कैलेंडुला (गुले अशर्फी, Calendula officinalis) भारत में ठंड के मौसम की एक वार्षिक फसल के रूप में उगाई जा सकती है, लेकिन हर्बल फसल के रूप में इसके लिए ICAR या किसी राज्य कृषि विश्वविद्यालय का कोई पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज नहीं है, और सूखी पंखुड़ियों का कोई प्रकाशित भारतीय खेत-भाव भी नहीं है। इसे सिर्फ छोटे ट्रायल क्षेत्र में ही लगाना ठीक है, और तभी जब किसी हर्बल, चाय या सौंदर्य उत्पाद के खरीदार ने आपसे सूखी पंखुड़ियां लेने की हामी भरी हो।

इसे Tagetes (अफ्रीकी और फ्रेंच गेंदा) से न मिलाएं, जो माला के लिए उगाया जाता है। वह बड़ा, जमा-जमाया फूल व्यापार है जिसकी अपनी किस्में और मंडी भाव हैं। कैलेंडुला अलग प्रजाति है, फूल छोटे हैं, पंखुड़ी का बाजार सीमित है और भारत में इसका कोई संगठित व्यापार नहीं है।

जलवायु, मिट्टी और फसल अवधि

  • मौसम: कैलेंडुला पाले के प्रति संवेदनशील वार्षिक पौधा है जिसे हल्का, ठंडा मौसम पसंद है। गर्मी के दौर में फूल आना कम हो जाता है, और नमी वाले मौसम में पाउडरी मिल्ड्यू का खतरा बढ़ता है।
  • मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली, लगभग उदासीन pH की मिट्टी। जलभराव और भारी चिकनी मिट्टी से बचें।
  • समय: FAO EcoCrop के अनुसार बीज 4 से 5 दिन में उगता है और पहले फूल 40 से 50 दिन बाद आते हैं, और ठंडी जलवायु में पाला पड़ने तक फूल आते रहते हैं। कनाडा की एक विस्तार गाइड फूल के सिर के पकने में करीब 70 दिन बताती है। भारत में बीज बेचने वाले ठंडे महीनों में और पहाड़ों में वसंत में बुवाई की सलाह देते हैं। अपने जिले के लिए बुवाई का समय स्थानीय KVK से पक्का कर लें, क्योंकि कैलेंडुला का कोई राज्य package of practices नहीं है।

रोपाई और दूरी

  • बीज सीधे बोया जाता है या नर्सरी में तैयार कर करीब 4 से 6 हफ्ते बाद रोपा जाता है। Ontario की गाइड (OMAFRA) में पौधे से पौधे की दूरी 5 से 25 सेमी और कतार से कतार की दूरी 15 से 70 सेमी दी गई है।
  • सर्बिया के Novi Sad में (भारत से बाहर) हुए ट्रायल में कतार की दूरी 40, 50, 60 और 70 सेमी रखी गई और सबसे कम यानी 40 सेमी पर सबसे ज्यादा फूल द्रव्यमान, 5,379 किलो/हेक्टेयर, मिला। शुरुआत के लिए 40 सेमी कतार और 15 से 20 सेमी पौधे की दूरी पर प्रति एकड़ करीब 50,000 से 65,000 पौधे (1.2 से 1.6 लाख प्रति हेक्टेयर) बैठते हैं। यह विदेशी आंकड़ों से निकाला गया अनुमान है, भारतीय सिफारिश नहीं।
  • भारत में बिकने वाली नामी बगीचे की किस्में ज्यादातर सजावटी हैं। पंखुड़ी के खरीदार आमतौर पर नारंगी, गहरे रंग और पूरी तरह दोहरे फूल वाली किस्में चाहते हैं, इसलिए बीज खरीदने से पहले खरीदार से पूछ लें कि कौन सा रंग और रूप चलेगा।

खाद, सिंचाई और कीट

  • OMAFRA के अनुसार पोलैंड, ईरान और भारत के शोध में फूल और बीज की सबसे अच्छी उपज के लिए 80 से 100 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर (प्रति एकड़ 32 से 40 किलो) का दायरा सामने आया है। इसे बांटकर दें और खेत तैयार करते समय जैविक खाद डालें।
  • हल्की, नियमित सिंचाई दें और शाम को पत्तियां गीली करने से बचें; ड्रिप अच्छा रहता है (देखें drip irrigation)।
  • विस्तार गाइडों में बताए गए रोग पाउडरी मिल्ड्यू, जीवाणु पत्ती धब्बा, alternaria और दूसरे पत्ती झुलसा, रतुआ और botrytis हैं। चौड़ी दूरी, जल निकास और रोगी पौधे हटाने से मदद मिलती है। किसी भी छिड़काव के लिए लेबल और स्थानीय KVK की सलाह मानें, क्योंकि पंखुड़ियां त्वचा और चाय के उत्पादों में जाती हैं। देखें pests।

कटाई और सुखाई

  • फूल कई हफ्तों तक खिलते रहते हैं, इसलिए उन्हें हाथ से बार-बार तोड़ा जाता है, आमतौर पर जब फूल पूरा खिल जाए और पंखुड़ियां फीकी पड़ने से पहले। बीज वाली फसल एक बार काटी जाती है, जबकि फूल वाली फसल में कई बार तुड़ाई होती है।
  • दिन के ठंडे समय में तोड़ें, खेत की गर्मी निकालें और हवादार छांव में सुखाएं (OMAFRA)। ठीक से न सूखी या फफूंद लगी पंखुड़ियां हर्बल खरीदार लौटा देते हैं।
  • सूखी पंखुड़ी की स्थानीय उपज अपने KVK या राज्य औषधीय पौध बोर्ड से पूछें। विदेशी ट्रायल में ताजे फूल का द्रव्यमान कई टन प्रति हेक्टेयर बताया गया है, और सिर के वजन में पंखुड़ियां सिर्फ एक हिस्सा होती हैं, इसलिए सूखी पंखुड़ी की उपज बहुत कम बैठती है। अपने 0.1 एकड़ के ट्रायल में खुद नापें।
💡 सुझाव: पहली खेप सुखाकर तौलें और ज्यादा लगाने से पहले खरीदार को नमूना भेजें। तुड़ाई और सुखाई की मजदूरी सबसे बड़ा खर्च है, और भाव से यह खर्च निकलेगा या नहीं, यह आपके अपने आंकड़े ही दिखाएंगे।

लागत और कमाई

  • भाव: कोयंबटूर के एक हर्बल सामग्री व्यापारी की ऑनलाइन लिस्टिंग में, जो अक्टूबर 2026 में देखी गई, सूखा कैलेंडुला फूल ₹450 प्रति किलो था। यह व्यापारी का बिक्री भाव है, और भारत में आयातित पंखुड़ियां भी बिकती हैं (कोलकाता का एक व्यापारी मिस्र मूल का माल बेचता है), इसलिए उगाने वाले को इससे काफी कम मिलने की उम्मीद रखनी चाहिए।
  • हिसाब जो खुद लगाएं: प्रति एकड़ कुल आय = सूखी पंखुड़ी के किलो x वह भाव जो आपका खरीदार लिखित में दे। जैसे लिस्टिंग भाव पर 100 किलो सूखी पंखुड़ी ₹45,000 होती, लेकिन भारतीय उगाने वालों के लिए उपज और भाव दोनों अजमाए नहीं गए हैं, इसलिए इसे सिर्फ नमूने के रूप में लें।
  • खेती की स्थानीय लागत अपने KVK से पूछें। बीज, खाद, सिंचाई, बार-बार तुड़ाई की मजदूरी, सुखाने की जगह और ढुलाई गिनें।

बाजार और जोखिम

  • खरीदार हर्बल चाय बनाने वाले, सौंदर्य और साबुन बनाने वाले, आयुर्वेद और हर्बल उत्पाद कंपनियां और प्राकृतिक रंग निकालने वाले हैं। बुवाई से पहले उनसे संपर्क करें और ग्रेड, नमी की सीमा और भुगतान की शर्तें पूछें।
  • बाजार छोटा है। कई किसानों के कुछ एकड़ भी इसे भर सकते हैं, और आयातित पंखुड़ियों से मुकाबला रहता है।
  • buy-back के वादे के साथ बीज बेचने वालों से सावधान रहें। शर्तें लिखित में लें। समूह में बिक्री के लिए FPO और औषधीय पौधों की मदद के लिए subsidy finder देखें। कैलेंडुला शामिल है या नहीं, यह राज्य बागवानी विभाग या राज्य औषधीय पौध बोर्ड से पूछें।

स्रोत