पेठा कद्दू (सफेद कद्दू, विंटर मेलन) भारत में व्यापक रूप से उगाया जाता है और इसे उगाना आसान है, लेकिन खेत पर इसका भाव कम है, इसलिए यह तभी फायदेमंद है जब आप इसे टन के हिसाब से पेठा बनाने वाले, प्रोसेसर या भरोसेमंद मंडी खरीदार को बेच सकें। उत्तर प्रदेश, खासकर आगरा के आसपास का इलाका, सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है, और आगरा का पेठा कारोबार मुख्य व्यावसायिक खरीदार है। पूरी तरह पका फल बिना कोल्ड स्टोरेज के तीन से चार महीने टिकता है, जिससे बेचने का समय चुनने की गुंजाइश मिलती है।

नीचे के आंकड़े TNAU, KAU, ओडिशा के एक किस्म परीक्षण और NIFTEM की पेठा प्रसंस्करण सामग्री से लिए गए हैं। पेठा कारोबार के भाव मौसम और साल के हिसाब से बदलते हैं; बुवाई से पहले मंडी भाव देख लें।

कहां उगता है और क्या चाहिए

  • क्षेत्र: NIFTEM की सामग्री उत्तर प्रदेश, केरल और तमिलनाडु को बड़े उत्पादक बताती है, जिनमें उत्तर प्रदेश (आगरा के पास) सबसे बड़ा उत्पादक है। ओडिशा (गजपति जिला) में भी परीक्षण हुए हैं।
  • मिट्टी: फल किसी भी मिट्टी में उगाया जा सकता है और खास देखभाल नहीं मांगता, लेकिन अच्छी जल निकासी वाली दोमट सुरक्षित चुनाव है। मानक तरीका गड्ढे हैं, समतल क्यारी नहीं (नीचे देखें)।
  • मौसम: TNAU तमिलनाडु के लिए जुलाई और जनवरी की रोपाई बताता है। उत्तर भारत में बुवाई की तारीख पाले और बारिश पर निर्भर है; अपने स्थानीय समय के लिए KVK से पूछें।
  • अवधि: TNAU के हाइब्रिड और CO 2 के लिए 120 से 130 दिन, CO 1 के लिए 140 से 150 दिन। NIFTEM के अनुसार फल बुवाई के 90 से 100 दिन बाद से तोड़े जा सकते हैं, जो लगभग 150 दिन तक चल सकता है।

किस्में

किस्मस्रोतफल और अवधिबताई गई उपज
CO 1TNAU, कोयंबटूर (1971)8 से 10 किलो का बड़ा लंबवत अंडाकार फल; 140 से 150 दिन20 से 25 टन/हेक्टेयर (TNAU फसल पृष्ठ पर किस्म समूह के लिए 30 से 35 टन/हेक्टेयर)
CO 2TNAU (1982), कोयंबटूर स्थानीय से चयन2 से 4 किलो का छोटा लंबवत फल; 120 से 130 दिन34 टन/हेक्टेयर
TNAU Ash Gourd Hybrid CO 1TNAU120 से 130 दिन; बीज दर 1.5 किलो/हेक्टेयरTNAU के अनुसार 80 से 90 टन/हेक्टेयर; इसे सर्वश्रेष्ठ स्थिति मानें
InduKAU, केरलऔसत फल 4.82 किलो; गूदा अच्छा मोटा24.5 टन/हेक्टेयर
TharaRARS पट्टाम्बी (KAU)1.22 किलो का फल; घरेलू और व्यावसायिक खेती22 टन/हेक्टेयर
Pusa Ujjwalओडिशा (गजपति) परीक्षण और NIFTEM की पेठा सूची में नामितप्रति बेल 5.41 फल, औसत फल 6.18 किलोगजपति परीक्षण में सबसे ज्यादा: 31.14 किलो प्रति बेल; Kashi Surbhi 23.2 किलो प्रति बेल
  • NIFTEM पेठा बनाने के लिए VAG 502, Pusa Ujjwal, CO 1, CO 2, Kashi Ujawal और MAH 1 को उपयुक्त बताता है। पेठा बनाने वाले को पका, रेशा रहित गूदा चाहिए, इसलिए बीज खरीदने से पहले खरीदार से उसकी पसंदीदा किस्म और फल का आकार पूछ लें।
  • गजपति परीक्षण का निष्कर्ष था कि कोई भी जीनोटाइप हर गुण में सबसे अच्छा नहीं था, इसलिए सिर्फ ज्यादा उपज देखने के बजाय खरीदार की जरूरत (फल का वजन, गूदा, भंडारण) के हिसाब से चुनें।
  • Vaidyakumbalam केरल की छोटे फल वाली औषधीय किस्म है, जिसका छिलका और टिकाऊपन अलग है; यह पेठा किस्म नहीं है।

रोपाई और पोषण

  • बीज दर: किस्मों के लिए 2.5 किलो/हेक्टेयर (लगभग 1 किलो प्रति एकड़), हाइब्रिड के लिए 1.5 किलो/हेक्टेयर (लगभग 0.6 किलो प्रति एकड़)।
  • गड्ढे और दूरी (TNAU): 30 x 30 x 30 सेमी के गड्ढे 2 मीटर x 1.5 मीटर पर, हर गड्ढे के चारों ओर थाला। यह लगभग 3,300 गड्ढे प्रति हेक्टेयर, यानी लगभग 1,350 प्रति एकड़ होते हैं।
  • बेसल: प्रति गड्ढा 10 किलो गोबर की खाद और 6:12:12 NPK मिश्रण 100 ग्राम (लगभग 33 टन खाद और 330 किलो मिश्रण प्रति हेक्टेयर; 13.5 टन और 135 किलो प्रति एकड़)। बुवाई के 30 दिन बाद प्रति गड्ढा 10 ग्राम नाइट्रोजन ऊपर से दें।
  • फर्टिगेशन: ड्रिप से देने पर TNAU 200:100:100 किलो N:P:K प्रति हेक्टेयर (लगभग 81:40:40 किलो प्रति एकड़) की सिफारिश करता है; देखें ड्रिप सिंचाई और उर्वरक। नीम खली 100 किलो/हेक्टेयर भी सुझाई गई है। मिट्टी जांच के हिसाब से मात्रा बदलें।
  • पानी: बुवाई से पहले थालों में सिंचाई करें, फिर लगभग हफ्ते में एक बार।

कीट और रोग

  • TNAU मुख्य समस्याओं में पत्ती भृंग, पत्ती खाने वाली सूंडियां, फल मक्खी और माहू, तथा चूर्णिल और मृदुरोमिल फफूंदी गिनाता है।
  • यहां दवा-दर-दवा मात्रा नहीं दी गई है। वही रसायन इस्तेमाल करें जो आपका KVK बताए, लेबल का पालन करें, और कीट गाइड देखें। मक्खी से खराब फल निकालकर नष्ट करें और बेलों को ठसाठस न रखें, इससे फफूंदी बढ़ती है।

कटाई, भंडारण और उपज

  • मोमी परत वाला पूरा पका फल तोड़ें। NIFTEM पेठे के लिए कच्चे फल से बचने की सलाह देता है, क्योंकि उसमें गूदा और टिकाऊपन कम होता है।
  • कटाई के बाद फल धो लें; पके फल बिना खास इंतजाम के 3 से 4 महीने टिकते हैं (NIFTEM)। चोट न लगने दें।
  • योजना के लिए उपज: TNAU और KAU के आंकड़ों से किस्मों की 20 से 35 टन/हेक्टेयर (8 से 14 टन प्रति एकड़)। हाइब्रिड के 80 से 90 टन/हेक्टेयर की पुष्टि देखे गए दूसरे स्रोतों में नहीं हुई।

कमाई: हिसाब कैसे लगाएं

NIFTEM की पेठा सामग्री चरम मौसम में ₹270 से 310 प्रति मन (40 किलो) बताती है, यानी लगभग ₹6.75 से 7.75 प्रति किलो, और महामारी के दौरान ₹400 से 410 प्रति मन तक (लगभग ₹10 प्रति किलो)। ये भाव पुराने हैं (लगभग 2020 से 2022) और रोज की नीलामी से तय होते हैं। आज का स्थानीय भाव लगाकर हिसाब करें।

स्थितिउपजभावप्रति एकड़ कुल आयप्रति हेक्टेयर कुल आय
कम12 टन प्रति एकड़ (30 टन/हेक्टेयर)₹6.75 प्रति किलो₹81,000₹2,02,500
ज्यादा14 टन प्रति एकड़ (35 टन/हेक्टेयर)₹7.75 प्रति किलो₹1,08,500₹2,71,250
  • ये कुल आय के आंकड़े हैं। पेठा कद्दू की खेती लागत का कोई आंकड़ा नहीं मिला; अपना बीज, गड्ढे की खाद, उर्वरक, मजदूरी, सिंचाई, ढुलाई और मंडी कमीशन घटाएं। स्थानीय आंकड़े के लिए KVK या राज्य बागवानी विभाग से पूछें।
  • फसल महीनों टिकती है, इसलिए सूखा, हवादार भंडार हो तो भाव बढ़ने पर किस्तों में बेचना संभव है।

बाजार और मूल्य संवर्धन

  • पेठा मुख्य बाजार है। NIFTEM की सामग्री के अनुसार आगरा में लगभग 1,500 कुटीर इकाइयां रोज 700 से 800 टन पेठा बनाती हैं। पेठे की लगभग आधी बिक्री पर्यटन से जुड़ी है, इसलिए मांग उसके साथ घटती-बढ़ती है। आगरा के पेठे को भौगोलिक संकेतक (GI) का दर्जा है।
  • 100 किलो पेठा बनाने के लिए निर्माता 200 से 250 किलो कद्दू, 10 किलो चूना और थोड़ी फिटकरी व साइट्रिक एसिड लेता है, यानी एक टन फल से लगभग 400 से 500 किलो पेठा बनता है।
  • पेठा बनाने वाले किसानों से या मंडी से खरीदते हैं। NIFTEM आपूर्ति पक्की करने का सबसे अच्छा तरीका अनुबंध खेती बताता है, जो भाव गिरने से भी आपकी सुरक्षा है: बुवाई से पहले निर्माता से भाव और सप्लाई की अवधि तय कर लें।
  • खुद पेठा बनाने के लिए खाद्य लाइसेंस (FSSAI) और प्रसंस्करण का इंतजाम चाहिए; प्रसंस्करण सहायता के लिए FPO और सब्सिडी खोजक देखें। PMFME योजना, जिसके तहत NIFTEM ये पेठा प्रशिक्षण सामग्री प्रकाशित करता है, ऐसा ही एक रास्ता है।
  • बीमा और ऋण: PMFBY (देखें कि आपके जिले में फसल अधिसूचित है या नहीं) और KCC।

स्रोत