चक्र फूल (star anise) ऐसी फसल नहीं है जिसे लगाकर भारतीय किसान जल्दी कमाई की उम्मीद करे। भारत का अपना स्रोत हिमालयी प्रजाति Illicium griffithii (स्थानीय नाम "lissi") है, जो अरुणाचल प्रदेश के ठंडे, नम जंगलों में करीब 2,000 से 3,000 मीटर पर जंगली उगती है और जिसे उगाया नहीं, बल्कि बीनकर जमा किया जाता है, जबकि दुकानों में बिकने वाला चक्र फूल चीन और वियतनाम का Illicium verum है। इसे उगाने का मतलब है ऊंचे पहाड़ी इलाके की जमीन पर धीरे बढ़ने वाला जंगली पेड़, जिसके लिए भारत में कोई तय खेती-पैकेज नहीं है और जिसका बाजार ज्यादातर आयात से तय होता है।

भारत ने 2023-24 में ₹439.09 करोड़ मूल्य का 9,215 टन चक्र फूल आयात किया, जो 2019-20 के 6,606 टन से ज्यादा है, जबकि देश के भीतर संग्रह हर गांव में कुछ टन का है। इस पन्ने को यह जानने के लिए पढ़ें कि अभी क्या पता है, और पौध पर पैसा लगाने से पहले राज्य के वन या बागवानी विभाग और नजदीकी KVK से बात करें।

भारत में यह कहां उगता है

  • अरुणाचल प्रदेश: Illicium griffithii पश्चिम कामेंग, तवांग, लोहित और निचले सुबनसिरी जिलों में मिलता है, और पक्के टाइगर रिजर्व (पूर्वी कामेंग) में बहुत कम संख्या में। एक वन सर्वे में यह 2,000 से 3,000 मीटर के बीच मिला, सबसे ज्यादा 2,500 से 2,750 मीटर पर, उपोष्णकटिबंधीय और शीतोष्ण चौड़ी पत्ती वाले जंगल में, बड़े पेड़ों के नीचे दूसरी और तीसरी मंजिल में।
  • दूसरे राज्य: यह प्रजाति नागालैंड, मणिपुर और मेघालय में भी बताई गई है। हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड में चक्र फूल के "संभव" होने की बातें शोध के दावे हैं, कोई मौजूदा फसल नहीं।
  • Illicium verum (व्यापार वाली प्रजाति): चीन में यह मुख्य रूप से गुआंग्शी में 200 से 700 मीटर पर उगाई जाती है, गहरी, अच्छे जल निकास वाली, उपजाऊ, नम, अम्लीय रेतीली दोमट या दोमट मिट्टी में। सूखी, बंजर या जलभराव वाली जमीन पर यह खराब बढ़ती है। इस प्रजाति का कोई भारतीय ट्रायल आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए भारत में इसका प्रदर्शन अज्ञात है।

प्रजातियां और उनका फर्क

प्रजातिकहांस्थिति और उपयोग
Illicium griffithii (lissi)जंगली, 2,000 से 3,000 मीटर, अरुणाचल और पूर्वोत्तरIUCN में संकटग्रस्त (Endangered); अरुणाचल में Near Threatened और मेघालय में Critically Endangered। फल चाय, स्थानीय शराब और खांसी, दांत दर्द व पेट दर्द की दवा में काम आता है।
Illicium verumगुआंग्शी और युन्नान (चीन), वियतनाम और दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशदुनिया के व्यापार का खाने वाला मसाला। विश्व उत्पादन का करीब 80% चीन में होता है, और उसका 90% से ज्यादा गुआंग्शी में।
Illicium anisatum (जापानी चक्र फूल)पूर्वी एशियाजहरीला (anisatin और neoanisatin)। असली चक्र फूल जैसा दिखता है और मिलावट में आने पर जहर फैला चुका है।

भारत में दोनों में से किसी प्रजाति की कोई नामित उन्नत किस्म जारी नहीं हुई है। पौध और रोपण सामग्री किसी ऐसे मानक नर्सरी रास्ते से नहीं बिकती जिसकी पुष्टि हो सके, इसलिए किसान को वन विभाग या किसी शोध संस्थान से लेना होगा।

खेती: क्या पता है और क्या नहीं

  • पेड़ और फूल: जंगल में पेड़ जनवरी से अप्रैल तक फूलता है और फल पतझड़ में पकता है। उसी सर्वे में एक साल छोड़कर फल आने का क्रम दिखा, यानी कुछ सालों में अच्छी और कुछ में खराब फसल, जो Mongabay India में बताए अरुणाचल के पहले व्यावसायिक उत्पादक के अनुभव से मेल खाता है।
  • पुनर्जनन: सर्वे में 1,372 अंकुर, 1,358 छोटे पौधे और 314 बड़े पेड़ गिने गए; अंकुर अच्छी संख्या में थे, लेकिन छोटे पौधों का बचना कमजोर रहा। छोटे पेड़ जमाना ही सबसे कठिन हिस्सा है।
  • उपलब्ध नहीं: दूरी, खाद की मात्रा, पहली फसल के साल या प्रति पेड़ उपज के कोई जांचे हुए भारतीय आंकड़े नहीं हैं। लिखित स्रोत के बिना किसी नर्सरी के इन आंकड़ों को न मानें। अपने जिले के राज्य वन विभाग या KVK से पूछें।
  • कीट: अरुणाचल में एक नया छोटा पीला कीट, भूरे धब्बों वाला, पेड़ों की बढ़त रोकता बताया गया है, और उसकी औपचारिक पहचान नहीं हुई है। पशुओं का रौंदना भी छोटे पेड़ों के लिए दर्ज खतरा है।

कटाई

  • अरुणाचल में संग्रह अक्टूबर से दिसंबर तक चलता है, ज्यादातर महिलाएं जंगल की जमीन से गिरे फल बीनती हैं। सूखा फल साबुत बेचा जाता है।
  • Illicium verum का फल पतझड़ और सर्दी में तब तोड़ा जाता है जब वह हरे से पीला पड़ता है, और फिर धूप में सुखाया जाता है; यह चीन का तरीका है, भारत की कोई सिफारिश नहीं।
  • गांव की उपज के आंकड़े: एक गांव, न्युकमादुंग, में 2022 में करीब 6 टन और 2023 में करीब 4 टन संग्रह बताया गया।

भाव और बाजार

  • स्थानीय भाव: 2013 में ₹120 से ₹150 प्रति किलो, हाल के सालों में करीब ₹150 प्रति किलो, महामारी के समय आयात पर रोक में ₹450 प्रति किलो तक उछाल, और वियतनामी माल की होड़ से हाल में ₹180 से ₹220 प्रति किलो बताया गया (Mongabay India, फरवरी 2025)। वन विभाग की ₹31 प्रति किलो की रॉयल्टी बताई गई है। भाव बहुत ऊपर-नीचे होते हैं, इसलिए योजना से पहले ताजा दर देखें।
  • बिचौलिए: व्यापार असंगठित है, गांव वालों को अक्सर ग्रेडिंग के मानक नहीं पता, और दूर के गांवों से ढुलाई महंगी है। सीधा बाजार न मिलना मुख्य कमी है।
  • आयात भाव तय करते हैं: कोई भी बड़ी रोपाई चीन और वियतनाम के चक्र फूल के सामने बिकेगी। बिक्री की कोशिश से पहले FPO जैसे समूह से जुड़ें, और export buyers तभी देखें जब आपके पास ग्रेड की हुई, जांची हुई उपज हो।
  • लागत और कमाई: इस फसल की खेती की लागत या प्रति एकड़ आमदनी का कोई भरोसेमंद भारतीय आंकड़ा नहीं है, इसलिए यहां नहीं दिया गया। "प्रति एकड़ लाखों" का वादा करने वाले किसी ब्रोशर के पीछे कोई स्रोत नहीं है।
💡 सुझाव: अरुणाचल के कुछ हिस्सों में गांव की समितियां जंगली lissi पेड़ों की रक्षा करती हैं और पेड़ काटने पर ₹5,000 से ₹50,000 का जुर्माना लगाती हैं। रोपण सामग्री के लिए जंगल के पेड़ कभी न काटें या उखाड़ें, और वन विभाग से पूछें कि फल बीनने और ढोने के क्या नियम हैं।

संरक्षण और नियम

  • Mongabay India की रिपोर्ट के अनुसार Illicium griffithii की आबादी करीब 84 सालों में 60% से ज्यादा घट गई है, मुख्य कारण फलों का जरूरत से ज्यादा संग्रह, पेड़ों की कटाई, जंगल कटना और जमीन का उपयोग बदलना हैं।
  • WWF-India अरुणाचल के नौ स्थानों पर Community Conserved Areas का समर्थन करता है ताकि टिकाऊ संग्रह और बाजार से जुड़ाव को बढ़ावा मिले।
  • वन सर्वे जंगली पेड़ों पर दबाव घटाने के लिए एग्रोफॉरेस्ट्री खेती, टिकाऊ संग्रह की ट्रेनिंग और गांव स्तर की सुरक्षा की सलाह देता है।

स्रोत