जई भारत में मुख्यतः डेयरी पशुओं के लिए सर्दी (रबी) के हरे चारे के रूप में चलती है, नाश्ते के अनाज के बाजार के लिए अनाज वाली फसल के रूप में नहीं। चारे वाली जई करीब 0.25 मिलियन हेक्टेयर में है, जिसमें 34% उत्तर प्रदेश, 20% पंजाब, 16% बिहार, 9% हरियाणा और 6% मध्य प्रदेश में है। इसे ठंडा मौसम, नवंबर की बुवाई और कुछ सिंचाइयां चाहिए।
इंसानों के खाने के लिए उगाई गई जई को छिलका हटाने और प्रोसेस करने की जरूरत होती है, और अनाज वाली जई का कोई पुष्ट भारतीय खेत-द्वार भाव या buy-back इंतजाम नहीं मिला। चारे, हे या साइलेज के हिसाब से चलें, अपने पशुओं के लिए या स्थानीय डेयरी के लिए, और अनाज के लिए उगाने से पहले किसी प्रोसेसर से लिखित में पूछ लें।
भारत में यह कहां उगती है
- मुख्य पट्टी: उत्तर, उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत, और हाल में पूर्वी राज्यों तक फैलाव। जई ठंडे मौसम की फसल है, इसलिए मानसून के बाद (अक्टूबर से दिसंबर) बोई जाती है।
- मिट्टी: ज्यादातर मिट्टियां चलती हैं, रेतीली दोमट से गाद वाली दोमट तक। क्षारीय या जलभराव वाले खेत से बचें। असम का पैकेज अच्छे जल निकास वाली गाद वाली दोमट या रेतीली दोमट की सलाह देता है, और वहां जई सली धान के बाद ली जा सकती है।
- पानी: इसे बारानी भी उगाया जा सकता है। सिंचाई में, मिट्टी सूखी हो तो बुवाई के तुरंत बाद एक पानी, अधिकतम कल्ले निकलने पर (बुवाई के करीब 45 दिन बाद) एक, और पहली कटाई के बाद एक पानी दें।
किस्में
| किस्म | किसने जारी की | खासियत | कहां के लिए ठीक |
|---|---|---|---|
| Kent | PAU लुधियाना, 1978 | दोहरे उपयोग वाली, गिरने से सुरक्षित, हरा चारा 550 से 570 क्विंटल/हेक्टेयर; आज भी सबसे ज्यादा मांगी जाने वाली किस्म | उत्तर और मध्य के मैदान |
| OS-6, OS-7 | CCS HAU हिसार, 1982 और 1984 | एक कटाई वाली; OS-7 में 550+ क्विंटल/हेक्टेयर | हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी UP |
| HJ-8 | CCS HAU हिसार, 1998 | दोहरे उपयोग वाली, तेज बढ़वार, 600 से 680 क्विंटल/हेक्टेयर | उत्तर भारत |
| JHO-822, JHO-851 | ICAR-IGFRI झांसी, 1989 और 1998 | बहु-कटाई; JHO-851 में दोबारा अच्छा फुटाव | मध्य और उत्तर भारत |
| UPO-212 | GBPUAT पंतनगर, 1990 | बहु-कटाई, 550 से 600 क्विंटल/हेक्टेयर, दाने झड़ने को सह लेती है | UP, उत्तराखंड, मैदान |
| JO-1 | JNKVV जबलपुर, 2005 | बहु-कटाई, 550 से 600 क्विंटल/हेक्टेयर | मध्य प्रदेश |
| RO-19 (Phule Harita) | MPKV राहुरी, 2007 | बहु-कटाई, रोग रोधी; असम की सिफारिश में 320 से 340 क्विंटल/हेक्टेयर | महाराष्ट्र, असम |
| JHO-99-2 | ICAR-IGFRI झांसी, 2005 | अच्छी गुणवत्ता का चारा; असम पैकेज में 320 से 340 क्विंटल/हेक्टेयर (कटाई का प्रकार अपने बीज आपूर्तिकर्ता से पक्का कर लें) | मध्य और पूर्वी भारत |
| SKO-7, SKO-20 | SKUAST श्रीनगर, 2005 और 2009 | दोहरे उपयोग वाली, रोग रोधी | कश्मीर और ठंडे पहाड़ |
- एक कटाई वाली किस्में करीब 50% फूल आने पर एक बार काटी जाती हैं। बहु-कटाई वाली किस्मों में पहली कटाई 40 से 45 दिन पर और बाद की कटाई हर 30 से 35 दिन पर होती है। दोहरे उपयोग वाली किस्मों को चारे के लिए काटा जा सकता है या बीज के लिए छोड़ा जा सकता है।
- 1976 से अब तक 60 से ज्यादा किस्में जारी हुई हैं, लेकिन Kent, UPO-212, JHO-822 और SKO-7 मिलकर बनने वाले ब्रीडर बीज का 75% से ऊपर हैं। प्रमाणित बीज राज्य बीज निगम, ICAR केंद्र या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से लें, और पूछ लें कि आपकी कटाई की योजना के हिसाब से कौन सी किस्म ठीक है।
बुवाई और बीज
- समय: हैदराबाद के एक ट्रायल (2016-17 और 2017-18) में सबसे अच्छा समय अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से नवंबर के पहले पखवाड़े तक रहा, और नवंबर के आखिर में उपज कम मिली। उत्तर में अक्टूबर के मध्य से नवंबर तक बुवाई आम है; असम का पैकेज दिसंबर तक की छूट देता है। crop calendar देखें।
- बीज दर: चारे के लिए 100 किलो प्रति हेक्टेयर (40 किलो प्रति एकड़), 25 से 30 सेमी की कतारों में 4 से 5 सेमी गहराई पर, बारीक और ठोस बीज-शय्या में। हैदराबाद के ट्रायल में JHO-822 और Kent के साथ 80 और 100 किलो प्रति हेक्टेयर की उपज में कोई फर्क नहीं मिला। बीज की फसल के लिए 50 से 60 किलो प्रति हेक्टेयर लगता है।
- निराई: बुवाई के 3 से 4 हफ्ते बाद एक निराई।
खाद
- मानक मात्रा: प्रति हेक्टेयर 80 किलो N, 60 किलो P2O5 और 40 किलो K2O (प्रति एकड़ 32, 24 और 16 किलो)। सिंचित फसल में नाइट्रोजन को तीन हिस्सों में बांटकर हर कटाई के बाद दें। बारानी फसल में यह एक बार आधार में दी जाती है।
- ज्यादा नाइट्रोजन: भारतीय ट्रायलों की एक समीक्षा में प्रति हेक्टेयर 120 किलो N (प्रति एकड़ 48 किलो) से करीब 30 टन/हेक्टेयर हरा चारा मिला। कुछ सिफारिशें 120:40:40 की हैं, जिसमें N का एक तिहाई और पूरा P व K बुवाई पर और बाकी करीब 32 दिन पर और पहली कटाई के बाद दिया जाता है।
- जैविक खाद: बुवाई से पहले प्रति हेक्टेयर 5 टन (प्रति एकड़ 2 टन) गोबर की खाद।
- असम पैकेज (कम मात्रा, धान के बाद खाली खेत की हालत): प्रति हेक्टेयर N, P2O5 और K2O 40:20:20 किलो, और पहली कटाई के बाद 20 किलो N प्रति हेक्टेयर ऊपर से। मिट्टी की जांच कराएं और अपने राज्य की सिफारिश मानें; fertilizers देखें।
कीट और रोग
- रोग रोधी किस्में anthracnose, crown rust, loose smut, powdery mildew और barley yellow dwarf virus के खिलाफ बताई गई हैं। आर्मीवर्म, स्टिंक बग, वायरवर्म और माहू कीटों के नाम हैं। पहले रोग रोधी किस्में चुनें; किसी भी छिड़काव के लिए लेबल के हिसाब से चलें और स्थानीय KVK से पूछें। pests देखें।
- जई का चारा ताजा खिलाया जाता है, इसलिए कटाई से पहले लेबल पर लिखा प्रतीक्षा समय मानें।
कटाई और उपज
- कटाई की ऊंचाई: जमीन से 8 से 10 सेमी ऊपर, ताकि बहु-कटाई वाली फसल दोबारा फूटे।
- हरा चारा: राष्ट्रीय समीक्षा अच्छी किस्मों की उत्पादकता 50 से 60 टन प्रति हेक्टेयर (प्रति एकड़ 20 से 24 टन) बताती है, और सूखा चारा 12 से 15 टन प्रति हेक्टेयर। NDDB 35 से 40 टन प्रति हेक्टेयर बताता है, और असम का पैकेज RO-19 और JHO-99-2 के लिए 32 से 34 टन प्रति हेक्टेयर (प्रति एकड़ 13 से 14 टन) और 5 से 6 टन सूखा पदार्थ देता है। इतना बड़ा फर्क किस्म, बुवाई की तारीख, नाइट्रोजन और कटाइयों की संख्या से आता है, इसलिए नीचे के आंकड़ों पर बजट बनाएं।
- गुणवत्ता: कच्चा प्रोटीन 8 से 10% (NDDB) या सूखे पदार्थ का करीब 10 से 11% (राष्ट्रीय समीक्षा) है। जई साइलेज और हे के लिए ठीक है।
- बीज: 2 से 3 टन प्रति हेक्टेयर (प्रति एकड़ 0.8 से 1.2 टन)। बीज के लिए उगाए गए एक हेक्टेयर के पांचवें हिस्से से एक हेक्टेयर बोने लायक बीज मिल जाता है।
लागत और कमाई
- 2026 के लिए जई के चारे की पुष्ट भारतीय लागत और भाव का आंकड़ा नहीं मिला। अपने खेत के लिए हिसाब खुद लगाएं: प्रति एकड़ हरा चारा (जैसे असम पैकेज की उपज पर 12 से 14 टन) को स्थानीय हरे चारे के भाव से गुणा करें, फिर बीज (40 किलो), खाद, सिंचाई और मजदूरी घटाएं।
- जई का मोल ज्यादातर दूध में है। 45 से 70 दिन में कटने वाला सर्दी का हरा चारा गर्मी के चारे से पहले का खाली समय भरता है, और खरीदे गए चारे या दाने की जगह ले सकता है। हरे चारे और साइलेज का आज का भाव नजदीकी दुग्ध संघ या KVK से पूछें।
- बीज बेचने के लिए प्रमाणन चाहिए। बीज बेचने से पहले अपनी राज्य बीज प्रमाणन एजेंसी से पूछ लें।
बाजार और जोखिम
- चारे वाली जई ज्यादातर खेत पर ही इस्तेमाल होती है या स्थानीय पशुपालकों को बिकती है; इसकी कोई मंडी भाव श्रृंखला नहीं है। साइलेज और बंधा हे बड़ी डेयरियों को बेचा जा सकता है।
- रोल्ड ओट्स और नाश्ते के अनाज के लिए अनाज वाली जई प्रोसेसरों पर निर्भर है; बुवाई से पहले भाव, ग्रेड और डिलीवरी पर लिखित प्रस्ताव लें।
- देर से बुवाई, फूल के समय गर्म दौर और ज्यादा खाद वाली फसल का गिरना खेत के मुख्य जोखिम हैं। सूखे या ओले से फसल नुकसान का बीमा हो सकता है; आपके जिले में क्या अधिसूचित है, यह PMFBY पर देखें, और कर्ज के लिए KCC।
स्रोत
- Analyzing trends and future projections in fodder oats (Avena sativa L.) for quality seed production in India
- Effect of time of sowing, seed rate and cultivar on oat green fodder, dry matter and crude protein yield (Indian Journal of Animal Nutrition)
- Assam Agricultural University, Package of practices for rabi crops of Assam: Oats (2021)
- Nutrient management for fodder oats in India: an overview
- NDDB, Oats (Avena sativa)
