निर्यात लायक Thompson Seedless भारत में मुख्य रूप से महाराष्ट्र की नासिक, सांगली और सोलापुर पट्टी तथा उत्तरी कर्नाटक में चलता है। इसके लिए ट्रेलिस वाला बाग, पक्की ड्रिप सिंचाई, ऐसा स्प्रे रिकॉर्ड जो यूरोप की अवशेष जांच में टिक सके, और रजिस्टर्ड पैक-हाउस या निर्यातक चाहिए। बिना खरीदार और तकनीकी मदद के छोटे प्लॉट पर इसे शुरू करना ठीक नहीं: बाग तैयार होने के बाद भी हर साल सिर्फ उत्पादन लागत ही करीब ₹2 से ₹2.5 लाख प्रति एकड़ बैठती है।

बाग की सारी उपज निर्यात ग्रेड की नहीं निकलती, इसलिए बाकी को घरेलू बाजार में कम भाव पर बेचना पड़ता है। हिसाब दोनों बाजारों को ध्यान में रखकर बनाएं।

कहां उगता है और क्या चाहिए

  • इलाका: Thompson Seedless और उसके क्लोन पर भारतीय ट्रायल नासिक के आसपास किसानों के बागों में हुए। Maharashtra State Grape Growers Association और ICAR-NRC Grapes (पुणे) मुख्य तकनीकी संस्थाएं हैं।
  • मिट्टी: TNAU के पैकेज के अनुसार मिट्टी का pH 6.5 से 7.0, विद्युत चालकता 1.0 से कम, गहराई कम से कम 1 मीटर और भूजल नीचे होना चाहिए। खारी या जलभराव वाली मिट्टी ठीक नहीं।
  • नासिक पट्टी में मौसम: NRC Grapes के ट्रायल में फल के लिए छंटाई अक्टूबर के पहले या दूसरे हफ्ते में की गई; निर्यात के गुच्छे इसके करीब 110 से 140 दिन बाद तोड़े जाते हैं, यानी कटाई जनवरी से मार्च के बीच आती है।
  • पानी: TNAU छंटाई और कटाई से 15 दिन पहले सिंचाई रोकने की सलाह देता है। ड्रिप आम तरीका है; देखें drip irrigation।

किस्में, क्लोन और रूटस्टॉक

चयनउत्पत्तिटिप्पणी
Thompson SeedlessVitis vinifera, भारत में लंबे समय से उगाई जाती है2018 के अध्ययन में उपज सबसे ज्यादा गुच्छे के वजन पर निर्भर रही
Tas-A-Ganeshसांगली के बोरगांव में किसान Vasantrao Arve की पहचानी हुई कलिका उत्परिवर्तनवहां उपज प्रति बेल टहनियों की संख्या पर ज्यादा निर्भर रही, इसलिए इसका प्रबंधन अलग होता है
2A cloneKearney Experimental Station, UC Davis, अमेरिकाउसी अध्ययन में उपज को बेल और गुच्छे के सामान्य मापों से बहुत कम समझा जा सका
Sonaka, Manik ChamanTNAU पैकेज में भारतीय बीजरहित किस्में बताई गई हैंअपने निर्यातक से पूछ लें कि उसे कौन सा प्रकार चाहिए
  • Indian Journal of Agricultural Sciences (2018) के अध्ययन में नासिक के बाग 6 से 7 साल पुराने थे, Dogridge रूटस्टॉक पर कलम किए गए थे और extended Y trellis पर चढ़ाए गए थे। अपनी मिट्टी और पानी के लिए कौन सा रूटस्टॉक ठीक रहेगा, यह NRC Grapes या किसी मान्यता प्राप्त नर्सरी से पूछें।
  • कलम किए पौधे सिर्फ ऐसी नर्सरी से लें जो किस्म और रूटस्टॉक का लेबल दे, और अपने खरीदार से पूछें कि उसे कौन सा क्लोन चाहिए।

दूरी और ट्रेनिंग

  • NRC Grapes के 2020 के Manjari Naveen किस्म के ट्रायल में Y ट्रेलिस पर 3.0 मीटर x 1.83 मीटर की दूरी रखी गई। इस दूरी पर प्रति एकड़ करीब 735 बेलें आती हैं (प्रति हेक्टेयर करीब 1,820)। Thompson Seedless की दूरी ट्रेलिस और रूटस्टॉक के हिसाब से बदलती है; स्थानीय स्तर पर पुष्टि करें।
  • TNAU का पैकेज मंडप (bower) पर Muscat के अलावा बाकी किस्मों के लिए 4 मीटर x 3 मीटर देता है, यानी प्रति एकड़ करीब 340 बेलें (प्रति हेक्टेयर करीब 830)।
  • ट्रेलिस या मंडप, ड्रिप और पैक-हाउस तक पहुंच शुरू के बड़े खर्च हैं। MIDH में नए अंगूर क्षेत्र की मौजूदा दर जिला बागवानी कार्यालय से subsidy finder के जरिए पूछें।

खाद, ग्रोथ रेगुलेटर और फल का भार

  • खाद और उर्वरक: TNAU प्रति बेल प्रति साल 50 से 100 किलो गोबर की खाद या कम्पोस्ट बताता है, साथ में किस्म और बढ़वार की अवस्था के हिसाब से N 0.10 से 0.60 किलो, P 0.08 से 0.24 किलो और K 0.30 से 1.20 किलो प्रति बेल। सही मात्रा KVK में मिट्टी और पत्ती की जांच के आधार पर तय करें। देखें fertilizers।
  • गुच्छों की गिनती से ज्यादा फल का भार मायने रखता है: NRC Grapes के Manjari Naveen ट्रायल में प्रति बेल 60 से 100 गुच्छे करने पर उपज बढ़ी लेकिन दाने का आकार और मिठास घट गई; प्रति बेल 60 गुच्छे ज्यादा संतुलित रहे। यह दूसरी किस्म है, पर इससे पता चलता है कि निर्यात करने वाले किसान गुच्छे क्यों पतले करते हैं।
  • ग्रोथ रेगुलेटर: बीजरहित अंगूर में दाने के आकार के लिए gibberellic acid इस्तेमाल होता है। APEDA की प्रक्रिया कहती है कि forchlorfenuron (CPPU) छंटाई के 65 दिन बाद या दाने के 6 से 8 मिमी होने के बाद नहीं देना चाहिए, ताकि अवशेष मिलने की संभावना घटे। हर दवा CIB&RC की पंजीकृत सूची और लेबल के भीतर रखें।
  • रोग: नमी वाले मौसम में डाउनी और पाउडरी mildew मुख्य फफूंद के खतरे हैं; NRC Grapes की स्प्रे सारणी मानें और कोई भी नई दवा डालने से पहले KVK से पूछें। नीचे बताए अवशेष नियमों के कारण बिना दर्ज या बिना पंजीकरण की दवा से उस प्लॉट का निर्यात रास्ता बंद हो सकता है।

निर्यात के नियम जो पूरे करने होंगे

  • फार्म पंजीकरण: EU और UK को जाने वाले अंगूर के लिए APEDA की 17 फरवरी 2026 की ट्रेड नोटिस के अनुसार हर फार्म और प्लॉट का जिला कृषि या बागवानी अधिकारी के पास GrapeNet पर पंजीकरण जरूरी है। पंजीकरण और नवीनीकरण हर साल 1 सितंबर से 31 दिसंबर तक होता है; फीस ₹50 प्रति प्लॉट प्रति साल है और देर से आवेदन पर ₹100 लेट फीस लगती है। प्लॉट को 12 अंकों का पंजीकरण नंबर मिलता है, और पंजीकरण तीन साल के लिए मान्य है पर हर साल नवीनीकरण कराना होता है।
  • स्प्रे रिकॉर्ड: पंजीकृत किसान को हर रसायन का प्लॉट के हिसाब से रिकॉर्ड (तारीख, उत्पाद, मात्रा, कटाई से पहले का अंतराल) रखना होता है और प्लॉट पर किसान का नाम और प्लॉट नंबर लगाना होता है। रिकॉर्ड न हो तो लैब नमूने की जांच से मना कर सकती है।
  • ग्रेडिंग: टेबल अंगूर के Agmark मानक में कम से कम 16 डिग्री Brix और शर्करा/अम्ल अनुपात 20:1 तय है, और Extra Class, Class I और Class II ग्रेड हैं। Agmark ग्रेडिंग प्रमाणपत्र मान्यता प्राप्त लैब से मिलते हैं, 15 दिन के लिए मान्य होते हैं, और आवेदन फीस ₹1,000 है।
  • पैक-हाउस: अंगूर की ग्रेडिंग और पैकिंग APEDA से मान्यता प्राप्त पैक-हाउस में होती है, आमतौर पर निर्यातक के जरिए।
💡 सुझाव: 31 दिसंबर की आखिरी तारीख से पहले अपना प्लॉट पंजीकृत कराएं और छंटाई से पहले निर्यातक से बात करें, कटाई के वक्त नहीं। पूछें कि उसे कौन सा क्लोन, दाने का आकार और अवशेष सीमा चाहिए और भुगतान कैसे और कब होगा।

उपज, लागत और कमाई

  • उपज: TNAU बीजरहित अंगूर के लिए प्रति हेक्टेयर प्रति साल 15 टन बताता है, यानी प्रति एकड़ करीब 6 टन। इसका सिर्फ एक हिस्सा निर्यात ग्रेड का निकलता है।
  • उत्पादन लागत: Indian Journal of Horticulture (2020) के एक पेपर में Thompson Seedless की उत्पादन लागत बाग लगाने का खर्च छोड़कर करीब ₹2.0 से ₹2.5 लाख प्रति एकड़ प्रति साल बताई गई है। हिस्सों में यह उर्वरक 24%, पौध संरक्षण 28%, ग्रोथ रेगुलेटर 20%, मजदूरी 13% और अन्य खर्च 15% रही।
  • बराबरी का हिसाब: ₹2 से ₹2.5 लाख को 6,000 किलो से भाग दें तो पूरी उपज पर करीब ₹33 से ₹42 प्रति किलो आता है। निर्यात और घरेलू भाव मौसम के साथ ऊपर-नीचे होते हैं, इसलिए निर्यातक से उस साल का भाव लिखित में लें और अपना मुनाफा खुद निकालें; खेत पर मिलने वाला कोई भाव यहां नहीं दिया गया क्योंकि वह हर हफ्ते बदलता है। घरेलू भाव mandi bhav पर देखें।
  • समय: नए बाग में ट्रेलिस बनाने और पूरी व्यावसायिक फसल आने में कई साल लगते हैं; अपने रूटस्टॉक का कार्यक्रम NRC Grapes या KVK से पूछें।
  • बीमा और कर्ज के लिए देखें PMFBY और KCC; साथ ही export buyers भी देखें।

बाजार और जोखिम

  • खरीदार APEDA से मान्यता प्राप्त पैक-हाउस वाले निर्यातक हैं; APEDA की पंजीकरण प्रक्रिया EU और UK के बाजारों पर लागू है। बिना पंजीकृत प्लॉट वाला किसान EU को माल नहीं दे सकता।
  • अवशेष की वजह से माल लौटना, फूल आने या पकने के समय बेमौसम बारिश, और निर्यात भाव का उतार-चढ़ाव मुख्य जोखिम हैं। FPO के जरिए समूह में बेचने से पैक-हाउस और ढुलाई का खर्च प्रति किलो घट सकता है।

स्रोत