इसबगोल (साइलियम, Plantago ovata) उत्तर गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के सूखे इलाकों के किसानों के लिए एक व्यावहारिक नकदी फसल है, क्योंकि यह कम पानी वाली सर्दी की फसल है और ऊंझा में इसकी स्थापित मंडी है। बुवाई के समय ठंडा मौसम और कटाई के समय सूखा, बारिश रहित मौसम चाहिए, और भाव साल दर साल बहुत ऊपर नीचे होते हैं।

फसल बीज के रूप में बिकती है; भूसी (वजन में बीज का लगभग चौथाई हिस्सा) बाद में प्रोसेसर अलग करते हैं, इसलिए किसान पूरा बीज बेचता है। पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज की उपज के हिसाब से लगभग 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (3.2 से 4 क्विंटल प्रति एकड़) मानकर चलें, और इससे ज्यादा के आंकड़ों को सबसे अच्छी स्थिति मानें।

भारत में कहां उगती है

  • मुख्य पट्टी: उत्तर गुजरात (ऊंझा और सिद्धपुर पट्टी, मेहसाणा जिला) भारत के उत्पादन का 75 से 80% बताया जाता है, उसके बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश (व्यापारिक स्रोत पहले दो को मुख्य पट्टी बताते हैं)। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में छोटे, बढ़ते क्षेत्र हैं।
  • जलवायु: अंकुरण 20 से 25 डिग्री C पर सबसे अच्छा होता है और फसल 30 से 35 डिग्री C के सूखे मौसम में पकती है; बताई गई वर्षा सीमा 50 से 125 सेमी सालाना है, पर फूल और कटाई के समय बारिश या भारी ओस फसल बिगाड़ती है।
  • मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट सबसे अच्छी, pH 7.2 से 7.9; चिकनी दोमट और काली कपास मिट्टी में भी उगाई जा सकती है बशर्ते पानी न रुके।

किस्में

किस्मकहां से जारी / स्रोतविशेषताएंटिप्पणी
Gujarat Isabgol-1 (GI-1)गुजरात (1976 में जारी)गहरी हरी पत्तियां; 110 से 115 दिन में पकती हैपुरानी किस्म, उत्तर गुजरात में अब भी दिखती है
Gujarat Isabgol-2 (GI-2)गुजरात (1983 में जारी)मध्यम चौड़ी हल्की हरी पत्तियां; 110 से 115 दिनगुजरात पट्टी में खूब उगाई जाती है
Haryana Isabgol-5 (HI-5)हरियाणा140 से 145 दिन; 1,000 से 1,200 किलो/हेक्टेयर; भूसी 25 से 30%लंबी अवधि, उत्तरी राज्यों के लिए उपयुक्त
Jawahar Isabgol-4 (JI-4)1996 में जारीपतली घनी पत्तियां, गुलाबी सफेद भूसी; 1,300 से 1,500 किलो/हेक्टेयरबताई गई उपज क्षमता है, खेत की पक्की उपज नहीं
Vallabh Isabgol-1, 2, 3गुजरात (2015 से 2016)जल्दी पकने वाली; तीनों में 897 से 1,440 किलो/हेक्टेयरनई किस्में; बीज की उपलब्धता विश्वविद्यालय या KVK से पूछें

तालिका की उपज के आंकड़े किस्मों के विवरण और एक व्यापारिक पत्रिका के सार से हैं; ये क्षमता हैं। प्रमाणित बीज और वर्तमान अनुशंसित किस्म के लिए Sardarkrushinagar Dantiwada Agricultural University (SDAU), Anand Agricultural University या नजदीकी KVK से पूछें।

बुवाई, बीज और दूरी

  • समय: नवंबर से दिसंबर के मध्य तक अनुशंसित समय है; अक्टूबर का आखिरी सप्ताह से नवंबर का दूसरा पखवाड़ा आदर्श बताया गया है, और नवंबर के पहले सप्ताह की बुवाई से सबसे अच्छी उपज मिलती है। बहुत जल्दी बुवाई, जब मौसम अब भी गर्म और नम हो, डाउनी मिल्ड्यू का खतरा बढ़ाती है।
  • विधि: बारीक, ढेले रहित क्यारी तैयार करें, क्यारियां बनाएं (जैसे 2.5 x 2.5 मीटर), और लगभग 30 सेमी की दूरी पर पंक्तियों में बोएं (एक ICAR ट्रायल में 20, 25 और 30 सेमी पंक्तियां लगभग बराबर निकलीं, 25 सेमी थोड़ी बेहतर)।
  • बीज दर: पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज में 4 किलो/हेक्टेयर है। बीज दर के एक ट्रायल (4, 6, 8 किलो/हेक्टेयर) में 8 किलो/हेक्टेयर पर सबसे ज्यादा बीज उपज और शुद्ध आय मिली।
मदप्रति हेक्टेयरप्रति एकड़
बीज दर (पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज)4 किलो1.6 किलो
बीज दर (ICAR अध्ययन, सबसे अच्छा लाभ)8 किलो3.2 किलो
जमीन तैयारी के समय गोबर की खाद10 से 15 टन4 से 6 टन
बेसल N : P2O5 : K2O50 : 25 : 30 किलो20 : 10 : 12 किलो
टॉप ड्रेसिंगबुवाई के लगभग एक महीने बाद नाइट्रोजन का हिस्सावही

सिंचाई और पोषण

  • बुवाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई दें; बीज 6 से 7 दिन में उगता है। पौध कम हो तो दूसरी हल्की सिंचाई मदद करती है। बाकी सिंचाइयां मिट्टी की नमी के हिसाब से दें, आखिरी सिंचाई बाली की दूधिया अवस्था पर। नमी वाले मौसम में भारी सिंचाई से बचें, क्योंकि इससे डाउनी मिल्ड्यू बढ़ता है।
  • नाइट्रोजन बांटकर दें: आधी या ज्यादा बेसल और बाकी बुवाई के एक महीने बाद टॉप ड्रेसिंग। मिट्टी की जांच कराएं; उत्पाद विकल्पों के लिए उर्वरक देखें।

कीट और रोग

  • डाउनी मिल्ड्यू (Peronospora plantaginis): मुख्य रोग। पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज में बोर्डो मिश्रण या कॉपर फफूंदनाशी, या mancozeb, 2 से 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की सलाह है। जल्दी बुवाई, घनी फसल और नम मौसम जोखिम बढ़ाते हैं।
  • मिट्टी के कीट: हल्की मिट्टी में दीमक और सफेद गिडार; फूल के समय माहू। पुराने पैकेज में ऐसे कीटनाशक लिखे हैं जिनकी अब अनुमति नहीं है; KVK से अभी पंजीकृत दवा पूछें और लेबल के अनुसार चलें। कीट देखें।

कटाई और उपज

  • फसल 110 से 130 दिन में पकती है (HI-5 को 140 से 145 दिन लगते हैं), इसलिए कटाई मार्च से अप्रैल में आती है। फसल पककर सूख जाने पर काटें, क्योंकि कटाई के पास बारिश या ज्यादा नमी से बीज झड़ता है और गुणवत्ता गिरती है; कटाई की अवस्था KVK से पक्की कर लें।
  • हल्के हाथ से गहाई करें, उफनाई करें और बीज को कम नमी तक सुखाएं। बीज सूखा रखें; गीला बीज ग्रेड खोता है।
  • उपज: 8 से 10 क्विंटल प्रति हेक्टेयर (3.2 से 4 क्विंटल प्रति एकड़) पैकेज का आंकड़ा है। भूसा बीज के वजन का लगभग दोगुना होता है। भूसी की रिकवरी बीज की लगभग 25 से 30% है; यह प्रोसेसर की रिकवरी है, आपकी उपज नहीं।
💡 सुझाव: इसबगोल कटाई के समय के मौसम पर टिका एक मौसम का दांव है। अनुशंसित समय में बोएं, खेत की जल निकासी अच्छी रखें, और कटाई मौसम पेज के पूर्वानुमान के हिसाब से तय करें।

लागत और आय

  • भाव (तारीख सहित): ऊंझा APMC में इसबगोल का मॉडल भाव 1 अक्टूबर 2026 को ₹13,550 प्रति क्विंटल था (दायरा ₹10,375 से ₹15,855), उस दिन लगभग 581 टन आवक थी (ACROP के जरिए Agmarknet डेटा)। 29 जुलाई 2026 को भाव ₹12,800 था। ये एक मंडी के थोक भाव हैं, पक्की पेशकश नहीं। ताजा भाव मंडी भाव पर देखें।
  • गणित (उदाहरण): 8 से 10 क्विंटल/हेक्टेयर x ₹13,550 = लगभग ₹1.08 से ₹1.36 लाख प्रति हेक्टेयर कुल आय (₹44,000 से ₹55,000 प्रति एकड़)। भाव ₹10,375 तक गिरे तो कुल आय ₹83,000 से ₹1.04 लाख प्रति हेक्टेयर रहती है।
  • लागत: छपे लागत आंकड़े पुराने हैं। ICAR पत्रिका के एक बीज दर ट्रायल में ₹31,175 प्रति हेक्टेयर की शुद्ध आय और 3.69 का लाभ लागत अनुपात मिला, और एक व्यापारिक सार में ₹15,000 प्रति हेक्टेयर खेती की लागत बताई गई है। भारत का कोई ताजा लागत आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए अपने बीज, मजदूरी, सिंचाई और गहाई के खर्च को ऊपर की कुल आय से मिलाएं।

बाजार और जोखिम

  • बीज ऊंझा APMC (मेहसाणा) में और व्यापारियों के जरिए ऊंझा और सिद्धपुर के आसपास की भूसी प्रोसेसिंग इकाइयों को बिकता है। भारत दुनिया की अधिकांश साइलियम आपूर्ति करता है, और एक व्यापारिक स्रोत अमेरिका, कनाडा और यूरोप को मुख्य गंतव्य बताता है।
  • भाव निर्यात मांग और गुजरात की फसल के आकार पर निर्भर करता है। अक्टूबर 2026 के एक दिन ऊंझा का दायरा ₹10,375 से ₹15,855 तक रहा, इसलिए गुणवत्ता मायने रखती है, और बुवाई के समय का भाव कटाई के समय के भाव का संकेत नहीं है।
  • इसबगोल का कोई सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं है (MSP सूची), इसलिए PMFBY के तहत फसल बीमा और किसान क्रेडिट कार्ड मुख्य आर्थिक सुरक्षा हैं, इन्हें जांचें।
  • कटाई पर बारिश, नम सर्दियों में डाउनी मिल्ड्यू और बहुत जल्दी बुवाई कमजोर फसल के सामान्य कारण हैं। पास में कोई प्रोसेसर न हो तो मिलकर बेचने के लिए FPO से जुड़ें। अन्य औषधीय फसलों के लिए अश्वगंधा देखें।

स्रोत