एवोकाडो भारत में दक्षिण और पूर्वोत्तर की मध्यम ऊंचाई वाली पहाड़ियों में चलता है, जैसे कर्नाटक का कोडागु (कूर्ग), तमिलनाडु की नीलगिरि और कोडाईकनाल की पहाड़ियां, केरल के वायनाड और इडुक्की, और सिक्किम। गर्म मैदानों में, जहां मिट्टी में पानी भरता हो, यह ठीक नहीं चलता। इसे अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी चाहिए, पहली फसल के लिए करीब 4 से 5 साल का सब्र चाहिए, और जड़ सड़न पर सख्त नियंत्रण चाहिए। भारत में एवोकाडो सिर्फ करीब 1,400 हेक्टेयर में है, इसलिए आम या केले की तुलना में बाजार और गुणवत्ता की जानकारी कम है।

भारत के ज्यादातर पुराने पेड़ बीज से उगे हैं, जिनके फल की गुणवत्ता और उपज में बहुत फर्क होता है। आज का व्यावहारिक रास्ता किसी जानी-पहचानी किस्म का कलमी पौधा है, ऐसी नर्सरी से जो अपने मातृ पेड़ों के नाम बता सके और रूटस्टॉक का प्रमाण दे सके।

भारत में यह कहां उगता है

बताए गए इलाके हैं केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश। ICAR-IIHR अपना एवोकाडो शोध कोडागु के चेत्तल्ली स्थित Central Horticultural Experiment Station में चलाता है। मध्यम ऊंचाई वाले सिक्किम में Fuerte उगाई जाती है, जिसके फल 200 से 400 ग्राम के होते हैं। पाले वाले गड्ढों, तेज हवा की मार वाली चोटियों और ऐसी मिट्टी से बचें जिसमें बारिश के बाद पानी टिकता हो। एवोकाडो की जड़ों को हवा चाहिए; कुछ दिन खड़ा पानी भी पेड़ को मार सकता है।

किस्में

किस्मस्रोतखासियतें
Arka SupremeICAR-IIHR, 2020 में रिलीजफूल का प्रकार A; फल 400 से 450 ग्राम; वसा 18 से 20%
Arka Coorg RaviICAR-IIHR, 2022 में रिलीजफूल का प्रकार B; फल 450 से 600 ग्राम; गूदे की ज्यादा रिकवरी
Fuerteबाहर से लाई गई; सिक्किम में उगाई जाती हैफल 200 से 400 ग्राम; मध्यम ऊंचाई की पहाड़ियों के लिए ठीक
Hass और इसकी रिश्तेदार किस्मेंबाहर से लाई गई; भारत में सीमित रोपण18% से ज्यादा तेल, मक्खन जैसी, लंबी शेल्फ लाइफ; भारत में बनी किस्मों में करीब 12% तेल और ज्यादा सख्त गूदा

एवोकाडो के फूल टाइप A या टाइप B के होते हैं, जो दिन के अलग-अलग समय खुलते हैं, और पर-परागण से फल बनना बेहतर होता है। इसीलिए Arka Supreme (A) और Arka Coorg Ravi (B) जैसी जोड़ी एक ही बाग में समझदारी है। अपनी नर्सरी से पूछें कि वे किस अनुपात की सलाह देते हैं।

रोपाई का सामान और दूरी

आम दूरी 6 से 8 मीटर वर्गाकार है, फैलने वाली किस्मों के लिए और ज्यादा। 8 मी x 8 मी पर करीब 63 पेड़ प्रति एकड़ (156 प्रति हेक्टेयर) लगते हैं; 6 मी x 6 मी पर करीब 112 प्रति एकड़ (278 प्रति हेक्टेयर)। 5 मी x 5 मी की सघन रोपाई (400 प्रति हेक्टेयर, करीब 160 प्रति एकड़) कुछ जगह होती है, लेकिन छत्र को खुला रखने के लिए छंटाई करनी पड़ती है। अप्रैल से मई में 1 मी x 1 मी x 1 मी के गड्ढे खोदें और उन्हें ऊपरी मिट्टी और गोबर की खाद बराबर मात्रा में मिलाकर भरें। मानसून की शुरुआत में हल्के ऊंचे टीले पर लगाएं ताकि पानी तने से दूर बह जाए।

पोषण और सिंचाई

पूरे बड़े पेड़ों के लिए आम पैकेज है 50 किलो FYM और हर पेड़ पर साल में करीब 400 ग्राम N, 200 ग्राम P और 500 ग्राम K। नम दक्षिण में (कूर्ग और ऐसे इलाकों में) उर्वरक दो बार में दिया जाता है, मई से जून और सितंबर से अक्टूबर में। छोटे पेड़ों को इसका एक अंश चाहिए, जो हर साल बढ़ता है; मिट्टी जांच के आधार पर उम्र के हिसाब से कार्यक्रम अपने KVK से पूछें। सूखे महीनों में छोटे पेड़ों की सिंचाई करें और drip सिंचाई इस्तेमाल करें, पानी तने के पास रखें पर तने से सटाकर नहीं। उथली जड़ों को बचाने के लिए मल्च डालें, और पानी कभी खड़ा न रहने दें।

कीट और रोग

  • Phytophthora जड़ सड़न (Phytophthora cinnamomi) सबसे गंभीर रोग है। लक्षण हैं पीलापन, मुरझाना और शाखाओं का सूखना। इसे अच्छी जल निकासी, ऊंची क्यारी पर रोपाई और रोगमुक्त पौधों से रोकें। पैकेज में metalaxyl की सलाह है (रोपाई से पहले करीब 1 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति 10 किलो मिट्टी, और ड्रेंच 1 ग्राम प्रति 10 लीटर पर)। लेबल और अपने KVK की मौजूदा सलाह का पालन करें।
  • फल छेदक, माइट और पत्ते खाने वाले कीट लगते हैं; नियमित निगरानी करें। पहचान में मदद के लिए pests पेज देखें।
  • भारत में रोग सहने वाले रूटस्टॉक सीमित हैं, जो इस क्षेत्र की बताई गई बाधाओं में से एक है।

कटाई और उपज

कलमी पेड़ करीब 4 से 5 साल में फल देना शुरू करते हैं, और एवोकाडो का फल पेड़ पर नहीं पकता। परिपक्व होने पर तोड़ें (फल तब भी सख्त होता है) और पेड़ से अलग कई दिन नरम होने दें। चेत्तल्ली में ICAR-IIHR के ट्रायल में Arka Supreme और Arka Coorg Ravi से रोपाई के आठ साल बाद 80 से 100 किलो प्रति पेड़ मिलने की रिपोर्ट है। पूरी तरह तैयार पेड़ों के बारे में खबरों में 150 से 200 किलो प्रति पेड़ के ऊंचे आंकड़े आते हैं, लेकिन उन्हें किसी ट्रायल रिकॉर्ड तक नहीं पहुंचाया जा सका, इसलिए योजना के लिए 80 से 100 किलो ही मानें। आपके खेत की उपज ऊंचाई, जल निकासी और प्रबंधन के हिसाब से बदलेगी।

लागत और कमाई, हिसाब के साथ

एवोकाडो के लिए भारत में खेती की लागत या खेत के दरवाजे के भाव का कोई जांचा-परखा रिकॉर्ड नहीं मिला, इसलिए नीचे के आंकड़े बताई गई मान्यताओं के साथ एक उदाहरण हैं, कोई कोटेशन नहीं। 8 मी x 8 मी पर (63 पेड़ प्रति एकड़) और आठवें साल 80 से 100 किलो प्रति पेड़ पर एक एकड़ से करीब 5,000 से 6,300 किलो मिलता है। अगर खेत पर ₹60 प्रति किलो मिले तो कुल आमदनी करीब ₹3 लाख प्रति एकड़ है; ₹120 प्रति किलो पर करीब ₹7.5 लाख। शुरू के सालों में खर्च होता है और कमाई नहीं, और drip, बाड़, मजदूरी और पौधों की लागत 4 से 5 साल तक उठानी पड़ती है। कोई भी फैसला लेने से पहले mandi भाव और पास के खरीदारों के भाव जरूर देखें।

💡 सुझाव: पहले छोटा ब्लॉक लगाएं (50 से 100 पेड़), दोनों तरह के फूल वाली किस्में रखें, और खरीदार पांचवें साल में नहीं, दूसरे साल में ढूंढ लें।

बाजार और बिक्री

  • भारत में खपत 2024 में करीब 10,000 टन बताई गई, और उसी FreshPlaza रिपोर्ट में 2026-27 तक 40,000 टन का अनुमान है। इस अनुमान को अंदाजा ही मानें।
  • आयात की गई Hass, मुख्य रूप से तंजानिया से उसके सीजन में, बाजार का महंगा सिरा तय करती है। कम तेल और छोटी शेल्फ लाइफ वाली भारतीय किस्में मुख्य रूप से ताजगी और दाम पर मुकाबला करती हैं।
  • खरीदार हैं सुपरमार्केट, होटल, जूस और सलाद आउटलेट और निर्यातक। किसान उत्पादक समूह अकेले उगाने वाले से बेहतर उन तक पहुंच सकता है; देखें FPO।
  • ऐसी नर्सरियों से सावधान रहें जो buy-back या "₹10 लाख प्रति एकड़" आमदनी का वादा करती हैं। किस्म का प्रमाणपत्र और लिखित समझौता मांगें।

सब्सिडी

एवोकाडो की नर्सरियों, drip सिंचाई वाले बागों और कोल्ड चेन को MIDH के तहत मदद मिलती है। दरें राज्य के हिसाब से अलग हैं, इसलिए subsidy finder और अपने जिले का बागवानी कार्यालय देखें। एवोकाडो के लिए प्रति हेक्टेयर दर जांची नहीं गई है, इसलिए कोई दर नहीं दी गई है। फसल कर्ज के लिए देखें KCC।

स्रोत