अनाज वाला राजगिरा (रामदाना) भारत के लिए कम लागत वाली एक व्यावहारिक फसल है, जो मुख्य रूप से गुजरात (बनासकांठा और खेड़ा), राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा और हिमालयी पहाड़ों में उगाई जाती है, और इसे पानी बहुत कम चाहिए। लेकिन इसका बाजार छोटा है: पूरे देश में केवल लगभग 40,000 से 50,000 हेक्टेयर में यह उगता है, इसलिए भाव कुछ मंडियों और व्रत के मौसम की मांग पर टिका रहता है।
इसी वर्ग में पत्तेदार चौलाई भी आती है जो सब्जी के लिए उगाई जाती है। यह गाइड पहले अनाज वाली फसल और फिर संक्षेप में पत्ती वाली फसल की जानकारी देती है।
भारत में कहाँ उगता है
- पहाड़: परंपरागत रूप से यह पहाड़ी फसल है (हिमाचल प्रदेश में बाथू, उत्तराखंड में चुआ)। Annapurna, Durga और Him Gauri जैसी पहाड़ी किस्में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और J&K के लिए जारी हुईं।
- मैदान और पठार: 1990 के दशक से मध्य और पश्चिमी भारत में इसका क्षेत्र बढ़ा। गुजरात में यह 12,000 हेक्टेयर से अधिक (रबी 2017-18) में है, ज्यादातर बनासकांठा और खेड़ा जिलों में, जहाँ पानी की कमी के कारण यह गेहूं और आलू की जगह लेता है।
- अन्य राज्य जिनके लिए किस्में जारी हुई हैं: कर्नाटक, ओडिशा, तमिलनाडु, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश।
- जलवायु और मिट्टी: राजगिरा C4 पौधा है जो गर्मी और सूखा सह लेता है और कई तरह की मिट्टी में चल जाता है, लेकिन उपजाऊ, अच्छे जल-निकास वाली, भुरभुरी और जैविक पदार्थ से भरपूर मिट्टी में सबसे अच्छा होता है।
- बुवाई का समय: एक खेती गाइड के अनुसार खरीफ में जून से जुलाई और सिंचाई के साथ जायद फसल के लिए फरवरी से मार्च। गुजरात के किसान इसे रबी में भी उगाते हैं; अपने KVK से स्थानीय तारीख पक्की कर लें।
किस्में
Central Sub-Committee द्वारा अधिसूचित किस्में, उपज All India Coordinated Research Network on Potential Crops के अनुसार:
| किस्म | जारी वर्ष | औसत उपज (क्विंटल/हेक्टेयर) | अनुशंसित क्षेत्र |
|---|---|---|---|
| Annapurna | 1984 | 22.5 | मध्य और ऊँचा हिमालय (140 से 150 दिन) |
| Durga | 2006 | 21.0 (मैदानी परीक्षणों में 13.65; प्रोटीन 14.1%) | HP, उत्तराखंड, J&K; मैदानी परीक्षणों में भी स्थिर |
| Suvarna | 1992 | 16.0 | कर्नाटक, ओडिशा, गुजरात |
| GA-1 (1991), GA-2 (2002), GA-3 (2008) | SDAU, गुजरात | 19.5, 15.5, 12.6 | गुजरात; GA-1 महाराष्ट्र के लिए भी; GA-3 झारखंड के लिए भी |
| GA-5, GA-6 (2020) | 2020 | 19.0, 18.5 | गुजरात (GA-5 राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड के लिए भी) |
| RMA-7 | 2010 | 14.7 | राजस्थान, गुजरात, ओडिशा, महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली |
| Phule Kartiki | 2012 | 15.0 | महाराष्ट्र |
| KBGA-4, KBGA-15 | 2017, 2021 | 21.0, 20.0 | कर्नाटक |
| Him Gauri, VL Chua 140 | 2024 | 16.7, 16.9 | हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड |
पकने की अवधि GA-2, GA-3, BGA-2 और PRA-3 जैसी जल्दी वाली किस्मों में लगभग 72 से 100 दिन और पहाड़ी किस्मों में 120 से 150 दिन है। अपने राज्य के लिए जारी किस्म का बीज राज्य कृषि विश्वविद्यालय या बीज केंद्र से लें; राजगिरा में पर-परागण आसानी से होता है, इसलिए खुद रखा बीज किस्म से भटक जाता है।
बुवाई, दूरी और पोषण
- बीज दर: बीज बहुत छोटा होता है; एक खेती गाइड के अनुसार 0.5 से 0.8 किलो प्रति एकड़ (लगभग 1.2 से 2 किलो प्रति हेक्टेयर)। बराबर बुवाई के लिए रेत या सूखी मिट्टी में मिलाकर पंक्तियों में बोएँ और जल्दी विरलन करें।
- दूरी: Suvarna किस्म पर TNAU के परीक्षण में 45 x 10, 45 x 15 और 45 x 20 सेमी की तुलना हुई। उर्वरक के साथ 45 x 15 सेमी (लगभग 59,000 पौधे प्रति एकड़) से बीज की गुणवत्ता सबसे अच्छी मिली, जबकि घनी 45 x 10 सेमी से लगभग 17.7% ज्यादा बीज मिला। खेती गाइड 45 x 20 सेमी (लगभग 45,000 पौधे प्रति एकड़) सुझाती है।
- उर्वरक: इसी TNAU परीक्षण में 50:30:30 किलो N:P2O5:K2O प्रति हेक्टेयर सबसे अच्छा रहा, यानी लगभग 20:12:12 किलो प्रति एकड़। बुवाई से पहले अच्छी सड़ी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालें। गाइड में आधार खाद के रूप में 2 टन वर्मीकम्पोस्ट प्रति एकड़ बताया गया है।
- पानी: खरीफ में फसल वर्षा पर निकल जाती है; जायद फसल को सिंचाई चाहिए। पानी खड़ा न रहने दें।
- अंतरफसल: पहाड़ों में फील्ड बीन और राजगिरा 2:1 में एक परीक्षण में सबसे ऊँचा लाभ-लागत अनुपात (2.57) मिला; गुजरात में राजगिरा के साथ चना (1:1) आम है। अलग-अलग पंक्तियों में बोएँ।
कीट और रोग
- गंभीर कीट या रोग की समस्या आमतौर पर नहीं बताई गई है। साहित्य में दर्ज कीट: माहू, इल्लियाँ, फुदका, ब्लिस्टर बीटल, फ्ली बीटल, मीलीबग, तना घुन और तना छेदक।
- दर्ज रोग: डैम्पिंग-ऑफ, सफेद रतुआ, पत्ती झुलसा, हेड कैंकर, और कुछ विषाणु व माइकोप्लाज्मा की समस्याएँ।
- साफ बीज, प्रतिरोधी किस्में और अच्छा जल-निकास रखें। पुरानी विश्वविद्यालय सिफारिशों में ऐसे कीटनाशकों के नाम हैं जो अब भारत में प्रतिबंधित या सीमित हैं; कुछ भी छिड़कने से पहले लेबल पढ़ें और अपने KVK से पूछें।
कटाई और उपज
- कटाई तब करें जब बालियाँ भूसे के रंग की हो जाएँ और निचला दाना हाथ से आसानी से झड़ने लगे। एक खेती गाइड कम अवधि वाली किस्मों में अनाज के लिए 80 से 90 दिन बताती है; पहाड़ी किस्में ज्यादा समय लेती हैं।
- काटकर साफ चादर पर सुखाएँ और धीरे से मड़ाई करें। भंडारण के लिए दाना साफ और सूखा रखें।
- उपज: राष्ट्रीय औसत लगभग 16 क्विंटल/हेक्टेयर (6.5 क्विंटल प्रति एकड़)। मैदानों में 25 क्विंटल/हेक्टेयर (10 क्विंटल प्रति एकड़) और पहाड़ों में 40 क्विंटल/हेक्टेयर (16 क्विंटल प्रति एकड़) तक की उपज दर्ज है। जारी किस्मों का औसत 11.6 से 22.5 क्विंटल/हेक्टेयर (लगभग 4.7 से 9 क्विंटल प्रति एकड़) है।
लागत और आमदनी
- भाव: गुजरात की पालनपुर APMC में अगस्त 2026 में राजगिरा लगभग ₹8,400 से ₹8,500 प्रति क्विंटल (₹84 प्रति किलो) बिका, जबकि 2026 में दायरा लगभग ₹7,500 से ₹8,500 रहा। आज का भाव मंडी भाव पर देखें।
- हिसाब: प्रति एकड़ 4 से 8 क्विंटल x ₹7,500 से ₹8,500 = ₹30,000 से ₹68,000 कुल आमदनी। एक खेती गाइड के अनुसार लागत और मजदूरी लगभग ₹10,000 से ₹12,000 प्रति एकड़ है, यानी अनाज की फसल में उपज और भाव के अनुसार शुद्ध आय लगभग ₹20,000 से ₹55,000 प्रति एकड़। जमीन का किराया, कटाई की मजदूरी और ढुलाई अलग है।
- पत्ती की फसल: इसी गाइड के अनुसार 5 से 6 कटाइयों में प्रति एकड़ 1.5 से 2.5 टन पत्ती, ₹20 से ₹35 प्रति किलो पर, और लागत लगभग ₹15,000। यह द्वितीयक स्रोत है और पत्ती का भाव शहर और मौसम के अनुसार तेजी से बदलता है।
बाजार और बिक्री
- बनासकांठा की पालनपुर APMC को भारत की सबसे बड़ी राजगिरा अनाज मंडियों में से एक बताया गया है, जहाँ से अनाज दूसरे राज्यों में जाता है।
- मांग ज्यादातर व्रत के खाने (लड्डू, चिक्की, आटा) और फुलाए हुए दाने की है। फुलाया राजगिरा और आटा कच्चे दाने से प्रति किलो ज्यादा बिकता है, पर प्रोसेसिंग के लिए मशीन और लाइसेंस चाहिए।
- शोधकर्ताओं के अनुसार मुख्य भोजन के रूप में सीमित उपयोग के कारण इसका क्षेत्र ज्यादा बढ़ने की संभावना नहीं है। ज्यादा रकबे वाले साल में भरमार से भाव गिर सकता है।
- किसानों का समूह FPO के जरिए बेहतर बेच सकता है। सहायता के लिए सब्सिडी खोजक देखें; इस फसल की कोई विशिष्ट दर सत्यापित नहीं हुई है।
स्रोत
- Plant Archives, Genetic resources, varietal and value-added development of grain amaranth in India
- Plant Archives, High yield and stability improved cultivar of grain amaranth in plain regions of India (ICAR-NBPGR and partners)
- TNAU study, Influence of fertilizer and spacing on seed yield and quality of grain amaranth cv. Suvarna
- Organic Mandya, amaranth (rajgira) farming (secondary source)
- ACROP, Palanpur rajgira mandi price (Agmarknet data)
