आलूबुखारा भारत में दो तरह की जगहों पर चलता है: हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा उत्तराखंड के मध्य-पहाड़ी और पहाड़ी ऊंचाइयों पर जापानी आलूबुखारा (Prunus salicina), और पंजाब व आसपास के उपोष्ण मैदानों में Satluj Purple और Kala Amritsari जैसी कम-शीतलन किस्में। किस्म आपकी जगह की सर्दी की ठंड से मेल खानी चाहिए, और फसल तभी लगाने लायक है जब ऐसे फल के लिए बाजार तक पहुंच हो जो दबता है और कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है।
पेड़ कुछ ही साल में फल देने लगते हैं और फल जल्दी पकता है, कम-शीतलन पट्टी में मई से लेकर पहाड़ों में अगस्त तक। मुख्य जोखिम हैं: परागणकर्ता के बिना खुद-बांझ किस्म लगाने पर कम फल लगना, फल मक्खी, और एक साथ ढेर सारे फल आने से भाव का उतार-चढ़ाव।
भारत में यह कहां उगता है
- इलाके: हिमाचल प्रदेश (कुल्लू घाटी जैसे मध्य-पहाड़, जहां नौणी, सोलन में जापानी आलूबुखारा किस्मों के ट्रायल हुए), जम्मू और कश्मीर और उत्तराखंड, साथ में पंजाब के मैदानों में कम-शीतलन किस्में, जहां PAU लुधियाना ने Satluj Purple की सिफारिश की।
- ऊंचाई: TNAU तमिलनाडु के पहाड़ों के लिए बताई अपनी ज्यादा-शीतलन किस्मों के लिए 1,200 मीटर से ऊपर कहता है।
- मिट्टी: जैविक पदार्थ वाली अच्छे जल निकास की दोमट, pH 5.8 से 6.2 (TNAU); जलभराव से जड़ों को नुकसान होता है।
- शीतलन: किस्म को शीतलन घंटों से मिलाएं। UHF नौणी के Indian Journal of Horticulture (2013) के एक मूल्यांकन में Black Amber, Ruby Sweet और Florida 1-2 जैसी कम-शीतलन किस्मों को हिमाचल प्रदेश के मध्य-पहाड़ों के लिए आशाजनक बताया गया।
किस्में
| किस्म | जानकारी का स्रोत | खासियत | कहां के लिए ठीक |
|---|---|---|---|
| Satluj Purple | PAU, लुधियाना की सिफारिश | कम-शीतलन; खुद-बांझ, इसलिए परागणकर्ता चाहिए | पंजाब और ऐसे ही उपोष्ण मैदान |
| Kala Amritsari | बागवानी शोध केंद्र के अध्ययन; कुल्लू ट्रायल | कम-शीतलन; खुद-उर्वर; कुल्लू ट्रायल में सबसे कम TSS; Satluj Purple के लिए परागणकर्ता के रूप में इस्तेमाल | मैदान और निचले पहाड़ |
| Red Beaut, Frontier, Mariposa, Black Amber | कुल्लू घाटी का ट्रायल (मध्य-पहाड़ी हिमाचल प्रदेश) | व्यावसायिक रोपण के लिए उपयुक्त पाई गईं, मई से अगस्त तक पकती हैं; Red Beaut सबसे जल्दी, Mariposa सबसे देर से (फूल से तुड़ाई तक करीब 150 दिन); Frontier का TSS 14.1 °Brix; Black Amber सबसे बड़ी, 130 ग्राम, 5.4 सेमी | हिमाचल प्रदेश के मध्य-पहाड़ |
| Ruby Sweet, Florida 1-2 | UHF नौणी का मूल्यांकन | कम-शीतलन; Black Amber के साथ आशाजनक; Florida 1-2 सबसे जल्दी फूलती है | हिमाचल प्रदेश के मध्य-पहाड़ |
| Rubio, Hale, Gaviota, Abundance, Shiro, Kelsey, Satsuma | TNAU | Rubio जल्दी; Hale, Gaviota, Abundance जून से जुलाई; Shiro, Kelsey, Satsuma जुलाई से अगस्त; Hale के साथ दूसरी किस्में लगानी जरूरी | तमिलनाडु के 1,200 मीटर से ऊंचे पहाड़ |
- कम से कम दो ऐसी किस्में लगाएं जो साथ-साथ फूलें। मैदानी बागों में Kala Amritsari, Satluj Purple का परागणकर्ता है।
- कलमी पौधे सरकारी या विश्वविद्यालय की नर्सरी से लें, जिसमें किस्म का नाम और रूटस्टॉक लिखा हो।
रोपाई और दूरी
- TNAU: एक साल के कलमी पौधे 4 x 4 मीटर पर (प्रति एकड़ करीब 250 पौधे, प्रति हेक्टेयर 625), 60 x 60 x 60 सेमी के गड्ढों में, जून से जुलाई या अक्टूबर से दिसंबर में रोपें।
- Satluj Purple के एक ट्रायल में 6 x 6 मीटर (प्रति एकड़ करीब 112, प्रति हेक्टेयर 278) पर पेड़ 6 x 1.5 मीटर के पेड़ों से बेहतर बढ़े और फले। कुल्लू के किस्म ट्रायल में 3 x 6 मीटर रखा गया।
- दूरी किस्म की बढ़वार और छंटाई के तरीके के हिसाब से चुनें; अपनी घाटी के लिए सिफारिश की गई दूरी राज्य के बागवानी विभाग से पूछें।
खाद, सिंचाई और कीट
- खाद (TNAU, फल देने वाला पेड़): अक्टूबर से नवंबर में प्रति पेड़ 30 किलो गोबर खाद, 500 ग्राम N, 1 किलो P2O5 और 1 किलो K2O। प्रति एकड़ 112 पेड़ों पर यह करीब 56 किलो N, 112 किलो P2O5 और 112 किलो K2O प्रति एकड़ है (278 पेड़ों पर प्रति हेक्टेयर 140, 280 और 280 किलो)। छोटे पेड़ों को कम चाहिए; मिट्टी जांच के हिसाब से चलें।
- पानी: कोई पुष्ट भारतीय कार्यक्रम नहीं मिला, इसलिए अपने KVK या बागवानी विश्वविद्यालय से पूछें; ड्रिप सिंचाई देखें।
- फल मक्खी: TNAU methyl eugenol ट्रैप (मछली के चूरे का विकल्प भी) और कीटनाशक छिड़काव सुझाता है; लेबल की मात्रा और तुड़ाई से पहले की अवधि मानें, और अपने KVK से पूछें। गिरे हुए फल इकट्ठा करके दबा दें।
- रोग नियंत्रण के लिए कीट पेज और स्थानीय बागवानी विभाग देखें; यहां कोई पुष्ट रोग कार्यक्रम नहीं दिया गया।
तुड़ाई और उपज
- TNAU फल देने वाले पेड़ के लिए किस्म और प्रबंधन के हिसाब से औसतन प्रति पेड़ साल में 25 से 30 किलो बताता है।
- प्रति एकड़ 112 पेड़ों पर प्रति पेड़ 25 से 30 किलो का मतलब करीब 2,800 से 3,360 किलो प्रति एकड़ (7 से 8.3 टन प्रति हेक्टेयर) है। छोटे पेड़ बहुत कम देते हैं।
- तब तोड़ें जब छिलके का रंग पूरा चढ़ जाए और फल अंगूठे से हल्का दबे। छांटें, कागज लगाकर उथले क्रेट में पैक करें और कुछ ही दिनों में बेच दें, क्योंकि कोल्ड-चेन के बिना आलूबुखारा ज्यादा टिकता नहीं।
लागत और कमाई
- कुल्लू जिले का अर्थशास्त्र अध्ययन (हिमाचल प्रदेश): रोपण की शुरुआती लागत ₹22,678 प्रति 100 पौधे; बिना फल वाले पौधों की रखरखाव लागत साल 1 से 5 में प्रति 100 पौधे ₹18,730, ₹20,453, ₹23,368, ₹26,874 और ₹29,350। अध्ययन में लागत वापसी 7 साल, लाभ-लागत अनुपात 2.17, IRR 33% और NPV ₹4.48 लाख मिला। ये लागतें पुराने सर्वे की हैं, इसलिए मौजूदा मजदूरी और सामग्री के भावों के हिसाब से बढ़ाकर देखें।
- उदाहरण: पेड़ पक जाने पर प्रति एकड़ 2,800 से 3,360 किलो, ₹30 से ₹60 प्रति किलो पर, कुल आय ₹84,000 से करीब ₹2 लाख प्रति एकड़ बैठती है। ये भाव मान्यताएं हैं, इन्हें अपने असली मिलने वाले भाव से बदलें।
- भाव की जांच: 30 सितंबर 2026 को पंजाब की मंडी के आंकड़ों में आलूबुखारे का बताया गया भाव ₹3,800 से ₹9,700 प्रति क्विंटल था, आवक बहुत कम थी, इसलिए यह सीजन के फल का पैमाना नहीं है। चालू भाव mandi bhav पर देखें।
- नए बागों के लिए मदद राज्य की बागवानी योजनाओं में मिल सकती है; कोई दर पुष्ट नहीं हुई, इसलिए subsidy finder या जिला बागवानी कार्यालय देखें।
बाजार और जोखिम
- खरीदार शहर की फल मंडियों के कमीशन एजेंट और खुदरा विक्रेता हैं; स्थानीय प्रोसेसरों से पूछें कि वे आलूबुखारा लेते हैं या नहीं। कुल्लू ट्रायल दिखाता है कि किस्में चुनकर पकना मई से अगस्त तक फैलाया जा सकता है, जिससे एक साथ ढेर लगने से बचाव होता है।
- जोखिम: परागणकर्ता न होने से फल न लगना, फल मक्खी, एक साथ आवक से गिरे भाव, और पहाड़ी सड़कों पर ढुलाई में नुकसान।
- उत्पादकों का समूह FPO के जरिए क्रेट और ढुलाई बांट सकता है; फल रोकना चाहें तो कोल्ड स्टोरेज सब्सिडी देखें।
स्रोत
- TNAU Agritech Portal, Plum
- Performance of some Japanese plum (Prunus salicina) cultivars in mid-hill condition of Kullu Valley, Himachal Pradesh (IJBSM)
- Kumar, Tandon, Singh and Sharma, Evaluation of promising Japanese plum genotypes for mid-hills of Himachal Pradesh, Indian Journal of Horticulture 70(2), 2013
- Effect of rootstocks and spacing on growth and productivity of plum cv. Satluj Purple (Krishikosh)
- Economics of production and marketing of plum in Kullu district of Himachal Pradesh (Krishikosh)
- ACROP, plum mandi prices in Punjab (Agmarknet data)
