बेल (Aegle marmelos) उन गिने-चुने फलदार पेड़ों में है जो गर्म, शुष्क अर्ध-शुष्क जमीन में बिना सिंचाई के भी व्यावसायिक फसल देता है, और ICAR-CIAH का गोधरा केंद्र केवल 400 मिमी बारिश में भी आर्थिक उपज बताता है। यह धीमी बागवानी फसल है: कलमी पेड़ 2वें साल से फल देने लगते हैं, लेकिन आर्थिक फसल करीब 5वें साल के बाद ही आती है और पूरी उपज 10वें साल के आसपास मिलती है।

छपे हुए मुनाफे के आंकड़े गुजरात के एक शोध केंद्र के हैं, और बेल की खरीद-बिक्री सीमित है, इसलिए ताजे फल, गूदे या पाउडर का खरीदार रोपाई से पहले ही ढूंढ लें।

भारत में यह कहां उगता है

  • क्षेत्र: ICAR-CIAH के अनुसार बेल पूरे भारत में, उपोष्ण, उष्ण, शुष्क और अर्ध-शुष्क इलाकों में उगता है। किस्मों पर काम फैजाबाद और लखनऊ (उत्तर प्रदेश), गोधरा (गुजरात), बीकानेर (राजस्थान) में होता है, और ट्रायल मध्य प्रदेश के कैमूर पठार और सतपुड़ा पहाड़ी क्षेत्र में हुए हैं।
  • सूखे की सीमाएं: गोधरा के ट्रायल स्थल पर औसत सालाना बारिश करीब 790 मिमी (300 से 910 मिमी के बीच) थी, गर्मी में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक, और मिट्टी चिकनी से चिकनी दोमट, pH 7.9, केवल 0.7 से 0.9 मीटर गहरी और नीचे चूना पत्थर वाली थी। फिर भी वहां बेल ने बिना सिंचाई के अच्छा फल दिया।
  • मिट्टी: एक खेती गाइड के अनुसार बेल pH 5.0 से 10.0 की मिट्टी में और करीब 9 dS/m तक खारापन सह लेता है। जलभराव से बचें।

किस्में

किस्मजारी करने वालाबताई गई खासियतें
Goma YashiICAR-CIAH गोधरा, 2010 में जारीबौना, कांटे रहित, पतला छिलका, कम रेशा, लेस और बीज; फल 1.00 से 1.62 किलो, गूदा 72 से 75%; अप्रैल में पकता है; 5 मीटर x 5 मीटर के लिए ठीक
Thar SrishtiICAR-CIAH गोधरा, 2020फल 1.55 किलो, 9वें साल में प्रति पेड़ 91.5 किलो, चम्मच से निकालकर ताजा खाया जा सकता है; पूरा पका फल 12 से 18 दिन टिकता है; 7 मीटर x 7 मीटर पर लगाएं
Thar PrakritiICAR-CIAH गोधराफल 1.40 किलो, 12वें साल में प्रति पेड़ 115.75 किलो; कागज जैसा छिलका, ज्यादा रेशा; देर से पकती है (मई का पहला हफ्ता); शरबत, मुरब्बा और पाउडर के लिए ठीक; 8 मीटर x 6 मीटर
Thar ShivangiICAR-CIAH गोधराफल 1.35 किलो, 11वें साल में प्रति पेड़ 109.15 किलो; छोटा कद, ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट; 6 मीटर x 6 मीटर
Narendra Bael-5, 7, 9, 16, 17NDUAT, कुमारगंज, फैजाबादमध्य प्रदेश के एक ट्रायल में NB-7 का फल सबसे भारी (3.97 किलो) और गूदा सबसे ज्यादा (70.71%) रहा; उपज के लिए NB-17 की सिफारिश हुई
CISH Bael-1, CISH Bael-2ICAR-CISH, लखनऊउसी ट्रायल में CISH Bael-2 पर प्रति पेड़ सबसे ज्यादा फल (33.96) और CISH Bael-1 में सबसे ज्यादा TSS (39.69 डिग्री Brix) रहा

उपज के आंकड़े अलग-अलग जगहों और पेड़ की उम्र के हैं, इसलिए इनकी आपस में तुलना नहीं हो सकती। ICAR-CIAH सलाह देता है कि अपनी कई किस्में साथ लगाएं ताकि जनवरी से जुलाई तक फल मिलता रहे। अपने जिले के सबसे नजदीक परखी गई किस्म चुनें और अपने KVK से पूछें।

रोपण सामग्री और दूरी

  • पौध तैयार करना: एक साल के बीजू पौधों को मूलवृंत बनाकर उन पर कलम (budding) की जाती है। मानसून से पहले मई और जून में एक महीने पुरानी कलिका से खेत में ही patch budding करने पर 95% से ज्यादा सफलता मिलती है; softwood grafting में 85% से ज्यादा। किसी नामी किस्म के कलमी पौधे ही लें; बीजू पेड़ देर से फल देते हैं और एक जैसे नहीं होते।
  • गड्ढे: 1 मीटर x 1 मीटर x 1 मीटर, जिन्हें गोबर की खाद और ऊपरी मिट्टी के 50:50 मिश्रण से भरें, साथ में 125 ग्राम सिंगल सुपरफॉस्फेट और 150 ग्राम नीम की खली मिलाएं। शुरुआती सालों में दीमक से बचाव के लिए chlorpyriphos 1 से 2 मिली प्रति लीटर से गड्ढे को भिगोने की सलाह है (लेबल और अपने KVK की बात मानें)।
  • मौसम: पहली बारिश के तुरंत बाद लगाएं ताकि पौधा मानसून में जम जाए।
  • दूरी और घनत्व: 5 मीटर x 5 मीटर पर प्रति हेक्टेयर 400 पेड़ (करीब 160 प्रति एकड़); 6 मीटर x 6 मीटर पर करीब 280 प्रति हेक्टेयर (113 प्रति एकड़); 7 मीटर x 7 मीटर पर करीब 204 प्रति हेक्टेयर (82 प्रति एकड़)।

खाद, सिंचाई और छंटाई

  • प्रति पेड़ मात्रा: ICAR-CIAH की उत्पादन गाइड प्रति पौधा साल में 10 किलो गोबर की खाद, 50 ग्राम नाइट्रोजन, 25 ग्राम फॉस्फोरस और 50 ग्राम पोटाश दो बार में देने को कहती है, जो 10 साल की उम्र तक इसी अनुपात में बढ़ती है। खाद, आधा N और K और पूरा P पहली बारिश के बाद डालें, बाकी अगस्त के आखिरी हफ्ते में। Goma Yashi के ट्रायल में 1 साल की उम्र पर 10 किलो FYM, 25 ग्राम N, 50 ग्राम P और 50 ग्राम K दिया गया और हर साल बढ़ाया गया, साथ में जिंक सल्फेट (6वें साल से 100 ग्राम प्रति पेड़)।
  • प्रति हेक्टेयर: प्रति हेक्टेयर 400 पेड़ मानें तो साल 1 की मात्रा करीब 4 टन FYM, 20 किलो N, 10 किलो P और 20 किलो K प्रति हेक्टेयर बैठती है, और पेड़ की उम्र के साथ बढ़ती है। सूक्ष्म पोषक तत्व तीसरे साल के बाद दिए जाते हैं।
  • पानी: Goma Yashi ट्रायल के पौधों में कभी सिंचाई नहीं हुई; वे थाले में 20 सेमी मोटी धान की पुआल की मल्च पर टिके रहे, जो हर साल बदली गई। जहां पानी मिलता हो, वहां एक खेती गाइड छोटे पौधों को साल में 8 से 10 सिंचाई और फल बनते समय बड़े पेड़ों को 4 से 5 सिंचाई बताती है; देखें drip irrigation।
  • छंटाई: पहले 3 से 4 साल में modified leader system में ढालें, फिर पेड़ के पत्ते झड़ने पर एक साल छोड़कर सालाना बढ़वार का करीब 25% छांटें (ट्रायल में मई में)।

कीट, रोग और विकार

  • कीट: पत्तियों पर लगने वाली lemon butterfly की इल्लियां सबसे बड़ा नुकसान करती हैं। Citrus leaf miner, spiralling whitefly और scale कम या कहीं-कहीं पाए जाते हैं। Bacillus thuringiensis और पीले चिपचिपे ट्रैप रासायनिक विकल्पों के साथ सुझाए गए हैं।
  • रोग: बेल में कोई गंभीर रोग नहीं है, लेकिन canker (Xanthomonas), shot hole, चूर्णिल आसिता, गोंद रोग, डंठल सिरे का सड़न और कटाई के बाद फल सड़न होते हैं। तुड़ाई में फल पर चोट न लगने दें; shell soft rot के लिए 52 डिग्री सेल्सियस के गर्म पानी में डुबोना बताया गया है।
  • फल गिरना और धूप से झुलसना: फल गिरना मल्च, संतुलित पोषण, 0.1% बोरेक्स या मटर के दाने के आकार पर NAA से घटता है। गर्म अर्ध-शुष्क इलाकों में धूप से खुला छिलका भूरा पड़ जाता है; पेड़ की छाया, मल्च और फल को foam net से ढकने से मदद मिलती है।
  • किसी भी छिड़काव के लिए लेबल और अपने KVK की बात मानें। देखें pests।

कटाई और उपज

  • फल आने में समय: Goma Yashi के ट्रायल में 2वें साल से फल लगना शुरू हुआ, लेकिन आर्थिक उपज 5वें साल के बाद आई।
  • तुड़ाई: फल को एक-एक करके 2 से 3 सेमी डंठल के साथ तोड़ें ताकि सड़न न लगे। गोधरा में किस्में करीब अप्रैल से मई की शुरुआत तक पकती हैं; खेती गाइडें अलग-अलग क्षेत्रों के लिए फरवरी से मई का समय बताती हैं।
  • प्रति पेड़ उपज, Goma Yashi, बिना सिंचाई, 5 मीटर x 5 मीटर: 2वें साल में 0.57 किलो से बढ़कर 10वें साल में 59.27 किलो, जो करीब 237 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (करीब 96 क्विंटल प्रति एकड़) है।
  • नई Thar किस्में: शोध केंद्र पर 9 से 12 साल में प्रति पेड़ 91.5 से 115.75 किलो; किसानों के खेत में पूरी उपज इससे अलग हो सकती है।
💡 सुझाव: जो किस्म लगानी है, उसके लिए खरीदार से लिखित में प्रति किलो भाव मांगें। नीचे दी गई शोध की कमाई दो मानकर चलाए गए भावों पर निकाली गई है, बाजार भाव पर नहीं।

लागत और कमाई

  • केंद्र का नतीजा: बिना सिंचाई, 5 मीटर x 5 मीटर पर Goma Yashi के लिए ICAR-CIAH ने 10वें साल में लागत घटाकर शुद्ध मुनाफा माना ₹10 प्रति किलो पर ₹1,87,080 प्रति हेक्टेयर और ₹20 प्रति किलो पर ₹4,24,160 प्रति हेक्टेयर। यह मोटे तौर पर प्रति एकड़ ₹76,000 से ₹1.72 लाख है। ये एक जगह के, 10वें साल के आंकड़े हैं; शुरुआती सालों में कमाई बहुत कम होती है (₹10 प्रति किलो पर कुल आय 2वें साल में केवल ₹2,280 प्रति हेक्टेयर थी)।
  • हिसाब, अपने भाव से दोहराएं: प्रति एकड़ पेड़ x प्रति पेड़ किलो x भाव। 160 पेड़, 59 किलो और ₹10 प्रति किलो पर कुल आय करीब ₹94,000 प्रति एकड़ बैठती है; ₹20 पर करीब ₹1.9 लाख।
  • सूखे इलाके में चालू खर्च कम है (खाद, मल्च, छंटाई, तुड़ाई), लेकिन नकद आमदनी देर से आती है; 5 से 6 साल थोड़ी आमदनी के लिए तैयार रहें। कर्ज के लिए मौजूदा लागत मानक अपने जिला बागवानी कार्यालय से पूछें (KCC)।

बाजार और बिक्री

  • ताजा फल स्थानीय बाजारों में बिकता है; प्रोसेसर शरबत, स्क्वैश, कैंडी, मुरब्बा, पाउडर और आयुर्वेदिक तैयारियां बनाते हैं। Goma Yashi को शरबत, स्क्वैश, कैंडी और मुरब्बे के लिए ठीक बताया गया है; Thar Prakriti जैसी ज्यादा रेशे वाली किस्मों को पाउडर के लिए। mandi bhav देखें; बेल हर जगह दर्ज नहीं होता।
  • मांग स्थानीय और मौसमी है, और फल की गुणवत्ता 1 से 3 हफ्ते में गिर जाती है, इसलिए प्रोसेसिंग या नजदीकी खरीदार मायने रखता है। समूह में FPO के जरिए बेच सकते हैं।
  • तय buy-back का वादा करने वाले पौध विक्रेताओं से सावधान रहें। बाग की मदद के लिए subsidy finder देखें; बेल रोपण की मौजूदा प्रति हेक्टेयर दर जिला बागवानी कार्यालय से पूछें।

स्रोत