कमरख (star fruit) गर्म, नम और पाला-मुक्त भारत में, खासकर पश्चिमी तट, नीलगिरि की तलहटी और दक्षिण व पूर्व के मैदानों में अच्छी उगती है, और इसे जमाना आसान है, लेकिन इसका बाजार पतला और छोटा है, इसलिए यह बड़े बाग की जगह स्थानीय बिक्री वाले कुछ एकड़ के लिए ज्यादा ठीक है। कलमी मीठी किस्म 2 से 3 साल में फल देती है; असली मेहनत उस फल के खरीदार ढूंढने में है जिसे कई ग्राहक जानते नहीं और जो जल्दी चोटिल हो जाता है।

उपज और अर्थशास्त्र पर भारत का बहुत कम ट्रायल डेटा छपा है, इसलिए नीचे के आंकड़े ज्यादातर फ्लोरिडा की extension सलाह और एक दूसरे दर्जे की भारतीय खेती गाइड से हैं। इन्हें अनुमान मानें और पास के किसी उत्पादक या अपने KVK से मिलाकर देखें।

भारत में यह कहां उगती है

  • इलाके: उड़ीसा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एक अध्ययन (Das and Bal, Indian Journal of Horticulture, 2010) के अनुसार कमरख पश्चिमी तटीय भारत और करीब 1,200 मीटर तक नीलगिरि की पहाड़ियों में उगती है। घर के बगीचों में इसके पेड़ केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर में आम हैं।
  • जलवायु: यह उष्णकटिबंधीय से गर्म उपोष्णकटिबंधीय पेड़ है। University of Florida की सलाह है कि यह ठंड और हवा के प्रति बहुत संवेदनशील है, इसलिए पाला-मुक्त और आड़ वाली जगह चुनें। खुली जगह में हवा रोकने वाले पेड़ लगाएं।
  • मिट्टी और पानी: गहरी, अच्छे जल निकास वाली दोमट सबसे अच्छी है। फूल आने से तुड़ाई तक पेड़ को नियमित पानी चाहिए, और जहां पानी रुकता है वहां जड़ सड़न का खतरा है।
  • मौसम: फल लगने से पकने तक करीब 60 से 75 दिन लगते हैं। दक्षिण भारत में तुड़ाई जनवरी से फरवरी और सितंबर से अक्टूबर में चरम पर रहती है (Das and Bal)। सिंचाई के साथ पेड़ पर साल में दो या तीन बार फूल आ सकते हैं।

किस्में

किस्ममूलखासियतटिप्पणी
Arkinफ्लोरिडा का चयनमीठी किस्म, फ्लोरिडा की मुख्य व्यावसायिक किस्मअपने राज्य में असली कलमी पौधों की उपलब्धता जांच लें
Karyफ्लोरिडा का चयनमीठी किस्म, फ्लोरिडा की प्रमुख किस्मभारत में कम मिलती है
Fwang Tung, B-10थाई और मलेशियाई किस्मेंफ्लोरिडा में छोटी किस्मों में गिनी जाती हैंनर्सरी से फल देने का सबूत मांगें
स्थानीय बीजू किस्मेंघर के बगीचे, ओडिशा, पूर्वोत्तरफल की गुणवत्ता अलग-अलगमातृ पेड़ चुनने से पहले फल चखें; खट्टी किस्में अचार और रस के काम आती हैं
  • ICAR की कोई जारी की हुई कमरख किस्म नहीं मिली। अपने राज्य की मान्यता प्राप्त नर्सरी से किसी नामी मीठी किस्म के कलमी या चश्मा चढ़े पौधे लें; बीजू पौधों की मिठास में बहुत फर्क होता है।

रोपाई और दूरी

  • फ्लोरिडा की पद्धति: कतारें 20 से 25 फुट (6 से 7.5 मीटर) और कतार में पेड़ 15 से 20 फुट (4.5 से 6 मीटर) की दूरी पर, यानी प्रति एकड़ 87 से 145 पेड़ (करीब 215 से 360 प्रति हेक्टेयर)।
  • भारतीय खेती गाइड (दूसरे दर्जे की): 5 मीटर x 4 मीटर, यानी प्रति एकड़ 200 पेड़ (करीब 500 प्रति हेक्टेयर), या खुले बाग के लिए 6 मीटर x 6 मीटर।
  • ऊपरी मिट्टी और सड़ी गोबर की खाद से भरे गड्ढों में लगाएं, और छोटे पेड़ों को हवा से बचाएं।

खाद और सिंचाई

  • 7 साल और उससे बड़े पेड़ों के लिए University of Florida की सलाह है: 6-8% N, 2-4% P, 6-8% K और 3-4% Mg वाले मिश्रण का प्रति पेड़ करीब 4 lb (1.8 किलो), साल में चार बार, साथ में chelated iron और सूक्ष्म पोषक तत्वों का पर्णीय छिड़काव। छोटे पेड़ों को उसी हिसाब से कम दें। ये मात्राएं फ्लोरिडा की चूना-पत्थर वाली मिट्टी की हैं, इसलिए भारत में मात्रा के लिए मिट्टी की जांच और अपने KVK की सलाह लें।
  • फूल आने से तुड़ाई तक नियमित पानी दें। ड्रिप सिंचाई इस फसल के लिए ठीक है और पानी बचाती है।

कीट और रोग

  • भारतीय खेती गाइडों में फल मक्खी को मुख्य कीट बताया गया है, और इसकी सूंडियां फल को अंदर से सड़ा देती हैं। गिरे हुए फल इकट्ठा करके नष्ट करें और ट्रैप के बारे में अपने KVK से पूछें।
  • फ्लोरिडा में पत्तियों और टहनियों पर स्टिंकबग और शल्क कीट, और anthracnose, पत्ती धब्बे, red alga और जड़ सड़न जैसे रोग बताए गए हैं।
  • किसी भी रसायन के लिए लेबल के हिसाब से चलें और ताजा सिफारिश के लिए अपने KVK से पूछें। देखें कीट।

तुड़ाई और उपज

  • तब तोड़ें जब छिलका हल्की नारंगी आभा के साथ पीला पड़ जाए; संभालकर उतारें क्योंकि फल की धारियां चोटिल हो जाती हैं।
  • फ्लोरिडा: एक पूर्ण विकसित पेड़ (7 साल और ऊपर) साल में 250 से 350 lb (करीब 113 से 159 किलो) देता है, कई तुड़ाइयों में।
  • भारतीय खेती गाइड (दूसरे दर्जे की): साल 2 से 3 में प्रति पेड़ 15 से 25 किलो और साल 5 से 40 से 80 किलो, यानी 200 पेड़ों पर प्रति एकड़ 8,000 से 16,000 किलो। योजना के लिए निचला सिरा लें।
💡 सुझाव: एक एकड़ से ज्यादा लगाने से पहले कोई होटल, जूस यूनिट या रिटेल चेन तय कर लें जो हर हफ्ते फल ले, और पहले सीजन का फल स्थानीय स्तर पर बेचकर भाव परख लें।

लागत और कमाई

  • भाव: दूसरे दर्जे की गाइड स्थानीय थोक में करीब ₹20 प्रति किलो और रिटेल या होटल सप्लाई में ₹60 से ₹80 प्रति किलो बताती है। आज का भाव मंडी भाव और स्थानीय खरीदारों से देखें।
  • हिसाब (उदाहरण): 200 पेड़ x 40 किलो = 8,000 किलो प्रति एकड़। ₹20 प्रति किलो पर यह ₹1.6 लाख है; ₹40 पर ₹3.2 लाख। प्रति पेड़ 15 किलो पर इन्हीं भावों पर कुल आय ₹60,000 से ₹1.2 लाख रह जाती है।
  • लागत: यही गाइड जैविक inputs पर साल में करीब ₹50,000 प्रति एकड़ बताती है, मजदूरी, तुड़ाई और ढुलाई से पहले। पौधे, गड्ढे और सिंचाई पहले साल में अलग से लगते हैं।
  • थोक मांग छोटी है, इसलिए कुछ टन ज्यादा माल भाव को जल्दी गिरा सकता है।

बाजार और सेहत की चेतावनी

  • खरीदार: स्थानीय फल मंडियां, सजावट, जूस और अचार के लिए होटल और रेस्तरां, जूस और अचार बनाने वाले, और संगठित रिटेल। भारतीय कमरख का कोई राष्ट्रीय निर्यात व्यापार नहीं मिला।
  • सेहत की चेतावनी: कमरख में caramboxin और oxalate होते हैं, और पुरानी किडनी की बीमारी वाले लोगों को इसे खाने के बाद हिचकी, भ्रम, दौरे और मौत तक हो सकती है (PubMed समीक्षा)। ताजा या जूस के रूप में बिकने वाले पैक पर चेतावनी छापें।
  • फल कुछ ही दिनों में चोटिल होकर खराब हो जाता है, इसलिए सप्लाई की कड़ी छोटी रखें। समूह में बिक्री के लिए FPO और बागवानी योजनाओं के लिए subsidy finder देखें। कमरख की कोई अलग सब्सिडी दर सत्यापित नहीं हुई; अपने राज्य के बागवानी विभाग से पूछें।

स्रोत