परसिमन (जापानी फल, अमलोक) भारत में सिर्फ ठंडे पहाड़ी इलाकों में बाग की व्यावहारिक फसल है, मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में, जहां कुछ खेतों में यह सेब, अनार और अनाज की जगह ले रहा है। इसे सर्दी की ठंड, अच्छे जल निकास वाली मिट्टी, चिड़ियों से बचाने की जाली और पहली काम की फसल के लिए 4 से 5 साल चाहिए, और भारत में प्रति एकड़ लागत का प्रकाशित आंकड़ा बहुत कम है।

फल स्थानीय बाजार में करीब ₹120 से ₹180 प्रति किलो बिकता है, और सेब के मुकाबले इस फसल में छिड़काव कम लगते हैं। पहले छोटा हिस्सा लगाएं और बढ़ाने से पहले बाजार जांच लें।

भारत में यह कहां उगता है

  • कुल्लू घाटी: हिमाचल के परसिमन का लगभग 90% कुल्लू जिले में होता है। क्षेत्रफल 2023 में करीब 200 हेक्टेयर और 2025 में 404 हेक्टेयर था, और 2023-24 में 1,250 टन उत्पादन हुआ (एक उद्योग समाचार के अनुसार)। 2019-20 में उत्पादन सबसे ज्यादा बंजार (324 टन), कुल्लू (297 टन) और नग्गर (185 टन) में रहा।
  • नए क्लस्टर: हिमाचल की परियोजना HP SHIVA (एशियाई विकास बैंक से वित्तपोषित) मंडी (बरोट घाटी, पराशर घाटी), कांगड़ा, सिरमौर, बिलासपुर और सोलन में Fuyu किस्म के क्लस्टर बना रही है, कुल मिलाकर करीब 358 हेक्टेयर, और रोपाई जनवरी से मार्च 2026 में हुई।
  • अन्य इलाके: परसिमन पर शोध SKUAST-कश्मीर (श्रीनगर) में हुआ है, और यह फल नीलगिरि और असम की पहाड़ियों से भी बताया गया है। इसे 1920 के दशक में यूरोपीय बसने वाले कुल्लू घाटी में लाए थे।
  • जलवायु और मिट्टी: सर्दी वाली समशीतोष्ण जलवायु और गर्म गर्मी, जैविक पदार्थ से भरपूर रेतीली दोमट मिट्टी, pH 6.5 से 7.5 (दूसरे दर्जे का स्रोत)। गर्म मैदान ठीक नहीं हैं क्योंकि पेड़ को सर्दी की ठंड चाहिए।

किस्में

किस्मप्रकारटिप्पणीभारत में कहां इस्तेमाल
Fuyuबिना कसैलेपन वाली; कड़ी अवस्था में भी खाई जाती हैHP SHIVA क्लस्टरों में लगाई जा रही है; तीन अवस्थाओं में तोड़ी जा सकती हैहिमाचल प्रदेश के क्लस्टर
Hachiyaकसैली; नरम होने पर ही खाने लायकश्रीनगर के ट्रायल में "Round" किस्म से ज्यादा उपज और बड़ा फल मिला, पर फल झड़ना 38.75% रहाकश्मीर घाटी का ट्रायल; कुल्लू के पुराने बाग
Tamopanहिमाचल के पुराने विश्वविद्यालय शोध में फल की भंडारण गुणवत्ता के लिए नाम आयामौजूदा उपलब्धता विश्वविद्यालय या नर्सरी से जांच लेंYSPUHF नौणी या बागवानी विभाग से पूछें
  • अगर कड़ा फल बिना पकाए शहर के बाजार में बेचना है तो Fuyu चुनें। Hachiya का कसैलापन हटाना पड़ता है या फल को नरम होने देना पड़ता है।
  • कलमी पौधे राज्य बागवानी विभाग या पंजीकृत नर्सरी से लें; कलमी पेड़ों में 4 से 5 साल में फल आने की बात बताई गई है।
  • Fuyu की दूसरी किस्मों से उपज की पूरी तुलना वाला कोई भारतीय ट्रायल नहीं मिला। अपनी ऊंचाई के लिए कौन सी किस्म ठीक है, यह Dr YS Parmar University of Horticulture and Forestry (नौणी, सोलन) या अपने जिला बागवानी अधिकारी से पूछें।

दूरी, मिट्टी और रोपाई

  • इस फसल के लिए बताई गई दूरी 4 x 4 मीटर से 6 x 6 मीटर तक है (दूसरे दर्जे का स्रोत)। 6 x 6 मीटर पर यह करीब 112 पेड़ प्रति एकड़ (278 प्रति हेक्टेयर) बैठता है; 4 x 4 मीटर पर करीब 250 प्रति एकड़ (625 प्रति हेक्टेयर)।
  • ढलान पर कंटूर या सीढ़ीनुमा खेत में लगाएं ताकि मिट्टी कम बहे।
  • हिमाचल में अभी प्रति हेक्टेयर ₹62,500 रोपण सब्सिडी मिलती है, साथ में पावर टिलर और स्प्रेयर पर 50% और सुरक्षा जाली पर 80% तक सहायता (2025 की रिपोर्ट के अनुसार)। मौजूदा दर और पात्रता जिला बागवानी कार्यालय से पक्की कर लें।

खाद, सिंचाई और देखभाल

  • एक गाइड फल देने वाले पेड़ के लिए साल में करीब 500 ग्राम संतुलित NPK मिश्रण सुझाती है, जो वसंत और जुलाई के बीच में बांटकर दिया जाए और नाइट्रोजन ज्यादा न हो। यह फल देने वाले पेड़ों के लिए एक ही दूसरे दर्जे का स्रोत है; उम्र के हिसाब से मात्रा के लिए मिट्टी जांच के आधार पर विश्वविद्यालय या KVK से पूछें।
  • पेड़ सूखा सह लेता है, लेकिन फल बनते समय बराबर नमी से फल बेहतर आता है। ढलान पर पानी बचाने के लिए drip irrigation देखें।
  • परसिमन में सेब से कम छिड़काव लगते हैं। चिड़ियां मुख्य समस्याओं में से एक हैं, और जाली ही आम उपाय है।
  • फल झड़ना आम है। कश्मीर के ट्रायल में दोनों किस्मों में 33% से 39% फल झड़ा, इसलिए छंटाई जैसा कुछ अपने आप होता मानकर चलें।

कटाई, उपज और भंडारण

  • मौसम: जल्दी वाले इलाकों में सितंबर से अक्टूबर, और कुल्लू में मुख्य कटाई नवंबर और दिसंबर में।
  • पहली फसल: कलमी पेड़ लगाने के करीब 4 साल के अंदर, पूरी उपज बाद में।
  • उपज: एक गाइड कहती है कि पूरा पेड़ 150 से 200 किलो देता है, जो आंकड़ा ज्यादा लगता है, और एक समाचार रिपोर्ट के अनुसार कुल्लू के कुछ पेड़ों से कुल मिलाकर 1,800 किलो से ज्यादा फल मिला। तुर्की के एक ट्रायल में Fuyu से प्रति पेड़ 50 से 52 किलो मिला। हिमाचल का कोई उपज ट्रायल नहीं मिला, इसलिए जब तक आपका अपना बाग कुछ और न दिखाए, पूरे पेड़ पर 20 से 50 किलो का हिसाब रखें।
  • कसैली किस्में: हिमाचल के एक विश्वविद्यालय शोध-प्रबंध में पाया गया कि Hachiya फल को 40°C गर्म पानी में 3 से 4 मिनट डुबाकर 20°C पर करीब 15 घंटे रखने से, या ethanol से उपचार करने से कसैलापन हट जाता है। Fuyu में यह जरूरी नहीं।
  • भंडारण: एक गाइड के अनुसार 0 से 2°C पर 2 से 3 महीने, और गलत संभाल हुई तो ठंड से नुकसान और फफूंद का खतरा।
💡 सुझाव: लगाने से पहले कुल्लू या नग्गर के किसी फल दे रहे बाग में जाएं, और पूछें कि पिछले सीजन में कमीशन एजेंट ने क्या भाव दिया और कितने पेड़ों से कितना बेचा।

लागत और कमाई

भारत में परसिमन की खेती की लागत का कोई प्रकाशित आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए तालिका में सिर्फ ₹120 से ₹180 प्रति किलो (2025 में बताए गए स्थानीय भाव) पर बिक्री का हिसाब है, 6 x 6 मीटर पर 112 पेड़ वाले एक एकड़ के लिए। ये उदाहरण हैं, अनुमान नहीं।

प्रति पेड़ उपजप्रति एकड़ (112 पेड़)₹120 प्रति किलो पर₹180 प्रति किलो पर
20 किलो2,240 किलो₹2.7 लाख₹4.0 लाख
35 किलो3,920 किलो₹4.7 लाख₹7.1 लाख
50 किलो5,600 किलो₹6.7 लाख₹10.1 लाख
  • यह छंटाई की हानि, जाली, मजदूरी, पैकिंग और कमीशन से पहले की कुल बिक्री है।
  • बाग पहले 4 साल कुछ नहीं कमाता, इसलिए उस दौरान रखरखाव और जाली का बजट रखें।

बाजार और जोखिम

  • कुल्लू के बागवानी कार्यालय और आसपास के उत्पादकों से पूछें कि कौन से फल बाजार और कमीशन एजेंट परसिमन खरीदते हैं, और जहां दर्ज हो वहां mandi bhav पर भाव देखें।
  • बाजार छोटा और नया है, और दो साल में क्षेत्रफल दोगुना हुआ है, इसलिए जैसे-जैसे ज्यादा पेड़ फल देंगे, आज का भाव टिके यह जरूरी नहीं।
  • ताजा फल नरम होता है और जल्दी दब जाता है, इसलिए सावधानी से तुड़ाई, गद्देदार क्रेट और जल्दी ढुलाई मायने रखती है।
  • समूह में बिक्री और प्रोसेसिंग (सूखे और पल्प उत्पाद) के लिए FPO देखें; सहायता योजनाओं के लिए subsidy finder देखें।

स्रोत