कसूरी मेथी एक अलग मेथी प्रजाति, Trigonella corniculata, की सूखी पत्ती है, और भारत में इसकी व्यावसायिक खेती राजस्थान के नागौर और आसपास के इलाकों में केंद्रित है, जहां इसे नागौरी मेथी, पान मेथी या मारवाड़ी मेथी भी कहते हैं। यह सूखे, उप-उष्णकटिबंधीय इलाकों के किसानों के लिए छोटी अवधि की सर्दी की फसल है, लेकिन आमदनी सुखाई की गुणवत्ता और व्यापारी मिलने पर निर्भर है, क्योंकि नागौर के किसान सर्वे में कोई अधिसूचित मंडी नहीं मिली और खरीदार बहुत कम थे।
साधारण मेथी (Trigonella foenum-graecum) के उलट, कसूरी किस्म 5 से 8 बार पत्ती की कटाई देती है, और उसके बाद फसल को बीज के लिए छोड़ा जा सकता है, जो बुवाई के लगभग 150 से 160 दिन बाद पकता है। पत्ती और बीज दोनों बिकते हैं।
कहां उगती है और क्या चाहिए
- क्षेत्र: पश्चिमी राजस्थान का नागौर जिला दर्ज किया गया केंद्र है। इस प्रजाति पर अकोला (महाराष्ट्र) में भी शोध हुआ है, जहां बीज उपज देखी गई।
- मौसम: ठंडी, सूखी रबी फसल। उप-उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए गाइड सितंबर से नवंबर की बुवाई बताते हैं। अकोला में अक्टूबर की शुरुआत से नवंबर के अंत तक की छह तारीखों में 10 अक्टूबर की बुवाई से सबसे ज्यादा बीज उपज मिली, इसलिए बीज चाहिए तो जल्दी बुवाई फायदेमंद है।
- मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली दोमट से बलुई दोमट। मेथी जलभराव सह नहीं पाती; स्थानीय मिट्टी सलाह के लिए अपने KVK से पूछें।
किस्म और बीज
- नागौर के किसान मुख्यतः स्थानीय नागौरी किस्म उगाते हैं। नागौर के उत्पादकों ने बेहतर गुणवत्ता का बीज मांगा है, इसलिए बीज एक जानी हुई कमजोरी है। KVK नागौर या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से Trigonella corniculata का परखा हुआ बीज मांगें, और खरीदार को कसूरी पत्ती चाहिए तो साधारण मेथी का बीज न लें, क्योंकि सुगंध और कटाई का स्वभाव अलग है।
- बीज दर: स्रोतों में बहुत अंतर है और यह उद्देश्य पर निर्भर है। पश्चिमी राजस्थान के शुष्क क्षेत्र के एक परीक्षण में परखे गए संयोजनों में 100 kg बीज और 45 kg N प्रति हेक्टेयर से सबसे ज्यादा सूखी पत्ती और बीज उपज तथा सबसे अच्छा मुनाफा मिला (लगभग 40 kg बीज और 18 kg N प्रति एकड़)। बीज उपज के लिए किए गए दूसरे परीक्षणों में 7.5 से 10.5 kg प्रति हेक्टेयर परखा गया। बीज खरीदने से पहले दर KVK से पक्की कर लें।
पोषण और फसल की देखभाल
- अकोला के बीज परीक्षण में परखी गई सबसे ऊंची मात्रा, 50 kg N, 50 kg P2O5 और 25 kg K2O प्रति हेक्टेयर (लगभग 20, 20 और 10 kg प्रति एकड़), से सबसे ज्यादा बीज उपज मिली। पत्ती की फसल के लिए राजस्थान परीक्षण का 45 kg N प्रति हेक्टेयर (लगभग 18 kg प्रति एकड़) बेहतर मार्गदर्शक है। मिट्टी जांच करवाएं और देखें उर्वरक।
- हर कटाई के बाद हल्की सिंचाई दें ताकि दोबारा बढ़वार हो, और ज्यादा पानी से बचें।
- चूर्णिल आसिता, जड़ सड़न और माहू जैसी आम मेथी की समस्याएं आ सकती हैं; लेबल मानें और KVK से पूछें, और देखें कीट।
कटाई, सुखाई और उपज
- पत्ती की कटाई: यह प्रजाति 5 से 8 कटाई के लिए उपयुक्त है। एक पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज बुवाई के लगभग एक महीने बाद एक या दो बार हरी पत्ती काटने और फिर बीज चाहिए तो फसल को बीज के लिए छोड़ने की सलाह देता है।
- सुखाई: नागौर सर्वे में कटाई और सुखाई में 50 प्रतिशत से ज्यादा नुकसान पाया गया। साफ चादर पर या हवादार शेड में छाया में सुखाएं, पत्तियों को बारिश और ओस से बचाएं, और धूप से सफेद पड़ने तथा धूल से बचें, जो ग्रेड घटाते हैं। पूरी तरह कुरकुरी होने पर ही मसलें और पैक करें।
- उपज के आंकड़े कटाई की संख्या और बीज रखने पर काफी बदलते हैं। नीचे की लागत और आमदनी के आंकड़े नागौर के किसान सर्वे से हैं।
लागत और आमदनी
- नागौर जिले में नागौरी पान मेथी के एक आर्थिक अध्ययन (ICAR ePubs के जरिए प्रकाशित) ने प्रति हेक्टेयर बताया: खेती की लागत (Cost C2) ₹1,47,366; सूखी पत्ती और बीज का कुल मूल्य ₹4,06,645; कुल लागत के बाद शुद्ध आमदनी ₹2,59,279। यह सर्वे अवधि के भावों पर लगभग ₹59,600 लागत, ₹1.65 लाख कुल और ₹1.05 लाख शुद्ध प्रति एकड़ है।
- ये एक जिले के खेत सर्वे के औसत हैं, जिनमें पत्ती और बीज की आय मिली हुई है। भाव तब से बदले हैं, इसलिए सूखी पत्ती के प्रति kg लिखित भाव से दोबारा हिसाब लगाएं: कुल आमदनी = सूखी पत्ती kg x भाव + बीज kg x भाव।
बाजार और जोखिम
- उसी अध्ययन ने अधिसूचित मंडियों की कमी, कम व्यापारी और कमीशन एजेंट, और भाव की गारंटी न होने को मुख्य बाधाएं बताया, साथ में बीज की गुणवत्ता और सुखाई व ग्रेडिंग तकनीक को।
- खरीदार स्थानीय व्यापारी और मसाला प्रोसेसर हैं, जो साबुत या चूरा पत्ती के रूप में पैक कर सकते हैं। अपने पास मेथी पत्ती और बीज के लिए मंडी भाव देखें, और FPO के जरिए समूह में बेचने पर विचार करें। प्रोसेसर को सप्लाई करनी हो तो निर्यात खरीदार देखें।
- कसूरी मेथी पर कोई MSP नहीं है। फसल बीमा के नियमों के लिए PMFBY देखें।
स्रोत
- Economic analysis of Nagauri pan methi cultivation in Rajasthan, ICAR ePubs
- Leaf and seed yield of nagauri methi as influenced by seed rates and nitrogen levels, Indian Journal of Agricultural Sciences
- Sowing time and fertilizer levels in kasuri methi at Akola, Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry
- Effect of seed rate and nitrogen levels on seed yield and quality of kasuri methi, KrishiKosh
- Vikaspedia, fenugreek package of practices
