वनामेई (प्रशांत श्वेत झींगा, Penaeus vannamei) सिर्फ समुद्र तट पर या खारे और लवणीय पानी में पाला जाता है, मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश और आठ और तटीय राज्यों में, और इसके लिए तटीय जलकृषि प्राधिकरण (CAA) में पंजीकरण, मान्यता प्राप्त हैचरी का SPF बीज, एरेटर और काफी चालू पूंजी चाहिए। यह भारत की सबसे बड़ी समुद्री खाद्य निर्यात फसल है, लेकिन एक बीमारी या भाव गिरने से पूरी फसल डूब सकती है, इसलिए यह नए लोगों के लिए नहीं है।
इस पेज के लिए लागत और उपज के विस्तृत मॉडल (जैसे NABARD के) उपलब्ध नहीं थे। पैसा लगाने से पहले राज्य के मत्स्य विभाग, MPEDA या पास के ICAR-CIBA केंद्र से मौजूदा बजट पूछ लें।
उद्योग का आकार और कहां पाला जाता है
- CIBA की Vanami Shrimpapp सामग्री के अनुसार नौ तटीय राज्यों में करीब 60,000 हेक्टेयर में वनामेई है, करीब 3.6 लाख टन उत्पादन और करीब 1.5 लाख किसान परिवार, जिनमें ज्यादातर छोटे किसान हैं।
- 2024-25 में भारत ने 1,698,170 टन समुद्री खाद्य का निर्यात किया जिसकी कीमत ₹62,408 करोड़ (US$7.45 अरब) थी। जमा हुआ झींगा सबसे ऊपर था: ₹43,334 करोड़, 741,529 टन, जो निर्यात की मात्रा का 43.67% और डॉलर कमाई का 69.46% है (MPEDA)।
- अमेरिका ने 311,948 टन और चीन ने 136,164 टन जमा झींगा लिया, इसलिए खेत का भाव कुछ ही विदेशी बाजारों पर निर्भर है। MPEDA समुद्री खाद्य उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक, ओडिशा और पश्चिम बंगाल को गिनता है।
- वनामेई 2010 के बाद तब आया जब सफेद धब्बा रोग ने देसी ब्लैक टाइगर झींगे को मारा (CIBA)।
कानूनी जरूरतें
- CAA अधिनियम, 2005 समुद्र, नदियों, खाड़ियों और बैकवॉटर की उच्च ज्वार रेखा से 2 किमी के भीतर के तटीय इलाके पर लागू होता है, और उच्च ज्वार रेखा से 200 मीटर के भीतर तटीय जलकृषि पर रोक लगाता है।
- पंजीकरण: पहले फार्म का CAA में पंजीकरण (जिला और राज्य स्तर की समितियों के जरिए) जरूरी है। SPF L. vannamei पालने के लिए फिर CAA में आवेदन करना होता है, जिसकी प्रोसेसिंग फीस इसकी सार्वजनिक सूचना के अनुसार जल-फैलाव क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर ₹500 है, और अनुमति CAA समिति के निरीक्षण के बाद ही मिलती है।
- CAA का आवेदन फार्म पंजीकरण संख्या और पानी का स्रोत, प्रति फसल बीज की संख्या और मात्रा, हैचरी से करार, दाने का स्रोत, एरेटर, पानी बदलने की व्यवस्था, गंदे पानी का उपचार (फार्म के समूह हों तो साझा ETS सहित), बीमारी की आपात योजना, एंटीबायोटिक या प्रोबायोटिक का उपयोग, बिक्री या प्रोसेसिंग का करार, मिला प्रशिक्षण और फार्म के रिकॉर्ड पूछता है। आवेदन से पहले ये तैयार रखें; फीस और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए CAA की साइट देखें।
- बीज: सिर्फ वही SPF वनामेई पोस्ट-लार्वा, जो CAA से ब्रूडस्टॉक आयात की अनुमति वाली हैचरी में बने हों, CAA से मान्य फार्मों को बेचे जा सकते हैं।
पालन की विधि
- प्रति वर्ग मीटर संख्या: केरल के एक अध्ययन ने अर्ध-गहन तालाबों में 120 दिन तक 15 से 60 झींगे प्रति वर्ग मीटर परखे। ज्यादा संख्या के लिए ज्यादा हवा चाहिए और रोग का जोखिम भी ज्यादा होता है। CAA की अपनी सीमा है, इसलिए अपनी अनुमति में मौजूदा सीमा पक्की कर लें।
- तालाब और पानी: तालाब सुखाकर तैयार करें, छनाई करके पानी भरें और बीज डालने से पहले प्राकृतिक प्लवक (plankton) पनपने दें। प्लवक और पानी का रंग वनामेई तालाब के प्रबंधन के केंद्र में हैं (केरल अध्ययन)। खारेपन, pH, ऑक्सीजन और अमोनिया की सीमाओं के लिए ICAR-CIBA की मिट्टी और पानी की गुणवत्ता वाली सामग्री देखें।
- दाना: झींगा पालन में दाना सबसे बड़ा चालू खर्च है; अच्छा दाना और फीडिंग ट्रे इस्तेमाल करें, और दाना और बढ़वार का रोज रिकॉर्ड रखें। अपने राज्य में मान्य दाने के ब्रांड के लिए मत्स्य अधिकारी से पूछें।
- फसल की अवधि: केरल के अध्ययन की फसलें 120 दिन चलीं; अपने खरीदार को किस आकार और समय पर कटाई चाहिए, यह पक्का कर लें।
- रोग: CIBA दर्ज करता है कि गहन वनामेई पालन से running mortality syndrome, early mortality syndrome और Enterocytozoon hepatopenaei (EHP) जैसी नई समस्याएं आई हैं। जांचा हुआ SPF बीज, सुरक्षित पानी का सेवन, पक्षियों से बाड़ और हर फसल के बाद तालाब की सफाई करें।
लागत और कमाई
- उत्पादन लागत मुख्य रूप से बीज, दाना, एरेटर की बिजली या डीजल, तालाब का पट्टा और मजदूरी पर निर्भर है। प्रति हेक्टेयर का कोई मौजूदा प्रमाणित बजट उपलब्ध नहीं था, और आंकड़ा दाने के भाव, बचाव और कटाई के आकार के साथ बहुत बदलता है।
- सूत्र: कुल आय = काटे गए टन x साइज काउंट का खेत पर भाव प्रति किलो। प्रति हेक्टेयर 10 टन पर ₹250 प्रति किलो से ₹25 लाख बनते हैं; ₹200 प्रति किलो पर ₹20 लाख। यह हिसाब समझाने का उदाहरण है, अनुमान नहीं: भाव की जगह प्रोसेसर या मत्स्य कार्यालय से आज का भाव रखें, और अपनी लागत घटाएं।
- जो फसल 40 से 60 दिन में बीमारी से फेल हो जाए, उसमें लगे दाने और बीज का आमतौर पर बहुत कम हिस्सा लौटता है, इसलिए एक फसल के नुकसान जितना रिजर्व रखें।
- वित्त के लिए बैंक से जलकृषि कर्ज के बारे में पूछें और मत्स्य कवर के लिए KCC देखें। सब्सिडी की पात्रता राज्य के मत्स्य विभाग या subsidy finder से जांचें; यहां कोई मौजूदा दर प्रमाणित नहीं हो सकी।
बाजार और जोखिम
- झींगा प्रोसेसरों और निर्यातकों को बिकता है, जो साइज काउंट के हिसाब से भाव तय करते हैं। डिलीवरी की व्यवस्था, भुगतान का समय और एंटीबायोटिक अवशेष की जांच कटाई से पहले तय कर लें।
- जोखिम: बीमारी, बिजली कटना, तट पर चक्रवात और बाढ़, अमेरिका और चीन के दो सबसे बड़े खरीदार होने से भाव का उतार-चढ़ाव, और दाने की बढ़ती कीमत।
- "गारंटी" वाली कमाई के प्रस्ताव या बिना जांच रिपोर्ट वाले बीज न लें। समूह में बिक्री के लिए FPO और खरीदारों के लिए export buyers देखें।
स्रोत
- MPEDA press release, India's seafood exports FY 2024-25
- Coastal Aquaculture Authority, public notice and application format for SPF L. vannamei culture
- Coastal Aquaculture Authority, FAQ and registration
- ICAR-CIBA, shrimp farming article on vannamei disease problems
- BioVoice News, CIBA Vanami Shrimpapp (area and production figures quoted from CIBA)
- Fishery Technology (ICAR), pond watercolor, plankton and production of vannamei in Kerala at 15 to 60 per m2
