सर्पगंधा (Rauvolfia serpentina) भारत के गर्म और नमी वाले इलाकों में 2 से 2.5 साल की जड़ वाली फसल के रूप में उगाई जा सकती है, लेकिन यह तभी ठीक है जब बीज का स्रोत दस्तावेज वाला हो और कोई खरीदार आपकी सूखी जड़ लेने को तैयार हो। जंगल में यह संरक्षित और संकटग्रस्त पौधा है, जंगली पौधे का निर्यात प्रतिबंधित है, और जड़ें वजन के हिसाब से मामूली भाव पर बिकती हैं, इसलिए कमाई धीमी और सीमित है।
जड़ ही उपज है। सूखी जड़ आयुर्वेदिक और दवा कंपनियां इसके एल्कलॉइड के लिए खरीदती हैं, जिनमें reserpine सबसे जाना-पहचाना है। ट्रायल और हैंडबुक की उपज 30 महीने बाद प्रति एकड़ करीब 0.75 से 1 टन सूखी जड़ है।
भारत में यह कहां उगती है
- प्राकृतिक क्षेत्र: लगभग 1,000 मीटर तक हिमालय की तलहटी, पूर्वी और पश्चिमी घाट की निचली पहाड़ियां, और अंडमान। FRLHT के अनुसार यह कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में 500 से 1,200 मीटर पर नम पर्णपाती जंगलों में काफी आम है, और इन तीनों राज्यों में इसे संकटग्रस्त माना गया है।
- जलवायु: एक हैंडबुक 10 से 30 डिग्री C, गर्म नम मौसम और जल निकास के साथ अच्छी बारिश बताती है; पूर्वोत्तर को आदर्श कहा गया है।
- मिट्टी: ह्यूमस वाली रेतीली दोमट से लाल लेटराइट दोमट, हल्की अम्लीय (उसी स्रोत में pH 4.6 से 6.5)। जलभराव वाली जमीन से बचें।
- कृषि वानिकी: इसे सुबबूल की कतारों के बीच अंतरफसल के रूप में उगाया गया है, क्योंकि यह आंशिक छांव सह लेती है।
रोपण सामग्री और नर्सरी
- इसे बीज से, और तने या जड़ की कलमों से लगाया जाता है।
- बीज: 500 वर्ग मीटर की नर्सरी क्यारी में करीब 6 किलो बीज बोने से 1 हेक्टेयर के लिए पौध मिलती है (एकड़ के लिए करीब 2.4 किलो)। क्यारी की मिट्टी में एक तिहाई अच्छी सड़ी खाद और पत्ती की खाद और दो तिहाई सिल्ट दोमट रखें। बीज 15 से 20 दिन में उगता है और पौध 40 से 50 दिन में रोपने लायक हो जाती है।
- बीज या कलमें सिर्फ राज्य वन विभाग, State Medicinal Plants Board, ICAR या विश्वविद्यालय से लें, जो बता सकें कि सामग्री कहां से आई। व्यापार के नमूनों में अक्सर करीबी प्रजातियों (R. tetraphylla, R. densiflora, R. micrantha) की जड़ें मिला दी जाती हैं, इसलिए खरीदार के लिए सही प्रजाति मायने रखती है।
- बिक्री के लिए किसी नामित उन्नत किस्म की पुष्टि नहीं हुई; अपने KVK या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से पूछें।
दूरी और रोपाई
| दूरी | प्रति हेक्टेयर (एकड़) पौधे | टिप्पणी |
|---|---|---|
| 30 x 30 सेमी | 80,000 से 1,00,000 (32,000 से 40,000) | हैंडबुक की सिफारिश |
| 60 x 45 सेमी | करीब 37,000 (15,000) | कृषि वानिकी ट्रायल में तीन दूरियों में सबसे अच्छी: 1.866 टन/हेक्टेयर हवा में सूखी जड़ |
- उसी ट्रायल में 45 x 30 सेमी और 45 x 45 सेमी भी आजमाई गई; सबसे चौड़ी दूरी पर जड़ की उपज सबसे ज्यादा रही।
- बारिश की शुरुआत में रोपाई करें ताकि पौध बिना सिंचाई के जम जाए।
सिंचाई और देखभाल
- आमतौर पर यह बारानी फसल है। जहां पानी हो, गर्मी में 4 और सर्दी में 2 सिंचाई, एक-एक महीने के अंतर पर, उपज बढ़ाती हैं।
- इस फसल के लिए भारत की कोई पुष्ट खाद सारणी नहीं मिली। आधार में अच्छी सड़ी गोबर की खाद डालें और मिट्टी जांच के आधार पर मात्रा के लिए KVK से पूछें।
- खेत को निराई से साफ रखें, खासकर पहले साल।
कीट और रोग
- जड़-गांठ सूत्रकृमि गांठें बनाता है और पौधे बौने रह जाते हैं। हैंडबुक में pyralid सुंडी और cockchafer की सफेद गिडार भी बताई गई हैं।
- पुरानी गाइडों में दानेदार सूत्रकृमिनाशक और एक ऑर्गेनोफॉस्फेट स्प्रे के नाम हैं। ऐसे कई उत्पाद प्रतिबंधित हैं, इसलिए वही इस्तेमाल करें जो KVK बताए कि अभी अनुमत है, और लेबल के हिसाब से चलें।
- जिस खेत की पिछली फसल में सूत्रकृमि रहे हों वहां न लगाएं, और खराब जल निकास वाले प्लॉट से बचें।
कटाई और उपज
- जड़ें रोपाई के करीब 30 महीने बाद खोदी जाती हैं। भारतीय हालात की एक पुरानी रिपोर्ट में सिंचित रेतीली चिकनी दोमट पर 2 साल के बाग से प्रति एकड़ करीब 2,000 पौंड और 3 साल के बाग से 3,000 पौंड हवा में सूखी जड़ मिलने की बात है (मोटे तौर पर 0.9 और 1.4 टन प्रति एकड़)।
- एक हैंडबुक प्रति हेक्टेयर 2,000 से 2,500 किलो सूखी जड़ बताती है (800 से 1,000 किलो प्रति एकड़)। कृषि वानिकी ट्रायल में 1.866 टन/हेक्टेयर (करीब 755 किलो प्रति एकड़) मिली।
- पूरी जड़, बारीक जड़ों समेत, बचाकर खोदें, धोएं और छांव में या ड्रायर में सुखाएं। हैंडबुक के विनिर्देश में जड़ के चूर्ण में reserpine के रूप में कुल एल्कलॉइड 0.15% से ऊपर होना चाहिए, इसलिए खरीदार जांच कर सकते हैं।
लागत और कमाई
- भाव: FRLHT सूखी जड़ का भाव ₹110 से ₹150 प्रति किलो दर्ज करता है। यह आंकड़ा बिना तारीख का है, इसलिए खरीदारों से आज का भाव पूछें।
- हिसाब: 2,000 से 2,500 किलो प्रति हेक्टेयर x ₹110 से ₹150 = ₹2.2 लाख से ₹3.75 लाख प्रति हेक्टेयर, यानी प्रति एकड़ करीब ₹0.9 लाख से ₹1.5 लाख, जो करीब 30 महीने बाद एक बार मिलता है। ट्रायल की उपज 755 किलो प्रति एकड़ पर ₹110 के भाव से करीब ₹83,000 बैठती है।
- पौध, मजदूरी और खुदाई का खर्च इसी में से निकालना होगा, और भारत में खेती की लागत का कोई पुष्ट आंकड़ा नहीं मिला। इसे 2.5 साल की मामूली अतिरिक्त आमदनी मानें, जल्दी कमाई वाली फसल नहीं।
बाजार और कानूनी सीमाएं
- Rauvolfia serpentina CITES के Appendix II में है और भारत की निर्यात निषिद्ध सूची में। जंगल से पौधे और उसके उत्पादों का निर्यात (फॉर्मूलेशन को छोड़कर) प्रतिबंधित है, इसलिए किसान घरेलू आयुर्वेदिक और दवा खरीदारों को बेचते हैं।
- जंगल से इकट्ठा करने पर राज्यों के नियम लागू हैं। अपनी जमीन पर दस्तावेज वाले बीज से उगाना सुरक्षित रास्ता है; जड़ ले जाने से पहले स्थानीय परिवहन नियम देख लें।
- किसान उत्पादक संगठन के जरिए बेचने से खरीदार तक पहुंचना आसान होता है। subsidy finder देखें; National Medicinal Plants Board की खेती के लिए मदद है, लेकिन सर्पगंधा की मौजूदा दर की पुष्टि नहीं हुई, इसलिए State Medicinal Plants Board से पूछें।
स्रोत
- FRLHT ENVIS, Rauvolfia serpentina
- Sarpagandha cultivation handbook summary (secondary source)
- Cultivation of Sarpagandha as intercrop under subabul based medicinal agroforestry system
- Indian Horticulture, Sarpgandha, a potential ayurvedic plant (ICAR)
- Rauvolfia serpentina, CITES and export status (secondary source)
