खुबानी भारत में सिर्फ लद्दाख, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की ठंडी, सूखी पहाड़ियों में, और थोड़ी पूर्वोत्तर की पहाड़ियों में चलती है। अकेला लद्दाख देश की करीब 62% फसल लगभग 2,300 हेक्टेयर में उगाता है। पेड़ों को सर्दी का ठंडक-काल चाहिए, वे सूखी पहाड़ी घाटियों को सह लेते हैं, और इतनी जल्दी फूलते हैं कि वसंत का पाला मुख्य जोखिम है; फसल छोटे मौसम में ताजा बिकती है या सुखाकर।

बाग की उपज और अर्थशास्त्र पर भारत का छपा ट्रायल डेटा सीमित है। यहां के आंकड़े लद्दाख और हिमाचल के शोध पत्रों, लद्दाख के उत्पादन पर सरकारी और प्रेस विज्ञप्तियों, और एक दूसरे दर्जे की खेती गाइड से हैं, जिसकी उपज और खाद की संख्याएं पास के किसी बाग से मिलाकर देखनी चाहिए।

भारत में यह कहां उगती है

  • लद्दाख: Press Information Bureau की एक विज्ञप्ति (सितंबर 2022) के अनुसार लद्दाख में 2,303 हेक्टेयर और 15,789 टन उत्पादन है, यानी भारत की खुबानी का करीब 62%, और करीब 1,999 टन सूखी खुबानी। मुख्य इलाके कारगिल, लेह और नुब्रा घाटी हैं, और 2026 की एक प्रेस रिपोर्ट 6,000 से ज्यादा किसान परिवार गिनती है।
  • दूसरे राज्य: मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश (जैसे किन्नौर और शिमला जिले) और उत्तराखंड, और सीमित मात्रा में पूर्वोत्तर की पहाड़ियां।
  • ऊंचाई और जलवायु: लेह के पास 3,340 मीटर पर DIHAR (DRDO) के एक बाग में सालाना वर्षा 200 मिमी से कम है, ज्यादातर बर्फ के रूप में, और पेड़ों की कलियां फरवरी के आखिर से मार्च में फूटती हैं। दूसरे दर्जे की गाइड कहती है कि सफेद गूदे वाली किस्में करीब 3,000 मीटर तक और पीले गूदे वाली 1,000 से 1,500 मीटर के लिए ठीक हैं।
  • मिट्टी: गहरी, अच्छे जल निकास वाली दोमट, जैविक पदार्थ के साथ; गाइड pH 6.0 से 6.8 बताती है। लेह के बाग की मिट्टी गाद वाली दोमट है और उसका pH 6.8 है।
  • पाला: लेह के अध्ययन में फूल मार्च से अप्रैल तक आए, और देर से फूलना वसंत के पाले से बचने का उपयोगी गुण माना गया।

किस्में

किस्मस्रोतखासियतकहां के लिए ठीक
Raktsey Karpoलद्दाख की देसी; GI टैग दिसंबर 2022सफेद गुठली, ऊंचा TSS, देर से और लंबा फूलना व पकनालद्दाख (लेह, कारगिल)
Nyarmo (Narmu) और Khanteलद्दाख के स्थानीय समूहNyarmo की गिरी मीठी है; Khante की गिरी कड़वी हैलद्दाख
Halman, Tokpopa, Safeda, Charmagz, AfghaniDIHAR ट्रायल में लद्दाख की देसी और लाई गई किस्मेंफल ज्यादातर 35 ग्राम से कम, TSS 16.1 से 20.6%; तुड़ाई जून के आखिर से अगस्त तकशीत-मरुस्थल लद्दाख
Kaisha, Charmagaz, Suffaida, New Castle, St. Ambroise, Early Shipley, Nuggetहिमाचल प्रदेश (नौणी) में उगाई और अध्ययन की गईंज्यादातर यूरोपीय मूल की किस्में; फूल मार्च के आखिर से अप्रैल की शुरुआत मेंहिमाचल की मध्यम और ऊंची पहाड़ियां, शुष्क शीतोष्ण क्षेत्र
  • किस्म को अपने गांव के ठंडक-काल और पाले के पैटर्न से मिलाएं। देर से फूलने वाली किस्में पाले का नुकसान घटाती हैं। कलम के स्रोत के लिए राज्य के बागवानी विभाग, SKUAST, CITH श्रीनगर या नौणी से पूछें।
  • लेह ट्रायल में सबसे जल्दी वाली किस्म 28 जून को और सबसे देर वाली 10 अगस्त को तैयार हुई, यानी करीब 31 से 39 दिन का फर्क; अलग-अलग समय की किस्में मदद करती हैं क्योंकि ताजा फल ज्यादा नहीं टिकता।

रोपण सामग्री और दूरी

  • DIHAR लेह के पेड़ Chuli, यानी जंगली स्थानीय खुबानी के मूलवृंत पर कलम किए गए थे, 4 मीटर x 4 मीटर पर (करीब 250 पेड़ प्रति एकड़, 625 प्रति हेक्टेयर) लगाए गए और modified central leader तरीके से सधाए गए।
  • दूसरे दर्जे की गाइड 6 मीटर x 6 मीटर की सलाह देती है, जो करीब 112 पेड़ प्रति एकड़ (277 प्रति हेक्टेयर) बैठता है। गाइड की प्रति एकड़ पेड़ों की अपनी गिनती इस्तेमाल न करें।
  • मान्यता प्राप्त नर्सरी से सुप्त, स्वस्थ कलमी पेड़ लगाएं।

खाद और सिंचाई

  • दूसरे दर्जे की गाइड 7 साल और उससे बड़े पेड़ों के लिए साल में प्रति पेड़ 40 से 45 किलो गोबर की खाद के साथ 500 ग्राम N, 250 ग्राम P2O5 और 200 ग्राम K2O बताती है। छोटे पेड़ों को कम दें। मिट्टी की जांच कराएं और अपने KVK से पूछें, क्योंकि लद्दाख के लिए ICAR की कोई सारणी नहीं मिली।
  • सिंचाई फल बनने के समय सबसे ज्यादा मायने रखती है; गाइड गर्म, सूखे मई और जून में हर 8 से 10 दिन पर पानी देने को कहती है। लेह इलाके में सालाना वर्षा 200 मिमी से कम है, इसलिए बाग सिंचाई के पानी पर निर्भर हैं। ड्रिप के साथ भंडारण टैंक मदद करता है; देखें ड्रिप सिंचाई।

कीट और रोग

  • दूसरे दर्जे की गाइड Armillaria जड़ सड़न, फूल का brown rot, plum pox virus और peach twig borer गिनाती है। अपने KVK से पूछें कि स्थानीय रूप से कौन से हैं और मौजूदा छिड़काव योजना क्या है; लेबल के हिसाब से चलें।
  • शीत-मरुस्थल में आमतौर पर फूल के समय का पाला कीटों से बड़ा नुकसान करता है।

तुड़ाई और उपज

  • मौसम: लेह ट्रायल में फल जून के आखिर से अगस्त तक तोड़े गए; दूसरे दर्जे की गाइड कम ऊंचाई पर उगने वाली किस्मों के लिए मई के पहले सप्ताह से जून के अंत तक बताती है। लेह ट्रायल में फूल से तुड़ाई तक करीब 85 से 108 दिन लगे।
  • फल का आकार: लद्दाख की किस्मों के फल छोटे हैं, ज्यादातर 35 ग्राम से कम, और मिठास ज्यादा (16.1 से 20.6% TSS)।
  • उपज: दूसरे दर्जे की गाइड पूरे विकसित पेड़ों के लिए प्रति पेड़ 50 से 85 किलो, या प्रति हेक्टेयर 15 से 25 टन (करीब 6 से 10 टन प्रति एकड़) बताती है। लद्दाख के बाग की उपज का कोई आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए जहां पाला और छोटे फल वाली स्थानीय किस्में हों वहां कम और ज्यादा उतार-चढ़ाव वाली फसल मानकर चलें।
💡 सुझाव: लगाने से पहले देखें कि पिछले दस सालों में आपकी जगह पर फूल के समय कितने साल पाला नहीं पड़ा, और पहली फसल स्थानीय व्यापारी या सुखाने-पैकिंग वाले समूह के जरिए बेचकर भाव समझ लें।

लागत और कमाई

  • ताजी या सूखी खुबानी का कोई सत्यापित खेत-द्वार भाव नहीं मिला, और बाग की खेती की लागत का भी नहीं। खरीदारों और मंडी से ताजा भाव लें।
  • सूत्र (प्रति एकड़): 112 पेड़ x 50 किलो = 5,600 किलो ताजा फल, यानी हर ₹10 प्रति किलो भाव पर ₹56,000। प्रति पेड़ 85 किलो पर 9,520 किलो होता है और हर ₹10 पर ₹95,200। पाले वाले खराब साल में प्रति पेड़ 20 किलो पर ₹10 प्रति किलो से सिर्फ ₹22,400 मिलते हैं।
  • बजट में रखें: कलमी पेड़, गड्ढे, सिंचाई की नाली या ड्रिप, कटाई-छंटाई और तुड़ाई की मजदूरी, क्रेट और सुखाने का इंतजाम। सूचीबद्ध भाव के लिए मंडी भाव देखें।

बाजार और जोखिम

  • लद्दाख का ताजा निर्यात नया है: 2022 में 35 टन गया, और जुलाई 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार UAE के एक रिटेलर के साथ MoU में इस सीजन कम से कम 1,000 टन का लक्ष्य है, जिसकी पहली 5 टन खेप जुलाई 2026 में भेजी गई। निर्यात के लक्ष्यों को योजना मानें, पक्की मांग नहीं।
  • ताजी खुबानी जल्दी खराब होती है, और दूरदराज की घाटियों से सड़क और उड़ान का खर्च जुड़ता है। सुखाना, जो लद्दाख में करीब 1,999 टन है, ऐसा उत्पाद देता है जो टिकता और ढुलता है। कोल्ड स्टोरेज मदद करता है; देखें कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी और निर्यात खरीदार।
  • फूल के समय का वसंती पाला और सूखे सालों में पानी की कमी मुख्य जोखिम हैं। फसल बीमा PMFBY के जरिए तभी मिल सकता है जब राज्य ने फसल को अधिसूचित किया हो।
  • FPO के जरिए समूह में बिक्री और बागवानी योजनाओं के लिए subsidy finder देखने लायक हैं। खुबानी की कोई अलग सब्सिडी दर सत्यापित नहीं हुई। पहाड़ के संबंधित फल: आड़ू, आलूबुखारा।

स्रोत