लोंगन भारत में एक नई, छोटे पैमाने की फल फसल है, जो मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में उगाई जाती है, और केरल में परीक्षण व शौकिया रोपण हैं। यह उन इलाकों के लिए है जहां पहले से लीची होती है और सर्दी ठंडी पर पाला-मुक्त रहती है, लेकिन भारत के लिए अभी कोई पूरा फसल पैकेज नहीं है, इसलिए ज़्यादातर सलाह चीन और थाईलैंड से ली गई है और बाज़ार पतला है।
फल बहुत जल्दी खराब होता है और दूर के बाज़ार सीमित हैं, इसलिए पहले कुछ पेड़ लगाएं और बाग लगाने से पहले खरीदार तय कर लें।
भारत में कहां उगता है
- राज्य: ICAR-NRC on Litchi (मुज़फ्फरपुर) लोंगन को बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सीमित पैमाने पर उगता बताता है, जो उत्तर बिहार और पश्चिम बंगाल की जलोढ़ मिट्टी में अच्छा चलता है, और कहता है कि इसे छत्तीसगढ़ और अन्य लीची क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। केरल में मलप्पुरम ज़िले और लगभग 1,500 फीट से ऊपर की ऊंची पहाड़ियों के उत्पादक इसे उगाते बताए गए हैं।
- तापमान: सर्दी में 2 से 3 महीने 15 से 22 °C ज़्यादा फूल लाता है, और फूल व फल लगने के लिए 20 से 25 °C सबसे अच्छा है। पाला पेड़ को मार सकता है या बुरी तरह नुकसान पहुंचा सकता है। 25 °C से ऊपर की रात का तापमान फल के विकास को नुकसान देता है और 40 °C से ऊपर का तापमान फल को नुकसान और गिरावट देता है।
- मिट्टी: गहरी, अच्छे जल निकास वाली, उपजाऊ लाल दोमट जिसमें जैविक पदार्थ ज़्यादा हो, pH 5.5 से 6.0 आदर्श है। फल लगने से तुड़ाई तक मिट्टी में नमी चाहिए।
किस्में और रोपण सामग्री
| किस्म | स्रोत | विशेषताएं | कहां उपयुक्त |
|---|---|---|---|
| Gandaki Uday (Gandaki Longan 1 के नाम से भी बताई गई) | ICAR-NRC on Litchi, मुज़फ्फरपुर; पश्चिम बंगाल से एकत्र सामग्री से चयन | भारत में जारी पहली लोंगन किस्म; जल्दी पकने वाली, हर साल फल देने वाली, बौना पेड़; गोल या चपटा फल 11 से 16 ग्राम, गूदा 69 से 74%, TSS 20 से 23 डिग्री ब्रिक्स | बिहार और पड़ोसी राज्यों के लीची क्षेत्र |
| Kohala, Daw, Chuliang, Fuyan, Wu Yuan | चीन और थाईलैंड की व्यावसायिक किस्में | इस्तेमाल किए गए स्रोतों में भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में परखी नहीं गई | केरल में आयातित सामग्री; प्रदर्शन अप्रमाणित |
- एयर लेयरिंग आम व्यावसायिक तरीका है। एक साल के एयर लेयर पौधे ICAR-NRC on Litchi, मुशहरी फार्म, मुज़फ्फरपुर में मिलते हैं, जो सही किस्म के पौधे का सबसे सुरक्षित स्रोत है। केरल के उत्पादक ग्राफ्टेड पौधे और कई आयातित किस्में बताते हैं; केवल किस्म के नाम और लिखित स्रोत के साथ खरीदें।
दूरी और रोपण
- ICAR-NRC on Litchi 6 से 8 m की दूरी बताता है, बरसात में रोपण, और 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढे जो दो हफ्ते पहले खोदकर जैविक खाद और फॉस्फेट खाद से भरे जाते हैं। यह लगभग 63 से 112 पेड़ प्रति एकड़ (156 से 278 प्रति हेक्टेयर) है।
- रोपाई पर पॉलीबैग हटा दें, जड़ों के चारों ओर मिट्टी दबाएं, और छोटे पौधों को नियमित सिंचाई दें।
- एक केरल रिपोर्ट पेड़ों के बीच लगभग 30 फीट और पूरी धूप की सलाह देती है, साथ में नियमित छंटाई।
पोषण और सिंचाई
- उम्र के हिसाब से प्रति पेड़ कोई परखा हुआ भारतीय उर्वरक कार्यक्रम नहीं मिला। मिट्टी की जांच कराएं और ICAR-NRC on Litchi या अपने KVK से पूछें; लीची के कार्यक्रम सबसे नज़दीकी स्थानीय संदर्भ हैं पर बिना जांचे नकल न करें।
- फल लगने से तुड़ाई तक मिट्टी नम रखें। देखें ड्रिप सिंचाई।
- फल वाले पेड़ों को चिड़ियों से बचाने के लिए जाली से ढकें, जैसा मुज़फ्फरपुर केंद्र में किया जाता है।
कीट और रोग
- ICAR-NRC सीमित क्षेत्र के आधार पर बताता है कि भारत में अभी कोई बड़ी कीट या रोग समस्या नहीं है।
- दूसरे देशों में लोंगन स्टिंक बग सबसे विनाशकारी कीट है, जो फरवरी के आसपास जोड़ा बनाता है, और विच्स ब्रूम (रोज़ेट शूट) गंभीर रोग है। विच्स ब्रूम के लिए संक्रमित शाखाएं और फूलों के गुच्छे काटकर नष्ट करें; सल्फर यौगिक और नीम तेल का छिड़काव हमला घटाता है।
- किसी भी छिड़काव के लिए लेबल और अपने KVK की सलाह मानें, और नया कीट दिखे तो उन्हें जल्दी बताएं।
तुड़ाई और उपज
- फूल से तुड़ाई तक फल को लगभग 5 महीने लगते हैं। भारत में लोंगन जुलाई से सितंबर में तोड़ा जाता है (NRC on Litchi)। फल तोड़ने के बाद नहीं पकता, इसलिए छिलके के रंग और मिठास से पूरा पका होने पर ही तोड़ें।
- केरल में कुछ किस्में तीन साल में फल देने लगती हैं; चार साल का पेड़ लगभग 5 किलो देता बताया गया है।
- NRC on Litchi पूरी तरह विकसित पेड़ के लिए साल में 100 से 120 किलो प्रति पेड़ बताता है। यह अनुसंधान केंद्र का आंकड़ा है, उन पेड़ों के लिए जिन्हें पूरा आकार लेने में कई साल लगे; बाग के स्तर का कोई भारतीय उपज सर्वे नहीं मिला।
लागत और आमदनी
- दाम: जून 2026 की एक केरल रिपोर्ट ने ₹300 से ₹450 प्रति किलो बताया। यह आंकड़ा छोटी मात्रा की स्थानीय बिक्री का है और लोंगन की कोई मंडी भाव श्रृंखला नहीं है, इसलिए इसे ऊपरी सीमा मानें जो आपूर्ति बढ़ने पर नहीं टिकेगी।
- हिसाब (उदाहरण): 100 किलो वाला पूरा विकसित पेड़ ₹300 से ₹450 पर कुल ₹30,000 से ₹45,000 देगा, और प्रति एकड़ 63 से 112 पेड़ इसे ₹19 लाख से ₹50 लाख प्रति एकड़ बना देते हैं, जो बड़े पैमाने पर यथार्थ नहीं है। 5 किलो वाला छोटा पेड़ ₹1,500 से ₹2,250 देता है। बजट के लिए कम दाम और शुरुआती सालों की उपज इस्तेमाल करें।
- भारत की कोई सत्यापित खेती-लागत नहीं मिली। लागत मुख्य रूप से पौधों, गड्ढों, सिंचाई, चिड़िया जाली और पूरी फलत से पहले के सालों की देखभाल की है।
बाज़ार और जोखिम
- ताज़ा फल शहर के फल विक्रेताओं और एशियाई भोजन या स्वास्थ्य खाद्य खरीदारों को बिकता है; सूखा लोंगन ("लोंगन नट्स") एशिया में लोकप्रिय है, और डिब्बाबंदी व जूस संभव हैं। ICAR-NRC on Litchi ने मूल्यवर्धित उत्पाद बनाए हैं और कहता है कि शेल्फ-लाइफ पर शोध अभी चाहिए।
- आपूर्ति बहुत कम है, इसलिए बताए गए दामों पर बड़ी मात्रा की मांग अपरखी है। तय दाम के वादों पर आयातित किस्में बेचने वाली नर्सरियों से सावधान रहें।
- ऋण के लिए KCC देखें; फल बाग सहायता के लिए सब्सिडी खोजक और अपना राज्य बागवानी विभाग देखें।
