मैंगोस्टीन भारत में सिर्फ एक तंग पट्टी में चलता है: केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक की पाला-रहित, बहुत नम, ज्यादा बारिश वाली जमीन, कम से मध्यम ऊंचाई पर। यह बहुत धीमी फसल है: ICAR की Indian Horticulture पत्रिका के अनुसार बीज वाले पेड़ों में रोपाई के 8 से 10 साल बाद फूल आना शुरू होता है और कलमी में 7 से 8 साल बाद, और पूरी फलन करीब 15 साल से ही आती है। अगर आप बिना आमदनी के एक दशक इंतजार नहीं कर सकते और आपके पास पहले से सही नम जमीन नहीं है, तो यह गलत फसल है।

फल ऊंचे भाव पर बिकता है, लेकिन इस पर भारत में लगभग कोई संगठित शोध या विस्तार काम नहीं है, इसलिए ऑनलाइन जो कुछ चलता है उसमें से ज्यादातर पत्रकारिता और किस्से-कहानियां हैं। यह गाइड अलग-अलग दिखाती है कि क्या दर्ज है और क्या सिर्फ बताया गया है।

भारत में कहां उगता है

  • राज्य: ICAR के अनुसार यह केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक के नम उष्णकटिबंधीय इलाकों में उगाया जाता है, और जलवायु की सख्त जरूरतों के कारण रकबा बहुत सीमित है, जबकि मांग और भाव ऊंचे हैं।
  • जलवायु: पाला-रहित भूमध्यरेखीय जलवायु, 400 से 900 मीटर की ऊंचाई तक, 180 से 250 सेमी बारिश (ICAR, 2021)। सूखे दौर, ठंड और सुखाने वाली हवा से नुकसान होता है।
  • मिट्टी: गहरी, अच्छी जल निकासी वाली और जैविक पदार्थ से भरपूर। जलभराव वाली या उथली मिट्टी इसके लिए ठीक नहीं।
  • जानी-पहचानी जगहें: 2019 की एक Modern Farmer रिपोर्ट केरल के परियारम का वर्णन करती है, जहां करीब 50 परिवार इसे उगाते हैं, अप्रैल और मई में तुड़ाई करते हैं और ज्यादातर स्थानीय बाजार के बजाय चेन्नई और बेंगलुरु में बेचते हैं। इसके अलावा तमिलनाडु के कन्याकुमारी और नीलगिरि की तलहटी का नाम अक्सर लिया जाता है, पर रकबे का कोई सरकारी आंकड़ा नहीं मिला।

किस्में

ICAR साफ कहता है कि भारत में कोई सिफारिश की गई किस्म नहीं है। पौधे ज्यादातर पुराने बागों के बीज वाले पौधे हैं, और फल एक जैसा नहीं होता। बीज अपोमिक्टिक है (भ्रूण मातृ ऊतक से बनता है, परागण से नहीं), इसलिए बीज वाले पौधे आमतौर पर मातृ पेड़ जैसे ही होते हैं। कलमी पौधे बीज वाले पौधों से करीब एक-दो साल पहले फल देते हैं (ICAR)। ऐसे बाग या नर्सरी से खरीदें जिसका मातृ पेड़ आपने फल देते देखा हो, और बिना किसी रिकॉर्ड वाली नाम की "किस्मों" के पैसे न दें।

रोपण सामग्री, दूरी और प्रति एकड़ पौधे

  • बीज वाले पौधे खेत में लगाने से पहले छायादार नर्सरी में 1 से 2 साल रहते हैं, और मानसून की शुरुआत में लगाए जाते हैं।
  • छोटे पेड़ों को शुरू के कई सालों तक आंशिक छाया चाहिए।
  • ICAR के लेख में 6 x 6 मीटर की दूरी दी गई है, जो करीब 110 पेड़ प्रति एकड़ (करीब 280 प्रति हेक्टेयर) है। दूसरे स्रोत 8 से 10 मीटर इस्तेमाल करते हैं, जिससे 40 से 63 पेड़ प्रति एकड़ आते हैं। पेड़ बड़ा हो जाता है, इसलिए पुराने बागों के लिए चौड़ी दूरी ज्यादा सुरक्षित है; अपने KVK से पुष्टि कर लें।
दूरीपेड़ प्रति एकड़पेड़ प्रति हेक्टेयर
6 x 6 मीटर (ICAR)करीब 112करीब 278
8 x 8 मीटरकरीब 63करीब 156
10 x 10 मीटरकरीब 40100

खाद-पोषण और सिंचाई

पेड़ की उम्र के हिसाब से खुराक का कोई जांचा हुआ भारतीय कार्यक्रम नहीं मिला, इसलिए यहां कोई नहीं दिया जा रहा। गड्ढे में और पेड़ के चारों ओर भरपूर जैविक पदार्थ (कम्पोस्ट या गोबर की खाद और मल्च) डालने की योजना बनाएं, और सूखे महीनों में मिट्टी नम रखें; सूखे मौसम में पानी की कमी खराब बढ़वार की एक जानी-पहचानी वजह है। स्थानीय कार्यक्रम के लिए अपने राज्य के बागवानी विभाग या KVK से पूछें और उर्वरक मिट्टी जांच के आधार पर तय करें (देखें उर्वरक)।

कीट और रोग

ICAR कीटों में पत्ती खाने वाले कीट (leaf eater), पत्ती सुरंगक (leaf miner) और फल छेदक (fruit borer) को, और रोगों में पत्ती झुलसा (leaf blight), Diplodia फल सड़न और भूरी जड़ रोग को गिनाता है। रसायनों के लिए लेबल और अपने स्थानीय KVK की बात मानें; यह भी देखें कीट।

फूल, तुड़ाई और उपज

  • ICAR: फूल मार्च से अप्रैल में आते हैं, और फल लगने के 120 से 128 दिन बाद पकता है, दक्षिण भारत में ज्यादातर जुलाई से अगस्त में। (परियारम की रिपोर्ट के अनुसार वहां तुड़ाई अप्रैल से मई में होती है, यानी समय जगह के हिसाब से बदलता है।)
  • पूरे बड़े पेड़ से 40 से 60 किलो फल मिलता है (ICAR)। फल कमरे के तापमान पर 2 से 3 हफ्ते और 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तथा 85 से 90 प्रतिशत नमी पर 50 दिन तक टिकता है।
  • अकेले पुराने पेड़ों से साल में 350 किलो (केरल का 35 साल पुराना पेड़) या लगभग एक टन (100 साल पुराना पेड़) मिलने की खबरें अखबारी किस्से हैं, ट्रायल के आंकड़े नहीं।

लागत और कमाई

खेती की लागत का कोई जांचा हुआ भारतीय अध्ययन नहीं मिला, इसलिए यहां सिर्फ हिसाब है, जिसमें ICAR की उपज और अखबारों में बताया गया भाव इस्तेमाल हुआ है (2019 के Modern Farmer लेख में ₹500 से ₹600/किलो; एक Global Agriculture लेख में ₹500/किलो)। इस्तेमाल करने से पहले खरीदारों से मौजूदा भाव पता कर लें।

स्थितिप्रति एकड़ प्रति साल फल₹500/किलो पर कुल आमदनी
112 पेड़ x 40 किलोकरीब 4.5 टनकरीब ₹22 लाख
112 पेड़ x 60 किलोकरीब 6.7 टनकरीब ₹34 लाख

ये आंकड़े सिर्फ पूरी फलन वाले बाग (करीब 15 साल) पर लागू होते हैं। उससे पहले करीब 8 से 10 साल आमदनी शून्य रहती है, और कई नए बागों की बड़ी आपूर्ति भाव को नीचे खींच देगी। ऊंचा भाव बहुत थोड़ी आपूर्ति पर टिका है; अगर बहुत से किसान एक साथ लगाएंगे तो यह नहीं टिकेगा। किसी जल्दी फल देने वाली फसल से तुलना करते समय 10 साल की देखभाल, छाया, सिंचाई और जमीन की लागत गिनें।

बाजार और बिक्री

  • ताजा फल शहर के बाजारों (केरल की रिपोर्ट में चेन्नई, बेंगलुरु का नाम है) और फल खुदरा विक्रेताओं के पास जाता है। ICAR के अनुसार यह मुख्य रूप से ताजा इस्तेमाल होता है; प्रोसेस किए उत्पाद (जेली, पेस्ट, शरबत, डिब्बाबंद फांकें) संभव हैं, पर छोटे पैमाने के हैं।
  • भाव आकार, दिखावट और ताजगी पर निर्भर करता है। बढ़े हुए दाम पर पौधे बेचने वाली नर्सरी का buy-back या "पक्के भाव" का समझौता न करें; वे असली खरीदार का विकल्प नहीं हैं।
  • मैंगोस्टीन के लिए कोई सरकारी निर्यात मात्रा या APEDA की योजना नहीं मिली।
💡 सुझाव: लगाने से पहले अपने ही बारिश वाले इलाके में 15 साल या उससे पुराना बाग देखें, प्रति एकड़ पेड़ गिनें और पूछें कि सामान्य साल में कितनी उपज मिलती है। 10 साल में फल देने वाली फसल जमीन के एक हिस्से में लगानी चाहिए, पूरी में नहीं।

स्रोत