अश्वगंधा (Withania somnifera) भारत में बारानी इलाकों की एक कारगर फसल है: यह हल्की, अच्छी जल निकासी वाली, यहां तक कि कमजोर मिट्टी में भी कम पानी और खाद में उग जाती है, और इसकी सूखी जड़ का आयुर्वेदिक और न्यूट्रास्यूटिकल बाजार में स्थिर उठाव है। पेच भाव में है: यह बहुत ऊपर-नीचे होता है, और जड़ से अच्छी कमाई तभी होती है जब ग्रेड अच्छा हो और खरीदार भरोसेमंद हो।
मध्य प्रदेश का नीमच और मंदसौर इलाका इसकी खरीद-फरोख्त का केंद्र है; फसल राजस्थान और कुछ और राज्यों में भी उगाई जाती है। नीचे की खेती की जानकारी TNAU Agritech पोर्टल से है; भाव के आंकड़े तारीख के साथ दिए गए हैं।
यह कहां उगती है और इसे क्या चाहिए
- तापमान: 20 से 35 डिग्री सेल्सियस सबसे अच्छा है; TNAU इस फसल के लिए 600 से 1,200 मीटर की ऊंचाई बताता है।
- मिट्टी: रेतीली दोमट या हल्की लाल मिट्टी, हल्की क्षारीय, pH 7.5 से 8.0। भारी चिकनी और जलभराव वाले खेत ठीक नहीं हैं और इनमें जड़ सड़ जाती है।
- बारिश: यह बारानी या हल्की सिंचाई वाली फसल के रूप में सबसे अच्छी होती है। पकते समय सूखा मौसम जड़ के लिए अच्छा रहता है। पाला और खड़ा पानी इसे नुकसान पहुंचाते हैं। किसी राज्य विश्वविद्यालय का जांचा-परखा बारिश का दायरा नहीं मिला, इसलिए कोई दायरा नहीं दिया गया है।
- मध्य प्रदेश: नीमच, मंदसौर (मनासा, जावद) की मंडियां व्यापार में आगे हैं। इन मंडियों के भाव AgMarkNet पर दर्ज होते हैं।
किस्में
| किस्म | स्रोत | टिप्पणी |
|---|---|---|
| Jawahar Asgandh-20 (JA-20) | मध्य प्रदेश (JNKVV) | मध्य प्रदेश में उगाई जाती है |
| Poshita, Rakshita | CSIR-CIMAP | ज्यादा उपज वाली रिलीज, TNAU की सूची में |
| WSR | CSIR क्षेत्रीय प्रयोगशाला (जम्मू) | TNAU की सूची में |
| Nagori | स्थानीय, राजस्थान की किस्म | पारंपरिक |
TNAU ये किस्में गिनाता है पर हर किस्म की उपज या withanolide की मात्रा नहीं बताता, इसलिए यहां कोई दावा नहीं किया गया है। बिना लेबल वाले माल की जगह किसी शोध संस्थान या कृषि विश्वविद्यालय से नाम वाली रिलीज का बीज खरीदें।
बुवाई, बीज और दूरी
- मौसम: TNAU के अनुसार फसल बरसात के आखिर में, करीब अगस्त से सितंबर में बोई जाती है और अगले साल काटी जाती है।
- बीज दर: छिटकवां बुवाई के लिए 10 से 12 किलो प्रति हेक्टेयर (करीब 4 से 5 किलो प्रति एकड़); नर्सरी तैयार करें तो करीब 5 किलो प्रति हेक्टेयर (करीब 2 किलो प्रति एकड़)।
- रोपाई: छह हफ्ते की पौध 60 सेमी x 60 सेमी पर, जो हिसाब से करीब 11,000 पौधे प्रति एकड़ (27,800 प्रति हेक्टेयर) होता है।
- दो या तीन जुताइयों से बारीक बीज क्यारी तैयार करें।
पोषण और पानी
- TNAU के अनुसार फसल मुख्य रूप से मिट्टी में बची उर्वरता पर चलती है और वह कोई खाद या उर्वरक डालने की सलाह नहीं देता। बुवाई से पहले थोड़ी बेसल गोबर की खाद आम तौर पर डाल दी जाती है; किसी भारतीय विश्वविद्यालय से उसकी जांची हुई मात्रा नहीं मिली, इसलिए कोई मात्रा नहीं दी गई है। पहले मिट्टी की जांच कराएं (देखें fertilizers)।
- सिंचाई: ज्यादातर बची हुई नमी पर, जरूरत हो तो जमाव के समय एक हल्की सिंचाई। TNAU कोई कार्यक्रम तय नहीं करता। ज्यादा पानी देने से बचें।
कीट और रोग
- डैम्पिंग-ऑफ और पौध सड़न: TNAU Trichoderma viride और Pseudomonas fluorescens, प्रत्येक 2 किलो प्रति हेक्टेयर, देने का सुझाव देता है।
- पत्ती झुलसा और शाखा सूखना: TNAU 0.3 प्रतिशत मैन्कोज़ेब का छिड़काव बताता है। छिड़काव से पहले लेबल का पालन करें और अपने KVK से पूछें; जड़ी-बूटी की जड़ें ऐसे खरीदारों को जाती हैं जो अवशेष की जांच करते हैं।
- जलभराव से बचें, जो पौध और जड़ के नुकसान की मुख्य वजह है।
कटाई और उपज
- जड़ें बुवाई के 150 से 170 दिन बाद तैयार होती हैं; TNAU कटाई का समय जनवरी से मार्च बताता है। पूरे पौधे उखाड़ें, जड़ों को ऊपरी हिस्से से काटें और सुखाएं।
- उपज: TNAU के अनुसार 400 से 1,200 किलो सूखी जड़ प्रति हेक्टेयर (करीब 160 से 485 किलो प्रति एकड़) और 200 से 500 किलो बीज प्रति हेक्टेयर (करीब 80 से 200 किलो प्रति एकड़)। दायरा बहुत चौड़ा है, और हल्की मिट्टी में अच्छे प्रबंधन से उपज ऊपरी हिस्से में रहती है।
- जड़ों को लंबाई, मोटाई, रंग और ठोसपन के हिसाब से A से D ग्रेड में बांटा जाता है। बेहतर ग्रेड का ज्यादा दाम मिलता है, इसलिए साफ-सफाई से छांटें और सुखाएं।
लागत और कमाई
- भाव (तारीख के साथ): acrop.app पर दिखे AgMarkNet आंकड़ों के मुताबिक नीमच APMC में 1 अक्टूबर 2026 को करीब ₹18,600 प्रति क्विंटल (₹186 प्रति किलो) था, मंदसौर में 18 सितंबर को ₹9,960, और नीमच में 8 मई 2026 को अचानक ₹28,900 तक चढ़ गया (ये एग्रीगेटर के आंकड़े हैं, एक दिन और एक मंडी की रीडिंग; ग्रेड नहीं बताया गया है)।
- TNAU की उपज पर कमाई का हिसाब (सिर्फ सूखी जड़): 160 किलो x ₹150 प्रति किलो है ₹24,000 प्रति एकड़; 485 किलो x ₹186 प्रति किलो है करीब ₹90,000 प्रति एकड़। बीज की बिक्री अपने भाव पर अलग से जोड़ें।
- बीज, जमीन की तैयारी, निराई, उखाड़ने और सुखाने की मजदूरी इलाके के हिसाब से बदलती है; NMPB या किसी राज्य विश्वविद्यालय से खेती की लागत का कोई जांचा-परखा आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए लगाने से पहले अपनी लागत खुद निकालें। व्यावसायिक वेबसाइटों पर ₹1 से ₹3 लाख प्रति एकड़ मुनाफे के दावे जांचे हुए नहीं हैं।
बाजार और बिक्री
- नीमच, मंदसौर और जावद की APMC मंडियों में या हर्बल प्रोसेसरों को बेचें। ताजा भाव mandi bhav पर देखें।
- भाव कुछ ही महीनों में आधा या दोगुना हो जाता है, इसलिए सबसे ऊंची रीडिंग पर भरोसा न करें; इसी मंडी में इस साल ₹9,960 से ₹28,900 तक भाव दिखा है।
- आयुष मंत्रालय के हवाले से बताया गया है कि छह साल में निर्यात करीब आठ गुना बढ़ा; पूरी रिलीज खोली नहीं जा सकी, इसलिए आंकड़े पक्के नहीं किए जा सके।
- किसी FPO से जुड़ें या बुवाई से पहले लिखित भाव और ग्रेड वाला खरीदार ढूंढ लें। ऐसी buy-back स्कीमों से सावधान रहें जो बीज या प्रशिक्षण का पैसा पहले ही मांगती हैं।
फसल बीमा मिल सकता है; देखें PMFBY, और NMPB के जरिए औषधीय पौधों पर सब्सिडी के लिए अपने राज्य औषधीय पादप बोर्ड से पूछें; मौजूदा दरें जांची नहीं गई हैं।
