स्टैटिस (Limonium sinuatum, सी लैवेंडर) भारत में सालाना फिलर और सूखे फूल के रूप में उगाया जा सकता है, और बेलगावी (कर्नाटक), नई दिल्ली और बेंगलुरु के भारतीय ट्रायल दिखाते हैं कि यह ठंडे मौसम में खुले खेत या शेड नेट के नीचे अच्छा फूलता है। इसके लिए चाहिए ठंडे मौसम की खिड़की, ऊंची क्यारियां, सूखे या ताजे फिलर डंठलों का खरीदार, और यथार्थ अपेक्षाएं: यह एक छोटी niche फसल है और इसके लिए कोई सार्वजनिक भारतीय भाव सूची नहीं है।
इस पन्ने की किसी बात को पक्की कमाई न समझें। ICAR के ट्रायल स्पाइक की संख्या और खेती का तरीका देते हैं, भाव नहीं, इसलिए छोटी क्यारी से ज्यादा लगाने से पहले किसान के पास फूल वाले, गुलदस्ता बनाने वाले या dry-flower निर्यातक का लिखित प्रस्ताव होना चाहिए।
कहां और कब उगता है
- ट्रायल की जगहें: ICAR-IARI, नई दिल्ली (2014-15 और 2015-16 का ट्रायल); बागवानी शोध एवं प्रसार केंद्र, कनाबर्गी, बेलगावी, कर्नाटक (2014 से 2017, खुला खेत); और UAS बेंगलुरु (924 मीटर, लाल रेतीली दोमट, pH 6.56, सितंबर 2021 से अप्रैल 2022, 50% शेड नेट के नीचे)।
- मौसम: स्टैटिस ठंडे मौसम की सालाना फसल है। UAS का पेपर बताता है कि उष्णकटिबंधीय ऊंचे इलाकों में इसे आमतौर पर सर्दी में उगाया जाता है। अगस्त या सितंबर में रोपने पर बेंगलुरु की जगह पर करीब अक्टूबर से फूल आए।
- रोशनी: कम से कम 14 घंटे का लंबा दिन जल्दी फूल और बेहतर गुणवत्ता देता है। बहुत तेज रोशनी में ही 40% तक शेड नेट सुझाया गया है और पौधे जम जाएं तो उसे हटा देना चाहिए।
- मिट्टी: अच्छे जल निकास वाली रेत या रेतीली चिकनी मिट्टी सबसे अच्छी है, और ज्यादा नमी या गीली मिट्टी पौधों को नुकसान करती है। लवणीयता सहने का कोई भारतीय आंकड़ा नहीं मिला, इसलिए खारी जमीन पर भरोसा करने से पहले मिट्टी और पानी की जांच कराएं।
किस्में
| संग्रह | स्रोत | नतीजा |
|---|---|---|
| सफेद (White) | बेलगावी ट्रायल, नौ संग्रह | सबसे ज्यादा उपज, प्रति हेक्टेयर करीब 4.08 लाख बिकाऊ स्पाइक; सबसे लंबा स्पाइक, 62.02 सेमी |
| लैवेंडर (Lavender) | बेलगावी ट्रायल | सबसे लंबी वास लाइफ, 13.64 दिन |
| पीला (Yellow) | बेलगावी ट्रायल | सबसे जल्दी फूल, रोपाई के 92 दिन बाद |
| खुबानी (Apricot) | बेलगावी ट्रायल | ट्रायल में शामिल; सबसे अच्छे प्रदर्शन वालों में नहीं |
- बेलगावी के लेखकों ने White और Lavender को कर्नाटक के उत्तरी पारंपरिक क्षेत्र में खुले खेत के लिए सबसे ठीक माना।
- ये ट्रायल के संग्रह थे, अधिसूचित किस्में नहीं। बीज ज्यादातर व्यावसायिक बीज कंपनियों का आयातित hybrid बीज होता है, इसलिए विक्रेता से सीरीज का नाम, जमाव प्रतिशत और बीज की लॉट पूछें।
दूरी और रोपाई
- ICAR-IARI ने ऊंची क्यारियों पर 30 x 30, 30 x 45 और 45 x 45 सेमी आजमाए। सबसे चौड़ी दूरी (45 x 45 सेमी) पर प्रति वर्ग मीटर 20 ग्राम नाइट्रोजन के साथ प्रति पौधा सबसे ज्यादा कट फूल (19.66), सबसे चौड़े फूल गुच्छे और खेत में सबसे लंबा फूलना (करीब 61 दिन) मिला। सबसे पास की दूरी (30 x 30 सेमी) पर पौधे ज्यादा ऊंचे हुए।
- प्रति एकड़ (4,047 वर्ग मीटर, क्यारी की पगडंडियों से पहले) पौधे: 30 x 30 सेमी पर करीब 44,900, 30 x 45 सेमी पर करीब 30,000 और 45 x 45 सेमी पर करीब 20,000। प्रति हेक्टेयर ये करीब 1.11 लाख, 74,000 और 49,000 हैं। क्यारियां और रास्ते असली गिनती 15 से 25% घटा देते हैं।
- नर्सरी में पौध तैयार करके रोपें। बेंगलुरु का पेपर कहता है कि जब तक रोजेट 25 से 30 सेमी चौड़ा न हो जाए, पहले फूल के डंठल तोड़ दें, ताकि बाद के डंठल लंबे और ज्यादा आएं।
खाद और सिंचाई
- IARI ट्रायल: सभी क्यारियों में आधार में P और K 10 ग्राम प्रति वर्ग मीटर, और नाइट्रोजन 10, 20 और 30 ग्राम प्रति वर्ग मीटर। फूलों की सबसे अच्छी संख्या 20 ग्राम N प्रति वर्ग मीटर पर आई (यानी क्यारी के क्षेत्रफल पर 200 किलो N प्रति हेक्टेयर या करीब 81 किलो प्रति एकड़)। ज्यादा नाइट्रोजन से मुख्यतः पत्ती और तने का वजन बढ़ा।
- बेंगलुरु ट्रायल: मानक मात्रा 40:20:20 किलो NPK प्रति हेक्टेयर ली गई, जो golden rod की मात्रा है। इस मात्रा का 125% खाद और 30 x 45 सेमी दूरी पर सबसे लंबे पैनिकल (103.67 सेमी) और सबसे लंबी वास लाइफ (24.33 दिन) मिली। खाद रोपाई के 21 दिन बाद दी गई, आधा नाइट्रोजन 19:19:19 से और आधा यूरिया से।
- दोनों ट्रायल की मात्राओं में बहुत फर्क है, इसलिए मात्रा चुनने से पहले मिट्टी की जांच कराएं और अपने KVK या बागवानी कॉलेज से पूछें। fertilizers और drip irrigation देखें; पानी को पौधे के गले पर न पड़ने दें और जलभराव से बचें।
- स्टैटिस के लिए कोई भारतीय कीट और रोग पैकेज नहीं मिला। गीली क्यारियों में जड़ और गले की सड़न पर नजर रखें, और कोई भी रसायन छिड़कने से पहले KVK से पूछें और लेबल के हिसाब से चलें।
कटाई और उपज
- बेलगावी के सबसे जल्दी वाले संग्रह (Yellow) में रोपाई के करीब 92 दिन बाद फूल शुरू हुए; दूसरे संग्रह में ज्यादा समय लगा, इसलिए रोपाई से पहली कटाई तक करीब 3 से 4 महीने मानें।
- अवस्था: ताजे इस्तेमाल और वास लाइफ के लिए 50% खिलने पर काटें; सुखाने के लिए 75% खिलने पर काटें। दिन के ठंडे समय में काटें और साफ पानी में पहले से ठंडा करें।
- सुखाई: गुच्छों को छांव में टांगें। बेंगलुरु के अध्ययन में सुखाई का समय उपचार के हिसाब से बदला, सबसे जल्दी 4.33 दिन में।
- उपज: बेलगावी के सबसे अच्छे संग्रह से प्रति हेक्टेयर करीब 4.08 लाख बिकाऊ स्पाइक मिले, यानी मोटे तौर पर प्रति एकड़ 1.65 लाख। इसे अच्छे प्रबंधन में ट्रायल का आंकड़ा मानें; कमजोर बीज या गर्मी में खेत की उपज कम रहेगी।
लागत और कमाई
- भाव: ताजे या सूखे स्टैटिस डंठलों का कोई भारतीय थोक भाव नहीं मिला, और यहां कोई नहीं दिया गया। खरीदारों से प्रति गुच्छा भाव, गुच्छे का आकार (डंठलों की संख्या), रंग की ग्रेडिंग और भुगतान की शर्तें लिखित में मांगें।
- अपने भाव से करने वाला हिसाब: प्रति एकड़ कुल आय = प्रति एकड़ बिकाऊ स्पाइक x प्रति डंठल भाव। प्रति एकड़ करीब 1.65 लाख स्पाइक की ट्रायल उपज पर हर ₹1 प्रति डंठल का मतलब ₹1.65 लाख कुल आय है, यानी ₹0.50 प्रति डंठल पर करीब ₹82,000 और ₹2 प्रति डंठल पर करीब ₹3.3 लाख, ग्रेडिंग के नुकसान, मजदूरी और गुच्छे बनाने से पहले। ये हिसाब के उदाहरण हैं, बाजार भाव नहीं।
- लागत: मुख्य मदें हैं बीज या प्लग पौध, ऊंची क्यारियां, ड्रिप, खाद, और कटाई, सुखाई, गुच्छे बनाने व पैकिंग की मजदूरी। खेती की लागत का कोई जांचा हुआ भारतीय आंकड़ा नहीं मिला।
बाजार और जोखिम
- खरीदार हैं फिलर चाहने वाले फूल वाले और गुलदस्ता बनाने वाले, dry-flower और potpourri निर्यातक, और शिल्प व सजावट की इकाइयां। लगाने से पहले स्थानीय मांग जांच लें, क्योंकि स्टैटिस कम मात्रा की फसल है।
- सूखे फूल रंग, डंठल की लंबाई और साफ, फफूंद रहित डंठलों पर बिकते हैं। धूप से सफेद पड़े या नम गुच्छे लौटा दिए जाते हैं।
- नम मौसम फसल को नुकसान करता है (बेंगलुरु का पेपर खासकर फूल के समय ज्यादा नमी से बचने को कहता है), इसलिए हवादार छांव वाली जगह में सुखाना जरूरी है।
- बीज या पौध की बिक्री के साथ buy-back या निर्यात का वादा करने वालों से लिखित, हस्ताक्षरित शर्तें लें। समूह में बिक्री के लिए export buyers और FPO देखें, और MIDH के तहत फूलों की खेती की मदद के लिए polyhouse subsidy और subsidy finder देखें (स्टैटिस की कोई अलग दर की पुष्टि नहीं हुई)।
स्रोत
- Jain et al., Optimization of spacing and nitrogen dose for growth and flowering of statice, Indian Journal of Agricultural Sciences 88(7), 2018 (ICAR-IARI)
- Evaluation of statice varieties for flower yield, quality and vase life (Belagavi, Karnataka)
- Karthik et al., Effect of spacing and fertiliser dose on quality and vase life of statice, Journal of Crop and Weed 19(2), 2023 (UAS Bengaluru)
