गिलोय (गुडूची, Tinospora cordifolia) लगभग हर तरह की मिट्टी में उग जाती है, लेकिन यह कम भाव वाली औषधीय तने की फसल है: 29 सितंबर 2026 को भाव बताने वाली एकमात्र मंडी में ₹30 प्रति किलो दिखा, और उसी मंडी में जुलाई और अगस्त में भाव ₹5 से ₹33 प्रति किलो रहा। यह तभी फायदा देती है जब पक्का खरीदार हो, लागत कम हो और चढ़ने के लिए पेड़ या जाली पहले से मौजूद हो।

भारत में छपे उपज के आंकड़े कई गुना अलग-अलग हैं, इसलिए हिसाब अपने छोटे प्लॉट से लगाएं। नीचे के तथ्य AICRP और NMPB परियोजनाओं के तहत भारतीय विश्वविद्यालयों के ट्रायल से हैं; लागत की कोई जांची हुई तालिका या सब्सिडी दर नहीं मिली।

यह कहां उगती है

  • गिलोय उष्णकटिबंधीय भारतीय उपमहाद्वीप की मूल निवासी है और पत्ती झाड़ने वाली बेल के रूप में लगभग सभी मिट्टियों और कई तरह की जलवायु में उगती है। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय का एक पेपर प्राकृतिक क्षेत्र करीब 300 मीटर ऊंचाई तक बताता है, और इसका ट्रायल रांची (646 मीटर, लैटेराइट रेतीली दोमट, 23 से 38 °C, करीब 1,400 मिमी बारिश) में सफल रहा।
  • भारतीय ट्रायल झारखंड (रांची), तमिलनाडु (अन्नामलाई विश्वविद्यालय) और पश्चिम बंगाल (विश्व-भारती) में हुए हैं, इसलिए फसल पूर्वी, दक्षिणी और पठारी हालात में परखी गई है।

रोपण सामग्री और जीनोटाइप

  • प्रवर्धन: पक्के तने की कलमें। अन्नामलाई विश्वविद्यालय के NMPB परियोजना ट्रायल में कलमों को पॉलीबैग में जमाकर फिर खेत में लगाया गया; रोपाई मई से जून में हुई।
  • सहारा: बेल को चढ़ने के लिए कुछ चाहिए। अन्नामलाई पेपर कहता है कि नीम और आम के पेड़ पसंदीदा सहारे हैं, जिनसे औषधीय गुण बेहतर माने जाते हैं (यह बताई गई मान्यता है, नापा हुआ नतीजा नहीं)।
  • जीनोटाइप: कोई नाम वाली जारी किस्म नहीं मिली; रांची ट्रायल में ICAR-NBPGR द्वारा IC नंबर दिए गए सात जर्मप्लाज्म एक्सेशन की तुलना हुई (ICAR-DMAPR द्वारा प्रायोजित AICRP औषधीय और सुगंधित पौधे के तहत 30 के सेट में से)। इनकी रोपण सामग्री किसानों को मिलती है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई; BAU रांची या ICAR-DMAPR से पूछें।
एक्सेशनप्रति पौधा ताजा तना (ग्राम)Giloy-satva (%)टिप्पणी
IC-06398991,319.64.74रांची ट्रायल में सबसे अच्छा (कॉलर 32.1 मिमी)
IC-06398981,269.14.36दोनों में दूसरे नंबर पर
IC-06399141,229.63.50सबसे कम सत्व
IC-06398961,221.64.06
IC-06399101,162.94.32
IC-06398901,152.73.56
IC-06399081,128.34.21सबसे कम तने का वजन

दूरी

  • BAU रांची ट्रायल में 100 x 100 सेमी रखी गई (10,000 पौधे प्रति हेक्टेयर, करीब 4,000 प्रति एकड़)। उसी पेपर में बताए एक ट्रायल में मध्य अप्रैल में रोपाई के साथ 3 मीटर x 3 मीटर रखी गई और 3.67% सत्व मिला।
  • कम दूरी का मतलब ज्यादा कलमें और ज्यादा सहारे; ज्यादा दूरी पेड़ों पर चढ़ाने के लिए ठीक रहती है। बड़ा करने से पहले एक दूरी छोटे प्लॉट में आजमाएं।

खाद

  • अन्नामलाई ट्रायल में जैविक खादों की तुलना हुई: प्रति हेक्टेयर 5 टन biodynamic compost (प्रति एकड़ 2 टन) के साथ 3% vermiwash का पत्तों पर छिड़काव देने से रोपाई के 90 दिन बाद सबसे ज्यादा पका तना मिला, 467 ग्राम प्रति पौधा, जबकि बिना खाद वाले में 219 ग्राम। प्रति हेक्टेयर 12.5 टन FYM (प्रति एकड़ 5 टन) के साथ vermiwash से 385 ग्राम मिला।
  • उस ट्रायल में तने में सूखा पदार्थ प्रति 100 ग्राम में 24 से 46 ग्राम रहा, सबसे अच्छे उपचार में सबसे ज्यादा (46 ग्राम)।
  • मिट्टी की जांच और किसी भी उर्वरक के लिए fertilizers देखें। पता कर लें कि आपका खरीदार अवशेष या जैविक की कोई शर्त रखता है या नहीं।
  • यहां कोई भारतीय कीट या रोग पैकेज जांचा नहीं जा सका; अपने KVK से पूछें और इंसानी इस्तेमाल के लिए बिकने वाली फसल पर रासायनिक छिड़काव से बचें। देखें pests।

कटाई और उपज

  • विश्व-भारती के पेपर के अनुसार कटाई तब शुरू होती है जब तने 2.5 सेमी से मोटे हो जाएं। रांची ट्रायल में एक्सेशन के हिसाब से कॉलर व्यास 19 से 32 मिमी था।
  • रांची ट्रायल में प्रति पौधा ताजा तने का वजन 1,128 से 1,320 ग्राम रहा। प्रति हेक्टेयर 10,000 पौधों पर यह करीब 11 से 13 टन ताजा तना प्रति हेक्टेयर (4.5 से 5.3 टन प्रति एकड़) बैठता है, लेकिन पेपर में उस कटाई के समय पौधे की उम्र नहीं लिखी है, इसलिए इसे ऊपरी सीमा मानें।
  • इसके उलट, वही साहित्य करीब 1,500 किलो ताजा तना प्रति हेक्टेयर (विश्व-भारती) और दो साल में 300 किलो सूखा प्रति हेक्टेयर (रांची पेपर में उद्धृत) का बहुत कम आंकड़ा दोहराता है। करीब आठ गुना का यह फर्क ही बताता है कि छोटा ट्रायल प्लॉट क्यों जरूरी है।
  • तने के टुकड़े बेचने से पहले छांव में सुखाएं; अन्नामलाई की नाप में सूखा तना ताजे तने के वजन का करीब चौथाई से आधा रहा।
  • प्रोसेसर giloy-satva (तने का स्टार्च) निकालते हैं; रांची के एक्सेशन से 3.5 से 4.74% मिला।
💡 सुझाव: एक एकड़ लगाने से पहले अपने खरीदार से लिखित में उत्पाद का रूप (ताजा तना, सूखा तना या सत्व), भाव और ढुलाई कौन देगा, पूछ लें। गिलोय का एकमात्र मंडी भाव एक बाजार में 0.04 टन की आवक का मिला, जो योजना बनाने के लिए बहुत कम है।

लागत और कमाई

  • भाव (Agmarknet, ACROP के जरिए): नीमच APMC, मध्य प्रदेश, 29 सितंबर 2026 को ₹3,000 प्रति क्विंटल (₹30 प्रति किलो), एक मंडी और 0.04 टन। उसी बाजार में 28 जुलाई से 31 अगस्त 2026 के बीच ₹500 से ₹3,300 प्रति क्विंटल रहा। उत्पाद का रूप नहीं लिखा है।
  • हिसाब: एक टन सूखा तना ₹5 प्रति किलो पर ₹5,000 और ₹30 प्रति किलो पर ₹30,000 में बिकता है। ट्रायल जैसे 11 से 13 टन ताजे तने और चौथाई से आधे सूखे अंश पर सूखा तना मोटे तौर पर 3 से 6 टन प्रति हेक्टेयर हो सकता है, जो उस भाव सीमा में करीब ₹15,000 से ₹2 लाख प्रति हेक्टेयर बैठता है। यह ऊपरी सिरे का उदाहरण है, उपज की गारंटी नहीं।
  • खर्च: कलमें, पॉलीबैग या नर्सरी, सहारे या जाली (मुख्य खर्च, जब तक पेड़ों का इस्तेमाल न हो), खाद, बेल संभालने, कटाई और सुखाने की मजदूरी। प्रति एकड़ भारतीय लागत का जांचा हुआ आंकड़ा नहीं मिला।

बाजार और जोखिम

  • गिलोय का तना Ayurvedic Pharmacopoeia of India में आधिकारिक औषधि है, और प्रोसेसर तने का चूर्ण, सत्व, गोलियां, जूस और चाय बेचते हैं।
  • भाव सबसे बड़ा जोखिम है: तना मामूली दर पर प्रति किलो बिकता है और एक बाजार में कुछ हफ्तों में भाव ₹5 से ₹33 प्रति किलो के बीच झूलता रहा।
  • COVID-19 के दौरान रोग प्रतिरोधक बढ़ाने वाली दवा के रूप में मांग उछली, लेकिन रांची का पेपर खुद ऐसे लोगों में लिवर चोट की रिपोर्टों का हवाला देता है जिन्होंने गिलोय इस तरह इस्तेमाल की (Murkute et al., 2022)। पहले की मांग के उछाल को अनिश्चित मानें।
  • किसी आयुर्वेदिक निर्माता या औषधीय पौधों के FPO के साथ लिखित buy-back खोजें; देखें FPO, mandi bhav और subsidy finder। औषधीय पौधों के लिए NMPB की मदद मौजूद है, लेकिन गिलोय की कोई मौजूदा दर यहां जांची नहीं जा सकी।

स्रोत