दमास्क गुलाब (Rosa damascena) उत्तर भारत के पहाड़ों और मैदानों में गुलाब जल और गुलाब तेल के लिए उगाया जा सकता है, जिनमें हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल हैं, लेकिन केवल तभी जब पहले से आसवन का रास्ता और खरीदार तय हो। फूल लगभग एक महीना ही चलते हैं, उन्हें सुबह जल्दी तोड़ना और उसी दिन आसवित करना पड़ता है, और तेल केवल लगभग 0.03 से 0.045% मिलता है।

तेल की प्राप्ति इतनी कम होने के कारण यह फसल तभी फायदेमंद है जब फूलों को खेत के पास ही गुलाब जल, तेल या गुलकंद में बदला जाए। भारत का प्रकाशित अर्थशास्त्र सीमित और पुराना है; नीचे के आंकड़े CSIR-IHBT पालमपुर के परीक्षणों और 2011 के पंजाब अध्ययन से हैं।

भारत में कहां उगता है

  • राज्य: CSIR-IHBT का एक शोधपत्र हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब को वर्तमान खेती के क्षेत्र बताता है, जहां व्यावसायिक खेती मुगल काल से चली आ रही है, और देश का तेल उत्पादन लगभग 200 किलो प्रति वर्ष बताता है। उत्तर प्रदेश का कन्नौज आसवन का पारंपरिक केंद्र है।
  • शोध स्थल: पालमपुर, हिमाचल प्रदेश, लगभग 1,320 से 1,393 मी पर, हल्की-शीतोष्ण से उप-शीतोष्ण और आर्द्र जलवायु, जहां साल में लगभग 2,500 मिमी बारिश होती है।
  • फूल आना: पालमपुर में फूल अप्रैल में शुरू होते हैं और तुड़ाई लगभग 30 से 38 दिन चलती है। उसके बाद अगली बसंत तक फूल की फसल नहीं मिलती।
  • मिट्टी और पानी: अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी; पालमपुर के परीक्षण वर्षा आधारित थे। जलभराव वाली जगह से बचें।

किस्में

किस्मस्रोतकहां उपयुक्त
JwalaCSIR-IHBT, पालमपुरउपोष्ण उत्तरी मैदान, निचली पहाड़ियां और लगभग 1,200 मी तक की मध्य पहाड़ियां
HimrozCSIR-IHBT, पालमपुरहल्के से ठंडे शीतोष्ण क्षेत्र, लगभग 1,200 से 2,500 मी
Noorjahan, RanisahibaCSIR-CIMAP, लखनऊमैदान; वर्तमान प्रदर्शन और रोपण सामग्री के लिए CIMAP से पूछें
  • IHBT ने Jwala और Himroz से क्लोन भी चुने हैं; पालमपुर के एक अध्ययन में क्लोनों में ताजे फूल की उपज 630 से 966 ग्राम प्रति पौधा और तेल की मात्रा ताजे फूल के वजन का 0.030 से 0.045% रही।
  • कलमें संस्थान या मान्य नर्सरी से लें, उन अनजान विक्रेताओं से नहीं जो अधिक उपज वाली किस्म का दावा करते हैं।

दूरी और रोपाई

  • पालमपुर के परीक्षणों में कतारों के बीच 1.5 मी और पौधों के बीच 0.75 मी रखा गया, यानी लगभग 8,900 पौधे प्रति हेक्टेयर या लगभग 3,600 प्रति एकड़।
  • गुलाब बहुवर्षीय झाड़ी है; छंटाई वाले अध्ययन का बाग दस साल पुराना था, इसलिए एक बार जमने के बाद उपज कई सालों में बंटी रहती है।

पोषण और छंटाई

  • उर्वरक: IHBT के क्लोन परीक्षण में प्रति वर्ष 120 किलो N, 60 किलो P और 40 किलो K प्रति हेक्टेयर (लगभग 48, 24 और 16 किलो प्रति एकड़) दिया गया। अपनी मिट्टी की जांच के अनुसार बदलें; देखें उर्वरक।
  • छंटाई का समय बहुत मायने रखता है: IHBT के एक अध्ययन में अक्टूबर के पहले सप्ताह में जमीन से 5 से 8 सेमी ऊपर छंटाई से सबसे अधिक फूल उपज (दो वर्षों में 62.4 और 53.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर) मिली, जबकि जून की छंटाई से केवल 25.9 और 18.3 क्विंटल प्रति हेक्टेयर मिली। सर्दी (दिसंबर) की छंटाई पारंपरिक तरीका है।
💡 Tip: अक्टूबर की छंटाई का समय स्थानीय KVK या बागवानी वैज्ञानिक के साथ तय करें; परीक्षण का नतीजा मध्य पहाड़ी स्थान का है और मैदानों में वैसा न भी हो।

कीट और रोग

यहां इस्तेमाल हुए स्रोत भारतीय दमास्क गुलाब के लिए सत्यापित कीट और रोग कार्यक्रम नहीं देते। अपने क्षेत्र की वर्तमान सलाह के लिए नजदीकी KVK या CSIR-IHBT से पूछें और उत्पाद के लेबल का पालन करें।

तुड़ाई और उपज

  • तुड़ाई का समय: वाष्पशील तेल बचाने के लिए फूल हाथ से सुबह 6:00 से 9:00 बजे के बीच (एक परीक्षण में 6:00 से 7:30 बजे) तोड़े गए। फूल उसी दिन आसवन इकाई पहुंचने चाहिए।
  • फूल की उपज: पालमपुर के क्लोन अध्ययन में प्रति पौधा 0.63 से 0.97 किलो ताजे फूल, और सबसे अच्छी छंटाई में 53 से 62 क्विंटल प्रति हेक्टेयर। पंजाब में किसानों के आंकड़ों पर आधारित अध्ययन में औसत 942 किलो प्रति एकड़ मिला, यानी लगभग 9.4 क्विंटल प्रति एकड़ या 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
  • तेल: 0.03 से 0.045% प्राप्ति पर 1 किलो तेल के लिए लगभग 2,200 से 3,300 किलो ताजे फूल लगते हैं। पंजाब अध्ययन ने 942 किलो फूल को लगभग 264 ग्राम तेल गिना। गुलाब जल के लिए CSIR-CIMAP सुधरा हुआ Deg-Bhapka स्टिल और छोटे प्रोसेसरों के लिए उपयुक्त छोटी पोर्टेबल Asvika इकाइयां देता है।

लागत और आमदनी

  • पंजाब के उत्पादकों के 2011 के एक अध्ययन (Singh and Singh, Journal of Non-Timber Forest Products) ने 942 किलो फूल के लिए खेती की लागत ₹36,647 प्रति एकड़ प्रति वर्ष, तेल की लागत ₹38,617 प्रति 264 ग्राम, और शुद्ध आय ₹20,783 प्रति एकड़ प्रति वर्ष बताई, जिसमें लाभ-लागत अनुपात 1.54 और IRR 12.70% था।
  • ये 2011 के रुपये हैं। तब से मजदूरी और ईंधन की लागत बढ़ी है, इसलिए हिसाब खुद दोबारा बनाएं: प्रति एकड़ फूल x उत्पादों में बदले जाने वाला हिस्सा x भाव, घटाएं तुड़ाई की मजदूरी (तुड़ाई लगभग 5 सप्ताह में सिमटी होती है), आसवन का ईंधन और स्टिल।
  • आमदनी गुलाब जल या तेल के भाव और छोटी अवधि में बिक्री पर निर्भर है। लगाने से पहले देखें कि स्थानीय खरीदार क्या दाम देते हैं।

बाजार और बिक्री

  • खरीदारों में इत्र और अत्तर के आसवक (कन्नौज), गुलाब जल और गुलकंद बनाने वाले, और सौंदर्य प्रसाधन व खाद्य कंपनियां हैं। गुलाब तेल ग्राम के हिसाब से बिकता है, और गुणवत्ता तुड़ाई के समय, आसवन और भंडारण पर निर्भर है।
  • जोखिम: छोटा तुड़ाई मौसम, बसंत की अनिश्चित बारिश या ओले, तुड़ाई के समय मजदूरों की कमी। रोपाई से पहले भाव और गुणवत्ता की शर्तें लिखित में तय करें।
  • समूह में FPO के जरिए बेचने और स्टिल साझा करने से लागत घट सकती है। CSIR-IHBT और CSIR-CIMAP रोपण सामग्री और तकनीक देते हैं; अपने राज्य में उपलब्ध सहायता के लिए राज्य बागवानी विभाग या औषधीय और सुगंधित पौध बोर्ड से पूछें।

स्रोत