भारत में तिलापिया पालन चलता है, लेकिन सिर्फ GIFT जैसी उन्नत नस्ल के लाइसेंसशुदा, सारे नर (monosex) बीज से, जो मान्यता प्राप्त हैचरी से आया हो, और यह तभी फायदे का है जहां लोग यह मछली खाते हों या कोई प्रोसेसर खरीदता हो। 2019-20 में देश में पाली गई तिलापिया करीब 30,000 टन थी, जिसमें GIFT करीब 2,000 टन प्लेट-साइज मछली थी, इसलिए बाजार अभी बन ही रहा है और राज्य के हिसाब से बहुत अलग है।
मछली खुद आसान है: यह दाने (pellet) पर तेजी से बढ़ती है और अच्छे तालाब में 6 से 9 महीने में 700 से 800 ग्राम की हो जाती है। मुश्किल हिस्से हैं कानूनी इजाजत, भरोसेमंद बीज, दाने की लागत, और ऐसे भाव पर खरीदार ढूंढना जो लागत निकाल दे।
नियम और बीज
- लाइसेंस: तिलापिया बाहर से लाई गई प्रजाति है, और इसका पालन नियमों के तहत है। ओडिशा में जिला मत्स्य अधिकारी ने जिम्मेदार तिलापिया पालन के दिशानिर्देशों के तहत प्रदर्शन किसानों को तिलापिया फार्म के लाइसेंस दिए। बीज खरीदने से पहले अपने जिला मत्स्य कार्यालय से संपर्क करें, क्योंकि नियम राज्य लागू करते हैं।
- Monosex बीज: नर मछली मादा से तेज और बराबर बढ़ती है, और मिले-जुले लिंग वाले तालाब में मछली खूब बच्चे देती है और तालाब छोटी, न बिकने वाली मछली से भर जाता है। Nile तिलापिया करीब 3 से 6 महीने में परिपक्व होती है और करीब 24 °C पर प्रजनन शुरू करती है। सिर्फ सारे नर बीज ही खरीदें।
- नस्लें: GIFT (genetically improved farmed tilapia, Nile तिलापिया की एक नस्ल) मुख्य उन्नत नस्ल है; Chitralada और Golden तिलापिया भी बनती हैं। 2019-20 में भारत में 11 लाइसेंसशुदा हैचरियों ने 94 million पोना (fry) बनाया, जिसमें GIFT monosex पोना सिर्फ करीब 10 million था, इसलिए हैचरी से उसका लाइसेंस और लिंग अनुपात की गारंटी मांगें।
- बीज का स्रोत: ओडिशा के कार्यक्रम में विजयवाड़ा के प्रजनन केंद्र का GIFT पोना RGCA के साथ चलाया गया। WorldFish की business case में पोना करीब ₹1.50 प्रति पोना माना गया है; हैचरियां ₹1 से ₹2 प्रति पोना बताती हैं।
कहां और कैसे पाली जाती है
- प्रणालियां: मिट्टी के तालाब (आमतौर पर 0.05 से 2.5 एकड़), जलाशयों के पिंजरे, घर के पीछे के biofloc टैंक और recirculating सिस्टम। प्लेट साइज 0.4 से 1 किलो तक पहुंचने में ग्रो-आउट में 4 से 8 महीने लगते हैं।
- राज्य: पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड और केरल में उत्पादन बढ़ रहा है, मुख्य रूप से घर के पीछे के biofloc टैंक और जलाशयों के पिंजरों से। ओडिशा में 2022 में करीब 300 किसान, करीब 300 एकड़ और साल में करीब 600 टन उत्पादन था। बड़े जलकृषि राज्य आंध्र प्रदेश में स्थानीय तिलापिया की खपत कम है, इसलिए वहां किसानों को बेचने में दिक्कत आती है।
- तमिलनाडु: कृष्णागिरि के जिला मत्स्य कार्यालय की एक योजना जिला मत्स्य कृषक विकास एजेंसी (DFFDA) में दर्ज किसानों को सरकारी मछली बीज फार्म से GIFT बीज देती है, मुख्य रूप से छोटे मौसम वाले खेत तालाबों के लिए। अपने राज्य में ऐसी योजनाएं देखें।
- Nile तिलापिया गर्म इलाके की मछली है जो उथला पानी पसंद करती है। जो ICAR में छपा शोध देखा गया उसमें सर्दी में बचने की तापमान सीमा नहीं मिली, इसलिए अपने इलाके के ठंडे महीनों के बारे में मत्स्य विभाग से पूछें।
बीज डालना, दाना और बढ़त (भारतीय स्रोतों के आंकड़े)
| मद | ओडिशा किसान कार्यक्रम (2022) | WorldFish/CII semi-intensive मॉडल (2022) |
|---|---|---|
| बीज की मात्रा | 6,000 अंगुलिका प्रति एकड़ | 22,000 प्रति हेक्टेयर (करीब 8,900 प्रति एकड़) |
| बचाव (survival) | 90 से 92%, किसानों के अनुसार | 60% माना गया |
| कटाई पर आकार | 6 से 7 महीने में करीब 800 ग्राम; कुछ के लिए 9 महीने में 700 से 800 ग्राम | 750 ग्राम, साल में दो कटाई |
| दाना | 3 टन मछली के लिए करीब 3.5 टन दाना (शुरू के हफ्तों में प्लवक के बाद) | feed conversion 1.3; दाना ₹38 प्रति किलो |
| उपज | प्रति फसल करीब 2 टन प्रति एकड़; एक किसान ने 1 एकड़ से 3 टन बताया | प्रति कटाई 10 टन प्रति हेक्टेयर (करीब 4 टन प्रति एकड़) |
- तालाब की तैयारी, चूना, हवा देना (aeration) और पानी की जांच उन स्रोतों में नहीं हैं जिनका उपयोग हुआ। हैचरी और अपने जिला मत्स्य अधिकारी की सलाह मानें, और दाने, मौत और पानी की गुणवत्ता का रिकॉर्ड रखें।
- ओडिशा के उपभोक्ताओं ने कम से कम 500 ग्राम की मछली पसंद की। 0.75 किलो से बड़ी मछली फिलेट और प्रोसेसिंग के लिए ठीक है; छोटी मछली साबुत बिकती है।
लागत और कमाई
- भाव: ओडिशा के किसानों ने थोक में करीब ₹110 प्रति किलो और खुदरा में ₹160 से ₹170 प्रति किलो बताया (The Fish Site, जून 2022)। WorldFish मॉडल में फार्म-गेट भाव ₹95 प्रति किलो माना गया है। अपने नजदीकी मछली बाजार का ताजा भाव देखें।
- ओडिशा जैसा हिसाब, एक एकड़ (उदाहरण): 2 टन मछली x ₹110 = ₹2.2 लाख। 1.3 के feed conversion पर 2 टन के लिए 2.6 टन दाना लगता है, जो ₹38 प्रति किलो पर करीब ₹99,000 है। 6,000 x ₹1.50 का पोना ₹9,000 है। मजदूरी, बिजली, aeration, तालाब का पट्टा, दवा और ब्याज से पहले करीब ₹1.12 लाख बचता है। एकड़ से 3 टन मिलने पर कुल आय ₹3.3 लाख है, लेकिन प्रति एकड़ 2 टन ज्यादा आम आंकड़ा है।
- WorldFish/CII मॉडल: कम से कम 2 हेक्टेयर के मॉडल फार्म को करीब ₹8.5 लाख प्रति हेक्टेयर पूंजी और ₹6.5 लाख प्रति हेक्टेयर कार्यशील पूंजी चाहिए, और साल में दो फसल तथा 95% बिकाऊ मछली पर पहले साल करीब ₹2.73 लाख शुद्ध प्रति हेक्टेयर प्रति साल, जो सातवें साल तक ₹3.59 लाख हो जाता है। पहले साल में अकेली पहली फसल से मूल्यह्रास और ब्याज के बाद सिर्फ करीब ₹12,000 प्रति हेक्टेयर शुद्ध बचा। यह WorldFish और Confederation of Indian Industry का योजना मॉडल है, खेतों के असली नतीजों का रिकॉर्ड नहीं, और यह सस्ते कर्ज और खेती की दर पर बिजली मानकर चलता है।
- ओडिशा में शुरुआती निवेश करीब ₹1.5 से ₹6.7 लाख और कमाई ₹3 से ₹8.5 लाख बताई गई, लेकिन फार्म के आकार के हिसाब से बड़ा फर्क रहा।
बाजार और जोखिम
- The Fish Site की ओडिशा रिपोर्ट मुख्य बाधाएं बताती है: उपभोक्ताओं की समुद्री या खारे पानी की मछली को पसंद, सीमित बाजार संपर्क, प्रोसेसिंग सुविधाओं की कमी और ढुलाई की कठिनाई।
- बिक्री के रास्ते हैं स्थानीय मछली बाजार और व्यापारी, होटल और रेस्तरां के खरीदार, और जहां मिले वहां साबुत जमी मछली या फिलेट बनाने वाले प्रोसेसर। WorldFish रिपोर्ट कहती है कि तालाब और पिंजरे का बड़ा उत्पादन फिलेट प्रोसेसरों को माल दे सकता है, और अफ्रीका को साबुत जमी मछली का निर्यात बाजार बताया गया है, लेकिन निर्यात के लिए लगातार गुणवत्ता और मात्रा चाहिए जो छोटे तालाब शायद ही दे पाते हैं।
- जो बीज असल में monosex न हो, महंगा या खराब दाना, और पास में खरीदार न होना, फार्मों के घाटे के मुख्य कारण हैं।
- वित्त के लिए Kisan Credit Card (मछली पालक बैंकों के जरिए पात्र हैं) और subsidy finder देखें। किसी मौजूदा सब्सिडी दर की पुष्टि नहीं हो सकी, इसलिए जिला मत्स्य कार्यालय से पूछें। FPO के जरिए मिलकर बेचने वाले किसानों को बेहतर ढुलाई और खरीदार की शर्तें मिल सकती हैं।
स्रोत
- WorldFish and CII, A Business Case for Scaling the Production of Tilapia in India (April 2022)
- The Fish Site, Can GIFT gain ground in eastern India (Odisha), 24 June 2022
- Krishnagiri District, Tamil Nadu: Multipurpose farm pond GIFT seed stocking scheme
- Patil, Hormone-free monosex Nile tilapia, Indian Journal of Veterinary and Animal Sciences Research 52(3), 2023
