ग्लेडियोलस भारत में उगाने के लिहाज से सबसे आसान कट फूलों में से है, क्योंकि यह कंद से उगने वाली खुले खेत की फसल है, पॉलीहाउस नहीं चाहिए, और उत्तर भारत के मैदानों में अनाज की फसलों के बाद फेर-बदल में अच्छी बैठती है। यह ठंडे और धूप वाले मौसम (दिन का तापमान 25 °C तक, रात का 16 °C तक) और अच्छे जल निकास वाली रेतीली मिट्टी में सबसे अच्छी चलती है, और तभी फायदा देती है जब डंडियां कली की कसी अवस्था में ही फूल बेचने वाले या फूल मंडी तक पहुंच जाएं।
नीचे के आंकड़े ज्यादातर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के 2022 के सजावटी फसलों के पैकेज से हैं। प्रति डंडी का भरोसेमंद मौजूदा भाव और भारत में लागत की कोई तालिका जांची नहीं जा सकी, इसलिए कमाई वाले हिस्से में सिर्फ हिसाब का तरीका दिया है और भाव आपकी स्थानीय मंडी पर छोड़ा है।
भारत में यह कहां उगती है
- PAU के अनुसार ग्लेडियोलस भारत के लगभग सभी राज्यों में उगाया जाता है, और भारत के उपोष्ण इलाके नवंबर से अप्रैल के बीच ठंडे देशों को निर्यात कर सकते हैं।
- जलवायु: दिन का तापमान 25 °C तक और रात का 16 °C तक सबसे अच्छा है। रोज कम से कम 8 घंटे रोशनी चाहिए; लंबे दिन डंडी की गुणवत्ता सुधारते हैं, जबकि छोटे दिन कंद और छोटे कंद बनाने में मदद करते हैं।
- मिट्टी: उपजाऊ, अच्छे जल निकास वाली रेतीली मिट्टी, pH 6.0 से 6.5 और मध्यम उर्वरता। जलभराव वाली या भारी चिपचिपी मिट्टी कंद सड़ा देती है और बढ़वार देर से करती है; भारी मिट्टी में कम्पोस्ट या FYM मिलाएं।
किस्में
| किस्म | किसने जारी की | खासियत | उपयोग |
|---|---|---|---|
| Punjab Glad-3 (2019) | PAU Ludhiana | पीला; डंडी 103 सेमी, 17 फूल, फूलदान में टिकाव 17 दिन; फूल आने में 105 दिन; प्रति कंद 22 छोटे कंद | कट फूल |
| Punjab Glad-2 (2016) | PAU Ludhiana | पीला; डंडी 86 सेमी, 17 फूल, फूलदान में टिकाव 16 दिन; फूल आने में 93 दिन; प्रति कंद 47 छोटे कंद | कट फूल |
| Punjab Glad-1 (2013) | PAU Ludhiana | पीले केंद्र वाला नारंगी; डंडी 85 सेमी, 15 फूल; फूल आने में 99 दिन; प्रति कंद 44 छोटे कंद | कट फूल |
| Punjab Pink Elegance (2010) | PAU Ludhiana | हल्का गुलाबी; डंडी 85 सेमी, 18 फूल, फूलदान में टिकाव 17 दिन; फूल आने में 86 दिन | कट फूल |
| Punjab Glance, Punjab Lemon Delight (2010) | PAU Ludhiana | नारंगी (Glance) और नींबू जैसा पीला (Lemon Delight); डंडी करीब 84 से 85 सेमी, 12 फूल | क्यारी की सजावट के लिए; जल्दी रोपाई (जुलाई से अगस्त) के लिए सबसे ठीक |
| Suchitra (1996) | PAU की उन्नत किस्मों की सूची | गहरे गुलाबी धब्बों वाला हल्का गुलाबी; डंडी 83 सेमी; फूल आने में 90 से 95 दिन; प्रति पौधा 85 छोटे कंद | जल्दी से मध्यम समय में फूल |
| White Prosperity, Nova Lux (2001) | PAU की उन्नत किस्मों की सूची | सफेद (डंडी 96 सेमी, 17 फूल) और गहरा पीला (डंडी 79 सेमी, 15 फूल); फूल आने में 110 से 120 दिन | देर से फूल |
- ICAR-IARI (Pusa श्रृंखला) और ICAR-IIHR (Arka श्रृंखला) ने भी ग्लेडियोलस की किस्में जारी की हैं; संस्थान या अपने KVK से पूछें कि आपके इलाके के लिए कौन सी ठीक हैं, और कंद ऐसी नर्सरी से लें जो नाम वाली, रोग रहित किस्म दे।
रोपाई
- मौसम (पंजाब): मुख्य रोपाई सितंबर से अक्टूबर में होती है। कटाई फैलाने और मंडी में एक साथ माल आने से बचने के लिए मध्य अगस्त से मध्य दिसंबर तक हर 10 से 15 दिन पर रोपें। जल्दी डंडी के लिए जुलाई के पहले हफ्ते से अगस्त के तीसरे हफ्ते तक रोपें; फसल अक्टूबर और नवंबर में आती है।
- दूरी और गहराई: 30 x 20 सेमी, जिसमें प्रति एकड़ 60,000 से 70,000 कंद लगते हैं (करीब 1.5 से 1.7 लाख प्रति हेक्टेयर)। कंद के आकार के हिसाब से 7 से 10 सेमी गहरा रोपें।
- छोटे कंद: PAU के अनुसार छोटे कंदों को 24 घंटे 200 मिलीग्राम प्रति लीटर GA3 में डुबोने से फूल देने लायक कंद 2 साल में मिल जाते हैं, जबकि प्राकृतिक तरीके से करीब 4 साल लगते हैं।
- बीज कंदों का भंडारण: कंदों को 4 से 7 °C पर रखने से बढ़वार और फूल बेहतर होते हैं।
खाद और सिंचाई
- आधार खाद (PAU, प्रति एकड़): खेत की तैयारी के समय 20 टन FYM, 40 किलो P2O5 और 40 किलो पोटाश (करीब 50 टन FYM और 100 किलो P2O5 प्रति हेक्टेयर)।
- नाइट्रोजन (PAU, प्रति एकड़): 3 पत्ती की अवस्था पर 80 किलो, और 6 पत्ती की अवस्था पर 80 किलो के साथ 40 किलो पोटाश। यह भारी मात्रा है; इसे अपनी मिट्टी की जांच और KVK से मिलाकर पक्का करें। देखें fertilizers।
- सिंचाई: अक्टूबर से फरवरी तक हर 7 से 10 दिन पर, फिर मार्च और अप्रैल में गर्मी के हिसाब से हर 4 से 5 दिन पर। अंकुरण के तुरंत बाद और 4 से 6 पत्ती की अवस्था पर पानी की कमी सबसे ज्यादा नुकसान करती है। कंद खोदने से कम से कम 4 से 6 हफ्ते पहले सिंचाई बंद कर दें।
- निराई-गुड़ाई: 2 से 3 गुड़ाई, आखिरी फूल के बाद कंद बनने के समय, और गिरने से बचाने के लिए 4 से 6 पत्ती की अवस्था पर 10 से 15 सेमी मिट्टी चढ़ाना।
रोग
- Fusarium उकठा और कंद सड़न: पीलापन, मुरझाना और दरांती जैसी मुड़ी पत्तियां; भंडारण में भूरे धब्बे कंद को सख्त और कालेपन वाला बना देते हैं। यह 25 से 30 °C पर सबसे ज्यादा होता है और कंद व मिट्टी में बना रहता है। PAU स्वस्थ कंद लेने, संक्रमित खेत का सिंचाई पानी साफ खेत में न जाने देने, और खोदे गए कंदों को 30 से 35 °C पर 7 से 10 दिन सुखाकर (क्योर करके) सड़न वाले कंद भंडारण से पहले हटाने की सलाह देता है।
- Botrytis झुलसा: पत्तियों पर पीले-भूरे धब्बे और डंडियों पर राखी फफूंद, जो करीब 20 ± 5 °C और पत्तियों के लंबे समय गीले रहने पर बढ़ता है। शाम को ऊपर से पानी न दें और संक्रमित अवशेष हटा दें।
- किसी भी छिड़काव में सिर्फ पंजीकृत रसायन इस्तेमाल करें, लेबल के हिसाब से चलें और अपने KVK से पूछें। देखें pests।
कटाई और उपज
- किस्म के हिसाब से डंडियां 60 से 120 दिन में आती हैं।
- सुबह जल्दी या देर शाम को कैंची से काटें और डंडियां तुरंत पानी में रखें। स्थानीय बाजार के लिए तब काटें जब सबसे नीचे का फूल पूरा खिल जाए; दूर के बाजार के लिए तब काटें जब सबसे नीचे के 1 से 3 फूलों में रंग दिखे (कसी कली)।
- उपज (PAU): प्रति एकड़ 60,000 कंद पर करीब 70,000 से 75,000 डंडियां और 70,000 से 80,000 कंद (करीब 1.7 से 1.85 लाख डंडियां प्रति हेक्टेयर)।
- कसी कली पर काटी गई डंडियां कोल्ड रूम में रखी जा सकती हैं; PAU के अनुसार छेद वाली थैलियों में 5 °C पर 10 दिन रखने के बाद 13 दिन तक ठीक गुणवत्ता रहती है, इसलिए कमजोर बाजार में माल रोककर रखा जा सकता है।
- कंद: डंडी की कटाई के 8 से 10 हफ्ते बाद, जब पत्तियां पीली पड़कर सूखें, तब खोदें; कंद और छोटे कंद अलग करें, धोएं, छांटें और 7 से 10 दिन छांव में सुखाएं, फिर अगली रोपाई तक थैलियों में 4 से 7 °C पर रखें।
लागत और कमाई
- आय का हिसाब: प्रति एकड़ डंडियां x प्रति डंडी भाव। PAU की प्रति एकड़ 70,000 से 75,000 डंडियों पर प्रति डंडी हर ₹1 के भाव का मतलब प्रति एकड़ ₹70,000 से ₹75,000 है। जिस महीने काटेंगे उस महीने अपनी नजदीकी फूल मंडी का भाव देखें, क्योंकि यह शादियों और त्योहारों के साथ ऊपर नीचे होता है।
- कंद से दूसरी कमाई: प्रति एकड़ 70,000 से 80,000 कंद दोबारा लगाए या बीज के रूप में बेचे जा सकते हैं, लेकिन सिर्फ अच्छी छंटाई वाले, रोग रहित कंद बिकते हैं।
- गिनने लायक खर्च: कंद (प्रति एकड़ 60,000 से 70,000 कंद पर बड़ा खर्च), FYM, खाद, सिंचाई, रोपाई, मिट्टी चढ़ाने, कटाई और पैकिंग की मजदूरी, कंदों का कोल्ड स्टोरेज, ढुलाई और मंडी का कमीशन। प्रति एकड़ भारतीय लागत का जांचा हुआ आंकड़ा नहीं मिला; मौजूदा मानक के लिए राज्य के बागवानी विभाग या KVK से पूछें।
बाजार और जोखिम
- खरीदार शहर की फूल मंडियां, फूल बेचने वाले, सजावट वाले और गुलदस्ता बनाने वाले हैं। भाव शादी और त्योहार के कैलेंडर के साथ ऊपर नीचे होता है।
- मुख्य जोखिम हैं खराब कंद या गीली मिट्टी से कंद सड़न, कई किसानों के एक साथ रोपने से मंडी में माल की भरमार, और बाजार पहुंचने से पहले डंडियों का खिल जाना।
- FPO के जरिए मिलकर बेचने से ढुलाई और मोलभाव में मदद मिल सकती है। अपने राज्य में कट फूल उगाने वालों की मदद के लिए crop calendar और subsidy finder देखें; यहां कोई मौजूदा दर जांची नहीं जा सकी।
