 प्रतिशत कोचीन बंदरगाह से गुजरता है। यह समीक्षा का आंकड़ा है, इसे मोटा संकेत मानें।
  • अध्ययन की जगहें: खेत के अध्ययन बेंगलुरु (alfisols), असम के जोरहाट, राजस्थान के अलवर, तेलंगाना और गुजरात की बीहड़ जमीन से आए हैं। इससे दिखता है कि फसल नम पूर्वोत्तर से लेकर अर्ध-शुष्क मैदानों तक चलती है।
  • जलवायु: उसी समीक्षा के अनुसार 20 से 30 डिग्री C का तापमान और भारी बारिश वाली गर्म, नम जलवायु।
  • कमजोर जमीन: ICAR-IISWC (वासद, गुजरात) ने 2019 से 2024 तक बीहड़ जमीन पर मालाबार नीम के साथ लेमनग्रास आजमाई और पाया कि बिना उपचार वाली परती जमीन के मुकाबले मिट्टी में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और जैविक कार्बन करीब 73 से 79 प्रतिशत ज्यादा रहे। यह बंजर जमीन पर लेमनग्रास का समर्थन करता है, लेकिन खेती की आय का आंकड़ा नहीं देता।

किस्में

किस्मकहां अध्ययन हुआबताई गई खासियत
I Cauveryदो साल का दूरी और नाइट्रोजन ट्रायल (Singh et al., 1996)45 x 45 सेमी की दूरी और 150 किलो N प्रति हेक्टेयर प्रति साल पर घास और तेल की ज्यादा उपज
Jor Lab L-2Regional Research Laboratory, जोरहाट (1991 से 1994)90 दिन के कटाई अंतराल पर सबसे ज्यादा तेल; हर अंतराल पर सिट्रल 88 से 90 प्रतिशत
Krishnaकटाई की बारंबारता के अध्ययनों में नाम आया है (Wikipedia)यहां कोई उपज का आंकड़ा पुष्ट नहीं हुआ
  • CSIR-CIMAP और दूसरे संस्थानों ने लेमनग्रास की सुधरी लाइनें जारी की हैं, लेकिन उनकी उपज और तेल का डेटा यहां नहीं दिया गया है। रोपाई की जड़ें (slips) CIMAP, राज्य कृषि विश्वविद्यालय या पंजीकृत नर्सरी से लें और किस्म का नाम और उसका सिट्रल पूछें।

रोपाई और दूरी

  • दूरी: Singh के दो साल के ट्रायल में 45 x 45 सेमी की पास की दूरी पर चौड़ी दूरी से ज्यादा घास और तेल मिला। यह करीब 20,000 झुंड प्रति एकड़ (करीब 49,000 प्रति हेक्टेयर) बैठता है।
  • रोपण सामग्री जड़ वाली कलमें या कल्ले हैं। जब मिट्टी में नमी हो तब रोपें।

खाद और सिंचाई

  • नाइट्रोजन: Singh के दूरी वाले ट्रायल में 150 किलो N प्रति हेक्टेयर प्रति साल (करीब 61 किलो प्रति एकड़) से घास और तेल की ज्यादा उपज मिली, और बेंगलुरु के alfisols वाले ट्रायल (1993 से 1995) में सिंचाई के साथ 100 किलो N प्रति हेक्टेयर (करीब 40 किलो प्रति एकड़) सबसे अच्छा रहा। दोनों से तेल की गुणवत्ता नहीं बदली। मिट्टी जांच कराएं और fertilizers देखें।
  • सिंचाई: बेंगलुरु के ट्रायल में IW:CPE अनुपात 0.75 पर सिंचाई से घास और तेल की उपज काफी बढ़ी। व्यवहार में इसका मतलब है सूखे दौर में नियमित सिंचाई; drip irrigation इसके लिए ठीक है। तेलंगाना के एक अध्ययन में उपज मिट्टी के नाइट्रोजन और फॉस्फोरस के साथ चली।
  • इस गाइड के लिए भारत का कोई कीट और रोग पैकेज नहीं मिला, इसलिए अपने KVK या CIMAP से पूछें कि स्थानीय स्तर पर कौन सी समस्याएं आती हैं।

कटाई, सुखाई और आसवन

  • पहली कटाई: एक समीक्षा रोपाई के करीब 4 से 6 महीने बाद कटाई बताती है, जमीन से करीब 20 सेमी ऊपर से काटकर।
  • अंतराल: जोरहाट के अध्ययन (Jor Lab L-2) में हर 90 दिन पर काटने से सबसे अच्छा तेल मिला। नीचे वाले तेलंगाना बाग में साल में तीन कटाई हुईं।
  • उपज, घास: अलवर, राजस्थान (2021 से 2023, एक प्रीप्रिंट जिसकी अभी विशेषज्ञ समीक्षा नहीं हुई) ने 20.13 टन प्रति हेक्टेयर घास (8.1 टन प्रति एकड़) बताई। 2023 में लगे तेलंगाना के एक बाग में तीन कटाइयों में करीब 6,140 किलो प्रति हेक्टेयर मिला। फर्क बड़ा है; यह जगह, उम्र, दूरी और बारिश पर निर्भर है।
  • तेल: तेलंगाना के अध्ययन में कटी घास को 36 घंटे छांव में सुखाने पर ओवन या धूप में सुखाने के मुकाबले सबसे ज्यादा तेल (0.77 से 0.85 प्रतिशत) मिला, और सिट्रल 65 से 84 प्रतिशत रहा। 0.77 से 0.85 प्रतिशत पर 6,140 किलो से करीब 47 से 52 किलो तेल प्रति हेक्टेयर (19 से 21 किलो प्रति एकड़) बनता है। एक समीक्षा सूखे वजन पर 1 से 2 प्रतिशत का बड़ा दायरा देती है।
  • तेल कटी पत्तियों के भाप आसवन से निकलता है। किसी सहकारी समूह या पड़ोसी की इकाई इस्तेमाल करने से अपनी भट्ठी का खर्च बचता है।
💡 सुझाव: रोपाई से पहले तेल खरीदार से लिखित में कहलवा लें कि वह कितना सिट्रल प्रतिशत मानेगा और प्रति किलो क्या भाव देगा, और पूछें कि आपकी पहली खेप का आसवन कहां हो सकता है। हिसाब खरीदार के भाव पर लगाएं, किसी गाइड के भाव पर नहीं।

लागत और कमाई

  • राजस्थान प्रीप्रिंट: लेमनग्रास की शुद्ध आय ₹1,40,856 प्रति हेक्टेयर (करीब ₹57,000 प्रति एकड़) और लाभ-लागत अनुपात 3.35, जबकि उसी अध्ययन में सरसों ₹60,210 प्रति हेक्टेयर रही। क्योंकि यह प्रीप्रिंट है और तेल के भाव, लागत और साल की मान्यताएं जांची नहीं जा सकीं, इसे संकेत भर का ऊपरी मामला मानें।
  • अपना हिसाब: प्रति एकड़ तेल की उपज (तेलंगाना के उदाहरण में करीब 20 किलो) को खरीदार के भाव से गुणा करें, फिर जड़ें, मजदूरी, कटाई, आसवन का ईंधन और ढुलाई, और खाद घटाएं। तेल का कोई पुष्ट भाव या खेती की लागत तालिका नहीं मिली, इसलिए यहां मुनाफे का कोई आंकड़ा नहीं दिया गया।

बाजार और जोखिम

  • तेल व्यापारियों और प्रोसेसरों को बिकता है, और इसका भाव बाजार के साथ बदलता है, इसलिए खरीदार से समझौता या समूह में माल रोककर रखने की योजना मायने रखती है। export buyers और FPO देखें।
  • ऐसी योजनाओं से सावधान रहें जो जड़ें बेचकर buy-back और प्रति एकड़ तय मुनाफे का वादा करती हैं। पूछें कि खरीदार आज तेल का प्रति किलो क्या देता है और कितने साल तक।
  • मदद: CSIR-CIMAP अपने Aroma Mission के तहत सुगंधित फसलों को बढ़ावा देता है; प्रशिक्षण, रोपण सामग्री और आसवन की मदद के बारे में CIMAP या राज्य बागवानी विभाग से पूछें। subsidy finder देखें।

स्रोत