स्कैम्पी, यानी विशाल मीठे पानी का झींगा (Macrobrachium rosenbergii), ओडिशा, गुजरात, केरल और गर्म पानी वाले अन्य राज्यों में मीठे पानी के तालाबों में पाला जा सकता है, लेकिन यह 6 से 8 महीने की धीमी फसल है जिसकी उपज मध्यम रहती है, और यह तभी फायदेमंद है जब बीज की गुणवत्ता, चारे की आपूर्ति और खरीदार पहले तय हों। ओडिशा में ICAR के कार्प-स्कैम्पी मिश्रित पालन प्रदर्शन में सात महीने में प्रति हेक्टेयर 950 किलो स्कैम्पी के साथ 7,530 किलो कार्प मिली।
ICAR-CIFA के अनुसार स्कैम्पी पालन हाल के वर्षों में घटा है और वह PMMSY योजना के तहत इसे फिर बढ़ाने पर काम कर रहा है, जिसमें एक आनुवंशिक रूप से सुधरी नस्ल CIFA-GI Scampi भी है। भारत में प्रकाशित अर्थशास्त्र कम और पुराना है, इसलिए यहां के आंकड़े केवल ICAR और TNAU की रिपोर्ट तक सीमित हैं।
कहां पाला जाता है
- राज्य: ICAR का पुनरुद्धार नोट गुजरात, केरल और ओडिशा का नाम लेता है। CIFA-GI के खेत अध्ययन में ओडिशा के 14 जिलों के 46 किसान (2019 से 2020) शामिल थे, और तमिलनाडु में स्टॉकिंग घनत्व का परीक्षण हुआ।
- जलवायु की सीमा: TNAU काम लायक पानी का तापमान 18 से 34 °C बताता है, जिसमें 27 से 31 °C सबसे अच्छा है। सर्दी में जो पानी 18 °C से नीचे जाए वह इस दायरे से बाहर है, जो ठंडी सर्दी वाले जिलों के लिए सीमा है।
- पानी: मीठा पानी, प्रदूषण रहित, साप्ताहिक या पाक्षिक बदलाव के लिए पर्याप्त आपूर्ति के साथ; pH 7 से 8.5 और घुलित ऑक्सीजन 75% संतृप्ति से ऊपर (TNAU)।
तालाब और तैयारी
- तालाब: TNAU 0.5 से 1.5 हेक्टेयर, आयताकार, 30 से 50 मी चौड़ा, औसत गहराई 0.9 मी (न्यूनतम 0.75, अधिकतम 1.2 मी) और कम से कम 60 सेमी फ्रीबोर्ड सुझाता है। पानी रोकने वाली चिकनी-गाद या बलुई दोमट मिट्टी सबसे अच्छी है।
- चूना मछली पालन से भी ज्यादा जरूरी बताया गया है। जहां पेलेट चारा इस्तेमाल हो, वहां TNAU उर्वरक सीमित रखने की सलाह देता है, और गोबर, सिंगल सुपरफॉस्फेट या यूरिया केवल उत्पादकता की जरूरत पर डालने को कहता है। अपनी मिट्टी के लिए चूने की मात्रा मत्स्य अधिकारी से पूछें।
बीज और स्टॉकिंग
- बीज: ICAR-CIFA ने CIFA-GI Scampi 4 अक्टूबर 2021 को जारी की और ब्रूडर विकास के लिए MoU से तीन व्यावसायिक हैचरी को दी, और PMMSY के तहत पांच गुणन हैचरी चुनी गईं। पोस्ट-लार्वा केवल उसी हैचरी से लें जिसकी पुष्टि CIFA या राज्य मत्स्य विभाग करे, और नस्ल व बैच का ब्योरा मांगें।
- नर्सरी: TNAU ग्रो-आउट से पहले पोस्ट-लार्वा को 4 से 5 सप्ताह पालकर 40 से 50 मिमी (1 से 3 ग्राम) करने की बात बताता है।
- स्टॉकिंग: TNAU एकल पालन में 4,000 से 50,000 प्रति हेक्टेयर और कार्प के साथ मिश्रित पालन में 2,500 से 20,000 प्रति हेक्टेयर बताता है। तमिलनाडु के एक परीक्षण ने 180 दिन तक 5 और 10 प्रति m² की तुलना की: 5 प्रति m² पर 984 किलो प्रति हेक्टेयर और 10 प्रति m² पर 1,662 किलो प्रति हेक्टेयर मिला, लेकिन अधिक घनत्व पर झींगे छोटे (औसत 31 ग्राम बनाम 28 ग्राम) और वृद्धि दर कम रही।
चारा और पानी का प्रबंधन
- TNAU चावल की भूसी और खली के गीले मिश्रण से लेकर बने हुए पेलेट तक के चारे बताता है, शरीर के वजन का लगभग 5%। तमिलनाडु के परीक्षण में गोबर और अकार्बनिक उर्वरक के साथ 22% क्रूड प्रोटीन वाला पूरक चारा दिया गया।
- घुलित ऑक्सीजन ऊंची रखें और समय पर पानी बदलें; स्कैम्पी पानी की गुणवत्ता के प्रति संवेदनशील है। रोग की योजना के लिए CIFA या राज्य मत्स्य विभाग से पूछें, और मृत्यु शुरू हो तो जल्दी संपर्क करें।
तुड़ाई और उपज
- अवधि: एकल पालन में 6 से 8 महीने और कार्प के साथ मिश्रित पालन में 8 से 12 महीने (TNAU)।
- आकार और जीवित रहना: TNAU प्रबंधन के अनुसार औसत तुड़ाई वजन 50 से 200 ग्राम और जीवित रहने की दर 50 से 70% बताता है।
- उपज: ओडिशा के सात महीने के कार्प-स्कैम्पी प्रदर्शन में प्रति हेक्टेयर (लगभग 380 किलो प्रति एकड़) 950 किलो स्कैम्पी के साथ 7,530 किलो कार्प; 180 दिन के तमिलनाडु परीक्षण में 984 से 1,662 किलो प्रति हेक्टेयर। इनसे ऊपर के ब्रोशर वाले आंकड़ों पर सावधानी रखें।
- CIFA-GI बनाम सामान्य बीज: ओडिशा के 14 जिलों के अध्ययन में CIFA-GI वाले किसानों ने गैर-GI किसानों से 53% अधिक वृद्धि दर, 68% अधिक उपज और 13% अधिक खेत-द्वार भाव दर्ज किया, जिससे प्रति फसल लगभग ₹0.62 लाख प्रति हेक्टेयर अतिरिक्त लाभ मिला। स्टॉकिंग घनत्व, स्टॉकिंग के समय का आकार और जीवित रहने की दर दोनों समूहों में उल्लेखनीय रूप से अलग नहीं थी।
लागत और आमदनी
| मद प्रति हेक्टेयर (TNAU, बिना तारीख) | ₹ |
|---|---|
| पूंजी लागत (तालाब, उपकरण) | 2,07,500 |
| 6 से 8 महीने की संचालन लागत | 1,08,075 |
| कुल निवेश | 3,15,575 |
- उस तालिका में बिक्री भाव या उपज नहीं है और आंकड़े बिना तारीख के हैं, इसलिए इन्हें स्थानीय कोटेशन से अपडेट करें।
- हिसाब की जांच: यदि स्कैम्पी की उपज लगभग 1,000 किलो प्रति हेक्टेयर हो, तो अकेली संचालन लागत तालाब के खर्च से पहले लगभग ₹108 प्रति किलो बैठती है, इसलिए खेत-द्वार भाव उससे साफ ऊपर होना चाहिए। कार्प-स्कैम्पी प्रदर्शन में कार्प (7,530 किलो) ने ज्यादातर मात्रा दी, इसलिए कार्प की आमदनी स्कैम्पी जितनी ही मायने रखती है।
- केवल सत्यापित लाभ का आंकड़ा ₹0.62 लाख प्रति हेक्टेयर प्रति फसल है, जो ओडिशा में CIFA-GI नस्ल ने सामान्य बीज से ज्यादा जोड़ा। खरीदारों और अपने राज्य मत्स्य विभाग से वर्तमान खेत-द्वार भाव लें।
बाजार और बिक्री
- स्कैम्पी स्थानीय मछली बाजारों, होटलों और व्यापारियों को बिकता है; स्टॉकिंग से पहले खरीदार से आकार के ग्रेड और संख्या के अनुसार भाव पूछें।
- जोखिम: धीमी वृद्धि और अलग-अलग तुड़ाई आकार, पानी की गुणवत्ता और ठंड के प्रति संवेदनशीलता, अनजान हैचरी का खराब बीज, और कार्प की तुलना में कम उपज प्रति हेक्टेयर। एक पूरे चक्र का अनुभव होने तक स्कैम्पी को अकेला दांव नहीं, बल्कि कार्प तालाब का प्रीमियम अतिरिक्त हिस्सा मानें।
- सहायता: ICAR के अनुसार स्कैम्पी बीज मूल्य श्रृंखला के लिए PMMSY की निधि है। तालाब और इनपुट की सहायता राज्य के अनुसार अलग है, इसलिए जिला मत्स्य अधिकारी से पूछें; यह भी देखें सब्सिडी फाइंडर, कार्यशील पूंजी के लिए किसान क्रेडिट कार्ड और समूह में बिक्री के लिए FPO।
स्रोत
- ICAR: The Scampi Returns, ICAR-CIFA under PMMSY poised to revive scampi farming in India
- ICAR: ICAR-CIFA aims to boost scampi farming through the genetically improved strain CIFA-GI Scampi
- Indian Journal of Fisheries (ICAR): On-farm performance of CIFA-GI scampi in 14 districts of Odisha
- Indian Journal of Fisheries (ICAR): Stocking density of Macrobrachium rosenbergii, Tamil Nadu
- TNAU Agritech Portal: Prawn culture
