गम्हार (Gmelina arborea) एक इमारती पेड़ है जो भारत के बड़े हिस्से में जंगली रूप से उगता है। यह नम, अच्छे जल निकास वाली उपजाऊ जमीन पर तेजी से बढ़ता है और करीब 4 से 5 साल में लुगदी की लकड़ी के रूप में, या करीब 10 से 12 साल में प्लाईवुड और फर्नीचर के लिए लट्ठों के रूप में बिक सकता है। यह उन किसानों के लिए ठीक है जिनके पास परती या मेड़ की जमीन है, जो एक दशक इंतजार कर सकते हैं, और जिनके पास ट्रक से पहुंचने लायक दूरी पर प्लाईवुड या आरा मिल है, क्योंकि इसका कोई मंडी भाव नहीं होता।

भारत में छपे बढ़वार के आंकड़े जगह के हिसाब से बहुत बदलते हैं, और प्रति एकड़ कितनी लकड़ी मिलेगी यह मिट्टी, बारिश, क्लोन और देखभाल पर निर्भर है। "प्रति हेक्टेयर 200 टन" जैसे ब्रोशर के आंकड़ों से सावधान रहें और अपने इलाके के असली बागानों के रिकॉर्ड पर हिसाब लगाएं।

भारत में यह कहां उगता है

  • इलाका: यह प्रजाति भारत की मूल है और उत्तर प्रदेश (झांसी, सहारनपुर, प्रयागराज), उत्तराखंड (हरिद्वार), पश्चिम बंगाल (झारग्राम) और असम (गोलाघाट) समेत कई राज्यों के कृषि वानिकी ट्रायल में लगाई गई है।
  • मौसम: सालाना करीब 750 मिमी से 4,500 मिमी बारिश काम करने की सीमा बताई गई है, और नम, गर्म इलाकों में बढ़वार सबसे अच्छी होती है।
  • मिट्टी: घाटियों और समतल जमीन की नम, उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली रेतीली दोमट। जलभराव, भारी चिकनी मिट्टी, या सूखी रेतीली और कमजोर मिट्टी में यह ठीक नहीं बढ़ता और बौना रह जाता है।
  • लकड़ी: हल्की लकड़ी, घनत्व करीब 450 से 650 किलो प्रति घन मीटर, आसानी से कटती है, प्लाईवुड की पतली परत, माचिस की तीलियों, फर्नीचर, पैकिंग और लुगदी में काम आती है।

रोपण सामग्री और दूरी

  • जानी-पहचानी बेहतर किस्म के क्लोन या पौधे लगाएं। Rain Forest Research Institute, Jorhat और IFGTB, Coimbatore को बेहतर बीज और accessions के स्रोत बताया गया है; असम की gene bank की स्टडी में चुने हुए क्लोन बढ़वार में आबादी के औसत से करीब 15 से 25% बेहतर मिले। अपने राज्य के वन विभाग या वन अनुसंधान संस्थान से पूछें कि प्रमाणित नर्सरी कौन सी है।
  • कृषि वानिकी ट्रायल में 5 x 5 मीटर (प्रति एकड़ करीब 160 पेड़, प्रति हेक्टेयर 400), 5 x 4 मीटर (प्रति एकड़ करीब 200, प्रति हेक्टेयर 500) और 4 x 5 मीटर या 5 x 3 मीटर की दूरी रखी गई। झांसी में मूंग के साथ 5 x 4 मीटर पर सबसे अच्छा लाभ-लागत अनुपात 2.67 रहा, जबकि सबसे चौड़ी दूरी 5 x 5 मीटर पर तना सबसे मोटा (27.4 सेमी) मिला।
  • मानसून की शुरुआत में पहले से खोदे गड्ढों में रोपें (गड्ढे का स्थानीय आकार और खाद अपने KVK से पूछें), और छोटे पौधों को बकरी और मवेशियों से बचाएं।

खेत के ट्रायल में बढ़वार

जगह और प्रणालीक्या दर्ज हुआ
हरिद्वार, सहारनपुर, प्रयागराज (4 x 5 मीटर और 5 x 5 मीटर, परती जमीन)सबसे अच्छी जगह पर 2 साल में ऊंचाई 4.96 मीटर और तने की मोटाई 44.5 सेमी बढ़ी
झांसी, उत्तर प्रदेश (5 x 5, 5 x 4, 5 x 3 मीटर, मूंग के साथ)स्टडी की अवधि में 5 x 4 मीटर पर पेड़ की ऊंचाई 6.01 मीटर
झारग्राम, पश्चिम बंगाल (अंतरफसलों के साथ पुराने पेड़)लकड़ी का आयतन 4.2 से 5.3 घन मीटर प्रति हेक्टेयर प्रति साल; उड़द की अंतरफसल सबसे अच्छी (पेड़ की ऊंचाई 8.35 मीटर, dbh 16.78 सेमी)
असम gene bank (चुने हुए क्लोन)अच्छी परिस्थितियों में इस प्रजाति की बढ़वार 15 से 25 घन मीटर प्रति हेक्टेयर प्रति साल बताई गई

करीब 5 और करीब 15 से 25 घन मीटर प्रति हेक्टेयर प्रति साल के बीच बड़ा फर्क है। औसत जमीन वाले किसान को निचले सिरे के आसपास का हिसाब रखना चाहिए।

अंतरफसल, देखभाल और बचाव

  • शुरू के 2 से 4 साल, जब छतरी खुली रहती है, अंतरफसल चल सकती है। झारग्राम में दलहनी फसलों (उड़द, मूंगफली) ने धान से ज्यादा पेड़ की बढ़वार बढ़ाई। वहां अंतरफसल की उपज धान 1.97 टन प्रति हेक्टेयर, लोबिया 1.03, मूंगफली 0.69 और उड़द 0.46 रही, और उड़द व मूंगफली से शुद्ध आय करीब ₹13,800 प्रति हेक्टेयर प्रति साल मिली।
  • पहले और दूसरे साल पौधों के आसपास खरपतवार न रहने दें, साफ लट्ठे के लिए नीचे की डालियां छांटें, और घने झुंड को पतला करें। भारत के लिए कोई खाद की तालिका नहीं मिली; मिट्टी जांच पर आधारित मात्रा के लिए अपने KVK या वन विभाग से पूछें।
  • यह खड़े पानी में ठीक नहीं बढ़ता। किसी भी रसायन से पहले अपने KVK से स्थानीय कीट और सूखने की समस्याओं के बारे में पूछें, और लेबल के हिसाब से चलें।

कटाई और रोटेशन

  • लुगदी और जलाऊ लकड़ी के लिए करीब 4 से 6 साल का छोटा रोटेशन; आरा लट्ठों और प्लाईवुड के टुकड़ों के लिए करीब 10 से 12 साल। भाव उम्र से नहीं, कटाई के समय के घेरे से तय होता है।
  • पेड़ काटने और ढुलाई के नियम राज्य के हिसाब से अलग हैं। रोपने से पहले और काटने से पहले अपने Divisional Forest Officer से पूछ लें कि आपके राज्य में बागान के पंजीकरण या ट्रांजिट परमिट की जरूरत है या नहीं।
💡 सुझाव: रोपने से पहले नजदीकी प्लाईवुड या विनियर यूनिट जाकर पूछें कि वे कितना घेरा और लंबाई लेते हैं, प्रति टन या घन फुट का मौजूदा भाव क्या है, और क्या वे खेत से खरीदते हैं। भाव बदलते रहते हैं, और भारत की कोई मौजूदा भाव सूची प्रमाणित नहीं हो सकी।

लागत और कमाई

  • गम्हार के लिए भारत की कोई प्रमाणित खेती-लागत तालिका नहीं मिली। लागत में पौधे, गड्ढे, बाड़, 2 साल की निराई, छंटाई, कटाई और ढुलाई आती है।
  • अपने आंकड़ों से करने लायक हिसाब: प्रति एकड़ पेड़ x कटाई तक बचे पेड़ (अक्सर 80% या कम) x प्रति पेड़ आयतन या वजन x खरीदार का भाव, फिर कुल लागत घटाकर रोटेशन के सालों से भाग दें। अंतरफसल शुरू की लागत का कुछ हिस्सा निकाल सकती है।
  • एक संदर्भ स्रोत अच्छे प्रबंधन में आखिरी कटाई पर प्रति पेड़ करीब 1.5 से 2 टन बताता है। यह एक संदर्भ पेज का ऊपरी आंकड़ा है और स्थानीय बागान के सबूत के बिना बजट में नहीं लेना चाहिए।

बाजार और जोखिम

  • खरीदार प्लाईवुड, विनियर, माचिस, पैकिंग और फर्नीचर इकाइयां और लुगदी मिलें हैं। कोई खुला मंडी भाव नहीं है, इसलिए जुबानी खरीदार काफी नहीं है। हो सके तो रोपने से पहले लिखित खरीद का वादा लें।
  • जोखिम: लंबा इंतजार, जलभराव से नुकसान, खराब क्लोन, और कमजोर स्थानीय बाजार। अगर ट्रक की पहुंच में कोई खरीदार नहीं है तो यह फसल लगाने लायक नहीं है।
  • समूह में बिक्री के लिए FPO, कर्ज के लिए KCC और कृषि वानिकी की मदद के लिए subsidy finder देखें। किसी राज्य की सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हो सकी।

स्रोत