ट्यूलिप भारत में व्यावहारिक रूप से सिर्फ ठंडी पहाड़ियों में उगता है: कश्मीर घाटी, लाहौल घाटी और हिमाचल प्रदेश व उत्तराखंड के ऊंचे इलाके। मैदानों में सर्दी इतनी गर्म रहती है कि कंद न फूलता है न बढ़ता है। लगभग सारे रोपाई वाले कंद अब भी नीदरलैंड से आते हैं, इसलिए पहला खर्च, यानी कंद, बहुत ज्यादा है, और फसल तभी फायदा देती है जब कट फ्लावर का बाजार हो या आप कंद-गुणन कार्यक्रम का हिस्सा हों।
भारत में ट्यूलिप पर शोध कुछ ही संस्थानों तक सीमित है (ICAR-CITH श्रीनगर, SKUAST-Kashmir, CSIR-IHBT पालमपुर)। यह गाइड उनके प्रकाशित आंकड़े देती है और जहां भारतीय लागत या भाव का आंकड़ा नहीं है, वहां साफ बताती है।
भारत में कहां उगता है
- कश्मीर घाटी: ट्यूलिप हॉलैंड से लाए गए और घाटी की जलवायु में अच्छा करते हैं। ICAR-केंद्रीय शीतोष्ण बागवानी संस्थान (CITH), श्रीनगर ने अपने परीक्षण लगभग 1,675 मीटर ऊंचाई पर, pH 6.8 वाली चिकनी दोमट से गादयुक्त चिकनी मिट्टी में, अच्छी जल निकासी के साथ किए।
- हिमाचल प्रदेश: CSIR-IHBT, पालमपुर ने लाहौल घाटी (उदयपुर) में फूल और कंद उत्पादन के परीक्षण किए हैं और वहां की फूल उत्पादक सहकारी समितियों के किसानों को प्रशिक्षण दिया है। The Tribune के अनुसार लक्ष्य आयातित कंदों पर निर्भरता घटाना है।
- तापमान की जरूरत: फूल बनने के लिए लगभग 17 से 20°C चाहिए, और फोर्सिंग के लिए 10 से 12 हफ्ते 5°C से नीचे (ICAR-CITH पत्र)। इसीलिए मैदानी इलाके कोल्ड रूम के बिना फूलने लायक कंद नहीं बना सकते।
- CSIR-IHBT उत्तराखंड के पहाड़ी हिस्सों और हिमाचल के कई जिलों (मंडी, चंबा, सोलन, शिमला, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर) को भी उपयुक्त मानता है, लेकिन व्यावसायिक उत्पादन अब भी जम्मू-कश्मीर में केंद्रित है।
कश्मीर में परखी गई किस्में
ICAR-CITH ने 2010 से 2014 के बीच 20 डच जीनोटाइप परखे। इनमें छह कट फ्लावर और कंद दोनों के लिए आशाजनक निकले:
| जीनोटाइप | फूलने की अवधि (दिन) | गुलदान में टिकाऊपन (दिन) | कंद गुणन (propagation coefficient) |
|---|---|---|---|
| Blessing Lady | 24.5 | 11.7 (सबसे ज्यादा) | 354% (सबसे ज्यादा); प्रति पौधा 3.1 कंद |
| Purissima Yellow | 27.2 (सबसे लंबी) | 11.0 | 298%; प्रति पौधा 2.8 कंद |
| American Dream | 24.7 | 10.5 | 308%; प्रति पौधा 2.7 कंद |
| Apeldoorn Elite | 25.2 | शीर्ष समूह में नहीं | 303%; डंठल 33.2 सेमी |
| Daydream | शीर्ष समूह में नहीं | 11.5 | 292% |
| Golden Oxford | 23.7 | 10.7 | शीर्ष समूह में नहीं |
- Oxford Wonder ने सबसे लंबा फूल डंठल दिया (35.5 सेमी), Blessing Lady और Apeldoorn Elite उसके करीब रहे। Horizon, Hamilton, Character और Cassini का गुणन कमजोर रहा (200% से कम)।
- Propagation coefficient यानी नए कंदों का वजन भाग रोपे गए कंदों का वजन, गुणा 100; 300% का मतलब है कि निकले कंद रोपे गए कंदों से लगभग तीन गुना भारी हैं।
- पत्र के अनुसार कश्मीर में ट्यूलिप बड़ी व्यावसायिक फसल इसलिए नहीं बना कि अच्छा रोपण सामग्री कम है, फूलने की अवधि छोटी (15 से 27 दिन) है और गुणन कम है।
रोपाई
- कंद का आकार: परीक्षण में 8 से 12 सेमी परिधि के एक जैसे, स्वस्थ कंद लिए गए। कंद सड़न रोकने के लिए रोपाई से पहले carbendazim (0.05%) से उपचारित करें; लेबल और स्थानीय KVK की सलाह मानें।
- समय: कश्मीर में नवंबर का पहला सप्ताह (The Tribune भी नवंबर रोपाई और अप्रैल में फूल बताता है)। फसल सर्दी भर जमीन के अंदर रहती है और जीनोटाइप के हिसाब से 72 से 95 दिन में अंकुरित होती है।
- ICAR-CITH परीक्षण में दूरी और गहराई: 20 सेमी x 20 सेमी, 8 से 10 सेमी गहरा। 20 x 20 सेमी पर एक एकड़ में रास्ते और क्यारी के खाली हिस्से घटाने से पहले लगभग 1 लाख कंद आते हैं (प्रति हेक्टेयर लगभग 2.5 लाख)।
- मिट्टी: चिकनी दोमट से गादयुक्त चिकनी, pH लगभग 6.8, अच्छी जल निकासी और पानी रोकने की क्षमता के साथ। जलभराव से कंद सड़ते हैं।
- समयरेखा: अंकुरण 72 से 95 दिन में, कलियां लगभग 128 से 151 दिन बाद, फूल मार्च के अंत से; पौधा खेत में लगभग 175 से 196 दिन रहता है।
फूल और कंद की कटाई
- कट फ्लावर: डंठल कली के रंग बदलने की अवस्था में सुबह काटें, पहले ठंडा करें (परीक्षण में लगभग एक घंटा 5°C पर) और लंबाई के हिसाब से छांटें। परीक्षण में गुलदान की उम्र बढ़ाने के लिए 8-HQS (300 ppm) का घोल इस्तेमाल हुआ।
- कंद की फसल: फूल के बाद कंद खोदे जाते हैं और बेटी कंद गिने जाते हैं। ICAR-CITH परीक्षण में हर रोपे कंद से 1.5 से 3.1 नए कंद मिले, लेकिन अगले साल फूलने लायक बड़े कंद उनमें से कुछ ही होते हैं।
- बिक्री के लिए डंठल काटने से कंद की फसल घटती है, इसलिए उत्पादक फूल की फसल (और हर साल नए कंद खरीदना) या कंद की फसल (और फूल बिक्री छोड़ना या घटाना) में से चुनते हैं।
लागत और कमाई
- कंद की लागत: The Tribune ने अक्टूबर 2017 में बताया कि आयातित ट्यूलिप कंद ₹15 से 20 प्रति कंद पड़ते हैं, और हर साल लगभग 3 लाख कंदों वाले करीब 100 कंटेनर आयात होते हैं। 2026 के भाव जांचे नहीं गए हैं और आकार व किस्म से बदलते हैं।
- हिसाब: प्रति एकड़ 1 लाख कंद और ₹15 से 20 प्रति कंद पर, 2017 के आयात भाव से सिर्फ रोपण सामग्री ₹15 से 20 लाख प्रति एकड़ (₹37 से 49 लाख प्रति हेक्टेयर) बैठती है। इसीलिए ट्यूलिप बगीचे, पर्यटन या कंद-कार्यक्रम की फसल है, छोटे खेत की नकदी फसल नहीं।
- देखे गए संस्थानों से कट फ्लावर के भाव, शुद्ध आय या खेती की लागत का कोई भारतीय खेत-स्तर का आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। निवेश से पहले राज्य बागवानी या फूल-विकास विभाग और मौजूदा खरीदारों से पूछें।
बाजार और जोखिम
- ट्यूलिप दुनिया के कट फ्लावर व्यापार में तीसरे स्थान पर है, और हॉलैंड सबसे बड़ा उत्पादक है (The Tribune)। भारत में मांग बगीचों, फूल प्रदर्शनियों और त्योहार व शादी के कट फ्लावर बिक्री से आती है; खेत में फूल सिर्फ लगभग एक महीना रहता है, जिससे बिक्री का समय सीमित रहता है।
- जोखिम: आयातित कंद की लागत, गीली मिट्टी में कंद सड़न, गर्म बसंत जो फूल जल्दी ला देता है (पालमपुर में दर्ज), और बिक्री की छोटी अवधि।
- सब्सिडी खोजक और राज्य फूल-विकास विभाग से सहायता के बारे में पूछें, और संरक्षित फूल खेती सोच रहे हों तो पॉलीहाउस सब्सिडी और एंथुरियम गाइड देखें।
स्रोत
- Kumar, Sharma and Singh, Screening of tulip germplasm for quality cut flower and bulb production, Indian Journal of Horticulture 74(2), 2017 (ICAR-CITH Srinagar)
- The Tribune: State to go big on tulip cultivation (22 October 2017)
- The Tribune: Tulips bloom in Lahaul's Udaipur (CSIR-IHBT)
- The Tribune: Tulips bloom in Palampur, institute keen to cash in on high demand
