कालमेघ (Andrographis paniculata) कम अवधि की, बरसात के मौसम की औषधीय जड़ी है, जो मध्य, उत्तर और दक्षिण भारत की सामान्य अच्छे जल निकास वाली मिट्टी में उग सकती है। यह तभी फायदेमंद है जब कोई एक्सट्रैक्ट बनाने वाली या आयुर्वेदिक कंपनी सूखी जड़ी खरीदने को तैयार हो। फसल खेत में लगभग 4 से 5 महीने रहती है और सूखे पूरे पौधे के रूप में बिकती है, जिसका भाव andrographolide की मात्रा पर तय होता है। इसलिए प्रति किलो भाव कम है और आमदनी पैदावार व पक्के खरीदार पर निर्भर करती है।
National Medicinal Plants Board ने कालमेघ को अपने प्राथमिक औषधीय पौधों में रखा है और CSIR-CIMAP इसकी खेती को बढ़ावा देता है। भारतीय मंडियों में भाव की रिपोर्ट अधूरी और बहुत ऊपर-नीचे होती है, इसलिए हिसाब सावधानी से लगाएं।
भारत में कहां उगता है
- राज्य: यह पौधा छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में प्राकृतिक रूप से मिलता है और कई राज्यों में इसकी खेती होती है। खेत परीक्षण मध्य प्रदेश में, हिसार (हरियाणा) में और राजेंद्रनगर (हैदराबाद, तेलंगाना) में हुए हैं। अपने KVK से पूछें कि पास में कौन से खरीदार कालमेघ लेते हैं।
- मौसम: उत्तर और मध्य के मैदानों में यह खरीफ (बरसात) की फसल है। हैदराबाद का परीक्षण रबी (सर्दी) की फसल था, इसलिए दक्षिण की गर्म सर्दियों में भी चलती है।
- मिट्टी: कई तरह की मिट्टी सह लेती है, पर जैविक पदार्थ वाली अच्छे जल निकास की दोमट या बलुई दोमट सबसे अच्छी है। जलभराव वाले खेत से बचें।
- पाला: यह गर्म मौसम का पौधा है। फसल को ठंडी रातों से पहले पूरा होने के हिसाब से लगाएं।
किस्म और रोपण सामग्री
| किस्म | स्रोत | टिप्पणी |
|---|---|---|
| CIM-Megha | CSIR-CIMAP, लखनऊ | राजेंद्रनगर परीक्षण में इस्तेमाल हुई; बीज केवल CIMAP या लाइसेंस वाले स्रोत से लें और andrographolide का तय स्तर पूछें |
| स्थानीय या जंगल से इकट्ठा बीज | खुला बाजार | पौधों के बीच andrographolide बहुत अलग-अलग होता है; इस्तेमाल से पहले खरीदार से पूछें |
- बुवाई से पहले बीज को 24 घंटे पानी में भिगोया जाता है। राज्यों की पद्धतियों में मिट्टी, रेत और गोबर खाद के मिश्रण में नर्सरी बोने और 10 से 25 सेमी की पौध को बुवाई के लगभग 6 सप्ताह बाद रोपने का वर्णन है। एक हेक्टेयर की नर्सरी के लिए लगभग 650 से 750 ग्राम बीज चाहिए; सीधी बुवाई में लगभग 1.5 किलो प्रति हेक्टेयर (लगभग 0.6 किलो प्रति एकड़) लगता है।
- दूरी: 30 x 15 सेमी आम तौर पर इस्तेमाल होती है, यानी लगभग 88,000 पौधे प्रति एकड़ (2.2 लाख प्रति हेक्टेयर)।
दूरी, पोषण और देखभाल
- दूरी का परीक्षण (CCS HAU, हिसार): चार दूरियों (30 x 15, 30 x 10, 20 x 15 और 20 x 10 सेमी) की तुलना हुई। सबसे अच्छी सूखी जड़ी की पैदावार और सबसे ज्यादा andrographolide 30 x 15 सेमी पर, रोपाई के 135 दिन बाद कटाई से मिली।
- खाद: राज्यों की पद्धतियों में आधार खुराक के रूप में लगभग 20 टन प्रति हेक्टेयर गोबर खाद (8 टन प्रति एकड़) और 75 किलो N, 75 किलो P2O5 व 50 किलो K2O प्रति हेक्टेयर (लगभग 30, 30 और 20 किलो प्रति एकड़) दो बार में, रोपाई पर और 40 दिन बाद, बताई गई है। इसे मार्गदर्शन मानें और मिट्टी जांच व अपने KVK से पुष्टि करें।
- जैविक विकल्प: राजेंद्रनगर में 30 टन प्रति हेक्टेयर गोबर खाद के साथ 7.5 लीटर प्रति हेक्टेयर तरल जैविक इनपुट, 15 x 15 सेमी पर, उस परीक्षण में सबसे अच्छी सूखी जड़ी की पैदावार दी।
- पानी: बरसात में फसल ज्यादातर वर्षा पर निर्भर रहती है; सूखे दौर में हल्की सिंचाई दें और खड़ा पानी निकालें।
- खरपतवार: पहले 40 से 50 दिन हाथ से निराई करके खेत खरपतवार-मुक्त रखें।
- कीट: पत्ती धब्बे और कुछ इल्ली या रस चूसक कीटों का नुकसान हो सकता है। जड़ी दवा में जाती है, इसलिए KVK की सलाह के बिना रासायनिक छिड़काव न करें; लेबल और खरीदार की अवशेष सीमा का पालन करें।
कटाई और पैदावार
- कब: हिसार में 135 दिन की कटाई से सबसे ज्यादा andrographolide (सूखी जड़ी का 2.63%) और जड़ी की पैदावार मिली। फूल आने से शुरुआती फली की अवस्था में कटाई करें और पौधे को जमीन से कुछ सेमी ऊपर काटें; गर्म मौसम में दूसरी (ratoon) कटाई संभव है।
- सुखाना: पूरे पौधे को साफ फर्श पर छाया में तब तक सुखाएं जब तक वह टूटने न लगे। धूप से सफेद पड़ना और फफूंद ग्रेड गिराते हैं।
- पैदावार: हिसार परीक्षण: 30 x 15 सेमी पर 5.14 टन प्रति हेक्टेयर सूखी जड़ी (लगभग 2.1 टन प्रति एकड़)। राजेंद्रनगर परीक्षण: 34.7 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (लगभग 14 क्विंटल प्रति एकड़)। मध्य प्रदेश के एक खरीफ परीक्षण में वृद्धि नियामक के साथ 46.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर दर्ज हुई। खेत की पैदावार आम तौर पर परीक्षण प्लॉट से कम होती है, इसलिए अपने खेत में साबित होने तक 1 से 1.5 टन प्रति एकड़ मानकर चलें।
लागत और कमाई
- भाव: Agmarknet पर आधारित रिपोर्ट के अनुसार 29 सितंबर 2026 को Neemuch APMC में 1.02 टन आवक पर ₹4,800 प्रति क्विंटल (₹48 प्रति किलो) था, जबकि एक और साइट मध्य प्रदेश के लिए औसत लगभग ₹100 प्रति किलो दिखाती है। अलग-अलग मंडी की प्रविष्टियां कम और ऊपर-नीचे हैं, इसलिए मंडी भाव के बजाय खरीदार का लिखित भाव लें।
- हिसाब (उदाहरण): 1 टन प्रति एकड़ x ₹48 से ₹100 प्रति किलो = ₹48,000 से ₹1,00,000 कुल आमदनी प्रति एकड़। परीक्षण की पैदावार 2 टन प्रति एकड़ पर आमदनी दोगुनी होगी, जो खेत स्तर पर किसान कम ही पाते हैं।
- लागत: बीज या नर्सरी, खेत की तैयारी, खाद, निराई, कटाई की मजदूरी और सुखाना। अपने इलाके की दरों से जोड़ें; भारतीय परिस्थितियों के लिए कोई ताजा प्रकाशित लागत आंकड़ा नहीं मिला।
बाजार और जोखिम
- खरीदार हर्बल एक्सट्रैक्ट निर्माता, आयुर्वेदिक दवा कंपनियां और उन्हें माल देने वाले व्यापारी हैं। भाव सूखी जड़ी प्रति किलो में बताए जाते हैं और andrographolide की मात्रा व सफाई पर निर्भर करते हैं।
- भाव कम है, इसलिए खराब फसल या मांग गिरने से मुनाफा बहुत कम रह सकता है। जो लिखित अनुबंध के बिना खरीद भाव की गारंटी दे, उससे बीज या पौधे न खरीदें।
- खरीदार ढूंढने के लिए FPO या अनुबंध समूह से जुड़ें। National Medicinal Plants Board के औषधीय पौधा सहायता के लिए सब्सिडी खोजक देखें; भरोसा करने से पहले मौजूदा दर अपने राज्य औषधीय पौधा बोर्ड से पूछें। फसल ऋण के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और संबंधित औषधीय फसल के रूप में अश्वगंधा भी देखें।
स्रोत
- Journal of Agriculture and Rural Development in the Tropics and Subtropics, kalmegh spacing and harvest time trial at CCS HAU Hisar
- Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry, organic treatments and spacing on CIM-Megha, Rajendranagar
- Vikaspedia, Andrographis paniculata package of practices
- FRLHT ENVIS, Andrographis paniculata taxon data sheet
- ACROP, kalmegh mandi price, Madhya Pradesh (Agmarknet data)
