एंथूरियम भारत में कट फ्लावर के रूप में तभी व्यावसायिक रूप से चलता है जब उसे गर्म, आर्द्र जगह में 75% शेड नेट या हवादार पॉलीहाउस के अंदर उगाया जाए। सबसे अच्छी तरह दर्ज इलाके मिजोरम और बाकी पूर्वोत्तर, केरल, कर्नाटक के पहाड़ी इलाके (कूर्ग) और तमिलनाडु (सेलम) हैं। पहला फूल आने से पहले मिट्टी रहित क्यारी, tissue culture के पौधे और ढांचा चाहिए, और पौधों को कुछ भी वापस कमाने में एक साल से ज्यादा लगता है, इसलिए रोपाई से ज्यादा जरूरी है कि डंठल का पक्का खरीदार हो।
भारत में उपज के आंकड़े ठोस हैं (किस्म और जगह के हिसाब से प्रति पौधा साल में 5 से 13 फूल), लेकिन खेत के भाव का ताजा डेटा कम है। नीचे की कमाई पुराने तारीख वाले आंकड़ों से निकाली गई है और इसे अपने स्थानीय फूल वाले या थोक व्यापारी के भाव से दोबारा निकालना चाहिए।
भारत में यह कहां उगता है
- मिजोरम: राज्य के बागवानी विभाग ने नवंबर 2002 में Technology Mission for the North East के तहत व्यावसायिक एंथूरियम शुरू किया। 2009 तक करीब 300 परिवार इसे उगा रहे थे, ज्यादातर शेड हाउस में मिट्टी रहित क्यारियों पर और तापमान नियंत्रण के बिना, और उत्पादकों के अनुसार करीब 5.5 लाख पौधों से साल में 27.5 से 33 लाख फूल मिलते थे।
- दूसरे इलाके: छपे ट्रायल और उत्पादक असम (AAU, जोरहाट), केरल, कर्नाटक (पहाड़ी इलाका, बेलगाम, सिरसी, बेंगलुरु) और तमिलनाडु (सेलम) के हैं। गर्म सूखे मैदानों में फॉगर और ठंडक चाहिए, इसलिए वे स्वाभाविक रूप से ठीक नहीं हैं।
- जलवायु की सीमाएं: TNAU 70 से 80% छांव, 75% शेड नेट हाउस, दिन का तापमान 24 से 28 डिग्री सेल्सियस, रात का 15 से 22 डिग्री सेल्सियस और ज्यादा नमी (80 से 90%) की सलाह देता है। सीधी धूप से स्पैथ झुलस जाते हैं और ठंडी या गर्म सूखी हवा उन्हें नुकसान पहुंचाती है।
- उगाने का माध्यम: खेत की मिट्टी नहीं। TNAU 1:1 पत्ती की खाद और कोकोपीट, pH 5.5 से 6.5 सुझाता है। असम के ट्रायल में कोकोपीट 2 हिस्से, नारियल का भूसा 1 हिस्सा, चारकोल 1 हिस्सा और जल निकास के लिए नीचे ईंट के टुकड़ों की परत रखी गई।
किस्में
| किस्म | प्रमाण | खासियत | टिप्पणी |
|---|---|---|---|
| Crinkle Red | कर्नाटक पहाड़ी इलाके का ट्रायल | प्रति पौधा साल में 13.14 फूल, उस ट्रायल में सबसे ज्यादा | लाल किस्म; बाजार में रंग की मांग देखें |
| Tropical, Cheers, Fire | वही ट्रायल | प्रति पौधा साल में 11.77, 10.60 और 10.25 फूल | Fire असम के ट्रायल में भी इस्तेमाल हुई |
| Midori Improved | वही ट्रायल | सबसे लंबा फूलदान जीवन, 35 दिन | हरा स्पैथ, खास बाजार का रंग |
| Presence, Xavia, Angel | शेड नेट किस्म ट्रायल (krishikosh) | वानस्पतिक और फूल के गुणों में सबसे अच्छी आंकी गईं | जगह के हिसाब से क्रम बदलता है; अपने सप्लायर से पुष्टि करें |
| Evita, Carnival | मिजोरम और असम के ट्रायल | जांच की किस्मों के रूप में इस्तेमाल हुईं | बिक्री के लिए रंगों का मेल मायने रखता है |
- TNAU लाल, नारंगी, सफेद, गुलाबी, हरे और दोरंगे समूह गिनाता है। रंग अपने खरीदार की बिक्री के हिसाब से चुनें, क्योंकि लाल और नारंगी आमतौर पर ज्यादा बिकते हैं, पर मिली-जुली क्यारी का माल लॉट में बेचना आसान होता है।
- व्यावसायिक क्यारियों के लिए tissue culture के पौधे बेहतर माने जाते हैं। बीज से फूल आने में 2 से 3 साल लगते हैं और रंग मिले-जुले आते हैं; suckers और 3 से 4 साल पुराने पौधों की तने की कलमें दूसरे रास्ते हैं।
- पौधे मान्यता प्राप्त tissue culture लैब या राज्य बागवानी विभाग से लें, और किस्म का नाम लिखित में मांगें, क्योंकि बिना नाम का मिला-जुला माल आम शिकायत है।
रोपाई और दूरी
- TNAU: 1.2 से 1.4 मीटर चौड़ी ऊंची क्यारियां, 60 x 60 सेमी की दूरी, क्यारी के प्रति वर्ग मीटर में करीब 2.8 पौधे, और रोपाई के लिए 15 सेमी ऊंचे, 4 से 6 पत्तियों वाले tissue culture के पौधे।
- असम के ट्रायल में छह महीने के पौधों को 45 x 45 सेमी पर लगाया गया, जो प्रति वर्ग मीटर लगभग 5 पौधे है। घनी दूरी से पौधे ज्यादा आते हैं पर हवा कम चलती है और रोग ज्यादा लगता है।
- क्यारी के प्रति 100 m2 में 60 x 60 सेमी पर करीब 280 पौधे। रास्तों और ढांचे में अतिरिक्त जमीन जाती है, इसलिए एक एकड़ (4,047 m2) में क्यारियों पर करीब 6,000 से 7,000 पौधे आते हैं, 11,000 नहीं।
खाद और सिंचाई
- TNAU का कार्यक्रम (ऊंची क्यारियां, 6 महीने के बाद): एक-एक हफ्ते छोड़कर। हफ्ता A: प्रति 100 m2 पर 250 ग्राम calcium nitrate, 150 ग्राम potassium nitrate और 50 ग्राम सूक्ष्म पोषक मिश्रण। हफ्ता B: 250 ग्राम mono ammonium phosphate, 100 ग्राम potassium nitrate और 50 ग्राम magnesium sulphate प्रति 100 m2।
- असम का ट्रायल: हर हफ्ते ड्रिप से fertigation, प्रति पौधा एक 2 लीटर प्रति घंटा का ड्रिपर, और प्रति हेक्टेयर साल में करीब 200 से 220 किलो N और 250 किलो K (करीब 20 और 25 ग्राम प्रति m2), साथ में करीब 100 किलो प्रति हेक्टेयर फॉस्फोरस। ड्रिप से पूरी मात्रा देने पर 75% और 50% मात्रा और छिड़काव वाली खाद के मुकाबले पोषक तत्वों का सबसे ज्यादा उठाव और फूल का सूखा वजन मिला।
- पानी: TNAU पानी देने और नमी बढ़ाने के लिए mist या ऊपर से स्प्रिंकलर की सलाह देता है। कम नमक वाला साफ पानी इस्तेमाल करें; NE ग्रीनहाउस गाइड सिंचाई के पानी का pH 5.5 से 7.0 और EC 0.1 से 0.3 mS/cm लक्ष्य बताती है। ड्रिपरों के लिए drip irrigation देखें।
कीट और रोग
| समस्या | TNAU की बताई रोकथाम |
|---|---|
| माहू | Dimethoate 0.3% |
| शल्क कीट और थ्रिप्स | Malathion 0.1% |
| मकड़ी (माइट) | Wettable sulphur 0.03% |
| एन्थ्रेक्नोज | Carbendazim 0.1% |
| पत्ती धब्बा | Mancozeb 0.2% |
| जड़ सड़न | Captan 2 ग्राम प्रति लीटर |
| जीवाणु मुरझान | Streptocyclin 200 ppm |
ये मात्राएं एक राज्य विश्वविद्यालय की सूची से हैं; कुछ रसायन अब कई जगह प्रतिबंधित हैं, इसलिए मौजूदा लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK से पूछ लें। छिड़काव से ज्यादा अच्छा जल निकास, साफ माध्यम और रोगी पौधे हटाना मायने रखता है। पहचान के लिए pests देखें।
कटाई और उपज
- जब स्पैथ पूरा खुल जाए और स्पैडिक्स के करीब एक तिहाई फूल खिल जाएं तब काटें। सुबह या शाम की ठंडक में काटें।
- TNAU साल में प्रति पौधा औसतन 8 फूल बताता है। कर्नाटक पहाड़ी इलाके के ट्रायल की किस्मों ने 10 से 13 दिए; मिजोरम के उत्पादकों के कुल आंकड़े मिले-जुले किसानों में प्रति पौधा करीब 5 से 6 बैठते हैं। जब तक आपकी अपनी क्यारियां ज्यादा न दिखाएं, 5 से 8 मानकर चलें।
- फूलदान जीवन: TNAU के अनुसार benzyl adenine पल्सिंग से 24.5 दिन और 8-HQC 200 ppm व 5% चीनी के होल्डिंग घोल से 30.5 दिन। कर्नाटक के ट्रायल में Midori Improved 35 दिन तक पहुंची।
- डंठल की लंबाई और स्पैथ के आकार से ग्रेडिंग करें और डिब्बों में ऐसे पैक करें कि स्पैथ आपस में न रगड़ें; चोट लगना डंठल का दर्जा गिरने की मुख्य वजह है।
लागत और कमाई
- भाव का प्रमाण (तारीख सहित): मिजोरम ने 2008-09 में 13,81,629 डंठल निर्यात किए जिनकी कीमत ₹96,69,123 थी, यानी करीब ₹7 प्रति डंठल। कर्नाटक के एक शोध अध्ययन में A ग्रेड के डंठल का ₹14 और B ग्रेड का ₹8 बताया गया; उसका साल नहीं दिया गया है। निवेश से पहले कोच्चि, बेंगलुरु और दिल्ली की फूल मंडियों के मौजूदा थोक भाव सीधे पूछ लें।
- प्रति 1,000 पौधे का हिसाब: कम मामला 1,000 x 5.5 डंठल x ₹7 = ₹38,500 साल का; ज्यादा मामला 1,000 x 8 डंठल x ₹14 = ₹1,12,000 साल का। शेड हाउस, tissue culture के पौधों, मजदूरी, ठंडक और ढुलाई की लागत इसके सामने रखनी होगी और यह जगह के हिसाब से बदलती है; अपने राज्य बागवानी विभाग या KVK से लिखित अनुमान लें।
- लागत वापसी: पौधों को पूरे फूल देने में एक साल या ज्यादा लगता है, इसलिए पहले साल में कोई खास आय न मानें और लागत वापसी कई साल में होगी। सब्सिडी के लिए इस्तेमाल होने वाली मौजूदा यूनिट लागत का मानक अपने राज्य बागवानी विभाग से पूछें; शेड नेट और पॉलीहाउस के लिए NHB और राज्य मिशन के लागत मानक आमतौर पर आधार होते हैं।
बाजार और जोखिम
- खरीदार स्थानीय फूल वाले, इवेंट सजावट वाले, महानगरों की फूल मंडियों के थोक व्यापारी और पूर्वोत्तर से डिब्बे हवाई या सड़क रास्ते भेजने वाले व्यापारी हैं। मिजोरम में दूसरे दर्जे के डंठल स्थानीय स्तर पर और ऊंचे दर्जे महानगरों में बिके।
- मुख्य जोखिम: बहुत ऊंची शुरुआती लागत, पहली आय के लिए लंबा इंतजार, गलत या मिली-जुली किस्म के tissue culture पौधे, नमी से होने वाले रोग और छोटे शहरों में कमजोर मांग। भाव रंग और डंठल की लंबाई से तय होता है, सिर्फ मात्रा से नहीं।
- FPO या उत्पादक समिति के जरिए बिक्री मिजोरम में चली और महानगर के खरीदारों तक पहुंचने में मदद करती है। ढांचे की मदद के लिए polyhouse subsidy और subsidy finder देखें; दरें राज्य के हिसाब से बदलती हैं और बागवानी विभाग से पक्की करनी होंगी।
स्रोत
- TNAU Agritech Portal, Anthurium
- Indian Journal of Horticulture, Effect of fertigation on nutrient uptake in anthurium (AAU, Jorhat), 2012
- Science Vision 11(4), Cultivation of Anthurium in Mizoram
- Performance of anthurium cultivars under hill zone of Karnataka
- Indian Horticulture, Low-cost greenhouse structures for the Northeast, Nov-Dec 2023
